महंगाई के मजबूत आंकड़ों और डॉलर की नरमी से यूरो में स्थिरता के संकेत यूरो क्षेत्र में सितंबर की महंगाई दर 3.8 प्रतिशत पर रहने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख के बाद यूरो और अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में बढ़त देखी जा रही है। वैश्विक मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो स्थिरता की ओर कदम बढ़ा रहा है। यूरो क्षेत्र में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी मुद्रास्फीति के ताजे आंकड़ों ने नीतिगत ब्याज दरों के रुख को लेकर बाजार की उम्मीदों को नई दिशा दी है। सितंबर महीने के लिए यूरो क्षेत्र की वार्षिक मुद्रास्फीति 3.8 प्रतिशत पर दर्ज की गई है, जो कि यूरोपियन सेंट्रल बैंक के तय 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी अधिक है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक की ओर से भविष्य में सख्त मौद्रिक फैसले लेने की संभावनाएं काफी मजबूत बनी हुई हैं। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की सख्ती और विनिमय दर पर असर यूरोपियन सेंट्रल बैंक की सितंबर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पेश किए गए आक्रामक महंगाई अनुमानों ने वित्तीय बाजारों पर गहरा असर डाला है। नीति निर्माताओं के इस रुख के बाद बाजार अब केंद्रीय बैंक की तरफ से लगभग 75 आधार अंकों की और मौद्रिक सख्ती की उम्मीद कर रहा है। उच्च ब्याज दरों की इस संभावना ने यूरो को मजबूती प्रदान की है, जिसके चलते विनिमय दर 1.1340 से 1.1350 के स्तर तक पहुंचने की गुंजाइश बन रही है। इसके साथ ही अमेरिकी शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में देखी गई बेचैनी ने भी यूरो को अतिरिक्त समर्थन दिया है, जिससे यह मुद्रा अब एक मजबूत कंसोलिडेशन दौर में प्रवेश कर रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी इक्विटी बाजारों में गिरावट का सिलसिला और आगे बढ़ता है, तो भी केवल यूरो ही सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा नहीं होगी। ऐसे परिदृश्य में स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर यानी यूएसडी और सीएचएफ का निचला स्तर सुरक्षात्मक खरीदारी के लिहाज से अधिक तेजी से बढ़त हासिल कर सकता है। निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यूरोप और अमेरिका के केंद्रीय बैंक किस तरह अपनी आर्थिक नीतियों का संतुलन बनाते हैं। फेड अध्यक्ष की टिप्पणी और डॉलर इंडेक्स में गिरावट अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के दौरान फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श की टिप्पणियों ने अमेरिकी मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया। फेड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वह मूल्य स्थिरता हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने आने वाले समय में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर कोई ठोस संकेत नहीं दिया। इस अनिर्णायक रुख से ब्याज दरों के दृष्टिकोण में कोई आक्रामक बदलाव नहीं दिखा, जिससे डॉलर इंडेक्स लगभग दो सप्ताह के निचले स्तर पर फिसल गया। बास्केट मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की इस कमजोरी ने अन्य प्रतिस्पर्धी संपत्तियों के लिए तेजी का रास्ता साफ कर दिया। एशियाई सत्र में अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने का रुख शुक्रवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान डॉलर की कमजोरी का सीधा फायदा अन्य मुद्राओं को मिला। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी तेजी को आगे बढ़ाते हुए 0.6950 के स्तर की तरफ कदम बढ़ाया। अमेरिकी डॉलर पर बढ़ते बिकवाली दबाव ने इस जोड़ी को उछाल बनाए रखने में मदद की। