यूरोपीय सेंट्रल बैंक हर बैठक में ले सकता है नीतिगत फैसला, गेदिमिनास सिमकुस ने दिए संकेत लिथुआनिया के केंद्रीय बैंक प्रमुख गेदिमिनास सिमकुस ने स्पष्ट किया है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी बैठकों में नीतिगत कदमों की संभावना खुली हुई है। अक्टूबर बैठक से पहले ऊर्जा कीमतों पर नजर रखी जाएगी, जबकि दिसंबर व्यापक समीक्षा का स्वाभाविक समय होगा। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समीक्षाओं में किसी भी फैसले को खारिज नहीं किया जा सकता। लिथुआनिया के केंद्रीय बैंक प्रमुख और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य गेदिमिनास सिमकुस ने यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान इस रुख को रेखांकित किया। सिमकुस के अनुसार केंद्रीय बैंक के सामने हर बैठक में नीतिगत कदम उठाने का विकल्प खुला हुआ है, हालांकि किसी भी ठोस कदम से पहले बदलते आर्थिक संकेतकों का बारीक आकलन जरूरी होगा। ऊर्जा कीमतों का रुख और आगामी बैठकों की रूपरेखा आगामी बैठकों के संदर्भ में गेदिमिनास सिमकुस ने विशेष रूप से ऊर्जा की कीमतों पर गौर करने की आवश्यकता जताई। उनका मानना है कि अक्टूबर में होने वाली बैठक से पूर्व ऊर्जा लागत में आने वाले उतार-चढ़ाव की स्थिति को पूरी गंभीरता से परखा जाना चाहिए। ऊर्जा लागत यूरो क्षेत्र में महंगाई की दिशा तय करने वाला एक अहम घटक बनी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दिसंबर का महीना पूरी आर्थिक स्थिति का अधिक व्यापक और स्वाभाविक तरीके से जायजा लेने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। साल के अंतिम महीने तक नए आर्थिक अनुमान और नीतिगत नतीजों के आंकड़े स्पष्ट हो जाते हैं, जिससे गवर्निंग काउंसिल को दीर्घकालिक दृष्टिकोण तय करने में मदद मिलती है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का मुख्य कार्य और ब्याज दर उपकरण जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरो क्षेत्र के लिए रिजर्व बैंक की भूमिका निभाता है। यह केंद्रीय बैंक क्षेत्र के भीतर ब्याज दरों का निर्धारण करने के साथ-साथ पूरी मौद्रिक नीति का संचालन करता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मुख्य अर्थ मुद्रास्फीति को लगभग 2% के स्तर पर नियंत्रित रखना होता है। मूल्य स्थिरता के इस 2% लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ब्याज दरें तुलनात्मक रूप से ऊंची रखी जाती हैं, तो सामान्यतः यूरो को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब ब्याज दरों में कटौती की जाती है, तो यूरो पर दबाव देखा जाता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल साल में 8 बार बैठक कर मौद्रिक नीति संबंधी अहम फैसले लेती है। इन महत्वपूर्ण निर्णयों में यूरो क्षेत्र के सभी राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और 6 स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी सम्मिलित हैं। क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की भूमिका अत्यधिक असाधारण या संकटपूर्ण आर्थिक परिस्थितियों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक विशेष नीतिगत उपाय का सहारा लेता है जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग कहा जाता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक नई मुद्रा जारी कर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड जैसी परिसंपत्तियों की खरीद करता है। इस प्रक्रिया का सामान्य परिणाम यह होता है कि यूरो की विनिमय दर कमजोर पड़ती है। क्वांटिटेटिव ईजिंग का इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में तब किया जाता है जब केवल ब्याज दरों को घटाने से मूल्य स्थिरता का लक्ष्य पाना संभव नहीं दिखता। अतीत में यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान, 2015 में जब महंगाई लंबे समय तक बेहद निचले स्तर पर अटकी रही, और कोरोना महामारी के संकट के दौरान इस असाधारण उपाय का उपयोग किया था। दूसरी ओर क्वांटिटेटिव टाइटनिंग पूरी तरह से क्वांटिटेटिव ईजिंग की विपरीत प्रक्रिया है। इसे उस समय अमल में लाया जाता है जब