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  "type": "article",
  "title": "यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर ऊर्जा संकट का दबाव, महंगाई दर 2 प्रतिशत लाने में 2027 तक हो सकती है देरी",
  "summary": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन के अनुसार ऊर्जा झटके शांत होने पर ही यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था संतुलित गति से आगे बढ़ेगी, जबकि लागत बढ़ने से 2 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य 2027 के मध्य तक खिंच सकता है।",
  "content": "यूरोपीय अर्थव्यवस्था के सुधार मार्ग में ऊर्जा लागत की अप्रत्याशित वृद्धि एक बार फिर बड़ी बाधा बन सकती है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े झटके शांत हो जाते हैं, तो यूरोपीय अर्थव्यवस्था एक स्थिर और मध्यम गति से विस्तार करेगी। हालांकि, यदि ऊर्जा खर्चों में दोबारा तेजी आती है, तो मुद्रास्फीति नीचे आने से पहले एक बार फिर उछाल ले सकती है, जिससे इसे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य तक वापस लौटने में 2027 के मध्य या उसके बाद तक का लंबा समय लग सकता है। वित्तीय बाजारों की गतिविधियों के बीच यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर वैश्विक स्तर पर मंथन तेज है।\n\n \n\nब्याज दरों और मुद्रा बाजार की वर्तमान स्थिति\n\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी नीतियों को लेकर वित्तीय बाजार काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। मनी मार्केट्स ने वर्ष के अंत तक लगभग 35 आधार अंकों की मौद्रिक सख्ती का अनुमान पहले ही अपनी कीमतों में शामिल कर लिया है। इसके साथ ही, निवेशकों और बाजार विश्लेषकों ने आगामी 17 दिसंबर की नीतिगत बैठक तक ब्याज दर वृद्धि की संभावना को पूरी तरह से कीमतों में समायोजित कर लिया है। विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यूरो की स्थिति विभिन्न मुद्राओं के मुकाबले मिश्रित देखी गई है, जहां यह कनाडाई डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति में दर्ज किया गया है। मुद्रा बाजार के हीट मैप से स्पष्ट होता है कि बेस करेंसी और कोट करेंसी के बीच होने वाले उतार-चढ़ाव में प्रमुख वैश्विक करेंसियों की दिशा अलग-अलग बनी हुई है।\n\n \n\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक की कार्यप्रणाली और 2 प्रतिशत लक्ष्य का तंत्र\n\nजर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरो क्षेत्र के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक की भूमिका निभाता है। यह बैंक क्षेत्र के लिए प्रमुख नीतिगत ब्याज दरें निर्धारित करता है और संपूर्ण मौद्रिक नीति का संचालन करता है। ईसीबी का सबसे प्रमुख और प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति दर को 2 प्रतिशत के आसपास नियंत्रित रखना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक का सबसे प्रमुख हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत अधिक रखी जाती हैं, तो आमतौर पर यूरो मजबूत होता है, जबकि दरें घटने पर इसके विपरीत असर दिखता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार आयोजित होने वाली आधिकारिक बैठकों में मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले लेती है। इन महत्वपूर्ण निर्णयों में यूरो क्षेत्र के सभी राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य मतदान और सहमति के आधार पर कदम तय करते हैं।\n\n \n\nक्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का नीतिगत प्रभाव\n\nअत्यधिक विषम या संकटपूर्ण आर्थिक परिस्थितियों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक विशेष नीतिगत उपाय का सहारा लेता है, जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग कहा जाता है। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत ईसीबी नए यूरो जारी करके वाणिज्यिक बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉरपोरेट बॉन्ड जैसी परिसंपत्तियां खरीदता है ताकि बाजार में तरलता डाली जा सके। इस प्रक्रिया का सामान्य परिणाम यूरो की मुद्रा में कमजोरी के रूप में सामने आता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग का इस्तेमाल अंतिम उपाय के रूप में तब किया जाता है जब केवल ब्याज दरों में कटौती करने से मूल्य स्थिरता का लक्ष्य प्राप्त होना संभव नहीं दिखता। ईसीबी ने 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान, वर्ष 2015 में लंबे समय तक बनी रही बहुत कम महंगाई की चुनौती के समय, और कोरोना महामारी के व्यापक आर्थिक संकट के दौरान इस असाधारण उपाय का सफलतापूर्वक उपयोग किया था।