# फेड की ब्याज दर वृद्धि पक्की होने और कच्चे तेल के उछाल से लुढ़का यूरो, तकनीकी स्तर टूटे

> अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्धि की संभावना 100 प्रतिशत होने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते यूरो दोनों प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे फिसल गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/fed-ki-byaja-dara-vriddhi-pakki-hone-aura-kachche-tela-ke-uchhala-se-lurhaka-euro-takaniki-stara-tute-33997 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो डॉलर, विदेशी मुद्रा, फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, कच्चा तेल, ब्याज दरें, अमेरिकी डॉलर, वित्त

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूरो पर चौतरफा दबाव देखने को मिल रहा है। यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (EUR/USD) सोमवार को 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.1550 के करीब बंद हुई। इस गिरावट के साथ ही यह करेंसी पेअर जुलाई के अंत के बाद पहली बार अपने 50-दिवसीय और 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे फिसल गया है। चार्ट पर नजर डालें तो ये दोनों महत्वपूर्ण संदर्भ रेखाएं केवल दो पिप्स की दूरी पर थीं, जिससे इस जोड़ी के टूटने की प्रक्रिया तकनीकी रूप से बेहद सीधी और तेज रही। अमेरिकी डॉलर ने कारोबारी सत्र के दौरान दुनिया की लगभग हर प्रमुख मुद्रा के मुकाबले बढ़त दर्ज की, जिससे जोखिम वाली संपत्तियों पर दबाव और गहरा गया।

बाजार की दिशा तय करने में अमेरिकी फेडरल रिजर्व से जुड़ी ब्याज दर वायदा (फेड फंड्स फ्यूचर्स) की बड़ी भूमिका रही। वायदा अनुबंधों में बुधवार को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में 0.25 प्रतिशत यानी 25 आधार अंकों की दर वृद्धि की संभावना 100 प्रतिशत पर आंकी गई है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो यह 2023 के बाद अमेरिका में होने वाली पहली ब्याज दर बढ़ोतरी होगी। दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ने पिछले गुरुवार को ही अपनी नीतिगत दरों में बढ़ोतरी की थी, लेकिन उस फैसले के बाद से यूरो हर कारोबारी सत्र में लगातार टूट रहा है और अपनी जमीन खोता जा रहा है।

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक का अनुमान और कच्चे तेल की वास्तविकता
यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने 10 सितंबर को अपनी डिपॉजिट दर को, जिस पर वह बैंकों को रात भर के लिए रखी गई नकदी पर ब्याज देता है, बढ़ाकर 2.50 प्रतिशत कर दिया था। यह इस साल की दूसरी दर वृद्धि थी और यह निर्णय गवर्निंग काउंसिल में सर्वसम्मति से लिया गया था। अपने बयान में नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया था कि मुद्रास्फीति एक विस्तारित अवधि के लिए उनके तय लक्ष्य से काफी ऊपर बनी रहेगी। फैसले के साथ प्रकाशित स्टाफ अनुमानों में महंगाई दर के चालू वर्ष की चौथी तिमाही में 3.6 प्रतिशत पर पहुंचने और अगले साल के मध्य तक घटकर 2.5 प्रतिशत पर लौटने की बात कही गई थी।

हालांकि, ईसीबी का यह पूरा अनुमान एक विशेष शर्त पर टिका था जो 19 अगस्त को तय की गई थी। इसके तहत ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत इस तिमाही में 88 डॉलर प्रति बैरल और अगले साल 78 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया था। जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जिस हफ्ते यह अनुमान जारी हुआ था, उसी समय से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और सोमवार को यह 105 डॉलर प्रति बैरल के भी पार निकल गया। कच्चे तेल की यह छलांग यूरोप की वित्तीय गणनाओं को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।

