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  "type": "article",
  "title": "फेड की ब्याज दर नीतियों के चलते ब्रिटिश पाउंड सितंबर के नए निचले स्तर पर लुढ़का",
  "summary": "फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के संकेतों के बीच ब्रिटिश पाउंड फिसलकर 1.3300 के करीब पहुंच गया है। बैंक ऑफ इंग्लैंड और फेड की दरों में बढ़ते अंतर के कारण डॉलर को लगातार मजबूती मिल रही है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती धमक के कारण ब्रिटिश पाउंड पर दबाव गहराता जा रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आगे और बढ़ोतरी के लगातार मिल रहे संकेतों के चलते पाउंड स्टर्लिंग गिरकर 1.3300 के ठीक ऊपर पहुंच गया, जो सितंबर महीने का इसका नया निचला स्तर है। दोनों देशों के नीतिगत ब्याज दरों में उपजा अंतर वैश्विक निवेशकों को डॉलर की ओर आकर्षित कर रहा है, जिससे मुद्रा बाजार में पाउंड की बिकवाली तेज हो गई है।\n\nनीतिगत दरों में बढ़ता अंतर और डॉलर का बढ़ता आकर्षण\nयूनाइटेड किंगडम में बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा निर्धारित मुख्य नीतिगत दर, जिसे बैंक रेट कहा जाता है, दिसंबर 2025 से ही 3.75 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को दरों में ताजा वृद्धि की थी, जिसके बाद वहां ब्याज दर का दायरा 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के बीच पहुंच गया है। फेड की इस दर सीमा का मध्य बिंदु 3.875 प्रतिशत बनता है, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड की मुख्य नीतिगत दर से 0.125 प्रतिशत यानी एक चौथाई के आधे हिस्से के बराबर अधिक है।\n\nइस दर अंतर का सीधा असर यह पड़ा है कि 16 सितंबर के बाद से डॉलर में निवेश की गई पूंजी पर पाउंड की तुलना में अधिक रिटर्न या ब्याज मिल रहा है। इस वर्ष 16 सितंबर से पहले ऐसा मौका कभी नहीं आया था जब डॉलर डिपॉजिट पर पाउंड से अधिक रिटर्न मिल रहा हो। मुद्रा बाजार का यह स्थापित सिद्धांत है कि अंतरराष्ट्रीय पूंजी हमेशा बेहतर और सुरक्षित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर प्रवाहित होती है। नतीजतन, बाजार जब भी फेडरल रिजर्व की तरफ से एक और दर वृद्धि की संभावना देखता है, निवेशक पाउंड को बेचकर डॉलर में नकदी स्थानांतरित करना शुरू कर देते हैं।\n\nब्रिटेन में महंगाई का दबाव और बैंक ऑफ इंग्लैंड की आंतरिक खींचतान\nयूके की मुद्रास्फीति के मोर्चे पर स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। अगस्त के महीने में ब्रिटेन की कुल महंगाई दर 3.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से काफी ऊपर है। केंद्रीय बैंक का यह भी आकलन है कि आने वाली तिमाहियों में ऊर्जा की बढ़ती लागत इस महंगाई को और ऊपर की ओर धकेल सकती है।\n\nइसी महंगाई पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति के कुछ सदस्य दरों में बढ़ोतरी के पक्ष में लगातार आवाज उठा रहे हैं। 17 सितंबर को हुई बैठक में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरों को 3.75 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला 6-3 के बहुमत से लिया था। इस बैठक में मुख्य अर्थशास्त्री पिल के साथ बाहरी सदस्य ग्रीन और मान ने दर को बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि, बैंक रेट में आधिकारिक वृद्धि के लिए पाउंड समर्थकों को समिति के एक चौथे सदस्य के समर्थन की सख्त जरूरत है। दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व के 18 अधिकारियों में से 16 अधिकारियों ने अपने ताजा अनुमानों में यह स्पष्ट किया है कि वे इस वर्ष कम से कम एक और दर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। यदि नवंबर की बैठक में ब्रिटेन के तीन असंतुष्ट सदस्य एक और सदस्य को साथ लेकर दर बढ़ा भी लेते हैं, तब भी फेड की एक और वृद्धि के बाद पाउंड साल के अंत में फेड से एक चौथाई के आधे हिस्से यानी 0.125 प्रतिशत पीछे ही रहेगा, जैसी स्थिति मौजूदा समय में बनी हुई है।