यूरोपीय अर्थव्यवस्था में सुस्त विकास और असमान महंगाई के बीच वैश्विक बाजारों में सतर्कता यूरो क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर में हल्की तेजी और देशों के बीच अलग-अलग महंगाई दरों के अनुमान के साथ ही वैश्विक बाजार प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों और अमेरिकी चुनावों की ओर देख रहे हैं। यूरोपीय संघ के प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तीसरी तिमाही के दौरान मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। अत्यधिक ऊर्जा लागतों और गर्मियों के कठिन मौसम के झटकों के बावजूद इस क्षेत्र की सामूहिक अर्थव्यवस्था ने टिकाऊपन का परिचय दिया है। विश्लेषकों के ताजा आकलनों के अनुसार, पूरे यूरो क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में मामूली बढ़त दर्ज होने के आसार हैं। हालांकि, इस क्षेत्रीय आंकड़े के भीतर सदस्य देशों का व्यक्तिगत प्रदर्शन काफी भिन्न है, जिसमें स्पेन आर्थिक विस्तार का नेतृत्व कर रहा है जबकि जर्मनी की रफ्तार लगभग थमी हुई है। इसके साथ ही, अलग-अलग घरेलू नीतियों और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता के चलते प्रमुख देशों में मुद्रास्फीति के रुझान भी अलग-अलग दिशाओं में जाते दिख रहे हैं। यूरोपीय देशों में विकास दर और मुद्रास्फीति की अलग-अलग दिशाएं यूरोपीय संघ की चार प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक प्रदर्शन में गहरा अंतर उभरकर सामने आया है। तीसरी तिमाही के तिमाही-दर-तिमाही आकलनों में स्पेन 0.6 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ सबसे आगे रहने की उम्मीद है। इसके बाद फ्रांस 0.2 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ सकता है, जबकि इटली में महज 0.1 प्रतिशत का धीमा विस्तार देखने को मिल सकता है। दूसरी तरफ, यूरोप के सबसे बड़े औद्योगिक देश जर्मनी की आर्थिक गतिविधि शून्य बदलाव के साथ पूरी तरह स्थिर रहने का अनुमान लगाया गया है। औद्योगिक सुस्ती और ऊर्जा कीमतों के दबाव ने वहां की गति को थाम रखा है। मुद्रास्फीति यानी महंगाई के मोर्चे पर भी इन चारों बड़े देशों के प्रारंभिक अनुमान जारी होने वाले हैं, जहां स्थानीय नीतियां बड़ा असर डाल रही हैं। जर्मनी और स्पेन दोनों को ही हाल में लागू किए गए ईंधन सहायता उपायों से राहत मिलने की संभावना है। इसके चलते जर्मनी में सालाना महंगाई दर घटकर 3.3 प्रतिशत से 3.0 प्रतिशत पर आ सकती है, जबकि स्पेन में यह आंकड़ा 5.0 प्रतिशत से कम होकर 4.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। इसके ठीक विपरीत, इटली में स्थिति भिन्न है। प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों पर भारी निर्भरता के कारण वहां महंगाई दर में 0.5 प्रतिशत अंक का इजाफा होने का अनुमान है, जिससे यह सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर दबाव और प्रमुख मुद्राओं की स्थिति वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर नए सिरे से बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में आई और गिरावट और कच्चे तेल के भाव में सीमित नरमी ने डॉलर की तीन सप्ताह के निचले स्तर से उबरने की कोशिशों को रोक दिया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर टिके रहने में सफल रहा और हाल के एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन दे रही हैं, हालांकि अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी की दो दिवसीय नीतिगत बैठक से पहले किसी बड़ी तेजी पर रोक लगी हुई है। इसी प्रकार, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में एशियाई सत्र के दौरान नए सिरे से बिकवाली देखने को मिली। शुक्रवार को 18 सितंबर के बाद के सबसे निचले स्तर को छूने के बाद यह जोड़ी अपनी रिकवरी को बरकरार नहीं रख सकी। गिरते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स डॉलर को कमजोर कर रहे हैं, जबकि बैंक ऑफ जापान के सख्त मौद्रिक रुख के संकेतों ने येन को सहारा दिया है। हालांकि, फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठकों को देखते हुए व्यापारी भारी दांव लगाने से बच रहे हैं, जिससे इस जोड़ी में गिरावट भी सीमित दायरे में बनी हुई है। सोने और बिटकॉइन में सुस्ती के बीच भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव कमोडिटी और डिजिटल एसेट्स के बाजार में पिछले सप्ताह की तेज गिरावट के बाद स्थिरता की कोशिशें जारी हैं। पिछले हफ्ते आई तेज बिकवाली के चलते हाजिर सोना 3,975 डॉलर प्रति औंस तक गिर गया था, जो अगस्त के बाद का इसका सबसे निचला स्तर था। सोमवार को सोने में मामूली बढ़त के साथ स्थिरता देखी गई। कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की नरमी और पश्चिम एशिया में कूटनीतिक वार्ताओं के जरिए तनाव कम करने के प्रयासों ने कीमती धातु को कुछ सहारा दिया है। दूसरी ओर, लगातार तीन हफ्तों के करेक्शन के बाद बिटकॉइन सोमवार को 80,500 डॉलर के आसपास मंडराता रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जो उछाल आया था, उसने महंगाई से जुड़ी चिंताएं फिर से भड़का दी हैं। ऊर्जा कीमतों के जोखिम ने निवेशकों के बीच जोखिम उठाने की भूख को कम कर दिया है, जिसका असर क्रिप्टोकरेंसी जैसे जोखिम भरे डिजिटल एसेट्स पर साफ नजर आ रहा है। केंद्रीय बैंकों के फैसले, आय रिपोर्ट और अमेरिकी चुनावों पर टिकी नजरें अक्टूबर का यह अंतिम पूरा हफ्ता वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। दुनिया भर के पांच प्रमुख केंद्रीय बैंक इस हफ्ते अपने नीतिगत फैसलों और ब्याज दरों को लेकर दिशा स्पष्ट करेंगे। इनमें रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड, बैंक ऑफ कनाडा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान शामिल हैं। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम का ऑटम बजट और ऑस्ट्रेलिया के मुद्रास्फीति के आंकड़े भी निवेशकों के रडार पर हैं। कॉर्पोरेट मोर्चे पर, अमेरिकी शेयर बाजार के एसएंडपी 500 इंडेक्स की लगभग 36 प्रतिशत कंपनियां इस हफ्ते अपनी तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित करने जा रही हैं। अमेरिकी डॉलर के लिए 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव एक अत्यंत निर्णायक मोड़ साबित हो सकते हैं। वित्तीय बाजार पहले से ही यह मानकर चल रहे हैं कि फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण को लेकर होने वाली चुनावी लड़ाई वाशिंगटन की राजकोषीय नीति की प्राथमिकताओं को बदल सकती है। यह राजनीतिक परिणाम परोक्ष रूप से 2027 में अमेरिकी मौद्रिक नीति की भावी दिशा और ब्याज दरों के पूरे परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है। इसका आप पर असर वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों से वित्तीय संपत्तियों और मुद्रा दरों पर सीधा असर पड़ सकता है। • मुद्रा विनिमय दर: अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और अन्य मुद्राओं में हलचल से विदेश यात्रा और आयात लागत पर असर पड़ता है। डॉलर कमजोर होने पर अंतरराष्ट्रीय खर्चों में तात्कालिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। • सोना और निवेश: सोने की कीमतों में स्थिरता से खुदरा खरीदारों और आभूषण प्रेमियों को स्पष्ट स्तर मिलते हैं। 3,975 डॉलर के निचले स्तर के बाद निवेश के नए अवसर तलाश रहे लोगों को बाजार पर नजर रखनी चाहिए। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशक: तीन हफ्तों की गिरावट के बाद बिटकॉइन का 80,500 डॉलर पर टिकना जोखिम का संकेत देता है। भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने पर डिजिटल संपत्तियों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। • ईंधन और महंगाई: प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के भाव सीधे घरेलू ईंधन और बिजली के बिलों को प्रभावित करते हैं। यूरोपीय ईंधन छूट जैसे उपाय यह दिखाते हैं कि सरकारी हस्तक्षेप से ही स्थानीय महंगाई नियंत्रित हो पा रही है। ऐसा क्यों हुआ यूरोपीय आर्थिक विकास में अंतर और वित्तीय बाजारों में सतर्कता के पीछे ऊर्जा आपूर्ति का ढांचा, सरकारी सब्सिडी और आगामी नीतिगत घटनाएं प्रमुख कारण हैं। • ऊर्जा निर्भरता और मौसम का असर: यूरोप में गर्मियों के प्रतिकूल मौसम और लगातार ऊंची ऊर्जा लागतों ने औद्योगिक उत्पादन को प्रभावित किया है। इटली जैसे देश प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों के सीधे संपर्क में हैं, जिससे वहां महंगाई बढ़ रही है। • राजकोषीय नीतियां और ईंधन राहत: जर्मनी और स्पेन ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन सहायता उपाय लागू किए हैं। इन लक्षित सरकारी छूटों के चलते वहां की वार्षिक महंगाई दर में प्रत्यक्ष कमी देखने को मिल रही है। • बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंक की बैठकें: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और पांच बड़े केंद्रीय बैंकों की इस हफ्ते होने वाली बैठकों ने मुद्रा बाजारों को सतर्क कर दिया है। निवेशक बड़े नीतिगत बदलावों और अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले जोखिम लेने से बच रहे हैं। सवाल-जवाब 1. तीसरी तिमाही में यूरो क्षेत्र की जीडीपी को लेकर क्या अनुमान है? उच्च ऊर्जा कीमतों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद यूरो क्षेत्र की जीडीपी में मामूली बढ़त दर्ज होने की उम्मीद है। 2. यूरोप में सबसे तेज और सबसे धीमी वृद्धि किस देश में रहने का अनुमान है? स्पेन में 0.6 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि का अनुमान है, जबकि जर्मनी में आर्थिक गतिविधि शून्य बदलाव के साथ सपाट रहने की संभावना है। 3. जर्मनी और स्पेन में महंगाई घटने की क्या मुख्य वजह है? दोनों देशों में हाल ही में लागू किए गए ईंधन सहायता उपायों के चलते महंगाई दर में कमी आने का अनुमान है। 4. इटली में महंगाई दर बढ़ने का क्या कारण बताया गया है? प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण इटली में महंगाई 0.5 प्रतिशत अंक बढ़कर 4.7 प्रतिशत होने का अनुमान है। 5. सोने और बिटकॉइन की हालिया कीमतें क्या दर्ज की गई हैं? सोना पिछले सप्ताह 3,975 डॉलर के निचले स्तर को छूने के बाद संभल रहा है, जबकि बिटकॉइन लगभग 80,500 डॉलर पर कारोबार कर रहा है। 6. इस हफ्ते किन प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकें होने वाली हैं? इस हफ्ते रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड, बैंक ऑफ कनाडा, फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकें निर्धारित हैं। https://trendkia.com/market/european-economy-men-susta-vikasa-aura-assam-ana-mahngai-ke-bicha-global-markets-men-satarkata-52035 TrendKia — Har trend, sabse pehle.