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  "type": "article",
  "title": "फेड गवर्नर वॉलर के बयान के बाद डॉलर इंडेक्स 102.50 के नीचे थमा, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तारीख पर सस्पेंस",
  "summary": "फेडरल रिजर्व के गवर्नर वॉलर द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि की निश्चित समयसीमा तय न करने के बाद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.50 के स्तर के नीचे सपाट हो गया, जबकि यूरो पर यूरोपीय बॉन्ड संकट का दबाव बना हुआ है।",
  "content": "अमेरिकी डॉलर इंडेक्स चार कारोबारी सत्रों में तीसरी बार 102.50 के प्रतिरोध स्तर के ठीक नीचे रुक गया है। फेडरल रिजर्व के गवर्नर वॉलर के ताज़ा वक्तव्य के बाद मुद्रा बाजार में यह स्थिरता देखने को मिली। वॉलर ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से ऊपर महंगाई करीब साढ़े पांच साल से बनी हुई है, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए किसी तय बैठक की तारीख का वादा नहीं किया। इस बीच वायदा बाजार 27-28 अक्टूबर की बैठक में दर वृद्धि की संभावना लगभग 20 प्रतिशत और 8-9 दिसंबर की बैठक के लिए करीब 80 प्रतिशत मानकर चल रहा है।\n\nमुद्रास्फीति का दबाव और ट्रेजरी यील्ड की स्थिति\nगवर्नर वॉलर ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि उच्च ब्याज दरों से आर्थिक गतिविधियों के बहुत अधिक सुस्त होने की उन्हें बड़ी चिंता नहीं है। उन्होंने महंगाई को ऊपर बनाए रखने वाले दो प्रमुख उत्प्रेरकों का नाम लिया: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, जिससे तकनीकी कीमतें बढ़ रही हैं, और नए व्यापारिक शुल्कों यानी टैरिफ का संभावित खतरा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसलों के प्रति सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली दो-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड वर्तमान में 4.80% के करीब चल रही है, जो फेड के मौजूदा लक्ष्य दायरे के ऊपरी छोर से करीब 0.80 अंक ऊपर है।\n\nबाजार में डॉलर इंडेक्स वॉलर के संबोधन के तुरंत बाद 102.50 की ओर बढ़ा, लेकिन यह सोमवार के उच्च स्तर को पार करने से चूक गया। बाद में यह फिसलकर 102.00 के ठीक ऊपर आया और फिर संभल गया। चूंकि वायदा बाजार पहले से ही दिसंबर की दर वृद्धि को लगभग पचा चुका था, इसलिए किसी तय बैठक का नाम न लेने से वायदा कीमतों के रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।\n\nयूरोपीय ऋण संकट और फ्रांस के बॉन्ड पर दबाव\nडॉलर इंडेक्स की मजबूती के पीछे केवल अमेरिकी कारक ही नहीं हैं, बल्कि यूरो की कमजोरी भी जिम्मेदार है। यूरो लगातार तीन बार 1.1150 के स्तर के ठीक ऊपर अटका, जो करीब 17 महीने का निचला स्तर है। इस गिरावट की मुख्य वजह फ्रांस के सरकारी ऋण पर मंडराता संकट है। फ्रांस के 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 4.90% के आसपास बनी हुई है, जबकि जर्मनी की यील्ड 3.50% पर है। फ्रांस की यील्ड अक्टूबर की शुरुआत में 5% से ऊपर पहुंची थी, जो दो दशकों का उच्चतम स्तर था।\n\nफ्रांस में 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले बॉन्ड की यह बिकवाली अब इटली और ग्रीस के सॉवरेन ऋण तक फैल चुकी है। फ्रांसीसी सरकार का 2027 का बजट राजकोषीय घाटे को राष्ट्रीय उत्पादन के 5% तक सीमित करने का लक्ष्य रखता है, लेकिन देश के राजकोषीय निगरानी तंत्र ने सरकार के आर्थिक अनुमानों को अत्यधिक आशावादी बताया है। इसके अलावा, कर्मचारी यूनियनों ने 13 अक्टूबर के लिए नए सिरे से हड़ताल का आह्वान किया है। इस बीच, जर्मन वित्त मंत्री क्लिंगबेल ने गुरुवार को पुष्टि की कि वे बॉन्ड बाजार के घटनाक्रम पर अपने फ्रांसीसी समकक्षों के साथ निरंतर संपर्क में हैं।\n\nमिशिगन विश्वविद्यालय के सर्वेक्षण पर टिकी नजरें\nगवर्नर वॉलर ने एक प्रमुख जोखिम का उल्लेख किया कि हालिया मूल्य वृद्धि के कारण परिवारों और कंपनियों की दीर्घकालिक मुद्रास्फीति अपेक्षाएं बढ़ सकती हैं। इस संबंध में मिशिगन विश्वविद्यालय (UoM) का शुक्रवार को 14:00 GMT पर आने वाला उपभोक्ता सर्वेक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सितंबर में इस सर्वेक्षण में एक साल की मुद्रास्फीति अपेक्षा 4.6% और पांच साल की अपेक्षा 3.4% दर्ज की गई थी।