यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मंदी संबंधी चेतावनी से यूरो में भारी गिरावट, प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले फिसलन बढ़ी यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अधिकारियों द्वारा बढ़ती ब्याज दरों, महंगे ईंधन और बॉन्ड यील्ड के दबाव से आर्थिक विकास दर घटने की चेतावनी के बाद यूरो दबाव में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को साझा यूरोपीय मुद्रा पर बिकवाली का गहरा दबाव देखा गया। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के अधिकारियों द्वारा आर्थिक वृद्धि दर में सुस्ती आने की खुली चेतावनी दिए जाने के बाद यूरो अपने सभी प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले लुढ़क गया। ठीक एक दिन पहले मंगलवार को फ्रांस द्वारा खर्चों में अतिरिक्त कटौती का संकल्प दोहराए जाने पर यूरो ने एक त्वरित रिकवरी दर्ज की थी, लेकिन यह राहत भरी तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। बुधवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन (जेपीवाई) के मुकाबले यूरो में लगभग 0.55 प्रतिशत की तीव्र गिरावट आई और यह 177.00 के इर्द-गिर्द आ गया। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर (यूएसडी) के सामने भी यूरोपीय मुद्रा सबसे कमजोर पायदान पर नजर आई। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा संकट के बीच नीतिगत दुविधा ईसीबी के प्रमुख रणनीतिकार और अर्थशास्त्री लेन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि लंबी अवधि की ब्याज दरों में होने वाली बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था की गति को धीमा कर देगी और मौद्रिक नीति का वास्तविक प्रभाव अनुमान से कहीं अधिक सीमित रह सकता है। यूरोप इस समय महंगे ऊर्जा स्रोतों, कड़े वित्तीय नियमों और सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार उछाल की तिहरी चुनौती झेल रहा है। सामान्य परिस्थितियों में अगर मुद्रास्फीति आधिकारिक लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से भाग रही हो, तो केंद्रीय बैंक का पारंपरिक कदम ब्याज दरों को बढ़ाना होता है। हालांकि वर्तमान माहौल सामान्य नहीं है क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले ही यील्ड बढ़ाकर वित्तीय सख्ती का एक बड़ा हिस्सा खुद लागू कर चुका है, जिससे नीति निर्माताओं के समक्ष एक जटिल असमंजस खड़ा हो गया है। नीति निर्माताओं द्वारा सुझाया जा रहा संतुलित दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा लागत का दोबारा बढ़ना महंगाई को ऊपर ले जाने का जोखिम पैदा करता है, जबकि साथ ही यह आर्थिक विस्तार के पहियों को थामने का खतरा भी बढ़ाता है। इस दोहरे दबाव की वजह से केंद्रीय बैंक के रुख में आंशिक सख्ती बनी हुई है, लेकिन अल्पकालिक दर वृद्धि की उम्मीदों में कमी आई है। बाजार अब अत्यधिक आक्रामक कदमों के बजाय आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर आधारित धीमी नीतिगत चाल की संभावना जता रहा है, जिससे यूरो के और अधिक टूटने की गुंजाइश भी एक निश्चित सीमा में सिमट रही है। वैश्विक विनिमय बाजार में यूरो की केंद्रीय भूमिका और संरचना यूरो यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है, जो मिलकर यूरोज़ोन का गठन करते हैं। वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक ट्रेड होने वाली मुद्रा का दर्जा रखती है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा था। जोड़ों के आधार पर विनिमय देखा जाए तो EUR/USD दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाला मुद्रा युग्म है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले सभी लेन-देन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा अकेले संभालता है। इसके बाद EUR/JPY की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत, EUR/GBP की 3 प्रतिशत और EUR/AUD की भागीदारी 2 प्रतिशत आंकी गई है। जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन का शीर्ष