# ईरान पर नए प्रतिबंधों की तैयारी और डॉलर में सुधार से स्थिर रहा यूरो

> पिछले हफ्ते की भारी हलचल के बाद अमेरिकी डॉलर में सुधार आने और ईरान पर प्रतिबंधों की आहट के बीच सोमवार को यूरो स्थिर कारोबार करता दिखा।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/euro-holds-ground-as-us-dollar-steadies-markets-brace-for-iran-sanctions-21345 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो डॉलर, ईरान प्रतिबंध, विदेशी मुद्रा बाजार, अमेरिकी ट्रेजरी, यूरोपीय सेंट्रल बैंक

अमेरिकी डॉलर में स्थिरता लौटने और पिछले सप्ताह बाजार में मची भारी उथल-पुथल के बाद माहौल शांत होने के बीच सोमवार को EUR/USD जोड़ी बिना किसी बड़े बदलाव के सपाट कारोबार करती नजर आई। इस रिपोर्ट को लिखे जाने के समय यह मुद्रा जोड़ी 1.1670 के आसपास टिकी हुई थी और मई महीने के मध्य में दर्ज किए गए अपने उच्च स्तरों के बेहद करीब मंडरा रही थी।

 

## डॉलर इंडेक्स की 99 के स्तर पर पहुंचने की कोशिश
 छह प्रमुख मुद्राओं की एक बास्केट के मुकाबले ग्रीनबैक की चाल मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) एक बार फिर 99.00 के आंकड़े को पार करने की कोशिश में जुटा है और फिलहाल यह 98.95 के इर्द-गिर्द कारोबार कर रहा है। हालांकि डॉलर में यह अल्पकालिक स्थिरता दिखाई दे रही है, लेकिन अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury) के उस फैसले के बाद व्यापक आर्थिक पृष्ठभूमि अभी भी काफी संवेदनशील बनी हुई है, जिसमें बॉन्ड बायबैक की घोषणा से अमेरिका की राजकोषीय नीति और बढ़ते सरकारी कर्ज को लेकर पुरानी चिंताएं फिर से ताजा हो गई थीं।

 

## यूरोपीय अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति का रुख
 BNY मेलन के रणनीतिकारों का मानना है कि यूरोपीय क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों में सुधार के संकेत मिलने के बावजूद मुद्रास्फीति ही सबसे बड़ा और मुख्य मुद्दा बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि बहुत जल्दी ब्याज दरों में सख्ती बढ़ाना एक बड़ी गलती साबित हो सकता है। उनके अनुसार यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) का नवीनतम महंगाई सर्वेक्षण यह संकेत देता है कि लोगों की उम्मीदें अब ज्यादा मजबूती से टिक रही हैं, जबकि यूरो अपने चक्रीय उच्च स्तरों के करीब है और पहले से ही मौद्रिक सख्ती का कुछ हिस्सा अपने स्तर पर संभाल रहा है।

 इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि इस हफ्ते यूरोप का पूरा ध्यान महंगाई से राहत पाने पर केंद्रित रहने वाला है। शुक्रवार को फ्रांस और स्पेन के फ्लैश सीपीआई (CPI) आंकड़े आने वाले हैं, जिन पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी क्योंकि स्पेन में महंगाई अभी भी फ्रांस की तुलना में काफी तेजी से आगे बढ़ रही है। इसके अलावा शुक्रवार को ही जर्मनी के बेरोजगारी आंकड़े भी सामने आएंगे, जो यूरोजोन की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के श्रम बाजार का एक स्पष्ट हाल पेश करेंगे और इससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के आगामी कदमों की रूपरेखा तैयार करने में खासी मदद मिलेगी।

 

