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  "type": "article",
  "title": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों को रखा स्थिर, पाउंड के मुकाबले कमजोर हुआ यूरो",
  "summary": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा प्रमुख दरों में कोई बदलाव न करने के बाद पाउंड के मुकाबले यूरो पर दबाव बना हुआ है, जबकि ट्रेडर्स अब शुक्रवार को आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।",
  "content": "यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा नीतिगत दरों को मौजूदा स्तर पर अपरिवर्तित रखने के निर्णय के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में यूरो को ब्रिटिश पाउंड के सामने कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, ब्रिटेन में बजट से जुड़ी चिंताओं में कमी आने और नवंबर में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा नीतिगत दर में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने ब्रिटिश पाउंड को मजबूत सहारा दिया है। अब बाजार के सभी प्रतिभागियों की निगाहें शुक्रवार को सामने आने वाले यूरोज़ोन के विकास आंकड़ों और जर्मनी के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर टिकी हैं।\n\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक का फैसला और नीतिगत रुख\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक ने व्यापक बाजार अनुमानों के अनुरूप अपनी तीनों प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। इस ताजा समीक्षा के बाद डिपॉजिट फैसिलिटी दर 2.50 प्रतिशत पर बनी रही। इसके साथ ही मेन रिफाइनेंसिंग ऑपरेशंस दर 2.65 प्रतिशत और मार्जिनल लेंडिंग फैसिलिटी दर 2.90 प्रतिशत पर स्थिर रखी गई।\n\nसेंट्रल बैंक ने अपने जारी नीतिगत बयान में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई के लिए ऊपर की ओर जोखिम पैदा कर रही हैं, जबकि इससे आर्थिक विकास को नीचे की ओर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही नीति निर्माताओं ने उल्लेख किया कि अंतर्निहित मुद्रास्फीति मोटे तौर पर स्थिर रही है और इस बात के बहुत कम संकेत मिले हैं कि ऊर्जा झटके का वेतन वृद्धि पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ा है। गवर्निंग काउंसिल ने दोहराया कि वह मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति को अपने 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर स्थिर करना सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत उपायों को लागू करने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।\n\nदिसंबर को लेकर अनिश्चितता और फ्रांस का राजकोषीय संकट\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक के सतर्क दृष्टिकोण ने व्यापारियों और निवेशकों को दिसंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर असमंजस में डाल दिया है, क्योंकि नीति निर्माता मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव और आर्थिक सुस्ती के दोहरे संकट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस पूरी स्थिति में फ्रांस की राजकोषीय अनिश्चितता ने बैंक के सामने चुनौतियों को और बढ़ा दिया है, हालांकि अधिकांश अर्थशास्त्री अब भी इस बात की संभावना जता रहे हैं कि साल के अंत से पहले दरों में एक और इजाफा देखने को मिल सकता है।\n\nमुद्रा बाजार के दैनिक रुझानों में ब्रिटिश पाउंड ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में नजर आया। विभिन्न प्रमुख मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव में पाउंड ने अन्य प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त बनाए रखी।\n\nयूरो अमेरिकी डॉलर का लाइव बाजार विश्लेषण और तकनीकी स्थिति\nविदेशी मुद्रा बाजार में यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) वर्तमान में 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.11 से 0.32 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इस मुद्रा जोड़ी का 52 हफ्तों का दायरा 1.11 से 1.20 के बीच बना हुआ है, जबकि वर्तमान ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर दर्ज किया गया है।