यूरोपीय अर्थव्यवस्था में सुधार के बावजूद यूरो पर क्यों मंडरा रहा है दबाव यूरोप में आर्थिक सुधार और औद्योगिक गतिविधियों को सहारा मिलने के बाद भी यूरो की ऊंची कीमतों को सही नहीं ठहराया जा सकता। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, ब्याज दर अंतर और हेजिंग के अभाव के चलते यूरो में जोखिम बढ़ रहा है। यूरोप के बाजारों में आर्थिक सुधार के संकेत भले ही वास्तविक दिखाई दे रहे हों, लेकिन यह गति मुद्रा के रूप में यूरो को मजबूती प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। औद्योगिक स्तर पर समर्थन और राजकोषीय उपायों से यूरोपीय परिसंपत्तियों को सहारा जरूर मिल रहा है, पर कमजोर मांग, नीतिगत गलतियों का खतरा और मुद्रा का अत्यधिक महंगा मूल्यांकन इसके ऊपर भारी दबाव बना रहे हैं। ऐसे माहौल में यूरो की खरीद का रुख बनाए रखना बाजार की वर्तमान वास्तविकताओं के विपरीत साबित हो सकता है। जर्मनी की सुस्ती और यूरोप का असंतुलित आर्थिक सुधार यूरोपीय क्षेत्र में देखने को मिल रहा यह सुधार अभी सभी क्षेत्रों में व्यापक रूप से नहीं फैला है। जर्मनी का सेवा क्षेत्र घटकर 48.5 के स्तर पर आ गया है, जिससे कारोबारी आत्मविश्वास में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही आउटपुट-प्राइस मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने सुस्त पड़ी है। हालांकि पूरे यूरोप में इन्वेंट्री प्रबंधन, रक्षा खर्च और डेटा केंद्रों में हो रहे बड़े निवेश से औद्योगिक इकाइयों को गति मिल रही है, लेकिन उपभोक्ता मांग और मुख्य मुद्रास्फीति का वेग इतना मजबूत नहीं है कि वह यूरो के दीर्घकालिक उछाल का समर्थन कर सके। मुद्रा बाजार के मौजूदा रुझानों पर नजर डालें तो सीधे यूरो पोजीशनिंग काफी मजबूत बनी हुई है। दूसरी ओर सीमा पार हेजिंग अपने एक वर्ष के औसत से लगभग 60% नीचे आ गई है। जुलाई में संपन्न हुई एफओएमसी बैठक के बाद निवेशकों द्वारा अमेरिकी डॉलर के एक्सपोजर में की गई कटौती ने यूरोजोन परिसंपत्तियों को बड़े पैमाने पर सुरक्षा कवच के बिना छोड़ दिया है। यूरो का मूल्यांकन पहले से ही ऊंचा बना हुआ है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति को और कड़ा किए जाने से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसका ब्याज दर अंतर अभी भी नकारात्मक बना हुआ है। यदि निवेशक यूरोप की तरफ पूंजी का प्रवाह जारी भी रखते हैं, तो भी आने वाले समय में करेंसी हेजिंग में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मूल्यांकन की चुनौतियां और कैरी ट्रेड की रणनीतियां अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) के एक वर्ष के वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) औसत की तुलना में यूरो वर्तमान में लगभग 2% ऊपर कारोबार कर रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि वास्तविक संदर्भ में यह मुद्रा काफी महंगी है, जबकि उधार लेने के लिहाज से यह अभी भी तुलनात्मक रूप से सस्ती बनी हुई है। इस स्थिति के चलते निवेशक यूरो को फंडिंग मुद्रा के तौर पर उपयोग करने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यूरो को फंडिंग करेंसी के तौर पर इस्तेमाल करना यूरोजोन की अर्थव्यवस्था को लेकर कोई नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं दर्शाता है। यूरोपीय शेयर बाजार कमजोर मुद्रा के साथ मिलकर भी बेहतर प्रदर्शन जारी रख सकते हैं। दूसरी ओर, यदि वास्तविक प्रभावी विनिमय दर सामान्य स्तरों की ओर लौटती है, तो बिना हेज की गई परिसंपत्तियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। यूरो-फंडेड कैरी ट्रेड रणनीतियों को इस संभावित समायोजन से सीधा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वैश्विक मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा और कच्चे तेल का दबाव व्यापक अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती अन्य मुद्राओं को लगातार पीछे धकेल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार तीसरे दिन गिरावट के रुख में रहा और मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार करते हुए इसने 0.7100 के स्तर का बचाव किया। अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब मजबूती से टिका हुआ है, क्योंकि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी और कच्चे तेल की वजह से उपजी महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग बढ़ा रहा है और जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव डाल रहा है। इसी तरह अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी बुधवार को एशियाई कारोबार में 155.00 के पार निकलकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। कच्चे तेल से जुड़ी मुद्रास्फीति की चिंताएं और फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि के अनुमान अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को लगातार मजबूती दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक आरक्षित मुद्रा के तौर पर अमेरिकी डॉलर की हैसियत को और पुख्ता कर दिया है। हालांकि बुधवार को फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले ट्रेडर्स में झिझक देखने को मिल रही है, जिससे यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी हुई है। सोने की चाल और केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसले यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में सोने ने मामूली इंट्राडे बढ़त दर्ज की, लेकिन नई खरीदारी की कमी के कारण यह $4,350 के स्तर से नीचे ही सीमित रहा। डॉलर में दो सप्ताह के उच्च स्तर से कुछ मुनाफावसूली दिखने से कीमती धातु को हल्का सहारा मिला, पर बड़े नीतिगत घटनाक्रमों से पहले निवेशक कोई आक्रामक दिशात्मक दांव लगाने के बजाय किनारे रहना