ईरान में धमाकों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा, क्रूड ऑयल में तेजी ईरान के विभिन्न इलाकों में हुए नए विस्फोटों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है और वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम से बचने का रुख हावी हो गया है। ईरान के भीतर से सामने आ रही घरेलू रिपोर्टों के अनुसार वहां कई स्थानों पर जोरदार धमाके सुने गए हैं। प्राप्त विवरण के मुताबिक ये विस्फोट ईरान के चाबहार और बंदर अब्बास शहरों में हुए हैं। इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव को एक बार फिर से चरम पर पहुंचा दिया है और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित संघर्ष को लेकर वैश्विक चिंताएं गहरी हो गई हैं। इस ताजा घटनाक्रम से कुछ समय पहले मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी सामने आई थी कि अमेरिकी वायु सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित ईरानी ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए थे। अमेरिकी और ईरानी पक्षों के बीच नए सिरे से भड़की इस तनातनी ने ऊर्जा बाजारों की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल इस सैन्य तनाव के तत्काल प्रभाव के रूप में अमेरिकी क्रूड ऑयल बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट की कीमतों में भारी तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 89.90 डॉलर पर पहुंच गई, और ताजा आंकड़ों के अनुसार इसमें लगभग 4 प्रतिशत की जोरदार बढ़त बनी हुई है। बाजार में इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई शत्रुतापूर्ण गतिविधियां हैं, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। वर्तमान में लाइव बाजार डेटा के अनुसार क्रूड ऑयल (CL=F) का भाव 89.30 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 85.76 डॉलर से 4.13 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। जोखिम भरे और सुरक्षित निवेश बाजारों की कार्यप्रणाली वित्तीय शब्दावली की दुनिया में जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर बाजारों को मुख्य रूप से रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ श्रेणियों में बांटा जाता है। रिस्क-ऑन बाजार वह स्थिति होती है जहां निवेशक भविष्य को लेकर अत्यधिक आशावादी होते हैं और वे अधिक रिटर्न की उम्मीद में जोखिम भरी संपत्तियों में निवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार रहते हैं। इसके विपरीत रिस्क-ऑफ बाजार की स्थिति में निवेशक भविष्य की अनिश्चितताओं से घबराकर सुरक्षित खेलने का प्रयास करने लगते हैं और ऐसी संपत्तियों का रुख करते हैं जो कम जोखिम वाली हों और निश्चित रिटर्न प्रदान कर सकें, भले ही वह मुनाफा अपेक्षाकृत कम ही क्यों न हो। आम तौर पर जब बाजार रिस्क-ऑन के दौर में होते हैं, तो शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिलती है और सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटीज के दाम भी ऊपर चढ़ते हैं क्योंकि उन्हें सकारात्मक आर्थिक विकास के दृष्टिकोण का लाभ मिलता है। जो देश भारी मात्रा में कमोडिटी का निर्यात करते हैं, उनकी करेंसी की मांग बढ़ने के कारण वे मजबूत होती हैं, और क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में भी उछाल आता है। इसके विपरीत रिस्क-ऑफ बाजार के माहौल में बॉन्ड की कीमतों में तेजी आती है, खासकर प्रमुख सरकारी बॉन्ड में, सोना अपनी चमक बिखेरता है, और जापानी येन, स्विस फ्रैंक तथा अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली मुद्राएं मजबूत होती हैं। कमोडिटी आधारित और सुरक्षित मुद्राओं का प्रदर्शन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर और रूबल तथा दक्षिण अफ्रीकी रैंड जैसी छोटी मुद्राएं आमतौर पर रिस्क-ऑन बाजारों के दौरान मजबूत होती हैं। इन अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर काफी हद तक कमोडिटी के निर्यात पर निर्भर करती है और ऐसे दौर में कच्चे माल की वैश्विक मांग बढ़ने की उम्मीद में ये मुद्राएं ऊपर जाती हैं। दूसरी ओर, संकट के समय अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक का बोलबाला रहता है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी है और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी कर्ज में निवेश करते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की संभावना न के बराबर मानी जाती है। जापानी येन में तेजी जापानी सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ने से आती है क्योंकि इसका बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास होता है जो संकट के समय भी इन्हें नहीं बेचते। स्विस फ्रैंक अपनी