# फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बीच कच्चे तेल की नरमी से सोने को मिली राहत, $4,358 के स्तर पर टिकने का प्रयास

> वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के कारण सोने को कुछ राहत मिली है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण बड़ी बढ़त की संभावनाएं सीमित हैं।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/fed-ke-sakhta-rukha-ke-bicha-kachche-tela-ki-narami-se-sone-ko-mili-rahata-4-358-ke-stara-para-tikane-ka-prayasa-32982 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, कमोडिटी मार्केट, फेडरल रिजर्व, कच्चा तेल, ब्याज दरें, तकनीकी विश्लेषण, वित्त

वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच सोने की कीमतों में एक महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है। ऊर्जा क्षेत्र की ओर से आ रहे भारी दबाव में कमी आने के बाद सोने की कीमतें $4,358 के स्तर के आसपास स्थिर होती दिख रही हैं। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में जारी आक्रामक तेजी अब कुछ शांत होने लगी है, जिससे सोने को एक राहत मिली है। इससे पहले सोने की कीमतें भारी दबाव में कारोबार कर रही थीं। हालांकि, इस मामूली सुधार के बावजूद सोने की कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित नजर आ रही है। वैश्विक वित्तीय बाजार अभी भी दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों, विशेष रूप से फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख से प्रभावित हैं। फेड का लगातार यह कहना है कि आने वाले लंबे समय तक ब्याज दरें उच्च स्तर पर बनी रहेंगी। बाजार की समाप्ति पर सोने की कीमत $4,358 पर दर्ज की गई, जो इसके पिछले बंद $4,388 की तुलना में 0.68% की गिरावट को दर्शाती है। ऐसे में, सोने के सुरक्षित निवेश वाले आकर्षण और बढ़ती ब्याज दरों के बीच जारी रस्साकशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

 

## फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और बाजार की उम्मीदें

बुधवार को फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी करने का फैसला किया। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिकांश नीति निर्माताओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस वर्ष के अंत से पहले कम से कम एक और ब्याज दर वृद्धि की जा सकती है। डॉयचे बैंक के रणनीतिकारों के अनुसार, इस निरंतर आक्रामक रुख ने अमेरिकी यील्ड कर्व के अगले हिस्से में एक बड़ा बदलाव पैदा कर दिया है। मुद्रा बाजार अब तेजी से एक और अधिक सख्त मौद्रिक वातावरण की उम्मीदों को अपने में समाहित कर रहा है। निवेशक अब अगले साल जून तक फेड द्वारा ब्याज दरों में एक और 75 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की पूरी संभावना मानकर चल रहे हैं। इस बदलाव के कारण एक ही दिन में यील्ड में 10.8 बेसिस पॉइंट का उछाल देखा गया। इसके अलावा, बाजार के रुख से संकेत मिलता है कि आगामी अक्टूबर की बैठक में ही एक और ब्याज दर वृद्धि की 50% संभावना बनी हुई है। ब्याज दरों पर बना यह लगातार दबाव सोने के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रहा है। चूंकि सोना एक बिना यील्ड वाली संपत्ति है, इसलिए यह सुरक्षित सरकारी बॉन्ड की तरह नियमित ब्याज या लाभांश नहीं देता है। यही कारण है कि जब सुरक्षित बॉन्ड पर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने को अपने पास रखने की अवसर लागत काफी बढ़ जाती है।

 