अर्थव्यवस्था में सुधार गति पकड़ चुका हो और महंगाई दोबारा ऊपर चढ़ने लगे। जहां क्वांटिटेटिव ईजिंग के तहत केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों को तरलता उपलब्ध कराने के लिए बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में यूरोपीय सेंट्रल बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड के मूलधन का दोबारा निवेश भी रोक देता है। बाजार के नजरिए से क्वांटिटेटिव टाइटनिंग को आमतौर पर यूरो के लिए तेजी लाने वाला सकारात्मक कारक माना जाता है। वैश्विक मुद्रा बाजारों में अन्य मुद्राओं का हाल और आर्थिक आंकड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी हलचल देखी जा रही है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोमवार को बैंक ऑफ कनाडा और अन्य वैश्विक घटनाक्रमों के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी की ओर बढ़ा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7140 के स्तर के आसपास डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंची, हालांकि इसमें आगे की बिकवाली की रफ्तार सीमित रही और भाव 0.7100 के मध्य से थोड़ा ऊपर कारोबार करते दिखे, जो दिन के दौरान करीब 0.25% की गिरावट दर्शाता है। अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी में नए सप्ताह के आरंभ पर एशियाई सत्र में खरीदारों की दिलचस्पी देखने को मिली और यह जोड़ी 154.00 के करीब पहुंची, जिससे पिछले शुक्रवार के नुकसान की कुछ भरपाई हुई। फिर भी भाव पिछले करीब एक सप्ताह के सीमित दायरे में बने हुए हैं और पिछले मंगलवार को दर्ज किए गए लगभग 7 महीने के निचले स्तर के करीब मंडरा रहे हैं, क्योंकि कारोबारी केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो पाई नेटवर्क लगातार दो हफ्तों की बढ़त के बाद सोमवार को 0.097 डॉलर से ऊपर कारोबार करता दिखा। पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और बेहतर डेवलपर टूल्स से इसकी उपयोगिता को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि तकनीकी संकेतकों में सुधार की संभावना के बीच ऊपर की ओर मौजूद एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज इसकी बढ़त को सीमित कर रहे हैं। इस बीच आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर कनाडा के अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर निवेशकों की पैनी नजर है। बैंक ऑफ कनाडा द्वारा 2 सितंबर की बैठक में ब्याज दर को अनुमान के मुताबिक 2.25% पर स्थिर रखने के बाद यह नया मुद्रास्फीति आंकड़ा मूल्य दबावों की स्थिति स्पष्ट करेगा। यूरो अमेरिकी डॉलर का तकनीकी विश्लेषण और बाजार की स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर वर्तमान में 1.15 पर बनी हुई है, जो पिछले बंद भाव 1.15 की तुलना में 0.11% की हल्की बढ़त दर्शाती है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों के मोर्चे पर 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 37 पर है, जो मंदी के दबाव की ओर संकेत करता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस नकारात्मक शून्य पर सिग्नल लाइन 0.00 के नीचे बना हुआ है, जिसका हिस्टोग्राम नकारात्मक है। प्रमुख मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय, 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 के स्तर पर हैं, जबकि 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज 1.15 और 200-दिवसीय एसएमए 1.16 पर मौजूद है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे होना डेथ क्रॉस दर्शाता है, जो लंबी अवधि के डाउनट्रेंड की पुष्टि करता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 1.15 से 1.17 के बीच फैले हैं जिसका मध्य स्तर 1.16 है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स 26 पर ट्रेंड की मौजूदगी दिखाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 17 और सिग्नल लाइन 11 पर है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज 0.01 है, जिसमें 20 दिनों का अहम सपोर्ट 1.15 और रेजिस्टेंस 1.17 पर केंद्रित है। पिवट स्तर 1.15 के साथ पहला और दूसरा