फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट, 0.7150 के नीचे फिसली मुद्रा अमेरिकी केंद्रीय बैंक के संभावित ब्याज दर फैसले और बॉन्ड यील्ड में तेजी के दबाव से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7120 के पास आ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भारी दबाव का सामना कर रहा है। फेडरल रिजर्व द्वारा पिछले तीन वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की प्रबल संभावना के बीच अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है। इसके असर से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7150 के अहम स्तर से फिसलकर 0.7120 के करीब कारोबार करता नजर आया। मुद्रा बाजार से जुड़े कारोबारी अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी मौद्रिक नीति घोषणा और उसके बाद होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। फेडरल रिजर्व की नीति और डॉलर का दबदबा अमेरिकी केंद्रीय बैंक की बैठक के नतीजों से पहले बाजार में 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। सिडनी स्थित कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया में मुद्रा रणनीतिकार कैरोल कोंग का आकलन है कि यदि फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की जाती है तो अमेरिकी मुद्रा को थोड़ा सहारा मिल सकता है। नीतिगत बैठक समाप्त होने के बाद फेड चेयरमैन केविन वार्श एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि वार्श अपने संबोधन में भविष्य में और दर वृद्धियों की संभावना को खारिज करते हैं तो अल्पकाल में अमेरिकी डॉलर पर दबाव बन सकता है। इसके विपरीत, यदि फेड नीति निर्माताओं की टिप्पणियां आक्रामक रुख दर्शाती हैं, तो यह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा में जोरदार तेजी ला सकती हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से उपजी महंगाई की चिंताएं और बढ़ते अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल भी अमेरिकी डॉलर को मजबूत कर रहे हैं। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की मांग को बढ़ा रहा है, जिसका सीधा असर जोखिम भरी संपत्तियों और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का रुख और बढ़ती यील्ड ऑस्ट्रेलिया के घरेलू मोर्चे पर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने अपनी आधिकारिक नकदी दर को 4.35% पर स्थिर रखा हुआ है। चालू वर्ष की शुरुआत में केंद्रीय बैंक ने लगातार तीन बार दरों में वृद्धि की थी। देश में कोर मुद्रास्फीति लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिसके चलते ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की अटकलें तेज हो गई हैं। आरबीए रेट ट्रैकर के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय बाजार इस बात की करीब 78% संभावना जता रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक अपनी आगामी बोर्ड बैठक में आधिकारिक नकदी दर को बढ़ाकर 4.60% कर देगा। यह बैठक सितंबर के अंत में निर्धारित है। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड बाजारों में बिकवाली का दौर ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गया है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5% से ऊपर निकलने के बाद ऑस्ट्रेलिया की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 8 आधार अंक उछलकर 5.41% पर पहुंच गई। सोसिएते जेनेराल के विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पिछले सप्ताह 4.90% का स्तर पार करने के बाद से खिंची हुई स्थिति में है, जबकि जर्मन 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 3.30% के स्तर पर पहुंच गई, जिससे पता चलता है कि मुख्य बॉन्ड बाजार बहुत कम समय में तेजी से बदले हैं। तकनीकी स्तर और चार्ट का विश्लेषण मुद्रा जोड़ी के चार्ट पर नजर डालें तो ऊपर की ओर शुरुआती प्रतिरोध बॉलिंजर बैंड के मध्य बिंदु यानी 20-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज के पास 0.7170 पर दिखाई दे रहा है। यदि खरीदार दोबारा नियंत्रण हासिल करते हैं, तो ऊपरी बैंड 0.7230 के आसपास रुकावट का काम करेगा। दूसरी ओर, नीचे की तरफ तात्कालिक सहारा 0.7125 के स्तर पर स्थित है, जबकि निचला बैंड 0.7108 पर स्थित है। यदि कीमत इस स्तर से नीचे फिसलती है, तो 100-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज 0.7080 पर अगला बड़ा तकनीकी स्तर साबित होगा। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस समय मुद्रा जोड़ी 0.7121 के आसपास कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.7115 से मामूली बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 48 पर है, जबकि एमएसीडी तटस्थ से मंद गति का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 0.7142 पर और 50-दिवसीय ईएमए 0.7107 पर बना हुआ है। दैनिक चार्ट पर 50-दिवसीय ईएमए और 200-दिवसीय ईएमए के बीच बना गोल्डन क्रॉस लंबी अवधि के अपट्रेंड की पुष्टि करता है, लेकिन मौजूदा समय में 19 का एडीएक्स संकेत दे रहा है कि बाजार एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है। ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था, लौह अयस्क और चीन का प्रभाव ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मूल्यांकन में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरों का स्तर सबसे प्रमुख कारक माना जाता है। चूंकि ऑस्ट्रेलिया प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर देश है, इसलिए इसकी अर्थव्यवस्था और मुद्रा के लिए लौह अयस्क का निर्यात अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्ष 2021 के आंकड़ों के अनुसार ऑस्ट्रेलिया हर साल लगभग 118 अरब डॉलर के लौह अयस्क का निर्यात करता है, जिसका प्राथमिक खरीदार चीन है। जब लौह अयस्क के अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़ते हैं, तो ऑस्ट्रेलिया की मुद्रा की मांग में इजाफा होता है और व्यापार संतुलन बेहतर होता है, जिससे मुद्रा को ताकत मिलती है। वहीं, कीमतों में गिरावट आने पर विपरीत स्थिति बनती है। चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लिहाजा चीनी अर्थव्यवस्था की सेहत सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को प्रभावित करती है। जब चीन की आर्थिक विकास दर मजबूत होती है, तो वह ऑस्ट्रेलिया से अधिक कच्चा माल, वस्तुएं और सेवाएं खरीदता