फेड ब्याज दर की उम्मीदों से दबाव में न्यूजीलैंड डॉलर साप्ताहिक निचले स्तर के करीब पहुँचा अमेरिका में बढ़ती मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बल दिया है, जिससे NZD/USD जोड़ी 0.5950 के नीचे साप्ताहिक निचले स्तर के करीब स्थिर बनी हुई है। गुरुवार को शुरुआती यूरोपीय कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले न्यूजीलैंड डॉलर में बढ़त दर्ज करने की कोशिशें नाकाम साबित हुईं और यह करेंसी जोड़ी अपने साप्ताहिक निचले स्तरों के पास ही बनी रही। NZD/USD करेंसी जोड़ी 0.5950 के स्तर के नीचे खिसक गई और सुबह की मामूली बढ़त को बनाए रखने में असमर्थ रही। इसका मुख्य कारण अमेरिका में जारी हुए मुद्रास्फीति के गर्म आंकड़े हैं, जिसने अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड द्वारा ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी की उम्मीदों को हवा दी है। इस दबाव के बावजूद न्यूजीलैंड डॉलर में गिरावट का दायरा सीमित देखा गया, क्योंकि निवेशक जैकसन होल सम्मेलन में केंद्रीय बैंक के शीर्ष अधिकारियों के बयानों और मध्य पूर्व में चल रहे कूटनीतिक घटनाक्रमों का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से फेड ब्याज दर बढ़ने की आशंका तेज वैश्विक मुद्रा बाजार में गुरुवार को अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े महंगाई के आंकड़ों का गहरा असर देखा गया। अमेरिका में उम्मीद से अधिक आए मुद्रास्फीति और कोर PCE आंकड़ों के बाद निवेशकों ने फेड की भविष्य की मौद्रिक नीति पर पुनर्विचार करना शुरू कर दिया है। बाजार में अब यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक उधार लेने की लागत को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है या फिर ब्याज दरों में अतिरिक्त वृद्धि कर सकता है। अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से अमेरिकी डॉलर संपत्तियों की अपील बढ़ जाती है, जिससे निवेशक डॉलर की ओर रुख करते हैं और न्यूजीलैंड डॉलर जैसी उच्च जोखिम वाली मुद्राओं पर बिकवाली का दबाव बनता है। दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) का सख्त मौद्रिक रुख NZD/USD जोड़ी के लिए एक सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। वेलिंगटन स्थित केंद्रीय बैंक ने लगातार संकेत दिए हैं कि घरेलू मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक सख्ती बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ RBNZ का सख्त रुख और दूसरी तरफ अमेरिका में बढ़ती ब्याज दर की उम्मीदों के कारण यह करेंसी जोड़ी 0.5950 के नीचे एक सीमित दायरे में सिमट गई है। यही वजह है कि गुरुवार को न तो खरीदार और न ही बिकवाल बाजार में स्पष्ट बढ़त बना सके। ट्रेजरी बायबैक और मध्य पूर्व में युद्धविराम की खबरों से डॉलर की तेजी थमी मुद्रास्फीति के मजबूत आंकड़ों के बावजूद अमेरिकी डॉलर में एकतरफा तेजी नहीं आ सकी, क्योंकि बाजार में कुछ अन्य कारकों ने डॉलर की बढ़त पर रोक लगा दी। इनमें सबसे प्रमुख अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की बांड बायबैक रणनीति रही। अमेरिकी सरकार द्वारा द्वितीयक बाजार से अपने बांड वापस खरीदने की प्रक्रिया के कारण अमेरिकी बांड यील्ड में गिरावट दर्ज की गई। बांड यील्ड में कमी आने से डॉलर में मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है, जिससे ग्रीनबैक की तेजी की रफ्तार धीमी पड़ गई। इसके अलावा, मध्य पूर्व से आ रही सकारात्मक कूटनीतिक खबरों ने भी वैश्विक बाजार में जोखिम को कम करने में मदद की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच एक नए युद्धविराम समझौते पर सहमति बन गई है, जिसकी घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है। इसके साथ ही ईरान और ओमान ने ओमान की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए एक अस्थायी समुद्री मार्ग पर सहमति व्यक्त की है। इस रणनीतिक जलमार्ग से समुद्री व्यापार सुरक्षित होने से कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की चिंताएं कम हुई हैं। इससे वैश्विक मुद्रास्फीति की आशंका घटी है और सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मांग में कमी आई है, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर को निचले स्तरों पर सहारा मिला है। जैकसन होल सम्मेलन में केविन वॉर्श के संबोधन पर टिकीं बाजार की निगाहें विरोधाभासी आर्थिक संकेतों के बीच निवेशकों ने गुरुवार को बड़े सौदे करने से परहेज किया और 'देखो और इंतजार करो' की नीति अपनाई। वित्तीय बाजार के प्रतिभागियों का पूरा ध्यान शुक्रवार को आयोजित होने वाले वार्षिक जैकसन होल आर्थिक सम्मेलन पर केंद्रित है। इस सम्मेलन में फेड चेयरमैन केविन वॉर्श अपना महत्वपूर्ण संबोधन देने वाले हैं। फेड अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद जैकसन होल में केविन वॉर्श का यह पहला संबोधन होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केविन वॉर्श के संबोधन से केवल सितंबर की आगामी मौद्रिक नीति बैठक का ही नहीं, बल्कि लंबी अवधि की ब्याज दर नीति का भी खाका सामने आएगा। निवेशक यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि फेड महंगाई की स्थिति और अपनी बैलेंस शीट को लेकर क्या रुख अपनाता है। शुक्रवार को आने वाले बयानों से विदेशी मुद्रा बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है, जो NZD/USD जोड़ी और अमेरिकी डॉलर की भविष्य की दिशा तय करेगी। यूरो और ब्रिटिश पाउंड भी सीमित दायरे में कर रहे हैं कारोबार गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान केवल न्यूजीलैंड डॉलर ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्रा जोड़ियों में भी सीमित हलचल देखी गई। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (GBP/USD) अपने साप्ताहिक निचले स्तर के पास 1.3600 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार करती नजर आई। पाउंड में भी बिकवाली का दबाव सीमित रहा क्योंकि व्यापारी जैकसन होल से मिलने वाले संकेतों से पहले नए सौदे लगाने से बच रहे थे। इसी तरह, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) 1.1650 के आसपास एक संकीर्ण दायरे में बनी रही। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) की ओर से दरें सख्त रहने की उम्मीदों ने यूरो को समर्थन दिया, जिससे अमेरिकी PCE आंकड़ों के बाद डॉलर में आई तेजी का प्रभाव संतुलित हो गया। यूरो व्यापारी अब मध्य पूर्व के हालात और अमेरिका के शुरुआती बेरोजगारी दावों से जुड़े आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं ताकि बाजार के अगले रुख का आकलन किया जा सके। इसका आप पर असर NZD/USD विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां विदेशी मुद्रा व्यापारियों, आयातकों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को सीधे प्रभावित करती हैं। • करेंसी व्यापारियों के लिए: जैकसन होल सम्मेलन से पहले NZD/USD जोड़ी 0.5950 के नीचे एक सीमित दायरे में बनी हुई है। अल्पकालिक व्यापारियों को शुक्रवार के संबोधन के बाद तेज उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए और अपने स्टॉप-लॉस स्तरों को संभालकर रखना चाहिए। • भारतीय आयातकों और निर्यातकों के लिए: अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बांड यील्ड में बदलाव से भारतीय कारोबारियों के लिए सीमा पार निपटान दरें प्रभावित होती हैं। डॉलर में ठेका लेने वाली कंपनियों को केंद्रीय बैंक के बयानों से पहले अपने विदेशी मुद्रा जोखिम को हेज करने पर विचार करना चाहिए। • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर के मुकाबले वैश्विक मुद्राओं की चाल से विदेशी मुद्रा विनिमय लागत पर असर पड़ता है। USD या NZD में खर्च उठाने वाले छात्रों और पर्यटकों को सही समय पर मुद्रा विनिमय के लिए विनिमय दरों की निगरानी करनी चाहिए। • खुद्रा निवेशकों के लिए: मध्य पूर्व में तनाव कम होने और ऊर्जा महंगाई घटने की उम्मीदों से शेयर बाजारों को स्थिरता मिलती है। निवेशकों को ब्याज दरों के रुझान पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें वैश्विक स्तर पर कंपनियों की कर्ज लागत बढ़ा सकती हैं। सवाल-जवाब 1. न्यूजीलैंड डॉलर अपने साप्ताहिक निचले स्तर के पास क्यों कारोबार कर रहा है? अमेरिका के गर्म महंगाई आंकड़ों के कारण फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका बढ़ी है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ है और NZD/USD जोड़ी 0.5950 के नीचे खिसक गई है। 2. NZD/USD जोड़ी में अधिक गिरावट को रोकने वाले कारक कौन से हैं? रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का सख्त रुख, ट्रेजरी बायबैक के कारण अमेरिकी बांड यील्ड में कमी और मध्य पूर्व में तनाव कम होने से इस जोड़ी को सहारा मिला है। 3. मध्य पूर्व के किन घटनाक्रमों का असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है? अमेरिका-ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के लिए अस्थायी समुद्री मार्ग समझौते से ऊर्जा महंगाई की चिंता घटी है, जिससे डॉलर की मांग घटी है। 4. फेड चेयरमैन केविन वॉर्श का जैकसन होल भाषण क्यों महत्वपूर्ण है? व्यापारी शुक्रवार को केविन वॉर्श के संबोधन का इंतजार कर रहे हैं ताकि फेड की भविष्य की ब्याज दर नीति और मौद्रिक दृष्टिकोण के बारे में स्पष्ट संकेत मिल सकें। 5. EUR/USD और GBP/USD करेंसी जोड़ियों का हाल कैसा है? GBP/USD जोड़ी 1.3600 के नीचे साप्ताहिक निचले स्तरों के पास बनी हुई है, जबकि EUR/USD जोड़ी ECB की सख्त नीति की उम्मीदों के बीच 1.1650 के पास स्थिर है। https://trendkia.com/market/fed-byaja-dara-ki-ummidon-se-dabava-men-new-zealand-dollar-saptahika-nichale-stara-ke-kariba-pahuncha-22999 TrendKia — Har trend, sabse pehle.