\n\nयदि एक साल का यह आंकड़ा 4.6% से ऊपर आता है, तो डॉलर इंडेक्स 102.50 के प्रतिरोध को तोड़कर ऊपर निकल सकता है। इसके विपरीत, एक कमजोर रीडिंग से बाजार का ध्यान केवल दिसंबर की बैठक तक सीमित रह जाएगा। यदि परिवारों की महंगाई संबंधी उम्मीदें बहुत तीखी रहती हैं, तो यह संभावना भी बन सकती है कि दर वृद्धि को छह हफ्ते पहले यानी 9 दिसंबर के बजाय 28 अक्टूबर को ही अमल में लाया जाए। फिलहाल वायदा बाजार इस शीघ्र कदम की संभावना पांच में से केवल एक (20%) मान रहा है।\n\nतकनीकी स्तर और बाजार का रुझान\nडॉलर इंडेक्स के लिए 102.50 का स्तर लगातार सोमवार, बुधवार और गुरुवार को अवरोध साबित हुआ। सोमवार को इस स्तर के ठीक ऊपर बना शिखर अप्रैल 2025 के बाद का उच्चतम स्तर था। इस सीमा के पार 103.00 का अगला मनोवैज्ञानिक स्तर मौजूद है। नीचे की तरफ, खरीदारों ने गुरुवार को 102.00 के ठीक ऊपर खरीदारी की। 1 अक्टूबर के बाद से हर निचला स्तर 101.50 से ऊपर टिका रहा है, जो सितंबर के अंत के कंसॉलिडेशन का ऊपरी छोर था।\n\nदैनिक चार्ट पर स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) लगभग 92 पर है और अपने ओवरबॉट स्तरों से नीचे की ओर झुक रहा है। जब तक 102.50 का स्तर सुरक्षित है, तब तक अल्पकालिक झुकाव 102.00 और 101.50 की ओर मुनाफावसूली का बना हुआ है। हालांकि, यदि दैनिक कैंडल 102.50 के ऊपर बंद होती है, तो यह मंदी का परिदृश्य अमान्य हो जाएगा और 103.00 के द्वार खुल जाएंगे। लाइव बाजार आंकड़ों में डॉलर इंडेक्स (DX-Y.NYB) 102.25 पर स्थिर कारोबार कर रहा है, जहां 14-दिवसीय RSI 70 के ओवरबॉट स्तर पर है और MACD 0.65 पर बुलिश हिस्टोग्राम संकेत दे रहा है। 52-सप्ताह का दायरा 95.55 से 102.54 के बीच है।\n\nग्लोबल फॉरेक्स और कमोडिटी बाजारों की हलचल\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य प्रमुख जोड़ियों पर भी साफ दिखाई दिया है। AUD/USD एशियाई सत्र में 0.6950 के ठीक ऊपर सीमित दायरे में रहा। मध्य पूर्व में गहराते संकट और पेंटागन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित हमलों के लिए तत्परता के आदेशों के कारण भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है। यह स्थिति, सख्त FOMC कार्यवृत्त और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बनाए हुए है।\n\nदूसरी ओर, USD/JPY एशियाई सत्र में 158.00 के नीचे लाल निशान में लौट आया। बाजार में यह अटकलें तेज हैं कि जापानी अधिकारी कमजोर येन को सहारा देने के लिए मुद्रा बाजार में सीधा हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर भी 18 महीने के उच्च स्तर से मुनाफावसूली के कारण थोड़ा नरम हुआ, जिससे इस जोड़ी में सुस्ती आई। इस बीच, पीली धातु यानी सोने ने संभलते हुए 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर को फिर से छू लिया। सोने की यह बढ़त डॉलर की आक्रामकता में मामूली ठहराव और 10 से 30 वर्ष की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई हल्की गिरावट के चलते संभव हुई।\n\nडॉलर का वैश्विक वर्चस्व, मौद्रिक तंत्र और लिक्विडिटी टूल्स\nअमेरिकी डॉलर (USD) न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा है, बल्कि कई देशों में यह स्थानीय नकदी के समानांतर अनौपचारिक रूप से भी प्रचलन में है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88% से अधिक हिस्से में डॉलर शामिल है, जो प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेन-देन को दर्शाता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड से वैश्विक आरक्षित मुद्रा का दर्जा छीन लिया था। 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के टूटने तक इसका मूल्य सोने से जुड़ा हुआ था।\n\nडॉलर के मूल्य का सबसे मुख्य चालक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है, जिसके दो कानूनी अधिदेश हैं: मूल्य स्थिरता यानी मुद्रास्फीति नियंत्रण और पूर्ण रोजगार। जब महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर भागती है, तो फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई घटती है या बेरोजगारी बढ़ती है, तो दरों में कटौती डॉलर को कमजोर करती है।