एनएमसी सेटलमेंट से बैंक ऑफ बड़ौदा का पहली तिमाही का मुनाफा 70% गिरा: मोतीलाल ओसवाल ने घटाकर ₹275 किया टारगेट प्राइस संयुक्त अरब अमीरात के एनएमसी हेल्थ विवाद में ₹5,700 करोड़ के एकमुश्त प्रावधान के कारण बैंक ऑफ बड़ौदा का पहली तिमाही का शुद्ध लाभ 70 प्रतिशत गिरकर ₹1,278 करोड़ रह गया। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर न्यूट्रल रेटिंग बनाए रखते हुए लक्ष्य मूल्य घटाकर ₹275 कर दिया है। सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख ऋणदाता बैंक ऑफ बड़ौदा ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान अपने वित्तीय नतीजों की घोषणा की है, जिसमें शुद्ध लाभ में भारी गिरावट दर्ज की गई है। संयुक्त अरब अमीरात स्थित एनएमसी हेल्थ के संयुक्त प्रशासकों के साथ अदालत के बाहर ₹5,700 करोड़ (₹56.7 बिलियन) का एकमुश्त कानूनी निपटारा करने के चलते बैंक के मुनाफे पर बड़ा असर पड़ा है। इस असाधारण खर्च के कारण बैंक का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 70 प्रतिशत घटकर ₹1,278 करोड़ रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में ₹4,541 करोड़ रहा था। भारी प्रावधान के बावजूद गुजरात मुख्यालय वाले इस पीएसयू बैंक का परिचालन ढांचा और लोन ग्रोथ प्रबंधन के तय दिशानिर्देशों के अनुरूप बनी हुई है। आय विवरण और तिमाही प्रदर्शन का विश्लेषण समीक्षाधीन तिमाही के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की कुल आय में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहली तिमाही में बैंक की कुल आय ₹36,681 करोड़ रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के ₹35,766 करोड़ की तुलना में अधिक है। हालांकि, नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) ब्रोकरेज अनुमानों से लगभग 3 प्रतिशत कम रही। बैंक के समग्र प्रदर्शन पर कमजोर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और कम कोर फीस इनकम का असर देखने को मिला है। वार्षिक आधार पर बैंक के शुद्ध लाभ में 72 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मुख्य रूप से एनएमसी समूह के कानूनी दावों को निपटाने के लिए किए गए विशेष प्रावधान के कारण हुई। ऋण वृद्धि और रैम सेगमेंट का योगदान कमजोर आय आंकड़ों के बावजूद बैंक ऑफ बड़ौदा का एडवान्स ग्रोथ प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। बैंक के बिजनेस मोमेंटम को मुख्य रूप से रैम (Retail, Agriculture, MSME) सेगमेंट से समर्थन मिला। इस दौरान बैंक की रिटेल बुक में सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। बैंक प्रबंधन ने आने वाले समय के लिए अपनी क्रेडिट ग्रोथ गाइडेंस को 12 से 14 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखा है। हालांकि परिसंपत्ति गुणवत्ता को लेकर कोई आंतरिक चिंता उत्पन्न नहीं हुई है, लेकिन ब्रोकरेज का अनुमान है कि ECL से संबंधित बदलावों के चलते वित्त वर्ष 2027-28 में क्रेडिट लागत लगभग 60bp के उच्च स्तर पर बनी रह सकती है। मोतीलाल ओसवाल की ब्रोकरेज रिपोर्ट और नया टारगेट वित्तीय नतीजों के मूल्यांकन के बाद ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल ने बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर पर अपनी रेटिंग और लक्ष्य मूल्य को संशोधित किया है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर 'Neutral' रेटिंग को कायम रखा है, लेकिन इसके टारगेट प्राइस को घटाकर ₹275 प्रति शेयर कर दिया है। यह नया लक्ष्य मूल्य मार्च 2028 के अनुमानित ABV के 0.9x पर आधारित है। ब्रोकरेज ने एकमुश्त निपटान लागत के प्रभाव को शामिल करते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आय अनुमान में 18.9 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 5.2 प्रतिशत की कटौती की है। इसके अतिरिक्त, ब्रोकरेज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए RoA का अनुमान 0.85 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 0.96 प्रतिशत निर्धारित किया है। शेयर बाजार में प्रदर्शन और ट्रेडिंग रेंज तिमाही नतीजों और एकमुश्त लागत के प्रभाव के बीच सोमवार 27 जुलाई को बीएसई पर बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर दबाव में खुला। बाजार बंद होने तक कंपनी का शेयर बीएसई पर 0.06 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ ₹246.45 प्रति शेयर पर स्थिर हुआ, जिससे बैंक का कुल बाजार पूंजीकरण ₹1,27,448.22 करोड़ दर्ज किया गया। कारोबार के दौरान शेयर ने ₹247.60 प्रति शेयर का इंट्राडे उच्च स्तर और ₹242.00 प्रति शेयर का निचला स्तर छुआ। विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकालिक लागत दबावों के बावजूद बैंक का दीर्घकालिक ऋण प्रोफाइल और खुदरा कारोबार की वृद्धि निवेशकों के लिए मुख्य ध्यान केंद्र बनी रहेगी। इसका आप पर असर भारत में: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों को एकमुश्त कानूनी प्रावधानों के कारण अल्पकालिक आय अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। ग्राहकों और शेयरधारकों के लिए: बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों के लिए जमा और ऋण सेवाएं सामान्य रहेंगी, क्योंकि बैंक का रिटेल और एमएसएमई लोन सेगमेंट 18.4% की दर से मजबूत बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. बैंक ऑफ बड़ौदा का पहली तिमाही का शुद्ध लाभ कितना गिरा? वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बैंक ऑफ बड़ौदा का समेकित शुद्ध लाभ 70% घटकर ₹1,278 करोड़ रह गया, जो पिछले साल समान अवधि में ₹4,541 करोड़ था। 2. मुनाफे में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण क्या है? यूएई स्थित एनएमसी हेल्थ के संयुक्त प्रशासकों के साथ अदालत के बाहर कानूनी विवाद निपटाने के लिए ₹5,700 करोड़ का एकमुश्त प्रावधान करने के कारण मुनाफे में गिरावट आई है। 3. मोतीलाल ओसवाल ने बैंक ऑफ बड़ौदा का नया टारगेट प्राइस क्या दिया है? मोतीलाल ओसवाल ने न्यूट्रल रेटिंग बनाए रखते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा का टारगेट प्राइस घटाकर ₹275 प्रति शेयर कर दिया है। 4. बैंक ऑफ बड़ौदा के रिटेल सेगमेंट में कितनी वृद्धि दर्ज की गई? पहली तिमाही के दौरान बैंक ऑफ बड़ौदा की रिटेल लोन बुक में वार्षिक आधार पर 18.4% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। https://trendkia.com/market/enaemasi-setalamenta-se-bank-of-baroda-ka-pahali-timahi-ka-munapha-70-gira-motilal-oswal-ne-ghatakara-275-kiya-tarageta-praisa-10710 TrendKia — Har trend, sabse pehle.