\n\nआगामी आर्थिक आंकड़े और विकास दर के संकेत\nमुद्रा बाजार की नजर अब एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी किए जाने वाले फ्लैश परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई आंकड़ों पर टिकी है, जो बुधवार को 08:30 जीएमटी पर जारी होने हैं। कारोबारियों की राय वाले इस मासिक सर्वेक्षण में 50 से ऊपर का आंकड़ा विस्तार दर्शाता है। ब्रिटेन के सेवा क्षेत्र के पीएमआई के 52.5 से घटकर 52 पर आने का अनुमान है, जबकि विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 51.7 से घटकर 51.4 रहने की उम्मीद जताई गई है।\n\nब्रिटेन के संदर्भ में सेवा क्षेत्र के आंकड़े सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि देश की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग चार-पांचवां हिस्सा सेवा क्षेत्र से ही आता है। इसके अलावा, अगस्त में यूके में सेवा क्षेत्र की महंगाई 3.4 प्रतिशत रही थी, जो कुल 3.1 प्रतिशत की महंगाई से कहीं ज्यादा है। ऐसे में दर वृद्धि के पक्षधर तीनों सदस्य अपनी दलीलों में इसी आंकड़े को आधार बनाएंगे। आर्थिक आंकड़ों के इस क्रम में गुरुवार को 23:01 जीएमटी पर जीएफके उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण भी जारी किया जाएगा, जिसके -14 से गिरकर -16 रहने का अनुमान है। यदि उपभोक्ता विश्वास में यह गिरावट आती है, तो यह दरें यथावत रखने के पक्षधर छह सदस्यों के रुख को और मजबूत करेगा। फेड के फैसले के बाद से पिछले पांच कारोबारी सत्रों में से चार में पाउंड में गिरावट आई है, और मौजूदा कैलेंडर पर ऐसा कोई संकेत नहीं है जो इस रुझान को पलट सके।\n\nतकनीकी स्तर और बाजार का मौजूदा रुझान\nतकनीकी चार्ट पर पाउंड बनाम अमेरिकी डॉलर यानी GBP/USD में 1.3400 का स्तर एक कड़े प्रतिरोध के रूप में स्थापित हो चुका है। फेडरल रिजर्व के फैसले के बाद से जितनी भी तेजी आई है, वे सभी 1.3400 के स्तर से टकराकर वापस लौट आई हैं। इसके ऊपर, 200 दिनों का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए ठीक 1.3450 के नीचे मौजूद है। 16 सितंबर को इस औसत स्तर के नीचे फिसलने के बाद से यह जोड़ी कभी भी इसके ऊपर दैनिक आधार पर बंद नहीं हो सकी है।\n\nनीचे की ओर, मंगलवार का निचला स्तर, जो ठीक 1.3300 के ऊपर था, अब सितंबर का नया सपोर्ट बन चुका है। इसके नीचे 1.3200 का अहम सपोर्ट है, जहां यह जोड़ी जून के अंत में गर्मियों की तेजी शुरू होने से पहले कारोबार कर रही थी। जब तक यह जोड़ी 1.3400 के नीचे बनी हुई है, तकनीकी दृष्टिकोण मंदी का ही बना हुआ है। इसमें पहला लक्ष्य 1.3300 है, जिसके मंगलवार को यह बेहद करीब आ गई थी, और दूसरा लक्ष्य 1.3200 का स्तर है। गति का आकलन करने वाला स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी स्टोक आरएसआई वर्तमान में 14 पर चल रहा है और बीते एक हफ्ते से अपने निचले स्तर पर बना हुआ है। यह संकेत देता है कि बिकवाली जरूरत से ज्यादा खिंच चुकी है, लेकिन अभी थमी नहीं है। यदि पाउंड 1.3450 के ऊपर दैनिक समापन देने में सफल होता है, तभी मंदी की यह धारणा अमान्य साबित होगी।\n\nपाउंड स्टर्लिंग का वैश्विक महत्व और मूल्य निर्धारण के आधार\nवर्ष 886 ईस्वी से अस्तित्व में आया पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी सक्रिय मुद्रा है और यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा के रूप में कार्य करता है। 