## कच्चे तेल का प्रभाव और ओमान में जहाजों का हस्तांतरण

सोने के बाजार में हालिया सुधार के पीछे सबसे प्रमुख कारकों में से एक कच्चे तेल की कीमतों का शांत होना रहा है। उद्योग जगत की रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब एशियाई रिफाइनिंग कंपनियों को अतिरिक्त कच्चे तेल की खेप उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इस काम को ओमान के सोहर बंदरगाह के पास समुद्र में ही जहाजों के बीच होने वाले तेल हस्तांतरण के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता का सोने से सीधा संबंध है। ऐतिहासिक रूप से ऊर्जा की कीमतों और मुद्रास्फीति के बीच गहरा संबंध रहा है। तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर व्यापक प्रभाव डालती हैं, जिससे उत्पादन और परिवहन लागत में भारी वृद्धि होती है। यह स्थिति अंततः महंगाई की उम्मीदों को बेकाबू कर देती है, जिसके कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को आक्रामक मौद्रिक नीतियां अपनाने और ब्याज दरों को बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। चूंकि उच्च ब्याज दरें सोने के आकर्षण को कम करती हैं, इसलिए ऊर्जा की कीमतों में होने वाली कोई भी वृद्धि परोक्ष रूप से सोने को नुकसान पहुंचाती है। इसके विपरीत, जब तेल की कीमतें ठंडी होती हैं, तो बेकाबू महंगाई और अधिक ब्याज दरों को लेकर बना तत्काल डर थोड़ा कम हो जाता है, जिससे सोने को अस्थायी सहारा मिलता है।

 

## तकनीकी चार्ट विश्लेषण और प्रमुख संकेतक

XAU/USD के दैनिक चार्ट का विश्लेषण करने पर एक बहुत ही सूक्ष्म तकनीकी स्थिति सामने आती है। सोने ने अपने हालिया सत्र को $4,358 पर समाप्त किया, जो कि इसकी 52-सप्ताह की ऐतिहासिक सीमा $3,661 से $5,586 के बीच बनी हुई है। इस दौरान दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिन के औसत का 0.40 गुना दर्ज किया गया। तकनीकी दृष्टिकोण से, सोना वर्तमान में एक दीर्घकालिक गिरावट के दौर से गुजर रहा है। चार्ट पर एक बियरिश डेथ क्रॉस देखा जा सकता है, जहां 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA50 जो कि $4,390 पर है, वह 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA200 जो $4,419 पर है, के नीचे चला गया है।

वर्तमान में $4,358 की कीमत इसके 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA20 से नीचे बनी हुई है, जो $4,426 पर स्थित है। यह स्तर सोने के लिए एक मजबूत और गतिशील रेजिस्टेंस के रूप में काम कर रहा है। इससे पहले के सत्रों में सोना $4,314.02 के स्तर के आसपास देखा गया था, जहां उसे $4,364.99 के पिछले 20-दिवसीय EMA के नीचे संघर्ष करना पड़ा था। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI वर्तमान में 45 पर है, जो कि 50 के तटस्थ स्तर से थोड़ा नीचे है। यह दर्शाता है कि बाजार में इस समय तेजी की कमी है, न कि यह कि बाजार ओवरसोल्ड स्थिति में आ गया है। इसके अलावा, मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD संकेतक भी बियरिश सेंटीमेंट का संकेत दे रहा है। यह 24.00 की सिग्नल लाइन के मुकाबले -5.17 पर बना हुआ है, जिसके कारण हिस्टोग्राम -29.17 के ऋणात्मक स्तर पर है।

महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों की बात करें तो दैनिक पिवट पॉइंट $4,342 पर स्थापित है। ऊपर की ओर पहला रेजिस्टेंस यानी R1 $4,390 पर और दूसरा रेजिस्टेंस यानी R2 $4,422 पर है। इसके अतिरिक्त, 8 सितंबर का उच्च स्तर $4,443 भी एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र है। नीचे की ओर, पहला प्रमुख सपोर्ट यानी S1 $4,310 पर है, जबकि इसके बाद अधिक मजबूत सपोर्ट यानी S2 $4,262 पर है। यदि ये स्तर टूटते हैं, तो सोने की कीमतें $4,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकती हैं, विशेष रूप से तब जब यह बुधवार के निचले स्तर $4,235.40 के नीचे चला जाए। एवरेज ट्रू रेंज यानी ATR इस समय 109.28 पर है, जो दैनिक अस्थिरता को प्रदर्शित करता है। ट्रेडर अक्सर इसका उपयोग अपने स्टॉप-लॉस बफर को निर्धारित करने के लिए करते हैं। फिलहाल 20-दिन का सपोर्ट लगभग $4,273 और रेजिस्टेंस $4,755 के आसपास आंका गया है।

