# यूरोपीय सेंट्रल बैंक और अमेरिकी ट्रेजरी के तरलता कदमों के बीच सोने ने $4,600 का स्तर पार किया

> यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा दीर्घकालिक पुनर्वित्त संचालन पर विचार और अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक योजना के बीच वैश्विक बाजारों में हलचल है, जहां सोना $4,600 के पार पहुंच गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/european-central-bank-aura-us-treasury-ke-taralata-kadamon-ke-bicha-sone-ne-4-600-ka-stara-para-kiya-19834 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरोपीय सेंट्रल बैंक, अमेरिकी ट्रेजरी, गोल्ड प्राइस, बिटकॉइन, फॉरेक्स मार्केट, बॉन्ड मार्केट

वैश्विक वित्तीय बाजारों में केंद्रीय बैंकों की तरलता नीतियों और सरकारी ऋण प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखे जा रहे हैं। एक तरफ यूरोपीय सेंट्रल बैंक बैंक प्रणालियों में नकदी के संतुलन को बनाए रखने के लिए नए दीर्घकालिक पुनर्वित्त संचालन यानी Structural LTROs के डिजाइन पर चर्चा शुरू करने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बॉन्ड बाजार को सहारा देने के लिए अपने बायबैक कार्यक्रम के आकार को दोगुना करने का ऐलान किया है। इस पृष्ठभूमि में विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर में मजबूती के बावजूद सोने की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया है और यह तीन महीने के उच्चतम स्तर $4,600 प्रति ट्रॉय औंस के पार निकल गया है। इसके साथ ही क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी तेजी का रुख बना हुआ है, जहां बिटकॉइन $77,000 के ऊपर कारोबार कर रहा है।

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक के LTRO प्रस्ताव और रिजर्व मांग का गणित
यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ECB चालू वर्ष के अंत की ओर स्ट्रक्चरल LTROs के स्वरूप और डिजाइन पर औपचारिक बातचीत शुरू कर सकता है। राबोबैंक के विश्लेषकों द्वारा किए गए विस्तृत अध्ययन के अनुसार, इन तरलता अभियानों के लिए 12 महीने की परिपक्वता अवधि यानी Maturity एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकती है। इसके अलावा, ECB इन संचालन प्रक्रियाओं को पुरानी फिक्स्ड-रेट और फुल-अलॉटमेंट व्यवस्था के बजाय नीलामी यानी Auction प्रक्रिया के जरिए जारी करने का विकल्प चुन सकता है। हालांकि, इस व्यवस्था को लागू करने की सटीक तिथि इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले महीनों में वाणिज्यिक बैंकों की ओर से सेंट्रल बैंक रिजर्व की मांग किस स्तर पर रहती है।

यदि सेंट्रल बैंक न्यूनतम रिजर्व आवश्यकताओं यानी Minimum Reserve Requirement को बढ़ाने की अपनी चर्चित योजनाओं पर आगे बढ़ता है, तो इससे LTRO के डिजाइन पर होने वाली चर्चाओं में तेजी आ सकती है। ECB गवर्निंग काउंसिल इस विषय पर चालू वर्ष की चौथी तिमाही Q4 या फिर अगले वर्ष की शुरुआत में विस्तार से विचार-विमर्श कर सकती है, जिसके बाद इसे वर्ष 2027 में औपचारिक रूप से लॉन्च किया जा सकता है। ऐतिहासिक आंकड़ों और तरलता स्थितियों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि जब मुख्य पुनर्वित्त संचालन यानी MRO की मांग 100 अरब यूरो से बढ़कर 125 अरब यूरो के दायरे में पहुंचती है, तब LTROs को शुरू किया जा सकता है। अतीत में 3-महीने का सबसे छोटा LTRO टेंडर 15 अरब यूरो का रहा था, जब MRO मांग संरचनात्मक रूप से कम से कम 100 अरब यूरो के स्तर पर बनी हुई थी।

वर्तमान में केंद्रीय बैंक और वित्तीय संस्थान टर्म फंडिंग की उपलब्धता और उससे जुड़ी लागतों के विभिन्न संकेतकों पर पैनी नजर रख रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि बैंकिंग प्रणाली की तरलता अपने निर्णायक मोड़ यानी Inflection Point के कितने करीब है। जैसे-जैसे क्वांटिटेटिव नॉर्मलाइजेशन यानी Quantitative Normalisation की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, टर्म दरों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नए LTRO अभियानों की शुरुआत से इस दबाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

## अमेरिकी ट्रेजरी का बड़ा कदम और फेडरल रिजर्व पर नजरें
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से अलग हटते हुए एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। बुधवार को ग्रीनविच मीन टाइम के अनुसार 12:32 GMT पर विभाग ने आधिकारिक जानकारी दी कि वह 10-वर्ष से 20-वर्ष और 20-वर्ष से 30-वर्ष वाले दीर्घकालिक बॉन्ड क्षेत्रों में तरलता सहायता बायबैक अभियानों के आकार को कम से कम दोगुना करेगा। इस नए फैसले के तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को $2 अरब से बढ़ाकर कम से कम $4 अरब कर दिया गया है। यह संशोधित व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक लागू रहेगी।

