फेड की दर बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच यूरो में 1.150 तक फिसलने का अनुमान आईएनजी का कहना है कि फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और ईसीबी के संभावित नरम रुख के चलते आने वाले हफ्तों में यूरो/डॉलर 1.150 तक फिसल सकता है, भले ही यूरोजोन की ग्रोथ का आंकड़ा ऊपर की ओर संशोधित हुआ हो। यूरो के लिए यह हफ्ता अहम माना जा रहा है। बाजार का रुख फिलहाल ऊपर से ज्यादा नीचे जाने की तरफ झुका है और आईएनजी के विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में यूरो/डॉलर 1.150 तक फिसल सकता है। इसी बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी की बैठक और अमेरिकी फेडरल रिजर्व यानी फेड का फैसला भी सिर पर है। असल कहानी डॉलर की मजबूती की है यूरो/डॉलर पर आईएनजी का यह नरम रुख असल में यूरोजोन की कमजोरी की वजह से नहीं है। बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह डॉलर को लेकर उनका नजरिया है, खासकर यह उम्मीद कि फेड सितंबर में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। जब फेड दरें बढ़ाता है तो डॉलर में निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाता है, जिससे निवेशकों का पैसा यूरो जैसी दूसरी करेंसी से खिंचकर डॉलर की तरफ जाने लगता है और यूरो/डॉलर नीचे आ जाता है। इसमें एक और वजह जुड़ गई है, ऊर्जा की कीमतों में हाल की तेजी। आईएनजी के मुताबिक, बढ़ती ऊर्जा कीमतें यूरो के कमजोर पड़ने की दलील को और मजबूत कर रही हैं। ऊर्जा आयात पर निर्भर यूरोजोन जैसे इलाकों के लिए महंगी ऊर्जा का सीधा मतलब है व्यापार संतुलन और बिगड़ना, जो करेंसी पर दबाव बढ़ाता है। व्यापार की शर्तें और बिगड़ीं यह असर आंकड़ों में भी दिखने लगा है। आईएनजी के रियल टाइम अनुमानों के मुताबिक यूरोजोन की कमोडिटी टर्म्स ऑफ ट्रेड यानी निर्यात और आयात की कीमतों का फासला अब मार्च के पिछले निचले स्तर से भी बदतर हो चुका है। सीधे शब्दों में कहें तो यूरोजोन बाहर से खरीदे जा रहे कच्चे माल और ऊर्जा पर पहले से ज्यादा खर्च कर रहा है, जबकि निर्यात से उतनी कमाई नहीं हो रही, और यह असंतुलन लंबे समय में करेंसी को कमजोर करता है। ग्रोथ के आंकड़े सुधरे, फिर भी राहत नहीं यूरोजोन के लिए एक अच्छी खबर भी आई। दूसरी तिमाही की ग्रोथ को पहले बताए गए 0.4% क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर से संशोधित कर 0.6% कर दिया गया है। इसकी बड़ी वजह आयरलैंड की मजबूत ग्रोथ रही, जो वहां मौजूद बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दमदार प्रदर्शन की बदौलत मुमकिन हुई। बावजूद इसके, इस सुधार से यूरो को लेकर आईएनजी के छोटी अवधि के नजरिए में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, क्योंकि फिलहाल पूरा खेल फेड की नीति और ऊर्जा कीमतों से जुड़े डॉलर के पहलू पर टिका है। गुरुवार की ईसीबी बैठक पर टिकी निगाहें यूरो के लिए अगली बड़ी परीक्षा गुरुवार को होने वाली ईसीबी बैठक में होगी। आईएनजी को इसमें नरम रुख आने की आशंका दिख रही है, क्योंकि बाजार ने पहले से ही आक्रामक सख्ती की उम्मीदें कीमतों में शामिल कर ली हैं। अगर ईसीबी इन उम्मीदों से पीछे हटता है, तो यह यूरो में और गिरावट की वजह बन सकता है। आईएनजी के विश्लेषकों ने कहा, "आने वाले हफ्तों में 1.150 की तरफ बढ़त हमें एक हकीकत भरा अनुमान लगती है।" ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूत, येन ने डॉलर पर लगाम कसी करेंसी बाजार में और हलचल भी दिखी। मंगलवार के एशियाई कारोबार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.7200 के ऊपर कारोबार करता दिखा, जो 14 मई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। जापानी येन में आई तेजी ने डॉलर पर दबाव बना रखा है, जो फेड को लेकर सख्त उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद हावी है। इसके अलावा इस महीने के आखिर में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की एक और दर बढ़ोतरी की उम्मीदें भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दे रही हैं, हालांकि चीन के मिले-जुले व्यापार आंकड़ों ने इस बढ़त पर कुछ लगाम लगाई। डॉलर और येन के जोड़े यानी USD/JPY की कहानी अलग रही। यह जोड़ी दिन में पहले 153.00 से नीचे छह महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद उछलकर दिन के दूसरे हिस्से में 154.00 के ऊपर कारोबार करती दिखी। लेकिन यह उछाल किसी बड़े बदलाव से ज्यादा एक तकनीकी सुधार लगता है, क्योंकि जापान के मजबूत वेतन वृद्धि आंकड़ों और दूसरी तिमाही की जीडीपी में ऊपर की तरफ हुए संशोधन ने अगले हफ्ते बैंक ऑफ जापान के दरें बढ़ाने की उम्मीदों को और पुख्ता कर दिया है, जो येन को सहारा देना जारी रखे हुए है। डीजल