 

## सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का महत्व

मानव इतिहास में सोने की हमेशा से एक अनूठी संरचनात्मक भूमिका रही है। सदियों से इसका उपयोग मूल्य के एक विश्वसनीय भंडार और विनिमय के माध्यम के रूप में किया जाता रहा है। आज के समय में, जहां आभूषणों के निर्माण में इसकी चमक और उपयोगिता बनी हुई है, वहीं वित्तीय दुनिया में इसे एक प्रमुख सेफ-हेवन एसेट माना जाता है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक विवादों या गंभीर आर्थिक मंदी के दौरान निवेशक जोखिम भरे शेयरों से अपना पैसा निकालकर सोने में लगाना पसंद करते हैं। चूंकि सोना किसी विशिष्ट देश या सरकार की नीतियों पर निर्भर नहीं करता, इसलिए यह फिएट मुद्राओं की तरह अवमूल्यन के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रहता है। इसी वजह से इसे मुद्रास्फीति और गिरती मुद्राओं के खिलाफ एक बेहतरीन हेज माना जाता है।

 

## केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और वैश्विक भंडार

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को सहारा देने के लिए ये बैंक अपने भंडार में विविधता लाते हैं। सोने की खरीदारी करके वे अपनी अर्थव्यवस्था की आंतरिक शक्ति को प्रदर्शित करते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की साख मजबूत होती है। भारी मात्रा में सोने का भंडार होना देश की ऋणशोधन क्षमता का एक बड़ा प्रमाण माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड खरीदारी करते हुए अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा, जिसकी कीमत लगभग 70 बिलियन डॉलर थी। रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बाद से यह किसी भी एक वर्ष में केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई सबसे बड़ी खरीदारी है। इस खरीदारी में मुख्य रूप से चीन, भारत और तुर्की जैसे उभरते देशों के केंद्रीय बैंक आगे रहे हैं, जो अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं।

 

## वैश्विक मुद्राओं और क्रॉस-एसेट पर प्रभाव

सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के साथ हमेशा से एक विपरीत संबंध रहा है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोने की कीमत घट जाती है, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब शेयर बाजार में बड़ी तेजी आती है, तो निवेशक सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों से पैसा निकालकर जोखिम वाले शेयरों में लगाने लगते हैं। अमेरिकी डॉलर के इस रुख का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी पड़ा है। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD में नई खरीदारी देखी गई, जिससे यह फिर से 0.7100 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी तब आई जब अमेरिकी डॉलर की फेड द्वारा प्रेरित आक्रामक बढ़त पर कुछ रोक लगी। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और अमेरिका-ईरान के बीच राजनयिक प्रयासों से भी समर्थन मिला।

दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी एशियाई सत्र में 156.00 के नीचे जाने के बाद फिर से संभल गई। बैंक ऑफ जापान यानी BoJ द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों से जापानी येन को सहारा मिल रहा है। जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने एक दशक से अधिक समय तक वैश्विक निवेश के लिए खरबों डॉलर का वित्तपोषण किया था, जिससे येन दुनिया का सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बन गया था। अब BoJ द्वारा नीति में बदलाव की उम्मीदों से यह पुराना समीकरण बदल रहा है। इस बीच, यूरोपीय सत्र में सोने ने अपनी बढ़त को जारी रखा और पिछले छह सप्ताह के निचले स्तर से उबरने में कामयाब रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट के कारण डॉलर में मुनाफावसूली हुई, जिससे सोने को बल मिला। हालांकि, फेड के कड़े रुख और मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण डॉलर को लगातार निचले स्तर पर समर्थन मिल रहा है, जो सोने की इस बढ़त को सीमित कर सकता है।