## डॉलर में ईंधन बिल और यूरोप पर दोहरी मार
यूरो के लिए केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों की तुलना में ऊर्जा की कीमतों का यह अनुमान कहीं अधिक मायने रखता है। यूरोप अपनी जरूरत का लगभग पूरा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है और इस पूरे कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जाता है। किसी भी ब्याज दर के फैसले से पहले, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी का सीधा अर्थ यह होता है कि ईंधन के बिल का भुगतान करने के लिए यूरो बेचकर अतिरिक्त डॉलर खरीदे जाते हैं। ईसीबी के स्टाफ अनुमान में 2028 तक यूरो की विनिमय दर को डॉलर के मुकाबले 1.16 पर स्थिर माना गया था, जबकि सोमवार का बाजार बंद स्तर इस स्तर से आधा सेंट नीचे आ चुका है।

ब्याज दर के मोर्चे पर भी डॉलर का पलड़ा भारी दिख रहा है। फेड रेट से जुड़े वायदा बाजार ने बुधवार को अमेरिकी दर के 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचने की संभावना को 100 प्रतिशत मान लिया है। साथ ही दिसंबर तक दूसरी बढ़ोतरी और अगले जुलाई तक दर के लगभग 4.55 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है, जो मौजूदा स्तर से करीब एक पूरा प्रतिशत अंक अधिक है। इसके विपरीत, वायदा बाजार 29 अक्टूबर को ईसीबी की अगली दर वृद्धि की संभावना 78 प्रतिशत और अगले सितंबर तक उसकी डिपॉजिट दर लगभग 3.40 प्रतिशत होने का अनुमान लगा रहा है। हालांकि दोनों केंद्रीय बैंक तीन से चार दर वृद्धियों की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं, जिससे आज का दर अंतर आगे भी लगभग जस का तस रहेगा, लेकिन ऊर्जा लागत के कारण डॉलर की मांग लगातार बनी हुई है।

## ट्रेजरी यील्ड में उछाल और आगामी आर्थिक आंकड़े
सोमवार को केवल ब्याज दरों के अंतर ने ही यूरो पर बिकवाली का दबाव नहीं बनाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के स्तर को छू गई। वहीं लंदन कारोबारी सत्र के दौरान कच्चा तेल चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। ट्रेजरी बांड और कच्चा तेल दोनों ही डॉलर में आंके जाते हैं, और जब डॉलर अन्य व्यापक कारणों से मजबूत होता है, तो यूरोप को अपना ईंधन बिल चुकाने के लिए अपनी मुद्रा और अधिक बेचनी पड़ती है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के अपने जून अनुमान में इस साल के अंत तक नीतिगत दर 3.8 प्रतिशत और अगले साल 3.6 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी, लेकिन बाजार ने 2027 के लिए समिति के तीन महीने पुराने अनुमान से लगभग एक पूरा प्रतिशत अंक अधिक की दरें पहले ही तय कर ली हैं। बुधवार के नए आर्थिक अनुमान ही यह तय करेंगे कि बाजार और नीति निर्माताओं में से किसका रुख डॉलर को नई दिशा देगा।

व्यापारिक सत्र के आगे के दिनों में कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े आने वाले हैं। मंगलवार को 09:00 GMT पर वित्तीय विश्लेषकों का ZEW सर्वेक्षण जारी होगा, जिसके 31.4 से सुधरकर 39.9 रहने का अनुमान है। उसी दिन 14:00 GMT पर ईसीबी बोर्ड सदस्य का संबोधन भी निर्धारित है। बुधवार को 09:00 GMT पर यूरोजोन औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े आएंगे, जिसमें जून के सपाट आंकड़े के बाद जुलाई में 0.4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। इसके बाद 12:30 GMT पर अमेरिकी खुदरा बिक्री के आंकड़े आएंगे, जिसमें 0.6 प्रतिशत की गिरावट के बाद अगस्त में 0.9 प्रतिशत की बढ़त की उम्मीद है। खुदरा बिक्री की गणना डॉलर में होती है और अगस्त में गैसोलीन जुलाई की तुलना में महंगा था, इसलिए मुख्य आंकड़ा मजबूत दिख सकता है। ऐसे में फेड मतदान से ठीक साढ़े पांच घंटे पहले मुख्य रूप से कंट्रोल ग्रुप के आंकड़ों पर नजर रखेगा, जिसमें ईंधन, ऑटोमोबाइल और निर्माण सामग्री को शामिल नहीं किया जाता।