\n\n इसके ठीक उलट, जब आर्थिक सुधार मजबूती पकड़ने लगता है और महंगाई में तेजी आने लगती है, तब क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की प्रक्रिया अमल में लाई जाती है। जहां क्वांटिटेटिव ईजिंग के तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय तंत्र में तरलता पहुंचाने के लिए बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में ईसीबी नए बॉन्ड की खरीद पूरी तरह बंद कर देता है और अपने पास मौजूद बॉन्ड की परिपक्वता पर मिलने वाली मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता। बॉन्ड खरीद रोकने और तरलता कम करने का यह नीतिगत कदम आमतौर पर यूरो के लिए सकारात्मक और तेजी का संकेत माना जाता है।\n\n \n\nवैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में उठापटक\n\nयूरोपीय घटनाक्रमों के साथ-साथ दुनिया भर के अन्य प्रमुख वित्तीय बाजारों में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई कारोबारी सत्र में सोमवार के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) किसी स्पष्ट दिशा के लिए संघर्ष करता हुआ दिखा। 0.7140 के स्तर का दोबारा परीक्षण करने के तुरंत बाद इस जोड़ी पर ताजा गिरावट का दबाव बना और यह मंगलवार को एशियाई बाजार खुलने से पहले 0.7100 के निचले स्तरों पर स्थिर होने का प्रयास करती नजर आई। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर को लेकर निवेशकों की धारणा में आया व्यापक सुधार रही है।\n\n दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) सोमवार को एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे आ गया। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों की जांच किए जाने के बाद संभावित आधिकारिक हस्तक्षेप के जोखिमों के बीच जापानी येन को हल्का सहारा मिला। इसके अतिरिक्त, जापान में स्थानीय अवकाश होने, तथा रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते संघर्ष और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों ने भी निवेशकों को सतर्क बनाए रखा। इन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर की गिरावट थम गई, जिससे इस करेंसी पेयर की गिरावट भी एक दायरे में सीमित रही।\n\n \n\nसोने के भाव और केंद्रीय बैंकों के कड़े फैसले\n\nकीमती धातुओं के बाजार में सोना नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में दबाव में रहा और इसका भाव 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास दर्ज किया गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में आई गिरावट के बावजूद मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने की कीमतों में यह सुधारात्मक गिरावट देखने को मिली। तीसरी तिमाही के अंतिम हफ्तों की ओर बढ़ते हुए वैश्विक वित्तीय बाजार एक अजीबोगरीब स्थिति में खड़े हैं। जहां एक तरफ अनिश्चितता और भारी उतार-चढ़ाव ने समूचे बाजार को अपनी चपेट में ले रखा है, वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है और यूरोपीय तथा अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ खुलने की तैयारी में दिखाई दिए।\n\n बाजार में सबसे गंभीर दबाव संप्रभु बॉन्ड बाजार में केंद्रित रहा है, जहां यूरोपीय और अमेरिकी यील्ड शुक्रवार देर रात एक और झटके के बाद ऊपर चढ़ गई थीं। इस बीच, बैंक ऑफ जापान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। जापानी केंद्रीय बैंक का यह कदम मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा पड़ाव माना जा रहा है, जो काफी हद तक उन उम्मीदों के अनुरूप रहा जो बाजार कई सप्ताह से लगा रहा था।\n\nइसका आप पर असर\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने और ऊर्जा झटकों की आशंका से वैश्विक मुद्रा और कर्ज लागत पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।