यूरोपीय सेंट्रल बैंक के फैसले से पहले यूरो पर बना दबाव, ब्याज दरों और महंगाई के बीच करेंसी मार्केट का पूरा हाल यूरोपीय क्षेत्र में महंगाई बढ़कर 3.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिसके बाद आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की पूरी संभावना है। हालांकि बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक की भावी नीतियों से यूरो में बड़ी गिरावट का खतरा बना हुआ है। यूरोपीय क्षेत्र में हालिया आंकड़ों के मुताबिक महंगाई दर 3.3 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है, जिसके बाद वित्तीय बाजारों में अगले सप्ताह यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मौद्रिक नीति में इस संभावित सख्त रुख के बावजूद यूरो मुद्रा की बढ़त सीमित दिखाई दे रही है। बाजार विश्लेषक आंत्ये प्रेफके के अनुसार, केंद्रीय बैंक की नीतिगत घोषणाओं और महंगाई के दीर्घकालिक अनुमानों के आधार पर यूरो के लिए ऊपर जाने का रास्ता तंग है, जबकि नीचे गिरने का जोखिम कहीं अधिक बना हुआ है। महंगाई दर में उछाल और ऊर्जा कीमतों का प्रभाव यूरोपीय अर्थव्यवस्था में महंगाई के 3.3 प्रतिशत पर पहुंचने का मुख्य कारण मिडिल ईस्ट में नए सिरे से बढ़ा तनाव और उसके परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतों में आई तेजी है। ऊर्जा बाजार में आई इस अस्थिरता ने मुख्य महंगाई दर को ऊपर धकेला है। दूसरी तरफ, कोर इन्फ्लेशन में उम्मीद के विपरीत मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था के भीतर अंतर्निहित दबाव में हल्की कमी का संकेत देती है। बाजार सहभागी यह मानकर चल रहे हैं कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक अगले वर्ष की शुरुआत तक ब्याज दरों में इजाफे का सिलसिला जारी रख सकता है। इसके विपरीत, कॉमर्सबैंक के विशेषज्ञों का आकलन है कि सितंबर की बैठक के बाद ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना काफी कम है। केंद्रीय बैंक के स्वयं के आर्थिक पूर्वानुमान यह दर्शाते हैं कि वर्ष 2027 के दौरान महंगाई दर धीरे-धीरे नीचे की ओर आएगी, जिससे अतिरिक्त नीतिगत सख्ती की गुंजाइश सीमित हो जाती है। यूरो पर क्यों मंडरा रहा है गिरावट का खतरा वित्तीय परिसंपत्तियों में अगले सप्ताह होने वाली ब्याज दर वृद्धि का असर पहले ही समायोजित हो चुका है। ऐसे में केवल दर बढ़ाना यूरो को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या केंद्रीय बैंक अपने वक्तव्य और नए अनुमानों के माध्यम से भविष्य में और सख्ती का संकेत देता है या फिर दरों में बढ़ोतरी के चक्र को समाप्त करने की घोषणा करता है। यदि बैठक के दौरान यह स्पष्ट हो जाता है कि सितंबर के बाद दरों में और वृद्धि नहीं होगी, तो यूरो में तेज बिकवाली देखने को मिल सकती है। चूंकि बाजार ने भविष्य में और सख्त कदमों की उम्मीद लगा रखी है, इसलिए उम्मीदों के विपरीत फैसला आने पर यूरो पर असमान रूप से नकारात्मक असर पड़ेगा। यानी अनुकूल खबर मिलने पर जितना उछाल आएगा, निराशाजनक खबर मिलने पर उससे कहीं अधिक गिरावट दर्ज की जा सकती है। डॉक्टर बॉन्ड और वैश्विक मुद्रा बाजार का रुख वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की स्थिति लगातार मजबूत बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में सैन्य और राजनीतिक तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की तरफ बढ़ा है, जिससे अमेरिकी डॉलर को मजबूत समर्थन मिला है। बुधवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में बढ़त दर्ज की गई और GBP/USD जोड़ी गिरकर 1.3500 के स्तर के करीब पहुंच गई। वहीं, EUR/USD जोड़ी मंगलवार को लाल निशान में बंद होने के बाद बुधवार को लगातार मंदी के दबाव में रही और 1.1600 के स्तर से नीचे आ गई, जो कि पिछले दो हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा उच्च ब्याज दरों को बनाए रखने की संभावनाओं ने भी डॉलर को अतिरिक्त ताकत दी है। कच्चे तेल की कीमतें और डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड कमोडिटी बाजार में अनिश्चितता का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को एशियाई सत्र के दौरान