दूसरी ओर, अमेरिकी वित्तीय जगत की निगाहें केविन वॉश पर भी टिकी हुई हैं, जो नीतिगत संदेशों के अस्पष्ट माहौल के बीच जैक्सन होल में अपनी पहली उपस्थिति दर्ज कराने जा रहे हैं। हालिया बॉन्ड बाजार हस्तक्षेप के बाद किसी बड़े आक्रामक या Hawkish फैसले की संभावना काफी कम नजर आ रही है। इसके अतिरिक्त, शेयर बाजार की हालिया तेजी के सुस्त पड़ने के बीच एनवीडिया जैसी प्रमुख टेक कंपनी के तिमाही नतीजे भी आने वाले समय में इक्विटी बाजारों की भावी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

## विदेशी मुद्रा बाजार: पाउंड और यूरो में हल्की गिरावट
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में हफ्ते के अंत में GBP/USD की जोड़ी दबाव में नजर आई और यह पिछले कारोबारी सत्र में 1.3670 के उच्च स्तर को छूने के बाद फिसलकर 1.3600 के निचले दायरे में आ गई। पाउंड में आया यह सुधार लगातार दो दिनों की बढ़त के बाद दर्ज किया गया है। ब्रिटेन के कमजोर आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी डॉलर में आई हल्की मजबूती ने इस मुद्रा जोड़े पर नीचे की ओर दबाव बनाने का काम किया।

इसी तरह EUR/USD में भी मामूली गिरावट देखी गई और यह 1.1670 के आसपास कारोबार करता नजर आया। इससे पहले यूरो ने 1.1700 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने का एक और असफल प्रयास किया था। यूरो में इस सुस्ती का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मामूली स्तर पर संभलना और अमेरिकी बॉन्ड बाजार में यील्ड में हो रहे बदलाव रहे हैं।

## सोने की रिकॉर्ड छलांग और क्रिप्टोकरेंसी में तेजी
कीमती धातुओं के बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमतों ने शानदार तेजी दिखाई। गुरुवार के अनिश्चित कारोबार को पीछे छोड़ते हुए सोने ने जोरदार छलांग लगाई और यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में $4,600 प्रति ट्रॉय औंस के आंकड़े को पार करते हुए तीन महीने के नए शिखर पर पहुंच गया। ध्यान देने योग्य बात यह है कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार बढ़ोतरी और डॉलर सूचकांक में हल्की मजबूती के बावजूद सोने की मांग बेहद मजबूत बनी हुई है।

डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का माहौल देखने को मिला। बिटकॉइन के $77,000 के पार पहुंचने से पूरे क्रिप्टो बाजार को समर्थन मिला। बिटकॉइन की इस बढ़त का सकारात्मक असर अन्य प्रमुख कॉइन्स पर भी पड़ा, जहां इथेरियम $2,400 के करीब और रिपल $1.35 के स्तर के आसपास मजबूती से कारोबार करते नजर आए।

## इसका आप पर असर
वैश्विक वित्तीय नीतियों और बाजार हलचल का आपके वित्तीय जीवन पर सीधा असर पड़ सकता है:

- **भारत में:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के $4,600 के पार पहुंचने से घरेलू सराफा बाजार में भी सोने और आभूषणों के दाम महंगे हो सकते हैं।
- **निवेशकों के लिए:** केंद्रीय बैंकों द्वारा नकदी के नए इंतजाम और बॉन्ड बायबैक से वैश्विक इक्विटी और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों में अस्थिरता के साथ निवेश के नए अवसर बन सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का LTRO क्या है और यह क्यों जरूरी है?
LTRO यानी Long-Term Refinancing Operations यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालिक तरलता प्रदान करने की एक प्रक्रिया है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में नकदी का प्रवाह सुचारू रहता है।

### 2. अमेरिकी ट्रेजरी ने बायबैक योजना में क्या बदलाव किया है?
अमेरिकी ट्रेजरी ने 10 से 30 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड के बायबैक की अधिकतम सीमा को $2 अरब से बढ़ाकर कम से कम $4 अरब प्रति ऑपरेशन कर दिया है, जो 9 सितंबर से लागू होगा।

### 3. सोने की कीमत में उछाल का नया स्तर क्या दर्ज किया गया?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4,600 प्रति ट्रॉय औंस के स्तर को पार करते हुए तीन महीने के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

### 4. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन और अन्य कॉइन्स का क्या रुझान रहा?
बिटकॉइन $77,000 के ऊपर पहुंच गया, जबकि इथेरियम $2,400 और रिपल $1.35 के स्तर के करीब सकारात्मक कारोबार कर रहे हैं।

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