 इस विश्लेषण को तैयार करने वाले विश्लेषक सागर दुआ वर्ष 2014 से ही वित्तीय बाजारों से जुड़े हुए हैं और चार्ट विश्लेषण के जरिए बाजार के रुझानों की व्याख्या करने का एक लंबा अनुभव रखते हैं।

## इसका आप पर असर
खुदरा सोना खरीदारों और कमोडिटी निवेशकों के लिए बाजार की मौजूदा स्थिरता सावधानी से रणनीति बनाने का अवसर देती है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी से अल्पकालिक महंगाई का डर कम हुआ है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें सोने की लंबी तेजी पर रोक लगाए रखेंगी।

- **निवेश रणनीति:** खुदरा निवेशकों को आने वाले समय में सोने की कीमतों में एक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि उच्च ब्याज दरें डॉलर को मजबूती प्रदान करती रहेंगी। इसका मतलब यह है कि किसी भी अल्पकालिक तेजी को दीर्घकालिक ब्रेकआउट मानने के बजाय सीमित ट्रेडिंग अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने के बाजार में हालिया हलचल वैश्विक ऊर्जा कीमतों और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों के बीच के जटिल संबंधों का परिणाम है। कच्चे तेल की नरमी ने राहत तो दी है, लेकिन उच्च ब्याज दरों का ढांचागत प्रभाव सोने की तेजी को रोक रहा है।

- **कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार:** सऊदी अरब द्वारा ओमान के सोहर बंदरगाह के पास जहाजों के माध्यम से एशियाई रिफाइनरियों को अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति करने के फैसले से ऊर्जा बाजार शांत हुआ है। इससे बेकाबू महंगाई का खतरा टल गया है जिसने पहले सोने पर दबाव बनाया हुआ था।
- **फेडरल रिजर्व का सख्त रुख:** फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और आगे भी सख्ती जारी रखने के संकेतों ने बॉन्ड यील्ड को ऊंचा बनाए रखा है। जून तक एक और 75 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की बाजार की उम्मीदें अमेरिकी डॉलर को मजबूत कर रही हैं जिससे सोने की बढ़त सीमित है।
- **वैश्विक तरलता का रुख:** बैंक ऑफ जापान जैसे बड़े केंद्रीय बैंकों द्वारा अति-उदार मौद्रिक नीतियों को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में बढ़ने से वैश्विक वित्तीय समीकरण बदल रहे हैं। इससे विभिन्न मुद्राओं में उतार-चढ़ाव आ रहा है जो परोक्ष रूप से सोने को प्रभावित करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हालिया कारोबारी सत्र में सोने की समाप्ति कीमत क्या रही?
सोने की कीमतें हालिया कारोबारी सत्र के अंत में $4,358 पर बंद हुईं, जो इसके पिछले बंद $4,388 से 0.68% की गिरावट को दर्शाती हैं।

### 2. कच्चे तेल की कीमतों का सोने के बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है?
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंताओं को बढ़ाती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने का खतरा बढ़ता है। यह स्थिति सोने के लिए नुकसानदेह होती है, जबकि तेल में नरमी सोने को राहत देती है।

### 3. सोने के लिए ऊपर और नीचे के प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं?
सोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस $4,390 (R1) और $4,422 (R2) पर है, जबकि नीचे की ओर पहला सपोर्ट $4,310 (S1) और दूसरा सपोर्ट $4,262 (S2) पर स्थित है।

### 4. डॉयचे बैंक के विश्लेषकों के अनुसार बाजार आगामी महीनों में क्या उम्मीद कर रहा है?
रणनीतिकारों के अनुसार, बाजार अगले साल जून तक फेड द्वारा ब्याज दरों में 75 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी की पूरी उम्मीद कर रहा है।

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