\n\n• भारतीय निवेशकों पर: वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें ऊंची रहने से विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख सतर्क रह सकता है। इससे भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह पर अल्पावधि में दबाव देखने को मिल सकता है।\n• यूरो क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों पर: यदि ऊर्जा लागत के कारण महंगाई 2027 तक खिंचती है तो वहां रहने और पढ़ने का खर्च ऊंचा बना रहेगा। इसके अलावा होम लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में जल्द बड़ी राहत मिलने की संभावना कम हो जाएगी।\n• सोने के खरीदारों पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के भाव 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास टिके होने से घरेलू बाजार में आभूषण महंगे रह सकते हैं। डॉलर मजबूत होने पर सोने में आने वाली गिरावट खरीदारों के लिए सीमित स्तर पर खरीदारी के मौके दे सकती है।\n• निर्यातकों और कारोबारियों पर: यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार और मजबूत यूरो का असर भारतीय निर्यातकों के ऑर्डर वॉल्यूम पर पड़ सकता है। यूरोपीय बाजारों में मांग सुधरने में समय लगने से कपड़ा और इंजीनियरिंग निर्यातकों को सतर्क योजना बनानी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के कारण मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के केंद्रीय बैंकों के प्रयासों में नई अड़चनें पैदा हो रही हैं।\n\n• ऊर्जा लागत की अनिश्चितता: यूरोप की उत्पादन और परिवहन लागत सीधे तौर पर ईंधन की कीमतों से जुड़ी हुई है। यदि ऊर्जा की कीमतों में दोबारा उछाल आता है, तो उत्पादन लागत बढ़कर सीधे खुदरा उपभोक्ता कीमतों पर दबाव डालती है।\n• मुद्रास्फीति का दोबारा उभरने का जोखिम: केंद्रीय बैंक के अनुसार महंगाई में एक बार फिर अस्थायी तेजी आ सकती है। इसके कारण नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का चक्र रुक सकता है और 2 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचने में 2027 के मध्य तक का समय लग सकता है।\n• वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध और पश्चिम एशिया में फैले तनाव से कमोडिटी और ऊर्जा आपूर्ति की राह में निरंतर जोखिम बने हुए हैं। यही तनावपूर्ण स्थितियां डॉलर जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों की मांग बढ़ा रही हैं और केंद्रीय बैंकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर रही हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री के अनुसार महंगाई लक्ष्य कब तक हासिल होगा?\nफिलिप लेन के अनुसार यदि ऊर्जा लागत में दोबारा उछाल आता है, तो मुद्रास्फीति के 2 प्रतिशत लक्ष्य तक लौटने में 2027 के मध्य या उसके बाद तक का समय लग सकता है।\n\n2. मनी मार्केट ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी बैठकों के लिए क्या अनुमान लगाया है?\nमुद्रा बाजार ने साल के अंत तक 35 आधार अंकों की सख्ती और 17 दिसंबर की बैठक में ब्याज दर में बढ़ोतरी को पूरी तरह कीमतों में शामिल कर लिया है।\n\n3. ईसीबी का प्राथमिक दायित्व क्या है और गवर्निंग काउंसिल की बैठकें कब होती हैं?\nईसीबी का प्राथमिक दायित्व मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के आसपास बनाए रखकर मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है, और इसकी गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करती है।\n\n4. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या मुख्य अंतर है?\nक्वांटिटेटिव ईजिंग में ईसीबी बाजार में नकदी डालने के लिए बॉन्ड खरीदता है जिससे यूरो कमजोर होता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बॉन्ड खरीद रोककर तरलता घटाई जाती है जिससे यूरो को मजबूती मिलती है।\n\n5. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?\nबैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है।\n\n6. वैश्विक बाजार में सोने और प्रमुख मुद्राओं का क्या रुख रहा?\nसोना 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास रहा, जबकि अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से AUD/USD और USD/JPY जैसी जोड़ियों में दबाव और उतार-चढ़ाव देखा गया।",
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  "publishedAt": "2026-09-22",
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