2022 के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा बाजार में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी और प्रतिदिन 630 अरब डॉलर के औसत कारोबार के साथ यह विश्व की चौथी सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा है। इसके मुख्य व्यापारिक जोड़ों में पाउंड और अमेरिकी डॉलर शामिल हैं, जिसे व्यापारी केबल के नाम से जानते हैं और यह कुल विदेशी मुद्रा बाजार का 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके अलावा ड्रैगन के नाम से जाना जाने वाला पाउंड और जापानी येन 3 प्रतिशत और यूरो तथा पाउंड 2 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं।\n\nपाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने फैसलों को 2 प्रतिशत के आसपास स्थिर महंगाई के मुख्य लक्ष्य के आधार पर तय करता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण महंगा करता है, जिससे विदेशी निवेशक आकर्षित होते हैं और मुद्रा को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई घटती है तो आर्थिक वृद्धि सुस्त होने के संकेत मिलते हैं, जिस पर काबू पाने के लिए बैंक दरें घटाता है। इसके अलावा जीडीपी, विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई, रोजगार आंकड़े और व्यापार संतुलन मुद्रा की सेहत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सकारात्मक व्यापार संतुलन देश की मुद्रा की वैश्विक मांग को सीधे तौर पर बढ़ाता है।\n\nअन्य वैश्विक बाजारों और संपत्तियों की हलचल\nवैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार के अन्य मोर्चों पर भी डॉलर की मजबूती का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में सोमवार की सुस्ती जारी रही और यह 0.7100 के अहम दायरे को तोड़ते हुए तीन दिनों के निचले स्तर पर आ गया। बाजार की निगाहें अब गुरुवार को होने वाले ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं। दूसरी ओर, डॉलर-येन जोड़ी एशियाई सत्र में मामूली बढ़त के साथ 157.50 के आसपास रही, जहां जापानी अधिकारियों के संभावित हस्तक्षेप के डर ने येन के नुकसान को सीमित किया। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दर को 7-2 के बहुमत से 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किए जाने के बावजूद येन पर दबाव कायम रहा, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है।\n\nकमोडिटी बाजार में सोने ने अपनी मजबूती फिर से हासिल की है। अमेरिकी डॉलर में खरीदारी, ट्रेजरी यील्ड में अनिश्चितता और मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार को सोना बढ़त दर्ज करते हुए 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। वैश्विक अनिश्चितताओं के इस माहौल में विभिन्न केंद्रीय बैंकों के फैसले आने वाले दिनों में मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की दिशा तय करेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी और ब्रिटिश ब्याज दरों के बीच बढ़ता अंतर वैश्विक वित्तीय बाजारों, विदेशी मुद्रा के लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों पर सीधा असर डाल रहा है।\n\n• मुद्रा विनिमय दर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाउंड के कमजोर होने और डॉलर के मजबूत होने से पाउंड-डॉलर विनिमय दर 1.3300 के निचले स्तर पर आ गई है। जो लोग यूके से अमेरिका में यात्रा कर रहे हैं या डॉलर में भुगतान कर रहे हैं, उनके लिए खर्च तुरंत बढ़ जाएगा।\n• विदेशी निवेश और बचत: अमेरिकी फेड की दरों में बढ़ोतरी के बाद डॉलर में जमा पूंजी पर पाउंड की तुलना में अधिक रिटर्न मिल रहा है। वैश्विक निवेशक और फंड मैनेजर अब अपने फंड्स को पाउंड से निकालकर अमेरिकी डॉलर डिपॉजिट्स की तरफ स्थानांतरित कर रहे हैं।