बैंकिंग संस्थान है। ईसीबी ही ब्याज दरों के निर्धारण और समग्र मौद्रिक प्रबंधन का संचालन करता है। ईसीबी का प्रमुख संवैधानिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत महंगाई को नियंत्रित करना या जरूरत पड़ने पर सुस्त विकास को गति देना शामिल है। इस काम के लिए बैंक ब्याज दरों में घट-बढ़ को मुख्य हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। सामान्य तौर पर जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं या उनके बढ़ने की संभावना प्रबल होती है, तो विदेशी निवेशकों के लिए पूंजी लगाना आकर्षक बन जाता है और यूरो मजबूत होता है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार बैठक करके नीतिगत निर्णय लेती है, जिसमें यूरोज़ोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुखों के साथ ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य मतदान करते हैं। आर्थिक संकेतकों का मुद्रा के स्वास्थ्य पर सीधा असर यूरोपीय मुद्रा के मूल्यांकन में यूरोज़ोन के मुद्रास्फीति आंकड़े, जिन्हें हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (एचआईसीपी) के माध्यम से मापा जाता है, अत्यंत संवेदनशील भूमिका निभाते हैं। जब भी एचआईसीपी आधारित महंगाई ईसीबी के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से ऊपर निकलती है, तो केंद्रीय बैंक को दरों में इजाफा करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। अपेक्षाकृत उच्च दरें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को क्षेत्र में निवेश करने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे मुद्रा का मूल्य बढ़ता है। इसके अतिरिक्त सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), मैन्युफैक्चरिंग एवं सर्विसेज पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण भी मुद्रा की दिशा तय करते हैं। जब किसी अर्थव्यवस्था के बुनियादी आंकड़े मजबूत होते हैं, तो वे विदेशी निवेश को आकर्षित करते हैं और दर वृद्धि की संभावना को बल देकर यूरो को सहारा देते हैं, जबकि कमजोर आंकड़े मुद्रा को सीधे नीचे धकेल देते हैं। विशेष रूप से यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन शामिल हैं, पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं और उनके आंकड़े मुद्रा के लिए निर्णायक साबित होते हैं। व्यापार संतुलन भी यूरो के लिए उतना ही अहम आर्थिक सूचक है। यह पैमाना किसी निश्चित अवधि में किसी देश द्वारा निर्यात से की गई कुल कमाई और आयात पर किए गए कुल खर्च के बीच का अंतर मापता है। जब कोई देश ऐसे सामानों का निर्माण करता है जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन उत्पादों को खरीदने के लिए संबंधित मुद्रा की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप, एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को उल्लेखनीय मजबूती प्रदान करता है, जबकि इसके उलट नकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा के मूल्य पर दबाव डालता है। अन्य प्रमुख वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का बाजार रुख बुधवार के कारोबारी सत्र में केवल यूरोपीय मुद्रा ही उथल-पुथल से नहीं जूझ रही थी, बल्कि अन्य परिसंपत्तियों में भी स्पष्ट उठापटक देखी गई। एशियाई सत्र में AUD/USD अपनी पिछली रिकवरी को बरकरार रखने में नाकाम रहा और 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक दायरे में कारोबार करता दिखा। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा आई तेजी के कारण अमेरिकी डॉलर को गिरावट पर लिवाली का समर्थन मिला, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में बना रहा। उधर USD/JPY लगभग डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर 158.50 के करीब टिका रहा, जहां खरीदार एफओएमसी मिनट्स से पहले 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार करते दिखे। बैंक ऑफ जापान के नरम रुख और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग ने इस जोड़ी को बढ़त दिलाए रखी। सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली संपत्तियों में सोना यूरोपीय सत्र के शुरुआती घंटों में मंदी के दबाव में रहा और 4,100 डॉलर प्रति औंस के दो महीने के निचले स्तर की ओर नजरें टिकाए दिखा, जिसे उसने पिछले सत्र में छुआ था। अमेरिकी डॉलर में आई नई मजबूती ने कीमती धातु पर दबाव बनाए रखा। वहीं डिजिटल संपत्ति बाजार में डॉगकॉइन (DOGE) में बिकवाली तेज रही और यह सप्ताह के दौरान 5 प्रतिशत से अधिक फिसलकर 0.090 डॉलर के आसपास आ गया। डेरिवेटिव्स बाजार में शॉर्ट पोजीशन एक महीने के शीर्ष पर पहुंच गईं और घटते मोमेंटम ने आगे और गिरावट के संकेत दिए। दूसरी तरफ भारतीय रुपये में भी भारी कमजोरी दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने के बावजूद, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि थी, रुपया संभल नहीं पाया और डॉलर के मुकाबले USD/INR उछलकर चार महीने के उच्च स्तर 96.72 के करीब जा पहुंचा। EUR/USD के लाइव तकनीकी स्तर और चार्ट विश्लेषण मुद्रा जोड़ी EUR/USD के लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा सत्र में भाव 1.12 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 1.12 की तुलना में 0.18 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यह जोड़ी पिछले 52 हफ्तों के दौरान 1.12 के निचले स्तर से लेकर 1.20 के ऊपरी स्तर के दायरे में रही है, और मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का ठीक 1.00 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी मोर्चे पर 14-दिवसीय आरएसआई 15 के स्तर पर आ चुका है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संपत्ति अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) की स्थिति में पहुंच चुकी है। एमएसीडी सूचक -0.01 पर है और इसका सिग्नल भी -0.01 पर बना हुआ है, जबकि हिस्टोग्राम -0.00 के साथ मंदी के रुझान की पुष्टि कर रहा है। मूविंग एवरेज का अध्ययन करने पर पता चलता है कि 20-दिवसीय ईएमए 1.14, 50-दिवसीय ईएमए 1.15 और 200-दिवसीय ईएमए 1.16 पर स्थित हैं। इसी तरह 50-दिवसीय एसएमए 1.15 और 200-दिवसीय एसएमए 1.16 के स्तर पर हैं। चार्ट पर 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस बना हुआ है, जो लंबी अवधि के मंदी के चक्र को दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 1.12 से 1.17 के दायरे में हैं जिसका मध्य स्तर 1.14 है, और वर्तमान मूल्य इन बैंड्स के भीतर बना हुआ है। 14-दिवसीय एडीएक्स 47 के स्तर पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार की ओर इशारा कर रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक संकेतक की फास्ट लाइन 10 और सिग्नल लाइन 17 पर है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला 14-दिवसीय एटीआर 0.01 दर्ज किया गया है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। आगामी सत्रों के लिए 20-दिवसीय तकनीकी समर्थन लगभग 1.12 और प्रतिरोध लगभग 1.16 पर बना हुआ है। दैनिक पिवट बिंदु 1.12 पर है, जिसके अनुसार पहला प्रतिरोध R1 1.12, दूसरा प्रतिरोध R2 1.13 और समर्थन स्तर S1 1.12 एवं S2 1.11 पर निर्धारित हैं। बाजार सहभागियों की नजर अब आने वाले आर्थिक आंकड़ों और आगामी केंद्रीय बैंक निर्णयों पर टिकी हुई है। इसका आप पर असर यूरोपीय मुद्रा में जारी कमजोरी और बढ़ती बॉन्ड यील्ड का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, वैश्विक निवेश और मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ेगा। • भारत में प्रभाव: डॉलर और अन्य वैश्विक मुद्राओं में उतार-चढ़ाव के बीच रुपया कमजोर होने से भारत के लिए यूरोपीय और अमेरिकी आयात महंगे हो सकते हैं। आयातकों को विदेशी खरीद के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है जबकि यूरोप को निर्यात करने वाले भारतीय व्यापारियों के मार्जिन पर असर दिख सकता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: बॉन्ड यील्ड में उछाल और मुद्रा में गिरावट से वैश्विक स्तर पर जोखिम भरी संपत्तियों से निकासी बढ़ सकती है। निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों और उच्च यील्ड वाले सरकारी बॉन्ड की ओर अपना रुख कर सकते हैं। • फॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए: EUR/USD का 1.12 के स्तर और ओवरसोल्ड आरएसआई के आसपास कारोबार करना अत्यधिक अस्थिरता की ओर संकेत करता है। ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप लॉस के साथ जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। • यूरोप यात्रा और पढ़ाई: यूरो के अन्य मुद्राओं के मुकाबले कमजोर रहने से अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और छात्रों के लिए यूरोप में स्थानीय खर्चों का समीकरण बदल सकता है। हालांकि डॉलर आधारित खर्चों की तुलना में यूरोज़ोन का खर्च तात्कालिक रूप से नियंत्रित लग सकता है। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय सेंट्रल बैंक के शीर्ष अधिकारियों द्वारा बढ़ती ब्याज दरों और महंगे ऊर्जा संसाधनों के कारण यूरोज़ोन में आर्थिक मंदी की आशंका जताने के चलते यूरो में यह तीव्र गिरावट आई है। • आर्थिक मंदी की चेतावनी: ईसीबी के मुख्य अर्थशास्त्री लेन ने संकेत दिया कि लंबी अवधि की ब्याज दरों में वृद्धि विकास दर को सुस्त करेगी और मौद्रिक नीति का असर उम्मीद से कम कर देगी। इस बयान ने बाजार में यूरोपीय अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं गहरी कर दीं। • बॉन्ड यील्ड में तीव्र उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सरकारी बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़ रही है जिससे वित्तीय स्थिति अपने आप सख्त हो गई है। इसने केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत दरें तय करने का गंभीर संकट पैदा कर दिया है। • ऊर्जा कीमतों का दोहरा झटका: ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं और महंगे ईंधनों ने महंगाई को ऊपर रखने और विकास दर को नीचे खींचने का दोहरा जोखिम उत्पन्न किया है। इससे यूरोज़ोन में आक्रामक दर वृद्धि की संभावनाएं कमजोर पड़ी हैं। • अमेरिकी डॉलर की मजबूती: भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी है, जिसने यूरो सहित अन्य वैश्विक मुद्राओं पर भारी दबाव बनाया है। सवाल-जवाब 1. बुधवार को यूरो में गिरावट का मुख्य कारण क्या था? ईसीबी अधिकारियों द्वारा बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा संकट के कारण यूरोज़ोन में आर्थिक सुस्ती आने की चेतावनी के चलते यूरो में बिकवाली देखी गई। 2. जापानी येन के मुकाबले यूरो का कारोबार किस स्तर पर रहा? यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन के मुकाबले यूरो लगभग 0.55 प्रतिशत गिरकर 177.00 के आसपास कारोबार करता दिखा। 3. EUR/USD की वैश्विक विनिमय बाजार में कितनी हिस्सेदारी है? EUR/USD दुनिया का सबसे बड़ा मुद्रा युग्म है, जो अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा लेन-देन के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। 4. ईसीबी की नीतिगत बैठकों में निर्णय कौन लेता है? ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल में यूरोज़ोन के राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुख और अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य वर्ष में आठ बार मिलकर निर्णय लेते हैं। 5. भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक समीक्षा में क्या कदम उठाया गया? आरबीआई ने अपनी नीतिगत बैठक में रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया, जो फरवरी 2023 के बाद पहली दर वृद्धि थी। 6. EUR/USD का मौजूदा तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तर क्या है? दैनिक तकनीकी चार्ट के अनुसार EUR/USD के लिए पहला पिवट और समर्थन स्तर 1.12 पर स्थित है, जबकि प्रमुख प्रतिरोध 1.13 और 1.16 पर बना हुआ है। https://trendkia.com/market/european-central-bank-ki-mndi-snbndhi-chetavani-se-euro-men-bhari-giravata-pramukha-mudraon-ke-mukabale-phisalana-barhi-44527 TrendKia — Har trend, sabse pehle.