वैश्विक भूराजनीति और फेडरल रिजर्व के रुख से शेयर बाजारों पर दबाव, अगस्त के अंत में सुस्त पड़े इक्विटी और बॉन्ड अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के सख्त बयानों के चलते अगस्त के आखिरी दिनों में वैश्विक बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। अगस्त का महीना समाप्त होने के साथ ही वैश्विक वित्तीय बाजारों का रुख काफी सुस्त नजर आया। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सप्ताह के दौरान भड़के भूराजनीतिक तनाव और जैक्सन होल सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के तीखे बयानों का असर शेयर बाजारों और बॉन्ड मार्केट पर साफ तौर पर दिखाई दिया। इन दोनों बड़े कारणों की वजह से निवेशकों में जोखिम लेने की क्षमता काफी हद तक प्रभावित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया भर के प्रमुख इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दबाव बना रहा और सूचकांक लाल निशान के साथ बंद हुए। अटलांटिक के दोनों किनारों पर अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में गिरावट सप्ताह के शुरुआती कारोबारी दिन यानी सोमवार को भूराजनीतिक मोर्चे पर पैदा हुई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का असर अटलांटिक महासागर के दोनों छोर के बाजारों पर पड़ा। अमेरिकी शेयर बाजार में एसएंडपी 500 सूचकांक में 0.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके पहले शुक्रवार को भी इसमें 0.36 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। इसके अलावा यूरोप के प्रमुख सूचकांक स्टॉक्स 600 में भी भारी सुस्ती देखने को मिली और यह 0.62 प्रतिशत लुढ़क गया, हालांकि इसके पिछले कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को इसमें 0.51 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। एशियाई बाजारों में भी दिखा सतर्कता का माहौल और गिरावट यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों की तर्ज पर ही एशियाई बाजारों में भी सतर्कता और नफासत का रुख हावी रहा, जिसके चलते यहां के प्रमुख सूचकांक मामूली गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। एशिया के विभिन्न बाजारों में हैंग सेंग सूचकांक सबसे ज्यादा 1.00 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार में पीछे रहा। इसके अलावा कोस्पी में 0.08 प्रतिशत, निक्केई में 0.26 प्रतिशत, सीएसआई 300 में 0.06 प्रतिशत और एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक में भी 0.32 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई और ये सभी सूचकांक लाल निशान के दायरे में ही ट्रेड करते दिखाई दिए। प्रमुख मुद्राओं और फॉरेक्स बाजार में उतार-चढ़ाव विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड यानी जीबीपी/यूएसडी की जोड़ी यूरोपीय सत्र के दौरान 1.3550 के स्तर से नीचे मामूली नुकसान के साथ कारोबार करती नजर आई। मध्य पूर्व क्षेत्र में लगातार बने हुए तनाव और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर सख्त अपेक्षाओं के चलते अमेरिकी डॉलर ने अपनी स्थिति में कुछ सुधार किया है, जिसका सीधा असर इस मुद्रा जोड़ी पर पड़ रहा है। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के जारी होने से पहले डॉलर की इस रिकवरी ने पाउंड पर दबाव बना दिया है। दूसरी ओर, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी EUR/USD भी 1.1600 के आसपास संघर्ष करती दिखाई दे रही है और यूरोपीय कारोबार के दौरान यह अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखने में नाकामयाब रही। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तकनीकी स्थिति सोने की बात करें तो सर्राफा बाजार में पीली धातु ने पिछले आठ दिनों के निचले स्तर से सोमवार को की गई अपनी रिकवरी को गंवा दिया है और मंगलवार की शुरुआत में यह 4,400 डॉलर के स्तर की ओर वापस लौटती हुई नजर आई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति तेज हुई है, जिसके बल पर अमेरिकी डॉलर में जोरदार उछाल आया है। डॉलर की मजबूती के चलते सोने पर दबाव बना है और यह 21-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए के करीब 4,400 डॉलर के स्तर को चुनौती दे रहा है, हालांकि सोमवार को इसने इस स्तर का सफलतापूर्वक बचाव किया था और रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स अभी भी तेजी का संकेत दे रहा है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल और तकनीकी स्तर क्रिप्टोकरेंसी सेगमेंट में रिपल, कार्डानो और डॉगकॉइन जैसे प्रमुख टोकन पिछले हफ्ते दर्ज की गई दहाई अंकों की भारी गिरावट के बाद से अब तक कमजोर स्थिति में बने हुए हैं। ये सभी डिजिटल एसेट्स अपने तात्कालिक समर्थन के लिए महत्वपूर्ण एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज की कड़ी परीक्षा ले रहे हैं। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे बाजार में तेजी का मोमेंटम कमजोर पड़ रहा है, वैसे-वैसे एक्सआरपी, एडीए और डॉगकॉइन की कीमतों में आने वाले समय में और अधिक कमजोरी देखने को मिल सकती है। डीजल बाजार में रिकॉर्ड उछाल और क्रैक स्प्रेड तेल बाजार भले ही पिछले कुछ महीनों की तुलना में शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल का बाजार एक बिल्कुल अलग और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहा है। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड यानी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है। इस दौरान यह इंट्राडे के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 102.00 डॉलर प्रति बैरल के थोड़े ही ऊपर बंद हुआ, जो ऊर्जा बाजार में आपूर्ति और रिफाइनिंग से जुड़ी मजबूत ताकतों को उजागर करता है। इसका आप पर असर वैश्विक वित्तीय बाजारों में भूराजनीतिक तनाव और नीतिगत बदलावों के कारण बने इस दबाव का असर भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी देखा जा सकता है। • भारत में: विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा जोखिम भरे परिसंपत्तियों से पैसा निकाले जाने के कारण घरेलू शेयर बाजारों और रुपये की चाल पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित वस्तुओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं। • वैश्विक स्तर पर: कच्चे तेल और विशेष रूप से डीजल के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने से वैश्विक परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता वस्तुओं के खुदरा मूल्यों पर पड़ सकता है। • निवेशकों के लिए: सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख मुद्राओं के बदलते रुख को देखते हुए पोर्टफोलियो विविधीकरण बेहद जरूरी हो गया है। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के लिए: प्रमुख डिजिटल टोकन में लगातार कमजोरी और मूविंग एवरेज के परीक्षण के दौर में निवेशकों को उच्च अस्थिरता के बीच अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। • ऊर्जा उपभोक्ता: डीजल के क्रैक स्प्रेड में ऐतिहासिक तेजी के कारण आने वाले हफ्तों में माल ढुलाई और विनिर्माण लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका है। सवाल-जवाब 1. अगस्त के अंत में वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट का मुख्य कारण क्या था? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा भूराजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श के सख्त बयान इसके मुख्य कारण रहे। 2. अटलांटिक के दोनों किनारों पर प्रमुख सूचकांकों का प्रदर्शन कैसा रहा? सोमवार को अमेरिकी एसएंडपी 500 सूचकांक में 0.33 प्रतिशत की गिरावट आई और यूरोप का स्टॉक्स 600 सूचकांक 0.62 प्रतिशत लुढ़क गया। 3. एशियाई बाजारों में सबसे खराब प्रदर्शन किस सूचकांक का रहा? एशियाई बाजारों में हैंग सेंग सूचकांक सबसे ज्यादा 1.00 प्रतिशत की कमजोरी के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला रहा। 4. सोने की कीमतें किस स्तर के आसपास कारोबार करती नजर आईं? सोने की कीमतें पिछले आठ दिनों के निचले स्तर से रिकवरी खोते हुए मंगलवार की शुरुआत में 4,400 डॉलर के करीब वापस लौट आईं। 5. डीजल बाजार में क्या रिकॉर्ड बना है? अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया और इंट्राडे में 102.00 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/equities-bonds-face-heavy-pressure-from-shifting-geopolitics-and-yields-as-august-concludes-25603 TrendKia — Har trend, sabse pehle.