\n\nतकनीकी संकेतकों के आधार पर 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 34 पर दर्ज किया गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र के करीब कमजोरी का संकेत देता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) -0.01 पर है जबकि इसका सिग्नल भी -0.01 पर बना हुआ है, जिससे हिस्टोग्राम 0.00 पर बुलिश रुख दिखा रहा है। चलती औसत दरों में 20-दिवसीय घातीय चलती औसत (EMA20) 1.12, EMA50 1.13 और EMA200 1.15 पर मौजूद हैं। इसके अलावा 50-दिवसीय साधारण चलती औसत (SMA50) 1.14 और SMA200 1.16 पर दर्ज हैं। कीमत दीर्घकालिक गिरावट के रुझान में फंसी हुई है, जहां EMA50 का EMA200 से नीचे जाना डेथ क्रॉस की स्थिति दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 1.11 से 1.13 के बीच फैले हैं और मध्य रेखा 1.12 पर है, जिससे कीमत बैंड के भीतर बनी हुई है। 14-दिवसीय ADX 47 के स्तर पर मजबूत ट्रेंड का इशारा कर रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 33 और सिग्नल लाइन 27 पर स्थित है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 0.01 पर है जो दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। आगामी सत्रों के लिए 20-दिवसीय समर्थन स्तर 1.11 और प्रतिरोध 1.13 के पास देखा जा रहा है। महत्वपूर्ण धुरी बिंदु (पिवट) 1.12 पर है, जहां प्रतिरोध R1 1.12 और R2 1.12 पर तथा समर्थन S1 1.11 और S2 1.11 पर टिके हैं।\n\nवैश्विक मुद्रा बाजारों में अन्य जोड़ियों का रुख\nगुरुवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी मजबूत होकर 0.7055 के करीब पहुंच गई। ऑस्ट्रेलिया में मुद्रास्फीति के ऊंचे आंकड़ों ने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चढ़ गया। इसके साथ ही बाजार में गुरुवार को बाद में जारी होने वाली अमेरिकी सितंबर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) मुद्रास्फीति रिपोर्ट पर नजरें बनी रहीं।\n\nअमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी में गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान कुछ लिवाली देखने को मिली और यह 158.00 के पार निकल गई। अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के बाद बने दो सप्ताह के उच्च स्तर से आई गिरावट को डॉलर ने आंशिक रूप से रिकवर किया। हालांकि, आगे की बढ़त तय करने से पहले खरीदार अमेरिका के तीसरी तिमाही के अग्रिम जीडीपी आंकड़ों और कोर पीसीई प्राइस इंडेक्स का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की अहम नीतिगत समीक्षा पर ध्यान केंद्रित होगा, जहां दिसंबर में दर वृद्धि की उम्मीदें मजबूत हो रही हैं। बैंक ऑफ जापान ने सितंबर में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 1.25 प्रतिशत किया था, और उसकी तरफ से संकेत दिए गए थे कि कीमतों में वृद्धि का जोखिम बना हुआ है, वास्तविक ब्याज दरें अब भी नकारात्मक हैं और आगे नीतिगत दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीद की जानी चाहिए।\n\nकमोडिटी और क्रिप्टो बाजार की चाल\nकीमती धातुओं के बाजार में सोने की तीन दिनों की लगातार तेजी पर ब्रेक लग गया। गुरुवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के स्तर के पास सोने पर बिकवाली का नया दबाव देखा गया। अमेरिकी डॉलर में मामूली बढ़त और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मिले-जुले रुझान के बीच सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि इस दौरान कच्चे तेल की कीमतें भी दबाव में बनी रहीं।\n\nडिजिटल एसेट बाजार में गुरुवार को रिपल 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर 1.30 डॉलर के नीचे फिसल गया और अहम मूविंग एवरेज से नीचे सीमित रहा। इसी तरह सोलाना में भी 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जहां बिकवाली के भारी दबाव के बीच यह अपने 200-दिवसीय ईएमए और 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर का परीक्षण करता दिखा।