ईसीबी की दरों और मध्य पूर्व के तनाव के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत बना हुआ है यूरो मध्य पूर्व के संघर्ष और बदलती आर्थिक रफ्तार के बीच यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती बनाए हुए है। यूरोपीय क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को लेकर नए पूर्वानुमान सामने आए हैं, जिसके अनुसार इस क्षेत्र की रफ्तार पर मध्य पूर्व के संघर्ष का असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि वर्ष 2025 में दर्ज की गई 1.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर वर्ष 2026 में 0.8 प्रतिशत पर आ सकती है। हालांकि इसके बाद आर्थिक गतिविधियों में सुधार की उम्मीद है और वर्ष 2027 में यह बढ़कर 1.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। महंगाई और नीतिगत ब्याज दरों का अनुमान आर्थिक वृद्धि के धीमा होने के साथ-साथ मुद्रास्फीति के मोर्चे पर भी बदलाव देखने को मिल सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के झटकों के कारण वर्ष 2026 में महंगाई दर बढ़कर 2.7 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है, जबकि वर्ष 2025 में यह 2.1 प्रतिशत पर थी। इसके बाद वर्ष 2027 में भी यह 2.6 प्रतिशत के स्तर पर बनी रह सकती है। इस बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ईसीबी की नीतिगत दरों में बदलाव की उम्मीद है। विश्लेषकों का अनुमान है कि वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी की जा सकती है, जिससे डिपॉजिट फैसिलिटी रेट बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य मुद्राओं का हाल विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की चाल भी भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित हो रही है। सोमवार को दिन के दूसरे हिस्से में ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 1.3300 के आसपास लाल निशान में कारोबार करती नजर आई। हफ्ते की शुरुआत इस जोड़ी ने तेजी के साथ की थी, लेकिन बाद में दिशा बदल गई। मध्य पूर्व के संघर्ष में ठहराव आने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे अमेरिकी डॉलर की बढ़त सीमित हुई और इस मुद्रा जोड़ी को फिलहाल अपना आधार बनाए रखने में मदद मिली। यूरो और अमेरिकी डॉलर की मौजूदा स्थिति दूसरी ओर, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी अपनी तेजी की रफ्तार को बरकरार नहीं रख पाई और सोमवार को दिन के दूसरे हिस्से में 1.1400 के नीचे सीमित बढ़त के साथ कारोबार करती दिखी। मध्य पूर्व में हमलों के थमने के बाद बाजार के जानकारों को इस बात की उम्मीद है कि इस संघर्ष में नरमी आएगी। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच किसी राजनयिक समाधान तक पहुंचने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका असर मुद्रा बाजारों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। बाजार के खिलाड़ी हर एक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगली दिशा का अनुमान लगाया जा सके। इसका आप पर असर वैश्विक बाजार और निवेशकों के लिए: मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव का असर वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो, आयात-निर्यात लागत और मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2026 में यूरो क्षेत्र की जीडीपी वृद्धि दर कितनी रहने का अनुमान है? वर्ष 2026 में यूरो क्षेत्र की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 0.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2025 में 1.5 प्रतिशत थी। 2. वर्ष 2026 में मुद्रास्फीति के कितने रहने की आशंका है? ऊर्जा झटकों के कारण वर्ष 2026 में मुद्रास्फीति बढ़कर 2.7 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। 3. ईसीबी की नीतिगत दरों को लेकर क्या अनुमान लगाया गया है? वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में ईसीबी की नीतिगत दर में 25 बेसिस पॉइंट की एक और बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे डिपॉजिट फैसिलिटी रेट 2.5 प्रतिशत हो जाएगी। 4. सोमवार को दिन के दूसरे हिस्से में EUR/USD की क्या स्थिति रही? सोमवार को दिन के दूसरे हिस्से में EUR/USD अपनी तेजी की गति खो बैठा और 1.1400 के नीचे सीमित बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। https://trendkia.com/market/euro-maintains-strength-against-us-dollar-despite-growth-slowdown-and-ecb-rate-projections-11023 TrendKia — Har trend, sabse pehle.