# फेड की ब्याज दर बढ़ने की आशंका से सोना 4300 डॉलर के नीचे फिसला, सिस्टमैटिक फंड्स ने घटाईं पोजीशन

> फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक और महंगे ईंधन के दबाव में सोने में जोरदार बिकवाली देखी गई है। हालांकि लंबे समय के निवेशकों के लिए केंद्रीय बैंकों की खरीद और डॉलर में संभावित कमजोरी को मजबूत आधार माना जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/fed-ki-byaj-dar-badhne-ki-aashanka-se-gold-4300-dollar-ke-neeche-phisla-systematic-funds-ne-ghatai-position-34021 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, फेडरल रिजर्व, ब्याज दर, कमोडिटी बाजार, अमेरिकी डॉलर, क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी नीतिगत फैसले से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल काफी तेज हो गई है। केंद्रीय बैंक की ओर से इस हफ्ते ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं और ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना हुआ है। इसी क्रम में पीली धातु सोमवार को फिसलकर 4,300 डॉलर के स्तर के नीचे चली गई। अमेरिकी डॉलर की मांग में जोरदार उछाल आने की वजह से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में तेज मुनाफावसूली दर्ज की गई है। इस गिरावट के बीच सिस्टमैटिक ट्रेंड फॉलोइंग फंड्स यानी सीटीए बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हुए अपनी मौजूदा नेट-लॉन्ग पोजीशन का करीब आधा हिस्सा बेच चुके हैं।

## सीटीए की बिकवाली और लंबी अवधि के फंडामेंटल्स
कमोडिटी ट्रेडिंग एडवाइजर्स यानी सीटीए की ओर से की जा रही इस तेज बिकवाली के बावजूद बाजार के जानकारों का मानना है कि इसका समग्र प्रभाव सीमित ही रहेगा। जानकारों का कहना है कि डॉलर की क्रय शक्ति में गिरावट का विषय फिर से जोर पकड़ रहा है, जो सोने के लिए सकारात्मक माहौल बनाता है। इसके साथ ही विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार खरीदारी और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ईटीएफ में नए सिरे से हो रहा संचय लंबी अवधि के निवेशकों को एक मजबूत सहारा दे रहा है। ऐसे में बाजार विश्लेषकों का आकलन है कि मौजूदा समय में सोने में दिखने वाली किसी भी अल्पकालिक कमजोरी को खरीदारी के एक बेहतरीन अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

## मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा
फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक से पहले वैश्विक मुद्रा बाजार में भी उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यानी एयूडी/यूएसडी सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान करीब 0.7140 के दायरे में डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर तक पहुंच गई। हालांकि निचले स्तरों पर बहुत ज्यादा बिकवाली का दौर आगे नहीं बढ़ पाया। इसके बावजूद हाजिर भाव 0.7100 के मध्य स्तर के ठीक ऊपर कारोबार करते हुए दिन के दौरान लगभग 0.25 प्रतिशत कमजोर रहे।

दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन यानी यूएसडी/जेपीवाई जोड़ी में हफ्ते की शुरुआत में लिवाली का माहौल बना। एशियाई सत्र के दौरान यह जोड़ी सुधरकर 154.00 के करीब पहुंच गई, जिससे पिछले शुक्रवार को हुए नुकसान का कुछ हिस्सा संभल गया। इसके बावजूद पिछले एक हफ्ते से कीमतें एक सीमित दायरे में ही बनी हुई हैं। यह दायरा पिछले मंगलवार को छुए गए करीब सात महीने के निचले स्तर से ज्यादा दूर नहीं है, क्योंकि विदेशी मुद्रा कारोबारी प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं।

## क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बढ़त का रुख
पारंपरिक वित्तीय बाजारों में डॉलर की मजबूती के बीच डिजिटल संपत्तियों के बाजार में तेजी का माहौल रहा। सोमवार को बिटकॉइन बढ़त के साथ 77,884 डॉलर के आसपास कारोबार करता हुआ दिखा। व्यापक क्रिप्टो बाजार में आई तेजी के साथ बिटकॉइन ने अपनी मजबूती बरकरार रखी। दूसरी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में एथेरियम और रिपल भी बिटकॉइन के न्यूट्रल से लेकर बुलिश दायरे का अनुसरण करते हुए नजर आए। एथेरियम ने जहां 2,521 डॉलर का अहम सपोर्ट स्तर मजबूती से संभाले रखा, वहीं रिपल भी 1.38 डॉलर के अपने महत्वपूर्ण स्तर पर टिका रहा।

## फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का परिदृश्य
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हाल ही में सामने आए पीपीआई और सीपीआई आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में वृद्धि के दांव तेजी से बढ़े हैं। बाजार की नजर अब फेडरल रिजर्व के अद्यतन डॉट प्लॉट पर टिकी हुई है, जो यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा कि डॉलर की आगे की दिशा क्या होगी। इसके साथ ही ब्याज दरों को कम रखने के डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बीच वॉर्श की स्वतंत्रता की भी परीक्षा मानी जा रही है। बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट रुख है कि यदि अमेरिकी डॉलर को अपनी हालिया बढ़त को आगे भी जारी रखना है, तो इसके लिए फेडरल रिजर्व को मौजूदा सख्त मौद्रिक रुख की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।

## इसका आप पर असर
सोने के भाव में 4,300 डॉलर के नीचे आई गिरावट और अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि की संभावनाओं का सीधा प्रभाव वैश्विक और भारतीय बाजारों पर पड़ता है।

- **भारत में:** घरेलू बाजार में सोने के खुदरा और वायदा भाव में अल्पकालिक नरमी देखने को मिल सकती है। ऐसे में आगामी शादी-ब्याह के सीजन के लिए आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को थोड़े घटे दामों का फायदा मिल सकता है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** कमोडिटी ट्रेडिंग फंड्स की बिकवाली के बाद भी केंद्रीय बैंकों की खरीद बाजार को संभाले हुए है। लंबी अवधि के पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए गिरावट पर धीरे-धीरे खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है।
- **मुद्रा विनिमय:** मजबूत होता अमेरिकी डॉलर अन्य विदेशी मुद्राओं पर दबाव बना रहा है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेशी शिक्षा के खर्च पर पड़ सकता है क्योंकि डॉलर में भुगतान महंगा हो जाता है।
- **क्रिप्टो निवेशकों के लिए:** सोने में बिकवाली के विपरीत डिजिटल टोकन स्थिर और सकारात्मक दायरे में बने हुए हैं। बिटकॉइन के 77,884 डॉलर और एथेरियम के 2,521 डॉलर पर टिके रहने से जोखिम संपत्तियों में स्थिरता बनी हुई है।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने में तेज गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाएं और डॉलर की मांग में आया उछाल है। इसके साथ ही ऊर्जा की ऊंची लागत और सिस्टमैटिक फंड्स द्वारा पोजीशन खाली करने से यह दबाव और बढ़ गया।

- **दर वृद्धि की आशंका:** हालिया पीपीआई और सीपीआई रिपोर्टों में महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं। ऊंची ब्याज दरें गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की चमक को घटा देती हैं।
- **सीटीए की तेज बिकवाली:** ट्रेंड-फॉलोइंग सीटीए फंड्स ने बाजार में रुख भांपते हुए अपनी कुल नेट-लॉन्ग पोजीशन का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा बेच दिया। इस अचानक आई भारी बिकवाली ने सोने को 4,300 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे धकेल दिया।
- **ऊर्जा की ऊंची कीमतें:** ऊर्जा बाजार में तेल और गैस के ऊंचे दामों ने उत्पादन लागत और महंगाई के दबाव को बरकरार रखा है। इससे फेडरल रिजर्व को नीतिगत सख्ती जारी रखने के लिए अतिरिक्त कारण मिल गया है।
- **आगे का नीतिगत रुख:** फेडरल रिजर्व का आगामी डॉट प्लॉट यह स्पष्ट करेगा कि दरें कितनी बढ़ेंगी। साथ ही ब्याज दरें घटाने के ट्रंप के दबाव के बीच केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता का रुख तय होना बाकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. सोने की कीमत में हालिया गिरावट का क्या स्तर रहा?
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिसलकर 4,300 डॉलर के स्तर के नीचे चला गया।

### 2. सोने में बिकवाली के मुख्य कारण क्या रहे?
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, डॉलर में उछाल, महंगे ऊर्जा दाम और सीटीए फंड्स की 50 प्रतिशत लॉन्ग पोजीशन की बिकवाली इसके प्रमुख कारण रहे।

### 3. लंबे समय के लिए सोने को किन कारकों से सहारा मिल रहा है?
केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही लगातार खरीद, ईटीएफ में नया संचय और डॉलर की क्रय शक्ति घटने की थीम से सोने को मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

### 4. क्रिप्टोकरेंसी बाजार में प्रमुख टोकन किस स्तर पर रहे?
सोमवार को बिटकॉइन 77,884 डॉलर के करीब कारोबार करता रहा, जबकि एथेरियम 2,521 डॉलर और रिपल 1.38 डॉलर के सपोर्ट स्तर पर टिके रहे।

### 5. विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ियों का क्या हाल रहा?
एयूडी/यूएसडी गिरकर करीब 0.7140 के डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर पर आ गई, जबकि यूएसडी/जेपीवाई सुधरकर 154.00 के पास पहुंच गई।

### 6. फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति में किन बातों पर नजर रखी जा रही है?
बाजार की नजर अद्यतन डॉट प्लॉट पर है, जबकि ब्याज दरों को कम रखने के ट्रंप के दबाव के बीच वॉर्श की स्वतंत्रता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

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