# यूरो और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पर टिकी निवेशकों की नजर, ईसीबी की बैठक पर है फोकस

> यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मुद्रा बाजार में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक और महंगाई के आंकड़ों पर भी निवेशकों की कड़ी नजर है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/euro-aura-us-dollar-face-off-as-ecb-rate-hike-takes-center-stage-30751 · **Language:** Hindi
**Tags:** ईसीबी, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, यूरो, अमेरिकी डॉलर, फेडरल रिजर्व, महंगाई आंकड़े, बॉन्ड बायबैक

यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की आगामी बैठक पर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं, जहां उम्मीद की जा रही है कि बैंक अपनी डिपॉजिट रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 2.50% तक पहुंचा सकता है। यह अनुमान पूरी तरह से आम सहमति और मौजूदा बाजार प्राइसिंग के अनुरूप है। इस बीच, प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लेगार्ड से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह भविष्य के कदमों पर अपनी पूरी फ्लेक्सिबिलिटी और विकल्पों को खुला रखेंगी। ऊर्जा की कीमतों में तेजी के कारण बीते सत्र में यील्ड में बढ़त देखने को मिली, जिससे कर्व के 2Y से 10Y सेगमेंट में EUR स्वैप में लगभग 8 बेसिस पॉइंट की तेजी दर्ज की गई।

अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा 6 अरब अमेरिकी डॉलर के लॉन्ग-एंड बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन की घोषणा के बाद, EUR/USD में हल्की बढ़त देखी गई और यह लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के साथ ऊपर की ओर फिसला। हालांकि, बायबैक का यह आकार बाजार की उम्मीदों से थोड़ा कम था, लेकिन इसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। अमेरिकी ट्रेजरी ने स्पष्ट किया है कि यह घोषणा केवल आज के ऑपरेशन पर लागू होती है और यह भविष्य के ऑपरेशनों के आकार को तय नहीं करती है। इस घोषणा के बाद लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली बढ़त दर्ज की गई, हालांकि यह उछाल सीमित दायरे में ही रहा।

मुद्रा बाजार में डॉलर और अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। एशियाई सत्र के दौरान गुरुवार को AUD/USD 0.7200 के स्तर से ऊपर अपने कंसोलिडेशन मूव को आगे बढ़ाता नजर आया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 14 मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर के करीब बना हुआ है। इसके विपरीत, फेडरल रिजर्व की सख्त नीतियों की उम्मीदें और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव अमेरिकी डॉलर को समर्थन दे रहे हैं, जिससे अमेरिकी महंगाई के आंकड़े आने से पहले इस करेंसी जोड़े पर दबाव भी बना हुआ है।

दूसरी ओर, USD/JPY एशियाई सत्र में 153.50 के ऊपर स्थिर नजर आ रहा है, हालांकि यह इस हफ्ते की शुरुआत में छूए गए सात महीने के निचले स्तर के करीब ही बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान की नीतियों में बदलाव की बढ़ती चर्चाएं जापानी येन को मजबूत कर रही हैं। इसके साथ ही, सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने अमेरिकी डॉलर की बिकवाली के दबाव को कम करने में मदद की है।

कीमती धातुओं के बाजार में भी सुस्ती और रिकवरी का दौर जारी है। सोना गुरुवार को शुरुआती कारोबार में 4,350 अमेरिकी डॉलर के एक हफ्ते के निचले स्तर से उबरकर 4,400 अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया। सोने के खरीदार अब गुरुवार और शुक्रवार को क्रमशः आने वाले अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि बाजार में एक स्थायी तेजी और रुख तय किया जा सके। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हालिया जॉब्स रिपोर्ट ने फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर बहस को पूरी तरह खत्म नहीं किया है, बल्कि नीति निर्माताओं को अपने विकल्पों को खुला रखने की अनुमति दे दी है, खासकर तब जब अगस्त के आंकड़ों ने श्रम बाजार में मजबूत रिकवरी दिखाई है।

## इसका आप पर असर
मुद्रा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे इन बदलावों का सीधा असर निवेशकों, आयातकों और विदेशी मुद्रा का लेन-देन करने वाले लोगों पर पड़ता है।

- **भारत में:** **वैश्विक मुद्रा उतार-चढ़ाव:** डॉलर और यूरो के बीच घटती-बढ़ती सुगबुगाहट का असर भारतीय रुपये के विनिमय मूल्य पर पड़ सकता है, जिससे आयात और विदेशी यात्राएं प्रभावित होती हैं। **कच्चे तेल की कीमतें:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और बॉन्ड यील्ड में बदलाव से देश में ईंधन की कीमतों और आयात बिल पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है।
- **वैश्विक स्तर पर:** **निवेशकों की रणनीति:** ईसीबी और फेडरल रिजर्व के फैसलों से वैश्विक पोर्टफोलियो और बॉन्ड बाजार में जोखिम की स्थिति बदलती है। **सोने और जिंसों का भाव:** महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों के रुख से सोने तथा अन्य प्रमुख मुद्राओं की कीमतों में भारी फेरबदल देखने को मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
केंद्रीय बैंकों की नीतियों, बांड बाजार के घटनाक्रम और महंगाई के आंकड़ों के बीच यह असमंजस कई आर्थिक कारकों और हालिया डेटा के कारण पैदा हुआ है।

- **केंद्रीय बैंक की नीतियां:** यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद अर्थव्यवस्था में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा है।
- **ट्रेजरी बायबैक का असर:** अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा घोषित 6 अरब डॉलर का लॉन्ग-एंड बॉन्ड बायबैक बाजार की शुरुआती उम्मीदों से थोड़ा कम था, जिसके कारण यील्ड और मुद्राओं की चाल में मामूली बदलाव आया।
- **महंगाई और श्रम बाजार के आंकड़े:** ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण हेडलाइन और कोर पीपीआई में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जबकि अगस्त की मजबूत जॉब्स रिपोर्ट ने फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक से किस तरह के फैसले की उम्मीद की जा रही है?
बाजार की उम्मीदों के अनुसार ईसीबी अपनी डिपॉजिट रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है।

### 2. अमेरिकी ट्रेजरी ने कितने मूल्य के बॉन्ड बायबैक की घोषणा की है?
अमेरिकी ट्रेजरी ने 6 अरब अमेरिकी डॉलर तक के लॉन्ग-एंड बॉन्ड बायबैक ऑपरेशन की घोषणा की है।

### 3. EUR/USD की चाल पर किस बात का असर पड़ा है?
अमेरिकी ट्रेजरी के बॉन्ड बायबैक और लंबी अवधि के ट्रेजरी यील्ड में आए उछाल का असर EUR/USD की चाल पर देखा गया है।

### 4. सोने की कीमतों में हाल ही में क्या बदलाव आया है?
सोना 4,350 अमेरिकी डॉलर के निचले स्तर से उबरकर 4,400 अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है।

### 5. अमेरिकी श्रम बाजार को लेकर हालिया रिपोर्ट में क्या सामने आया है?
अगस्त के महीने में श्रम बाजार में उम्मीद से ज्यादा मजबूत रिकवरी दर्ज की गई है।

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