बुधवार को ही 17:00 GMT पर ईसीबी अध्यक्ष का भाषण होगा, जिसके बाद 18:00 GMT पर फेडरल रिजर्व अपने फैसले की घोषणा करेगा और 18:30 GMT पर फेड चेयरमैन की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। गुरुवार को 07:00 GMT पर ईसीबी के मुख्य अर्थशास्त्री का वक्तव्य और 09:00 GMT पर अगस्त मुद्रास्फीति के अंतिम आंकड़े आएंगे, जिसमें कोर माप 2.4 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहने का अनुमान है। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ईसीबी द्वारा पिछले सप्ताह घोषित दर वृद्धि बुधवार 16 सितंबर से ही लागू हो रही है, जिस दिन फेड अपनी दर पर मतदान करेगा।

## चार्ट संरचना और तकनीकी प्रतिरोध व समर्थन स्तर
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से यूरो डॉलर जोड़ी के लिए 1.1570 के करीब मौजूद दोनों एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज अब सबसे अहम प्रतिरोध रेखा बन गए हैं। यह वही स्तर है जिसके ठीक नीचे जोड़ी ने सोमवार को क्लोजिंग दी है। इसके ऊपर 1.1600 का स्तर आता है, जिसके इर्द-गिर्द इस जोड़ी ने दो सप्ताह तक कारोबार किया था और शुक्रवार को इसके नीचे फिसल गई थी। इसके आगे सितंबर का उच्चतम स्तर मौजूद है जो 1.1650 से कुछ ही कम है।

नीचे की तरफ समर्थन स्तरों को देखें तो सोमवार का निचला स्तर जो 1.1500 के ठीक ऊपर बना था, वह पहला बड़ा आधार है। इसके नीचे अगस्त की शुरुआत का आधार 1.1500 पर स्थित है। यदि बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तथा यह स्तर टूटता है, तो अगला महत्वपूर्ण तकनीकी समर्थन 1.1450 के स्तर पर पहुंच जाता है। जब तक 1.1600 का स्तर सुरक्षित है, तब तक तकनीकी रुझान नीचे की ओर झुका रहेगा। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (Stoch RSI) लगभग 18 के स्तर पर बना हुआ है और लगातार गिर रहा है, जो यह दर्शाता है कि मंदी का दौर अभी थमा नहीं है बल्कि और खिंच सकता है। यदि दैनिक आधार पर क्लोजिंग दोबारा 1.1600 से ऊपर होती है, तभी यह मंदी का ढांचा अमान्य माना जाएगा।

लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, EUR/USD वर्तमान में 1.15 के करीब कारोबार कर रहा है और इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.13 से 1.20 के बीच रहा है। लाइव तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 37 के आसपास है, एमएसीडी मंदी का संकेत दे रहा है और 50-दिवसीय व 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज दोनों 1.16 के आसपास केंद्रित हैं, जहां डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 1.15 से 1.17 के दायरे में हैं और औसत दैनिक वोलैटिलिटी (ATR) 0.01 पर है। पिवट पॉइंट 1.15 पर स्थित है, जबकि ऊपर की ओर प्रतिरोध 1.15 और नीचे समर्थन 1.15 व 1.14 के स्तरों पर केंद्रित है।

## यूरोपीय अर्थव्यवस्था में मुद्रा, मुद्रास्फीति और व्यापार संतुलन
यूरो यूरोपीय संघ के उन 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है जो यूरोज़ोन का हिस्सा हैं। अमेरिकी डॉलर के बाद यह दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वैश्विक विदेशी मुद्रा लेनदेन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 31 प्रतिशत रही है, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। EUR/USD वैश्विक मुद्रा बाजार का सबसे बड़ा पेअर है, जो कुल लेनदेन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इसके बाद EUR/JPY चार प्रतिशत, EUR/GBP तीन प्रतिशत और EUR/AUD दो प्रतिशत का स्थान आता है।