रेजिस्टेंस 1.15 तथा पहला सपोर्ट 1.15 व दूसरा सपोर्ट 1.14 बना हुआ है। इसका आप पर असर यूरोपीय सेंट्रल बैंक के नीतिगत फैसलों का सीधा असर वैश्विक ब्याज दरों, मुद्रा विनिमय दरों और व्यापारिक लागतों पर पड़ता है। • विदेशी मुद्रा कारोबारियों के लिए: यूरो और डॉलर के विनिमय में आगामी बैठकों के दौरान उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। ट्रेडर्स को 1.15 के अहम सपोर्ट और 1.17 के रेजिस्टेंस स्तर को ध्यान में रखकर जोखिम प्रबंधन करना चाहिए। • यूरोप यात्रा और पढ़ाई के खर्च: ब्याज दरों में संभावित बदलाव यूरो के मूल्य को सीधे प्रभावित कर सकते हैं। यदि यूरो मजबूत होता है तो यूरोप में पढ़ाई और यात्रा का खर्च भारतीय यात्रियों के लिए अधिक महंगा हो सकता है। • निर्यातकों और आयातकों पर असर: यूरो क्षेत्र से व्यापार करने वाली भारतीय कंपनियों के मार्जिन विनिमय दर के आधार पर बदलेंगे। अनुबंधों की हेजिंग करने वाले कारोबारियों को अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों के नतीजों पर नजर रखनी चाहिए। • वैश्विक तरलता की दिशा: केंद्रीय बैंकों की नीतियां वैश्विक पूंजी प्रवाह को निर्धारित करती हैं। यदि मौद्रिक रुख सख्त रहता है तो उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश की गति प्रभावित हो सकती है। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अधिकारियों द्वारा हर बैठक में फैसले की संभावना खुला रखने का बयान बदलती आर्थिक परिस्थितियों और ऊर्जा की कीमतों की अनिश्चितता के कारण सामने आया है। यूरो क्षेत्र में मूल्य स्थिरता को बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक परिस्थितियों के अनुरूप लचीला रुख अपना रहा है। • ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता: यूरोप में ऊर्जा लागत की चाल मुद्रास्फीति को तेजी से प्रभावित करती है। अक्टूबर बैठक से ठीक पहले तेल और गैस की कीमतों का व्यवहार केंद्रीय बैंक को तात्कालिक कदम उठाने के लिए बाध्य कर सकता है। • महंगाई को 2% पर लाने की प्रतिबद्धता: केंद्रीय बैंक का मुख्य अधिदेश मुद्रास्फीति को करीब 2% के लक्ष्य पर टिकाए रखना है। जब तक यह लक्ष्य मजबूती से हासिल नहीं होता, तब तक दरों में किसी भी बदलाव का विकल्प बंद नहीं किया जा सकता। • दिसंबर में व्यापक आर्थिक डेटा: साल के अंत तक पूरे यूरोप का आर्थिक परिदृश्य और नए पूर्वानुमान सामने आ जाते हैं। यही कारण है कि दिसंबर को स्थिति के समग्र मूल्यांकन के लिए सबसे स्वाभाविक समय माना गया है। सवाल-जवाब 1. गेदिमिनास सिमकुस ने आगामी बैठकों को लेकर क्या बयान दिया? उन्होंने कहा कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक की आगामी हर बैठक में मौद्रिक नीतिगत कदम उठाए जाने की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता। 2. अक्टूबर की बैठक से पहले किस पहलू पर गौर करने पर जोर दिया गया है? गेदिमिनास सिमकुस ने अक्टूबर बैठक से पहले ऊर्जा की कीमतों का बारीक विश्लेषण करने पर विशेष बल दिया है। 3. दिसंबर की बैठक को क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है? दिसंबर को पूरे आर्थिक हालात और आंकड़ों का अधिक स्वाभाविक एवं व्यापक तरीके से आकलन करने का उपयुक्त समय माना गया है। 4. यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक लक्ष्य क्या है? यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका आशय महंगाई को लगभग 2% के स्तर पर नियंत्रित रखना है। 5. गवर्निंग काउंसिल में निर्णय लेने की क्या प्रक्रिया है? गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करती है, जिसमें यूरो क्षेत्र के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और क्रिस्टीन लेगार्ड सहित 6 स्थायी सदस्य फैसला लेते हैं। 6. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है जिससे यूरो कमजोर होता है, जबकि टाइटनिंग में बॉन्ड खरीद और पुनर्निवेश रोककर नकदी घटाई जाती है। https://trendkia.com/market/european-central-bank-hara-baithaka-men-le-sakata-hai-nitigata-phaisala-gediminas-simkus-ne-die-snketa-34069 TrendKia — Har trend, sabse pehle.