है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया का व्यापार संतुलन, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च का अंतर है, मुद्रा की दिशा तय करता है। अधिशेष व्यापार संतुलन मुद्रा को सहारा देता है, जबकि घाटा बढ़ने पर इस पर नकारात्मक असर पड़ता है। वैश्विक बाजारों में निवेशकों का जोखिम उठाने का मिजाज भी एक अन्य अहम घटक है, जहां जोखिम-सकारात्मक माहौल ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा के पक्ष में काम करता है। अन्य वैश्विक बाजारों और संपत्तियों की स्थिति वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों में भी डॉलर की मजबूती का साफ असर देखने को मिल रहा है। डॉलर इंडेक्स में बढ़त के बीच यूएसडी/जेपीवाई 155.00 के स्तर को पार कर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा की स्थिति को और बल दिया है। हालांकि, फेड के फैसले और बैंक ऑफ जापान की आगामी बैठक से पहले जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की बढ़त सीमित दायरे में रही। कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतें अमेरिकी डॉलर और ऊंची यील्ड के दबाव में 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे बनी हुई हैं। उपज न देने वाली इस पीली धातु पर बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा नकारात्मक असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त क्रिप्टोकरेंसी बाजार में क्लैरिटी एक्ट के सीनेट में आगे न बढ़ पाने के कारण मंगलवार को एथेरियम गिरकर 2,400 डॉलर पर आ गया था, हालांकि खरीदार अभी भी इसमें सक्रियता बनाए हुए हैं। ब्रिटेन के आर्थिक मोर्चे पर बुधवार को अगस्त महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े जारी होने वाले हैं, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत घोषणा से ठीक पहले ब्रिटिश पाउंड में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। वहीं जापान के केंद्रीय बैंक द्वारा अपनी दशकों पुरानी अत्यंत ढीली मौद्रिक नीति को और सख्त करने की तैयारी से वैश्विक स्तर पर येन से वित्तपोषित होने वाले सौदों के नए चरण में प्रवेश करने के आसार बन रहे हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियों में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर सीधा असर पड़ेगा। • भारतीय आयातकों और निर्यातकों पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर में मजबूती से भारतीय रुपये पर दबाव आ सकता है। आयातकों को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है जबकि निर्यातकों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है। • वैश्विक वित्तीय बाजारों पर प्रभाव: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 5% से ऊपर रहने से वैश्विक पूंजी सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित हो सकती है। उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ सकता है। • कमोडिटी और धातु बाजार: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नरमी और चीनी अर्थव्यवस्था की गतिशीलता धातुओं की मांग को प्रभावित करती है। घरेलू बाजार में आयातित कच्चे माल की लागत घट-बढ़ सकती है। • विदेशी यात्रा और पढ़ाई: ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए मुद्रा में उतार-चढ़ाव फीस के बजट को प्रभावित कर सकता है। डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा कमजोर होने पर भारतीय छात्रों को राहत मिल सकती है। ऐसा क्यों हुआ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में यह गिरावट फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी और वैश्विक बॉन्ड प्रतिफल में आई भारी उछाल के कारण हुई है। • फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति: अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा तीन वर्षों में पहली बार दरों में वृद्धि किए जाने की लगभग 90% संभावना जताई जा रही है। इससे डॉलर को व्यापक समर्थन मिला है और जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ा है। • वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल: कच्चे तेल की कीमतों के कारण बढ़ी महंगाई ने अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड को 5% से ऊपर पहुंचा दिया है। इसके असर से ऑस्ट्रेलियाई 10-वर्षीय यील्ड भी बढ़कर 5.41% पर पहुंच गई है। • भू-राजनीतिक अनिश्चितता: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच तनातनी ने निवेशकों को डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों में शरण लेने के लिए प्रेरित किया है। इसके चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्राओं की बिकवाली हुई है। • चीन और कमोडिटी कारक: ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार चीन की आर्थिक स्थिति और लौह अयस्क की वैश्विक मांग भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा रही है। सवाल-जवाब 1. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर किस स्तर के नीचे फिसला है? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7150 के स्तर के नीचे फिसलकर 0.7120 के आसपास कारोबार कर रहा है। 2. फेडरल रिजर्व से बाजार को क्या उम्मीद है? बाजार को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व पिछले तीन वर्षों में पहली बार 25 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि कर सकता है। 3. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की वर्तमान आधिकारिक नकदी दर क्या है? रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की आधिकारिक नकदी दर इस समय 4.35% पर स्थिर रखी गई है। 4. क्या ऑस्ट्रेलिया में आगे ब्याज दरें बढ़ सकती हैं? बाजार में लगभग 78% संभावना जताई जा रही है कि आरबीए आगामी बैठक में दर को बढ़ाकर 4.60% कर सकता है। 5. ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था के लिए कौन सा निर्यात सबसे महत्वपूर्ण है? ऑस्ट्रेलिया के लिए लौह अयस्क सबसे बड़ा निर्यात है, जो सालाना लगभग 118 अरब डॉलर का योगदान देता है। 6. वैश्विक बॉन्ड बाजारों में क्या हलचल रही? अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के पार चली गई, जबकि ऑस्ट्रेलियाई 10-वर्षीय यील्ड 5.41% पर पहुंच गई। https://trendkia.com/market/fed-ke-phaisale-se-pahale-australian-dollar-men-giravata-0-7150-ke-niche-phisali-mudra-33874 TrendKia — Har trend, sabse pehle.