लगातार तीसरे दिन तेजी दर्ज की गई। पिछले छह कारोबारी दिनों में से पांच दिनों में कच्चे तेल में बढ़त देखने को मिली है, जिससे यह 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। विशेष रूप से रिफाइंड उत्पादों के बाजार में भारी हलचल है। हालांकि कच्चे तेल का समग्र बाजार स्थिर दिख सकता है, लेकिन डीजल सेगमेंट अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI कच्चे तेल के बीच का अंतर, जिसे डीजल क्रैक स्प्रेड कहा जाता है, हाल ही में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। इसने 102.00 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का सर्वकालिक इंट्राडे रिकॉर्ड बनाया है। सोने में निचले स्तर से सुधार और अमेरिकी रोजगार आंकड़े सुरक्षित निवेश के रूप में सोने ने अपने चार सप्ताह के निचले स्तर से उबरते हुए वापसी की है। यूरोपीय सत्र की शुरुआत में सोना 4,320 डॉलर प्रति औंस से ऊपर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी डॉलर में आई हल्की नरमी ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है, हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बनी आशंकाओं के कारण सोने में कोई बड़ी तेजी रुकी हुई है। अब बाजार के सभी प्रतिभागियों की नजरें अमेरिका के आगामी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। ऑटोमैटिक डेटा प्रोसेसिंग (ADP) रिसर्च इंस्टीट्यूट आगामी बुधवार को निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन से जुड़ी अपनी मासिक रिपोर्ट जारी करेगा। अगस्त महीने के दौरान अमेरिका के निजी क्षेत्र में 47,000 नए रोजगार जुड़ने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो जुलाई में दर्ज 44,000 नए रोजगार के आंकड़े से थोड़ा ही अधिक है। इसके अतिरिक्त, शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट भी वैश्विक बाजारों की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसका आप पर असर यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीतियों और वैश्विक बाजारों में हो रहे उतार-चढ़ाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, यात्रा और निवेश पर पड़ता है। • भारत में: यूरो और डॉलर की विनिमय दरों में बदलाव से भारतीय आयातकों और निर्यातकों की लागत प्रभावित हो सकती है। अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में ईंधन और माल ढुलाई महंगी होने का खतरा बढ़ जाता है। • यूरोप और वैश्विक यात्रा: अगर यूरो में कमजोरी आती है, तो भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए यूरोप की यात्रा और वहां पढ़ाई का खर्च थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि, डॉलर मजबूत होने से वैश्विक स्तर पर सोने और कच्चे तेल की घरेलू कीमतें प्रभावित होंगी। • निवेशकों के लिए: वैश्विक फॉरेक्स बाजार में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण इक्विटी बाजारों में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों को जोखिम भरी परिसंपत्तियों में सतर्कता बरतनी चाहिए। सवाल-जवाब 1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अगली बैठक में क्या फैसला हो सकता है? बाजार में अगले हफ्ते यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना जताई जा रही है। 2. यूरो में बड़ी गिरावट का खतरा क्यों है? चूंकि बाजार ने दर वृद्धि का असर पहले ही समायोजित कर लिया है, अगर केंद्रीय बैंक आगे दरें न बढ़ाने का संकेत देता है तो यूरो में तेज गिरावट आ सकती है। 3. यूरोपीय क्षेत्र में महंगाई का मौजूदा स्तर क्या है? यूरोपीय क्षेत्र में महंगाई दर बढ़कर 3.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिसका मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतें हैं। 4. अमेरिका में रोजगार के क्या अनुमान हैं? ADP रिपोर्ट के अनुसार अगस्त महीने में अमेरिकी निजी क्षेत्र में 47,000 नए रोजगार जुड़ने का अनुमान है। https://trendkia.com/market/european-central-bank-ke-phaisale-se-pahale-euro-para-bana-dabava-byaja-daron-aura-mahngai-ke-bicha-karensi-marketa-ka-pura-hala-26360 TrendKia — Har trend, sabse pehle.