\n\nइसका आप पर असर\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने और वैश्विक मुद्राओं में आए उतार-चढ़ाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ेगा।\n\n• मुद्रा विनिमय और विदेश यात्रा: यदि आप यूरोप या ब्रिटेन की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यूरो के मुकाबले पाउंड में मजबूती से ब्रिटेन की यात्रा अपेक्षाकृत अधिक महंगी हो सकती है। यूरो में कमजोरी से यूरोज़ोन के देशों में यात्रा और खर्च करना पहले की तुलना में थोड़ा किफायती रहेगा।\n• आयात और निर्यात कारोबार: यूरोज़ोन से मशीनरी या उत्पाद आयात करने वाले भारतीय व्यापारियों के लिए कमजोर यूरो लागत के मोर्चे पर राहत दे सकता है। वहीं ब्रिटेन को सामान निर्यात करने वाले कारोबारियों को मजबूत पाउंड के कारण बेहतर भुगतान मूल्य प्राप्त हो सकता है।\n• फॉरेक्स ट्रेडर्स और निवेशक: EUR/USD का 1.12 और EUR/GBP में जारी दबाव से निपटने के लिए ट्रेडर्स को 1.11 के समर्थन और 1.13 के प्रतिरोध स्तरों को ध्यान में रखकर हेजिंग रणनीतियां बनानी होंगी। जर्मन मुद्रास्फीति और यूरोज़ोन जीडीपी डेटा आने तक बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।\n• वैश्विक कमोडिटी और सोना: सोने का 4,000 डॉलर के स्तर से फिसलना और डॉलर में मजबूती वैश्विक स्तर पर आभूषण तथा बुलियन निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। घरेलू बाजारों में भी डॉलर की मजबूती के अनुपात में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और आर्थिक सुस्ती के बीच मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर बनाए रखने और विकास को नुकसान न पहुंचाने के बीच संतुलन साध रहा है।\n\n• मुद्रास्फीति और ऊर्जा लागत का दबाव: कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई दर में फिर से तेजी आने का अंदेशा बना हुआ है। हालांकि कोर महंगाई में स्थिरता दिखने के चलते सेंट्रल बैंक ने दरों में तुरंत बदलाव करने से परहेज किया है।\n• आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय संकट: यूरोज़ोन की आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम बना हुआ है, जबकि फ्रांस में जारी राजकोषीय अनिश्चितता ने वित्तीय नीतियों को जटिल बना दिया है। नीति निर्माता ऐसी स्थिति में दरों को बढ़ाकर विकास को और बाधित नहीं करना चाहते।\n• बैंक ऑफ इंग्लैंड और पाउंड का समर्थन: ब्रिटेन में बजट से जुड़ी अनिश्चितताएं समाप्त होने और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा नवंबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने पाउंड को मजबूत किया है, जिससे यूरो-पाउंड अनुपात में यूरो पर दबाव बढ़ा।\n• आगामी आर्थिक आंकड़ों का इंतजार: बैंक के नीति निर्माता आगे की रणनीति तय करने से पहले शुक्रवार को आने वाले यूरोज़ोन विकास दर और जर्मनी के मुद्रास्फीति आंकड़ों के परिणाम देखना चाहते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने प्रमुख ब्याज दरों को किस स्तर पर बरकरार रखा है?\nसेंट्रल बैंक ने डिपॉजिट फैसिलिटी दर को 2.50 प्रतिशत, मेन रिफाइनेंसिंग ऑपरेशंस दर को 2.65 प्रतिशत और मार्जिनल लेंडिंग फैसिलिटी दर को 2.90 प्रतिशत पर स्थिर रखा है।\n\n2. यूरो के मुकाबले ब्रिटिश पाउंड में मजबूती क्यों देखने को मिली?\nब्रिटेन में बजट चिंताओं में कमी आने और नवंबर में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण पाउंड मजबूत हुआ है।\n\n3. EUR/USD मुद्रा जोड़ी का वर्तमान बाजार भाव और दायरा क्या है?\nEUR/USD वर्तमान में 0.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.12 पर कारोबार कर रहा है, जिसका 52 हफ्तों का दायरा 1.11 से 1.20 के बीच रहा है।\n\n4. गुरुवार को सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का क्या रुख रहा?\nसोना 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पास फिसल गया, जबकि रिपल 1.30 डॉलर के नीचे 2 प्रतिशत से अधिक और सोलाना 100 डॉलर के स्तर पर 2 प्रतिशत गिरा।",
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