फेड, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की बैठकों पर टिकी नजरें, डॉलर इंडेक्स 99 के करीब इस सप्ताह वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की महत्वपूर्ण नीतिगत बैठकों से तय होगी, जबकि वैश्विक डॉलर इंडेक्स 99.00 के स्तर पर बना हुआ है। वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए आने वाला सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण और उतार-चढ़ाव भरा रहने की उम्मीद है। इस सप्ताह दुनिया के तीन सबसे बड़े केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों को लेकर अहम फैसले सुनाने वाले हैं। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) इस निर्णायक सप्ताह की शुरुआत से ठीक पहले 99.00 के स्तर के पास मजबूती से टिका हुआ है। पिछले गुरुवार को जारी हुए अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बाद डॉलर में मामूली गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इसने तुरंत वापसी करते हुए अपनी स्थिति मजबूत कर ली। हालांकि, अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तमाम संभावनाओं के बावजूद, ग्रीनबैक अभी तक बाजार में कोई बड़ा और निर्णायक ब्रेकआउट दिखाने में असमर्थ रहा है। वैश्विक मुद्राओं की बात करें, तो स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD) में सबसे ज्यादा मजबूती देखी गई है, जबकि अन्य प्रमुख मुद्राएं डॉलर के मजबूत रुख के कारण दबाव में दिखाई दे रही हैं। सप्ताह भर का व्यस्त वैश्विक आर्थिक कैलेंडर इस सप्ताह की शुरुआत बेहद व्यस्त आर्थिक आंकड़ों के साथ होने जा रही है, जो बाजार को आगे की दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। सोमवार को कनाडा के अगस्त महीने के मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिसके साथ ही चीन के आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े भी पेश किए जाएंगे। इन आंकड़ों से वैश्विक मांग और विशेष रूप से कमोडिटी बाजारों की स्थिति साफ होगी। इसके बाद, मंगलवार को यूनाइटेड किंगडम (UK) के श्रम बाजार की रिपोर्ट जारी होगी, जो वहां की रोजगार स्थिति को दर्शाएगी। उसी दिन जर्मनी का प्रतिष्ठित जेडीडब्ल्यू (ZEW) आर्थिक सेंटिमेंट सर्वे भी जारी किया जाएगा, जिससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था की सेहत का अंदाजा लगेगा। बुधवार का दिन पूरे सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ यानी पिवट साबित होने वाला है। इस दिन यूनाइटेड किंगडम (UK) के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिससे वहां की महंगाई दर का पता चलेगा। इसके साथ ही, अमेरिका के रिटेल सेल्स के आंकड़े भी इसी दिन सामने आएंगे, जिनमें एक बार फिर उछाल आने की उम्मीद जताई जा रही है। इन तमाम आंकड़ों के ठीक बाद वैश्विक वित्तीय बाजार का सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा, जिसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) अपने ब्याज दरों पर फैसले की घोषणा करेगा। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व के आर्थिक अनुमान और चेयरमैन की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाएगी, जिससे भविष्य की नीतिगत दिशा तय होगी। इसके तुरंत बाद, गुरुवार को बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) अपनी नीतिगत घोषणाएं करेगा और अंत में शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान (BoJ) की बैठक के फैसलों के साथ इस सप्ताह का समापन होगा। कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक चिंताएं ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड ऑयल की कीमतें इस समय 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। हालांकि, हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों के कारण कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर टिकी हुई हैं। इस सप्ताह कच्चे तेल से जुड़े कोई विशिष्ट आंकड़े जारी नहीं होने वाले हैं, जिसके कारण तेल बाजार की पूरी कहानी अब भू-राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रही है। ईरान और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) के आसपास बना गतिरोध कच्चे तेल की कीमतों को नीचे गिरने से रोक रहा है। इसके अतिरिक्त, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की ओर से दी गई चेतावनी, जिसमें वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति में लगातार बढ़ती कमी की बात कही गई है, कीमतों को सहारा दे रही है। बाजार में आई हालिया गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशकों का सेंटिमेंट कितनी तेजी से बदल सकता है, लेकिन बुनियादी कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं अब भी बाजार को थामे हुए हैं। प्रमुख मुद्रा जोड़े और सोने की स्थिति विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख मुद्राओं की हलचल भी तेज बनी हुई है। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD का जोड़ा 0.7100 के मध्य स्तर के पास स्थिर होता दिखाई दिया। इससे पहले इस जोड़े में भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे यह एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था। दरअसल, अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के गर्म आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल दिया था, जिसने अमेरिकी डॉलर को मजबूत किया और इस जोड़ी पर दबाव बनाया। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त रुख की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की गिरावट को सीमित कर दिया है। अब बाजार के निवेशक अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति के अंतिम आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं ताकि नए दांव लगाए जा सकें। दूसरी ओर, USD/JPY का जोड़ा एशियाई कारोबारी सत्र में 154.00 के निचले स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। जापान में जारी हुए गर्म पीपीआई (PPI) आंकड़ों ने बाजार को बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा सख्त नीति अपनाने के संकेत दिए हैं, जिससे जापानी येन को नई ताकत मिली है। हालांकि, अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण जापानी येन की यह बढ़त सीमित दिखाई दे रही है। इस बीच, बहुमूल्य धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में शानदार सुधार देखा गया है। सोना एक बार फिर मजबूती हासिल करते हुए 4,440 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर को छूने की कोशिश कर रहा है। सोने ने गुरुवार को हुई अपनी पूरी गिरावट की भरपाई कर ली है, क्योंकि सप्ताह के अंत में अमेरिकी डॉलर की चाल में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णयों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर वैश्विक महंगाई और शेयर बाजारों पर पड़ने वाला है। - भारतीय निवेशकों पर असर: फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और कच्चे तेल के 100 डॉलर के स्तर पर रहने से भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आ सकता है। अमेरिकी डॉलर मजबूत होने से भारतीय रुपया कमजोर हो सकता है, जिससे विदेशी निवेश पर असर पड़ेगा। - घरेलू महंगाई और ईंधन की कीमतें: कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत में ईंधन के दामों और आयात खर्च को प्रभावित कर सकती हैं। यदि डॉलर मजबूत रहता है, तो भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाएगा, जिसका असर घरेलू परिवहन लागत पर पड़ सकता है। - सोने के खरीदारों के लिए: सोने की कीमतों में 4,440 डॉलर के स्तर की ओर रिकवरी होने से घरेलू बाजारों में भी सोने के आभूषण महंगे हो सकते हैं। सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग आने वाले सप्ताह में और बढ़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम इसलिए हो रहा है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय महत्वपूर्ण संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। - नीतिगत निर्णयों का टकराव: अमेरिका, ब्रिटेन और जापान के केंद्रीय बैंकों की बैठकें एक ही सप्ताह में होना एक दुर्लभ संयोग है। यह बाजार में अत्यधिक अनिश्चितता पैदा कर रहा है क्योंकि तीनों अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग मुद्रास्फीति चक्रों का सामना कर रही हैं। - भू-राजनीतिक तनाव: ईरान और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार जारी सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों को एक मजबूत आधार मिला हुआ है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने का जोखिम पैदा कर रहा है। - मुद्रास्फीति का दबाव: हाल ही में जारी हुए गर्म जापानी और अमेरिकी पीपीआई (PPI) आंकड़ों ने केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख बनाए रखने का दबाव बढ़ा दिया है। सवाल-जवाब 1. इस सप्ताह कौन से प्रमुख केंद्रीय बैंक नीतिगत बैठकें करने वाले हैं? इस सप्ताह दुनिया के तीन सबसे बड़े केंद्रीय बैंक- अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान अपनी मौद्रिक नीति बैठकों के निर्णय घोषित करेंगे। 2. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर पर कारोबार कर रहा है? अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) मजबूत रुख के साथ 99.00 के स्तर के करीब बना हुआ है। 3. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पास क्यों बनी हुई हैं? ईरान और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भू-राजनीतिक तनाव और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) द्वारा वैश्विक आपूर्ति में कमी की चेतावनी के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 के पास टिकी हुई हैं। 4. जापानी येन में मजबूती क्यों देखी जा रही है? जापान में उम्मीद से अधिक गर्म पीपीआई (PPI) आंकड़े जारी होने के बाद बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीति सख्त करने की उम्मीदों से येन को मजबूती मिली है। 5. सोने की वर्तमान स्थिति क्या है? सोना अपनी हालिया गिरावट से उबरते हुए $4,440 प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की ओर बढ़ रहा है। https://trendkia.com/market/fed-bank-of-england-aura-bank-of-japan-ki-baithakon-para-tiki-najaren-dollar-index-99-ke-kariba-31282 TrendKia — Har trend, sabse pehle.