सख्त बैंकिंग नीतियों के कारण निवेशकों को बेहतर पूंजी सुरक्षा प्रदान करता है। प्रमुख मुद्राओं और परिसंपत्तियों की बाजार चाल विदेशी मुद्रा बाजार में ब्रिटिश पाउंड डॉलर के मुकाबले कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रहा है और मंगलवार को यह फिसलकर 1.3500 के निचले स्तर यानी दो हफ्तों के सबसे निचले पायदान पर लौट आया है। पाउंड की इस मंदी की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर में आई अच्छी तेजी है, खासकर तब जब निवेशक हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और अमेरिका-ईरान संकट के बीच बनी अनिश्चितता का आकलन कर रहे हैं। इसी तरह यूरो और डॉलर की जोड़ी में भी गिरावट तेज हुई है और मंगलवार को यह 1.1600 के अहम समर्थन स्तर को तोड़कर नीचे आ गई है। सुस्त अमेरिकी आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी डॉलर में सुधार और भू-राजनीतिक तनाव के चलते यह सुधार देखा जा रहा है। सोने के बाजार में भी मंदी का दौर जारी है और मंगलवार को यह फिसलकर लगभग तीन हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो प्रति ट्रॉय औंस 4.300 डॉलर के थोड़ा ही ऊपर है। अमेरिकी डॉलर की वापसी और अमेरिकी Treasury यील्ड में हो रही वृद्धि इस कीमती धातु पर दबाव बना रही है, भले ही मध्य पूर्व में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दूसरी ओर बिटकॉइन 78,000 डॉलर के समर्थन स्तर से ऊपर टिकने की कोशिश में सुस्त बना हुआ है जबकि ईथेरियम 2,450 डॉलर के आसपास ठहरा हुआ है। वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉन्ड बिकवाली के दौर से गुजर रहे हैं, जिसमें ब्रिटेन को सबसे बड़ा झटका लगा है और वहां यील्ड में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डीजल की कीमतों का रुख और ऊर्जा बाजार की स्थिति हालांकि तेल बाजार कुछ महीनों पहले की तुलना में शांत नजर आ सकता है, लेकिन डीजल के आंकड़े एक बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड के बीच का प्रीमियम, हाल ही में इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है और इंट्राडे रिकॉर्ड बनाते हुए यह 102.00 डॉलर से थोड़ा ऊपर पहुंच गया है। यह इस बात का संकेत है कि रिफाइंड ईंधन की मांग और आपूर्ति के बीच भारी अंतर बना हुआ है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इसका आप पर असर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में संघर्ष की आशंकाओं का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। • भारत में: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से भारत जैसे आयातक देशों पर आयात बिल का बोझ बढ़ेगा, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम प्रभावित हो सकते हैं। • आर्थिक प्रभाव: क्रूड ऑयल के महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की उपभोग की वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ सकता है। • निवेशक रणनीति: वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने के कारण निवेशकों को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है और सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। • ऊर्जा आपूर्ति: होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल के परिवहन में बाधा आने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। सवाल-जवाब 1. ईरान में हाल ही में कहां विस्फोट सुने गए? घरेलू रिपोर्टों के अनुसार ईरान के चाबहार और बंदर अब्बास शहरों में विस्फोट सुने गए हैं। 2. वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल की कीमत में कितनी तेजी आई है? वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 89.90 डॉलर हो गई है, जिसमें लगभग 4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। 3. रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ बाजारों में क्या अंतर है? रिस्क-ऑन बाजार में निवेशक आशावादी होकर जोखिम भरी संपत्तियां खरीदते हैं, जबकि रिस्क-ऑफ बाजार में वे पूंजी की सुरक्षा के लिए सुरक्षित और निश्चित रिटर्न वाली संपत्तियां चुनते हैं। 4. संकट के समय कौन सी मुद्राएं सुरक्षित मानी जाती हैं? संकट के दौर में अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक को सुरक्षित निवेश के रूप में सबसे अधिक लाभ मिलता है। 5. अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड में क्या रिकॉर्ड बना है? अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया और 102.00 डॉलर के इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। https://trendkia.com/market/explosions-men-iran-renew-hormuz-war-fears-as-crude-oil-surges-25973 TrendKia — Har trend, sabse pehle.