\n\nअभूतपूर्व वित्तीय संकटों में फेड क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है, जिसमें केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थाओं से सरकारी बॉन्ड खरीदकर वित्तीय प्रणाली में भारी लिक्विडिटी डालता है। जैसा कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट में देखा गया था, यह व्यवस्था डॉलर को कमजोर करने का कारण बनती है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में केंद्रीय बैंक परिपक्व हो चुके बॉन्ड के मूलधन का पुनर्निवेश बंद कर देता है, जिससे बाजार से नकदी घटती है और अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिलती है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की मजबूती के कारण वैश्विक आयात खर्च और घरेलू मुद्रा के अवमूल्यन का जोखिम बढ़ जाता है।\n\n• भारत में प्रभाव: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक कल-पुर्जों का आयात अधिक महंगा हो सकता है। इससे घरेलू बाजार में रुपये पर दबाव बढ़ेगा और आयातित महंगाई के चलते खुदरा कीमतों पर असर पड़ सकता है।\n• वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.80% के करीब रहने से विदेशी संस्थागत निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी वापस खींच सकते हैं। यदि डॉलर इंडेक्स 102.50 के पार निकलता है, तो पोर्टफोलियो का झुकाव सुरक्षित डॉलर संपत्तियों की ओर बढ़ेगा।\n• विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर के ऊंचे स्तरों पर टिके रहने से विदेश में पढ़ाई और यात्रा का बजट बढ़ जाएगा। ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिए मुद्रा विनिमय दरों पर नजर रखना जरूरी होगा।\n• कमोडिटी और सोना खरीदारों के लिए: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव $4,150 पर टिके रहने के बावजूद डॉलर की तेजी घरेलू स्तर पर सोने को और महंगा कर सकती है। खरीदारों को अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों के आने तक नए सौदों में सावधानी बरतनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nफेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा दरों में आक्रामक कटौती से इनकार करने और यूरोप में संप्रभु ऋण संकट गहराने की वजह से डॉलर इंडेक्स अपने उच्चतम स्तरों के करीब टिका हुआ है।\n\n• लगातार मुद्रास्फीति दबाव: अमेरिका में महंगाई पिछले साढ़े पांच वर्षों से फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार और नए टैरिफ के खतरों ने उत्पादन लागत को ऊंचा बनाए रखा है।\n• यूरोप में बॉन्ड संकट: फ्रांस की 10-वर्षीय यील्ड 4.90% तक पहुंचने और आगामी चुनावों से जुड़े राजकोषीय तनाव ने यूरो को 17 महीने के निचले स्तर पर धकेल दिया है। यूरो की कमजोरी ने डॉलर इंडेक्स को परोक्ष रूप से मजबूत किया है।\n• अनिश्चित दर परिदृश्य: गवर्नर वॉलर द्वारा किसी निश्चित बैठक में दरों में वृद्धि का वादा न करने के बावजूद बाजार दिसंबर में 80% दर वृद्धि की संभावना देख रहा है। मिशिगन विश्वविद्यालय के सर्वेक्षण में मुद्रास्फीति उम्मीदें बढ़ने की आशंका ने डॉलर में खरीदारी बनाए रखी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर रुक गया है?\nडॉलर इंडेक्स 102.50 के प्रतिरोध स्तर के ठीक नीचे रुका है, जो पिछले चार कारोबारी सत्रों में इसकी तीसरी रुकावट है।\n\n2. फेड गवर्नर वॉलर ने मुद्रास्फीति के किन कारणों का उल्लेख किया?\nउन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार से जुड़ी बढ़ती तकनीकी लागत और नए व्यापारिक शुल्कों (टैरिफ) के खतरे को प्रमुख कारण बताया।\n\n3. वायदा बाजार में ब्याज दर वृद्धि की क्या संभावनाएं हैं?\nवायदा बाजार 27-28 अक्टूबर की बैठक में दर वृद्धि की संभावना लगभग 20% और 8-9 दिसंबर की बैठक के लिए करीब 80% मान रहा है।\n\n4. फ्रांस के बॉन्ड बाजार का यूरो पर क्या असर हो रहा है?\nफ्रांस की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.90% के करीब पहुंचने और बजटीय चिंताओं के कारण यूरो 1.1150 के पास 17 महीने के निचले स्तर पर आ गया है।\n\n5. मिशिगन विश्वविद्यालय के सर्वेक्षण का बाजार पर क्या असर हो सकता है?\nयदि एक साल की मुद्रास्फीति अपेक्षा 4.6% से ऊपर आती है, तो डॉलर इंडेक्स 102.50 के स्तर को तोड़कर 103.00 की ओर बढ़ सकता है।",
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  "category": "बाज़ार",
  "publishedAt": "2026-10-08",
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