# फेड और भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाउंड में सुस्ती, 1.3300 के स्तर पर टिका ब्रिटिश पाउंड

> बैंक ऑफ इंग्लैंड की संभावित ब्याज दरों में वृद्धि और फेडरल रिजर्व के रुख के बीच पाउंड स्टर्लिंग 1.3330 के पास स्थिर बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/fed-aura-bhu-rajanitika-tanava-ke-bicha-pound-men-susti-1-3300-ke-stara-para-tika-british-pound-49344 · **Language:** Hindi
**Tags:** जीबीपी यूएसडी, ब्रिटिश पाउंड, अमेरिकी डॉलर, विदेशी मुद्रा बाजार, बैंक ऑफ इंग्लैंड, फेडरल रिजर्व, वित्त

वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ ब्रिटिश पाउंड ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3300 के मनोवैज्ञानिक स्तर से वापसी के संकेत दिए हैं। हालांकि इस शुरुआती उछाल के बावजूद खरीदारों में आगे की तेजी को लेकर स्पष्ट हिचकिचाहट देखी जा रही है। 23 सितंबर के बाद के अपने उच्चतम स्तर से पिछले शुक्रवार को दर्ज की गई मामूली गिरावट के बाद यह जोड़ी फिलहाल 1.3330 के आसपास लगभग स्थिर रुख के साथ कारोबार कर रही है, क्योंकि अमेरिकी डॉलर में बिकवाली का दबाव अब थमता दिखाई दे रहा है।

## तकनीकी प्रतिरोध और मंदी के संकेत
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी जोड़ी अभी भी 1.3390 पर स्थित अपने 100 दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज और 1.3406 पर स्थित 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर से नीचे बनी हुई है। इन अहम स्तरों से नीचे बने रहने के कारण पाउंड का व्यापक रुझान दबाव में दिखता है। इसके अलावा 1.3343 पर मौजूद 38.2 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट का स्तर भी तत्काल प्रतिरोध पैदा कर रहा है। जब तक हाजिर कीमतें इस घने प्रतिरोध दायरे को पार नहीं करतीं, तब तक किसी भी बड़ी रैली की संभावना सीमित नजर आती है।

लाइव तकनीकी संकेतकों के अनुसार रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 53 के स्तर पर है, जो तटस्थ से संतुलित स्थिति दर्शाता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस में हल्का सकारात्मक रुझान बना हुआ है, जबकि 20 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.33 और 50 दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज 1.34 के स्तर पर स्थित हैं। 52 सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच बना हुआ है, जहां 1.31 का स्तर मजबूत सपोर्ट और 1.34 का दायरा कड़े प्रतिरोध का काम कर रहा है।

## बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति की भूमिका
ब्रिटिश पाउंड के मूल्य को तय करने वाला सबसे अहम कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने फैसलों को मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य पर केंद्रित रखता है, जिसका मानक करीब 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर हासिल करना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए बैंक ऑफ इंग्लैंड का मुख्य हथियार ब्याज दरों का समायोजन है।

जब मुद्रास्फीति बहुत अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा करता है ताकि मांग पर लगाम लगाई जा सके। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक साबित होती हैं, क्योंकि यह वैश्विक निवेशकों को यूनाइटेड किंगडम में पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति अत्यधिक नीचे गिरती है तो यह आर्थिक सुस्ती का संकेत माना जाता है, जिससे निपटने के लिए केंद्रीय बैंक दरों में कटौती करता है ताकि उद्योग सस्ते कर्ज लेकर विकास परियोजनाओं में निवेश कर सकें। मौजूदा बाजार में नवंबर में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी के कयास पाउंड के लिए मददगार बने हुए हैं।

## आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन का प्रभाव
अर्थव्यवस्था की वास्तविक सेहत को आंकने वाले आंकड़े भी पाउंड स्टर्लिंग की चाल पर गहरा असर डालते हैं। सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़े तथा रोजगार के स्तर सीधे तौर पर मुद्रा के रुख को प्रभावित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि केंद्रीय बैंक को सख्त नीति अपनाने की गुंजाइश भी देती है, जिससे पाउंड मजबूत होता है। कमजोर आर्थिक आंकड़े इसके विपरीत दबाव पैदा करते हैं।

इसके अलावा व्यापार संतुलन भी एक महत्वपूर्ण कारक है, जो किसी अवधि में निर्यात से होने वाली आय और आयात पर किए गए खर्च के अंतर को दर्शाता है। जब किसी देश के निर्यातों की अंतरराष्ट्रीय मांग अधिक होती है, तो विदेशी खरीदारों को भुगतान के लिए घरेलू मुद्रा खरीदनी पड़ती है। नतीजतन, सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को ताकत देता है, जबकि नकारात्मक व्यापार संतुलन उसे कमजोर करता है।