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो मौद्रिक नीति संचालित करता है और ब्याज दरें तय करता है। ईसीबी का मुख्य दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका मतलब महंगाई पर लगाम लगाना या आर्थिक विकास को गति देना है। इस कार्य के लिए उसका प्राथमिक साधन ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं या उनके बढ़ने की उम्मीद होती है, तो वैश्विक निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए क्षेत्र में पूंजी लाते हैं, जिससे मुद्रा को मजबूती मिलती है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति पर बैठक करती है, जिसमें राष्ट्रीय बैंकों के प्रमुखों के अलावा ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं।

मुद्रास्फीति का आकलन करने के लिए यूरोज़ोन में हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज (HICP) सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है। यदि महंगाई ईसीबी के दो प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाती है, तो बैंक को दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा जीडीपी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई (PMI), रोजगार और उपभोक्ता विश्वास जैसे व्यापक आर्थिक संकेतक भी मुद्रा की दिशा तय करते हैं। जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, इसलिए इन चार बड़े देशों के आंकड़े विशेष रूप से प्रभावशाली होते हैं। साथ ही व्यापार संतुलन भी एक प्रमुख कारक है। यदि कोई देश मांग वाले उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन वस्तुओं की खरीद के लिए अतिरिक्त मांग पैदा होने से उस देश की मुद्रा मजबूत होती है, जबकि व्यापार घाटा मुद्रा पर दबाव डालता है।

## अन्य वैश्विक बाजारों और संपत्तियों की स्थिति
मुद्रा बाजार के अन्य क्षेत्रों पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर की मजबूती का असर अन्य जोड़ियों पर भी साफ देखा गया। AUD/USD सोमवार को दबाव में रहा और एशियाई सत्र खुलने से पहले 0.7100 के करीब पहुंचने के बाद सुधरकर 0.7150 के क्षेत्र में पहुंचा। अमेरिकी दर वृद्धि की मजबूत संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नए मासिक निचले स्तर पर धकेल दिया, जहां अब निवेशकों की नजर चीन के आगामी प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर टिकी है।

USD/JPY जोड़ी में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में खरीदारी देखी गई और एशियाई सत्र में यह 154.00 के करीब पहुंची, जिससे शुक्रवार के नुकसान की कुछ भरपाई हुई। हालांकि हाजिर कीमतें पिछले एक सप्ताह से सीमित दायरे में हैं और पिछले मंगलवार को छुए गए लगभग सात महीने के निचले स्तर के करीब बनी हुई हैं, क्योंकि व्यापारी प्रमुख केंद्रीय बैंक बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। कमोडिटी बाजार में सोने ने नई तेजी दिखाते हुए सोमवार को 4,300 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को चुनौती दी, लेकिन डॉलर की तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल के कारण पीली धातु पर दबाव बना रहा।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जैस्मीकॉइन (JASMY) ने सोमवार को कुछ स्थिरता के संकेत दिए। हालांकि यह टोकन 0.0035 डॉलर के समर्थन और 0.0040 डॉलर के प्रतिरोध के बीच फंसा रहा। मई के बाद से इसकी तकनीकी संरचना कमजोर हुई है और यह 0.0078 डॉलर के उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जहां मंदड़िए पूरी तरह हावी दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, अमेरिका में पीपीआई और सीपीआई रिपोर्ट के बाद फेड की ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदें तेज हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति पद के संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप के कम दरों के दबाव के बीच नीति निर्माताओं की स्वतंत्रता पर भी नजरें हैं, जबकि डॉलर की आगे की बढ़त इस बात पर निर्भर करेगी कि फेड अपनी सख्त नीतिगत उम्मीदों पर किस तरह खरा उतरता है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की पूर्ण संभावना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर वैश्विक मुद्रा विनिमय दरों, यात्रा खर्च और निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय और डॉलर पर असर:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर के मजबूत होने से यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं पर गिरावट का दबाव गहराएगा। यदि आप विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं या विदेशी मुद्रा में लेनदेन करते हैं, तो डॉलर आधारित खर्चे और महंगे हो जाएंगे।
- **ऊर्जा बिल और मुद्रास्फीति:** कच्चे तेल के 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने से पेट्रोलियम आयात करने वाले सभी देशों में ऊर्जा लागत बढ़ेगी। उपभोक्ताओं और परिवहन व्यवसायों को आने वाले हफ्तों में ईंधन और माल ढुलाई की बढ़ी हुई कीमतों के लिए तैयार रहना चाहिए।
- **ऋण और बांड यील्ड:** अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत छूने से वैश्विक पूंजी प्रवाह पर असर पड़ेगा। उभरते बाजारों और कॉर्पोरेट बांड से पूंजी निकलकर अमेरिकी ट्रेजरी में जा सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उधार लागत में इजाफा होगा।
- **फॉरेक्स ट्रेडर्स के लिए तकनीकी स्तर:** EUR/USD का 1.1570 और 1.1600 से नीचे फिसलना तकनीकी मंदी का स्पष्ट संकेत है। ट्रेडर्स को 1.1500 और 1.1450 के समर्थन स्तरों पर नजर रखनी चाहिए और उच्च अस्थिरता को देखते हुए सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
यूरो में आई इस गिरावट और डॉलर में उछाल के पीछे मुख्य कारण केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों का विचलन और ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की अप्रत्याशित महंगाई है। इन दो परस्पर जुड़े घटनाक्रमों ने विदेशी मुद्रा बाजार में भारी असंतुलन पैदा कर दिया है।