पसंद कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले से ठीक पहले जारी हुए आंकड़ों में अगस्त की अमेरिकी नौकरियों की रिपोर्ट काफी जोरदार रही थी, जिसने दरों के बाजार में दरों में तेज बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी थी। हालांकि हालिया अगस्त सीपीआई मुद्रास्फीति के आंकड़ों को नीतिगत दिशा तय करने के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दूसरी तरफ, जापान की शून्य के करीब ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेश में खरबों डॉलर के प्रवाह में मदद की, जिससे जापानी येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में शामिल हो गया था। अब जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह मौद्रिक नीति को और कड़ा किए जाने की संभावना है, यह फायदा एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है। जहां अधिकांश प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं ने ब्याज दरें बढ़ाई थीं, वहीं जापान लंबे समय तक दुनिया का अकेला अपवाद बना रहा था। इसका आप पर असर वैश्विक केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और मुद्रा विनिमय पर सीधा असर पड़ने वाला है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: यदि आप यूरोप या अमेरिका की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो डॉलर की मजबूती के कारण डॉलर आधारित खर्च महंगे बने रहेंगे। वहीं यूरो में बहुत अधिक उछाल न आने से यूरोपीय देशों की यात्रा और खरीदारी पर खर्च में स्थिरता बनी रह सकती है। • वैश्विक निवेश और फंड: अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड और विदेशी इक्विटी में निवेश करने वाले निवेशकों को हेजिंग पर ध्यान देना होगा। यूरोजोन में अनहेज्ड परिसंपत्तियों में मुद्रा समायोजन के चलते रिटर्न प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है। • कच्चे तेल और आयात पर असर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती के कारण आयातित ऊर्जा उत्पाद महंगे हो रहे हैं। इससे आने वाले हफ्तों में घरेलू स्तर पर ईंधन और परिवहन से जुड़े खर्चों पर अप्रत्यक्ष दबाव देखने को मिल सकता है। • सुरक्षित निवेश के विकल्प: केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले सोने और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। जो निवेशक सोने में पैसा लगाना चाहते हैं, उन्हें दरों के फैसले के बाद मूल्य स्थिरता का इंतजार करना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यूरो में अपेक्षित मजबूती न आने और अमेरिकी डॉलर के लगातार मजबूत बने रहने के पीछे आर्थिक आंकड़ों का असंतुलन, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं। • असंतुलित विकास और जर्मनी में सुस्ती: यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में सेवा क्षेत्र गिरकर 48.5 पर आ गया और मांग कमजोर बनी रही। डेटा केंद्र और रक्षा क्षेत्र में निवेश के बावजूद उपभोक्ता मांग की कमी यूरो में टिकाऊ तेजी नहीं बनने दे रही है। • फेडरल रिजर्व की सख्ती और यील्ड में उछाल: अमेरिका में अगस्त की मजबूत नौकरियों की रिपोर्ट और अगस्त सीपीआई आंकड़ों ने ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंका बढ़ा दी है। इस कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंची और डॉलर को मजबूती मिली। • भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालातों ने निवेशकों को अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित आरक्षित मुद्रा की ओर रुख करने के लिए मजबूर किया है। • बैंक ऑफ जापान का संभावित नीतिगत बदलाव: लंबे समय तक शून्य ब्याज दरों के जरिए वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के सस्ते फंडिंग का जरिया रहे जापानी येन पर बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्ती किए जाने की संभावना से वैश्विक कैरी ट्रेड में अनिश्चितता बढ़ गई है। सवाल-जवाब 1. यूरोप में आर्थिक सुधार के बाद भी यूरो क्यों कमजोर बना हुआ है? जर्मनी के सेवा क्षेत्र में सुस्ती और कमजोर मांग के कारण सुधार व्यापक नहीं है, साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नकारात्मक ब्याज दर अंतर यूरो पर दबाव बना रहा है। 2. जर्मनी के सेवा क्षेत्र का हालिया आंकड़ा क्या रहा है? जर्मनी का सेवा क्षेत्र सूचकांक घटकर 48.5 के स्तर पर आ गया है, जो इस क्षेत्र में संकुचन और घटते कारोबारी आत्मविश्वास को दर्शाता है। 3. यूरो का मूल्यांकन बीआईएस आरईईआर के हिसाब से कितना अधिक है? यूरो अपने एक वर्ष के बीआईएस वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) औसत से लगभग 2% ऊपर कारोबार कर रहा है, जिससे यह वास्तविक संदर्भ में महंगा बना हुआ है। 4. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में क्या रुझान देखा गया? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7100 के करीब मासिक निचले स्तर पर रहा, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन 155.00 के पार एक सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। 5. सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या असर पड़ा है? सोने में हल्की बढ़त देखी गई लेकिन नई खरीदारी की कमी के कारण यह $4,350 प्रति औंस के स्तर से नीचे ही बना रहा। 6. बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठक क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है? बैंक ऑफ जापान द्वारा ब्याज दरों को और सख्त किए जाने की उम्मीद है, जिससे एक दशक से वैश्विक निवेश को वित्तपोषित करने वाला सस्ता येन फंडिंग मॉडल बदल सकता है। https://trendkia.com/market/european-arthavyavastha-men-sudhara-ke-bavajuda-euro-para-kyon-mndara-raha-hai-dabava-33783 TrendKia — Har trend, sabse pehle.