## वैश्विक मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों की स्थिति
अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी सोमवार को खासी हलचल देखी गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के सहायक गवर्नर क्रिस केंट के सख्त बयानों के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने लगातार दूसरे दिन तेजी जारी रखी और 0.6900 के निचले स्तर से उबरकर तीन महीने के उच्च स्तर को छू लिया। चीन के आगामी वृहद आर्थिक आंकड़ों से पहले यह बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हालिया गिरावट ने डॉलर को दो सप्ताह के निचले स्तर के करीब सीमित रखा, जिससे इस जोड़ी को समर्थन मिला।

दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन की जोड़ी में एशियाई सत्र के दौरान बिकवाली देखने को मिली। बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा की टिप्पणियों और संभावित मुद्रा हस्तक्षेप की अटकलों ने जापानी येन को मजबूत किया। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की कीमतों में भी तेजी देखी गई, जहां कीमतें 4,200 डॉलर के स्तर को पार करने की तैयारी में हैं, हालांकि फेडरल रिजर्व की नीतियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर का समर्थन सोने की एकतरफा तेजी को सीमित कर सकता है।

## इसका आप पर असर
विदेशी मुद्रा बाजार में पाउंड और डॉलर की मौजूदा स्थिरता आयातकों, विदेशी यात्रियों और मुद्रा कारोबारियों के वित्तीय फैसलों को सीधे प्रभावित करती है।

- **मुद्रा कारोबारियों पर प्रभाव:** पाउंड स्टर्लिंग में 1.3340 से 1.3400 के बीच कड़ा तकनीकी प्रतिरोध मौजूद है। इस स्तर पर सीमित उतार-चढ़ाव को देखते हुए सख्त स्टॉप लॉस के साथ ही सौदे करने की सलाह दी जाती है।
- **यूके यात्रा और शिक्षा बजट:** पाउंड के 1.33 के आसपास स्थिर रहने से ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के खर्च में भारी उछाल नहीं आएगा। आगामी हफ्तों में ट्यूशन फीस और रहने का खर्च मौजूदा विनिमय दरों के अनुसार स्थिर रहने की उम्मीद है।
- **आयात और निर्यात व्यापार:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की स्थिरता कच्चे माल के आयात लागत को संतुलित रखती है। भारतीय निर्यातकों को यूके और यूरोपीय बाजारों में हेजिंग रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का अवसर मिलेगा।
- **सुरक्षित निवेश प्रवाह:** भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर और सोने में मांग बनी रहेगी। खुदरा निवेशक पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए इन सुरक्षित परिसंपत्तियों की चाल पर नजर रख सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पाउंड स्टर्लिंग और अमेरिकी डॉलर के बीच सीमित दायरे का मुख्य कारण दोनों देशों के केंद्रीय बैंकों के परस्पर विरोधी मौद्रिक संकेत और वैश्विक अनिश्चितताएं हैं।

- **केंद्रीय बैंकों का रुख:** बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा नवंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पाउंड को सहारा दे रही है। दूसरी ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने डॉलर की गिरावट पर ब्रेक लगा दिया है।
- **तकनीकी स्तरों पर बिकवाली:** 1.3343 और 1.3406 पर स्थित महत्वपूर्ण फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तरों पर तकनीकी ट्रेडर्स द्वारा मुनाफावसूली की जा रही है। इस मजबूत तकनीकी प्रतिरोध के कारण पाउंड की तेजी 1.3330 के स्तर पर अटक गई।
- **भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं:** वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित पनाहगाह माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मांग को बनाए रखा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से बचते हुए डॉलर में तरलता बनाए रख रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. जीबीपी/यूएसडी में मौजूदा समय में कौन से तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हैं?
जीबीपी/यूएसडी के लिए 1.3343 पर 38.2 प्रतिशत फिबोनाची स्तर और 1.3406 पर 50.0 प्रतिशत स्तर प्रमुख प्रतिरोध हैं, जबकि 1.3100 मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है।

### 2. बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति का पाउंड पर क्या असर पड़ता है?
जब बैंक ऑफ इंग्लैंड मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत पर लाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है, तो पाउंड मजबूत होता है, जबकि दर कटौती से मुद्रा कमजोर होती है।

### 3. अमेरिकी डॉलर को किन कारकों से मजबूती मिल रही है?
फेडरल रिजर्व की सख्त ब्याज दर नीतियों की उम्मीदें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर को समर्थन दे रहे हैं।

### 4. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में क्या रुझान देखने को मिला?
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा, जबकि येन को संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका और बैंक ऑफ जापान की टिप्पणियों से समर्थन मिला।

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