## ईरान पर प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर
 सोमवार को बाजार का मुख्य केंद्र बिंदु भू-राजनीतिक तनाव भी रहा क्योंकि अमेरिका सोमवार को ही बाद में ईरान के खिलाफ नए और कड़े प्रतिबंधों की एक और खेप लागू करने की पूरी तैयारी कर रहा था। ईरान पर संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के ऊर्जा कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर फैली अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर ने अपनी खोई जमीन वापस पाना शुरू कर दिया है। इसी अनिश्चितता के माहौल के चलते जोखिम के प्रति संवेदनशील मानी जाने वाली GBP/USD जोड़ी भी पिछले हफ्ते आई शानदार तेजी के बाद सोमवार को 1.3600 के स्तर से ऊपर समेकन के दौर में बनी रही और दबाव में नजर आई।

 दूसरी ओर, सुरक्षित निवेश के रूप में देखे जाने वाले सोने (XAU/USD) ने सोमवार को अपनी बढ़त का सिलसिला जारी रखा। अमेरिकी वित्त विभाग की बायबैक घोषणा के बाद पिछले सप्ताह आई जोरदार तेजी को आधार बनाते हुए सोना मई के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर यानी करीब 4,650 डॉलर के आसपास कारोबार करता हुआ दिखाई दिया।

सोमवार को ही EUR/USD जोड़ी भी 1.1700 के स्तर से नीचे फिसलकर कमजोरी के साथ कारोबार करती दिखी, क्योंकि अमेरिकी वित्त विभाग की बॉन्ड बायबैक योजना में बदलाव के कारण पिछले हफ्ते बाजार में बिकवाली देखने को मिली थी और अब डॉलर आंशिक सुधार की कोशिश कर रहा है। इस बीच निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और इस हफ्ते आने वाले बड़े आर्थिक आंकड़ों के साथ-साथ ईरान पर लगने वाले अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों के पैकेज की पूरी डिटेल का इंतजार कर रहे हैं।

 

## बॉन्ड बायबैक और बाजार पर उसका असर
 अमेरिकी वित्त विभाग ने पिछले हफ्ते बुधवार को अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया था, जिस पर गहराई से गौर करने की जरूरत है। विभाग ने दोपहर 12:32 GMT पर घोषणा की थी कि वह 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय क्षेत्रों में तरलता समर्थन बायबैक ऑपरेशनों के आकार को कम से कम दोगुना करने जा रहा है। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी हो गई है और 4 नवंबर तक जारी रहने वाली है।

 इस पूरे सप्ताह आने वाले वृहद आर्थिक आंकड़ों में बुधवार को आने वाली अमेरिकी PCE रिपोर्ट और शुक्रवार को जैक्सन होल सम्मेलन में वॉर्श का भाषण बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि ये सभी घटनाक्रम वैश्विक मुद्रा बाजारों की अगली चाल तय करने में निर्णायक साबित होंगे।

## इसका आप पर असर
**पाठकों पर प्रभाव:**

- **भारत में:** विदेशी मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर की चाल से भारतीय रुपये के मूल्य, आयातित कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू स्तर पर ईंधन के दामों पर सीधा असर पड़ सकता है।
- **वैश्विक स्तर पर:** ईरान पर नए प्रतिबंधों और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर निवेशकों और व्यापारियों पर होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. सोमवार को EUR/USD मुद्रा जोड़ी किस स्तर पर कारोबार कर रही थी?
सोमवार को EUR/USD मुद्रा जोड़ी 1.1670 के आसपास सपाट कारोबार कर रही थी, जो मई के मध्य के उच्च स्तर के करीब है।

### 2. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर को पार करने की कोशिश कर रहा है?
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 99.00 के स्तर को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है और यह लगभग 98.95 पर कारोबार कर रहा है।

### 3. अमेरिकी वित्त विभाग ने बॉन्ड बायबैक योजना में क्या बदलाव किए हैं?
वित्त विभाग ने 10-वर्षीय और 30-वर्षीय क्षेत्रों में तरलता समर्थन बायबैक ऑपरेशनों के आकार को दोगुना कर दिया है, जिससे अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दी गई है।

### 4. इस सप्ताह निवेशकों की नजर किन प्रमुख आर्थिक रिपोर्टों पर है?
निवेशक बुधवार को आने वाली अमेरिकी PCE रिपोर्ट और शुक्रवार को होने वाले वॉर्श के जैक्सन होल भाषण पर गहरी नजर बनाए हुए हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._