- **अमेरिकी ब्याज दर वृद्धि की 100% संभावना:** अमेरिका में मजबूत आर्थिक आंकड़ों और महंगाई के दबाव के चलते ब्याज दर वायदा ने बुधवार को फेड द्वारा 0.25 प्रतिशत दर वृद्धि की संभावना को पूरी तरह पक्का मान लिया है। 2023 के बाद पहली बार अमेरिका में दरें बढ़ने की तैयारी ने वैश्विक स्तर पर डॉलर की मांग को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है।
- **कच्चे तेल की गलत आधारभूत गणना:** यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने मुद्रास्फीति का अनुमान लगाते समय ब्रेंट क्रूड के 78 से 88 डॉलर प्रति बैरल रहने की उम्मीद की थी। बाजार में तेल की कीमतें 105 डॉलर पार पहुंच जाने से यूरोप को आयात भुगतान के लिए लगातार यूरो बेचकर डॉलर खरीदने पड़ रहे हैं।
- **अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड उछाल:** अमेरिकी 10-वर्षीय सरकारी बांड की यील्ड 2023 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत तक पहुंच गई। सुरक्षित और आकर्षक रिटर्न की तलाश में वैश्विक निवेशकों ने अपनी पूंजी को अमेरिकी प्रतिभूतियों में लगाना शुरू कर दिया, जिससे अन्य सभी मुद्राएं कमजोर हुईं।

## सवाल-जवाब

### 1. EUR/USD जोड़ी में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है?
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की 100% संभावना और कच्चे तेल का 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचना इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।

### 2. यूरोपीय सेंट्रल बैंक के अनुमानों में क्या चूक हुई?
ईसीबी ने अगले साल कच्चे तेल की कीमत 78 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था, जबकि वास्तविक बाजार में कच्चा तेल 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है।

### 3. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से यूरो पर नकारात्मक प्रभाव क्यों पड़ता है?
यूरोप अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और उसका भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए तेल का बिल भरने के लिए यूरो बेचकर डॉलर खरीदने पड़ते हैं।

### 4. EUR/USD के लिए कौन से तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तर महत्वपूर्ण हैं?
ऊपर की तरफ 1.1570 और 1.1600 प्रमुख प्रतिरोध स्तर हैं, जबकि नीचे की तरफ 1.1500 और 1.1450 अहम समर्थन स्तर बने हुए हैं।

### 5. अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ताजा स्तर क्या रहा है?
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद पहली बार बढ़कर 5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गई है।

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