\n• यूके आयात और महंगाई: पाउंड के कमजोर होने से ब्रिटेन के लिए डॉलर में होने वाले आयात, विशेषकर ऊर्जा और ईंधन, महंगे हो जाते हैं। इसका सीधा असर आम ब्रिटिश नागरिकों की बिजली, गैस और पेट्रोल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे घरेलू बजट प्रभावित होगा।\n• विदेशी मुद्रा कारोबारी: तकनीकी चार्ट पर 1.3400 के नीचे पाउंड में स्पष्ट मंदी का रुझान बना हुआ है। ट्रेडर और निवेशक अब 1.3300 और 1.3200 के सपोर्ट स्तरों को ध्यान में रखकर अपने सौदे तय कर रहे हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nब्रिटिश पाउंड में आई ताजा गिरावट सीधे तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक रुख अपनाने और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा दरों को स्थिर रखने के फैसले से जुड़ी है। दोनों केंद्रीय बैंकों की प्राथमिकताओं और आर्थिक आंकड़ों के अंतर ने इस स्थिति को जन्म दिया है।\n\n• ब्याज दरों का बढ़ता अंतर: फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को अपनी दर बढ़ाकर 3.75-4.00 प्रतिशत कर दी, जिसका मध्य बिंदु 3.875 प्रतिशत है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की दर 3.75 प्रतिशत पर स्थिर होने के कारण डॉलर जमा पर पाउंड से अधिक ब्याज मिल रहा है, जिससे पूंजी डॉलर की ओर मुड़ गई।\n• फेड का सख्त मौद्रिक रुख: फेड के 18 में से 16 अधिकारियों ने इस वर्ष कम से कम एक और दर वृद्धि की संभावना जताई है। इस सतत मौद्रिक सख्ती के अनुमान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है।\n• बैंक ऑफ इंग्लैंड का आंतरिक विभाजन: 17 सितंबर की बैठक में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने दरों को यथावत रखने के लिए 6-3 से मतदान किया था। हालांकि तीन सदस्यों ने महंगाई से निपटने के लिए 4 प्रतिशत दर की मांग की, लेकिन बहुमत की हिचकिचाहट ने पाउंड को आवश्यक सहारा नहीं दिया।\n• कमजोर आर्थिक और उपभोक्ता परिदृश्य: ब्रिटेन के सेवा पीएमआई के 52.5 से गिरकर 52 और उपभोक्ता विश्वास के -14 से गिरकर -16 रहने के पूर्वानुमान सामने आए हैं। आर्थिक मंदी के इन संकेतों ने केंद्रीय बैंक के लिए आगे आक्रामक तरीके से दरें बढ़ाना मुश्किल बना दिया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिटिश पाउंड सितंबर के नए निचले स्तर पर क्यों आ गया?\nअमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और आगे और बढ़ोतरी के संकेत देने से डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे पाउंड गिरकर 1.3300 के करीब आ गया।\n\n2. मौजूदा समय में बैंक ऑफ इंग्लैंड और फेड की ब्याज दरें कितनी हैं?\nबैंक ऑफ इंग्लैंड की मुख्य दर 3.75 प्रतिशत है, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर सीमा 3.75 से 4.00 प्रतिशत के बीच है जिसका मध्य बिंदु 3.875 प्रतिशत है।\n\n3. बैंक ऑफ इंग्लैंड की हालिया बैठक में क्या फैसला हुआ था?\nकेंद्रीय बैंक ने 17 सितंबर को 6-3 के बहुमत से दरों को 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया, जिसमें तीन सदस्यों ने 4 प्रतिशत के पक्ष में वोट दिया था।\n\n4. पाउंड बनाम डॉलर के लिए प्रमुख तकनीकी स्तर कौन से हैं?\nऊपर की तरफ 1.3400 और 1.3450 पर कड़ा प्रतिरोध है, जबकि नीचे की तरफ 1.3300 और 1.3200 प्रमुख सपोर्ट स्तर हैं।\n\n5. ब्रिटेन में महंगाई की वर्तमान स्थिति क्या है?\nअगस्त में ब्रिटेन की मुद्रास्फीति 3.1 प्रतिशत रही थी, जो केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के आधिकारिक लक्ष्य से अधिक है।\n\n6. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?\nबैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है।",
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  "publishedAt": "2026-09-22",
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