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के मोर्चे पर भी नई बिकवाली हावी रही, जिसके चलते यह मुद्रा जोड़ी 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गई। ब्याज दरों में सख्ती को लेकर किसी स्पष्ट दिशा के अभाव ने डॉलर की मांग को कमजोर बनाए रखा। कमजोर डॉलर के माहौल में बहुमूल्य धातुओं के बाजार में भी खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ी है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन सोने में लिवाली देखने को मिली, हालांकि यह अभी भी अपने पिछले दो सप्ताह के सीमित दायरे में ही कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स में आई नरमी ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सुरक्षित निवेश के विकल्पों की मांग इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में दरों की कटौती या स्थिरता को लेकर फेडरल रिजर्व का अगला औपचारिक कदम क्या रहता है। मुद्रास्फीति की चुनौतियां यूरोप और अमेरिका दोनों जगहों पर नीति निर्माताओं के लिए परीक्षा बनी हुई हैं। इसका आप पर असर वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर की कमजोरी और यूरो की मजबूती का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश पोर्टफोलियो और यात्रा खर्च पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय: डॉलर के कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अन्य मुद्राओं को राहत मिलती है। इससे आयात करने वाली कंपनियों के लिए लागत में मामूली स्थिरता आ सकती है। • सोने के निवेशक: कमजोर अमेरिकी डॉलर के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों को समर्थन मिलता है। घरेलू बाजार में आभूषण और सोने में निवेश करने वालों को अल्पावधि में मूल्य वृद्धि देखने को मिल सकती है। • यूरोप यात्रा और पढ़ाई: मजबूत होते यूरो के कारण भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए यूरोप में खर्च बढ़ सकता है। विदेशी मुद्रा विनिमय कराते समय ज्यादा भारतीय रुपये चुकाने पड़ सकते हैं। • इक्विटी और जोखिम परिसंपत्तियां: टेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शेयरों में अस्थिरता के बीच निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले खुदरा निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यूरो में स्थिरता और डॉलर में नरमी का मुख्य कारण यूरोप और अमेरिका के केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक नीति रुख में आया अंतर है। जहां यूरोप में महंगाई अभी भी नियंत्रण से बाहर है, वहीं अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों पर कोई सख्त वादा नहीं किया है। • यूरो क्षेत्र में ऊंची महंगाई: यूरो क्षेत्र का सितंबर सीपीआई 3.8 प्रतिशत पर बना हुआ है, जो केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत लक्ष्य से लगभग दोगुना है। इस आंकड़े ने यूरोपीय नीति निर्माताओं को ब्याज दरों में 75 आधार अंकों की अतिरिक्त वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया है। • फेड का गैर-प्रतिबद्ध रवैया: फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने आईएमएफ बैठकों में मूल्य स्थिरता की बात तो की, लेकिन भविष्य की दर वृद्धि पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। इस स्पष्टता के अभाव ने डॉलर पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया। • अमेरिकी टेक शेयरों में घबराहट: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में आई अस्थिरता ने बाजार की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इस कारण अमेरिकी डॉलर से सुरक्षित संपत्तियों और यूरो में पूंजी का प्रवाह देखा गया। सवाल-जवाब 1. यूरो क्षेत्र में सितंबर की महंगाई दर कितनी रही? यूरो क्षेत्र में सितंबर महीने की वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति 3.8 प्रतिशत पर पुष्टि की गई है। 2. यूरोपियन सेंट्रल बैंक से बाजार को क्या उम्मीद है? बाजार को उम्मीद है कि यूरोपियन सेंट्रल बैंक अपनी मौद्रिक सख्ती जारी रखते हुए ब्याज दरों में लगभग 75 आधार अंकों की और बढ़ोतरी कर सकता है। 3. फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने क्या बयान दिया? केविन वॉर्श ने कहा कि वह मूल्य स्थिरता के प्रति प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य की ब्याज दरों के रास्ते पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। 4. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट का अन्य मुद्राओं पर क्या असर हुआ? डॉलर इंडेक्स दो सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6950 की तरफ बढ़ा और यूएसडी/जेपीवाई 158.00 से नीचे फिसल गया। 5. क्या सोने की कीमतों में भी कोई बदलाव दर्ज किया गया? हां, कमजोर डॉलर के चलते शुक्रवार को सोने में लगातार दूसरे दिन लिवाली देखी गई, हालांकि यह अभी भी दो सप्ताह के दायरे में बना हुआ है। https://trendkia.com/market/euro-consolidates-strength-against-us-dollar-as-sticky-inflation-fuels-tightening-path-48468 TrendKia — Har trend, sabse pehle.