की कीमतें दे रहीं अलग चेतावनी करेंसी बाजार से हटकर बात करें तो कच्चे तेल का बाजार कुछ महीने पहले के मुकाबले फिलहाल शांत दिख रहा है, लेकिन डीजल की तस्वीर बिल्कुल अलग है। अमेरिका का डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स की कीमत और WTI क्रूड की कीमत के बीच का फासला, हाल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया और दिन के कारोबार में एक वक्त 102.00 डॉलर के ऊपर तक पहुंच गया। इतनी बड़ी उछाल इस बात का संकेत है कि क्रूड के मुकाबले डीजल की सप्लाई तंग है, जिसका असर आगे चलकर ट्रांसपोर्ट, शिपिंग और औद्योगिक इस्तेमाल की लागत बढ़ाने के तौर पर दिख सकता है, भले ही कच्चे तेल की मुख्य कीमतें फिलहाल काबू में दिखें। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर भारत से जुड़ी नहीं है, इसलिए इसका असर मुख्य रूप से करेंसी ट्रेडर्स, डॉलर-यूरो में कारोबार करने वाले आयातकों-निर्यातकों और विदेश यात्रा करने वालों पर पड़ेगा। • करेंसी ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए: यूरो के डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ने का मतलब है कि आने वाले हफ्तों में यूरो में रखी संपत्तियों की डॉलर के लिहाज से कीमत घट सकती है। जिनके पास यूरो/डॉलर से जुड़े निवेश हैं, उन्हें गुरुवार की ईसीबी बैठक और सितंबर की फेड बैठक पर नजर रखनी चाहिए। • आयातकों और निर्यातकों के लिए: जो कंपनियां डॉलर में भुगतान करती हैं लेकिन कमाई यूरो में करती हैं, अगर यूरो 1.150 तक फिसलता है तो उनकी लागत बढ़ सकती है। वहीं जो कंपनियां अमेरिका को माल बेचती हैं, उन्हें कीमतों में सापेक्षिक फायदा मिल सकता है। • विदेश यात्रा करने वालों के लिए: यूरो से डॉलर बदलवाने वाले यात्रियों को कम डॉलर मिल सकते हैं, जबकि डॉलर लेकर यूरोजोन घूमने जाने वालों का पैसा थोड़ा ज्यादा चल सकता है। • ईंधन और ढुलाई की लागत के लिए: डीजल क्रैक स्प्रेड का पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना डीजल की सप्लाई में तंगी का इशारा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद ट्रांसपोर्ट और शिपिंग लागत बढ़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ यूरो में आ रही यह अनुमानित गिरावट यूरोजोन की किसी नई कमजोरी से नहीं, बल्कि डॉलर की तरफ के हालात से ज्यादा जुड़ी है। • फेड की दर बढ़ोतरी की उम्मीद: बाजार को उम्मीद है कि फेड सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाएगा, जिससे डॉलर में निवेश ज्यादा फायदेमंद लगने लगता है और यूरो से पैसा खिंचता है। • ऊर्जा कीमतों में तेजी: हाल में ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे डॉलर की मजबूती की दलील और पुख्ता होती है, क्योंकि यूरोजोन को अपनी ज्यादातर ऊर्जा आयात करनी पड़ती है और महंगी ऊर्जा का सीधा बोझ उस पर पड़ता है। • व्यापार की शर्तें बिगड़ना: रियल टाइम अनुमान बताते हैं कि यूरोजोन की कमोडिटी टर्म्स ऑफ ट्रेड मार्च के पिछले निचले स्तर से भी नीचे जा चुकी हैं, यानी आयात पर खर्च निर्यात से हो रही कमाई के मुकाबले ज्यादा भारी पड़ रहा है। • ईसीबी के नरम रुख की आशंका: गुरुवार की बैठक से पहले बाजार पहले ही आक्रामक सख्ती की उम्मीदें लगा चुका है। अगर ईसीबी इन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, तो यह यूरो पर दबाव और बढ़ा सकता है। सवाल-जवाब 1. यूरो डॉलर के मुकाबले कितना नीचे जा सकता है? आईएनजी का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यूरो 1.150 के स्तर तक फिसल सकता है। 2. डॉलर यूरो के मुकाबले मजबूत क्यों हो रहा है? मुख्य वजह यह उम्मीद है कि फेड सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाएगा, साथ ही बढ़ती ऊर्जा कीमतें भी इसमें मदद कर रही हैं। 3. यूरोजोन के ग्रोथ आंकड़ों में क्या बदलाव आया? दूसरी तिमाही की ग्रोथ को 0.4% से संशोधित कर 0.6% क्वार्टर-ऑन-क्वार्टर कर दिया गया, जो मुख्य रूप से आयरलैंड की मजबूत ग्रोथ की वजह से हुआ। 4. गुरुवार की ईसीबी बैठक में क्या उम्मीद है? आईएनजी को इसमें नरम रुख आने की आशंका है, क्योंकि बाजार ने पहले से ही आक्रामक सख्ती की उम्मीदें कीमतों में शामिल कर ली हैं। 5. डीजल क्रैक स्प्रेड क्या है और यह क्यों अहम है? यह अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड की कीमत के बीच का फासला है, जो हाल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया, जो डीजल की तंग सप्लाई का संकेत है। 6. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन में क्या हलचल दिखी? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर आरबीए की दर बढ़ोतरी की उम्मीदों में 0.7200 के ऊपर पहुंचा, वहीं USD/JPY जापान के मजबूत वेतन और जीडीपी आंकड़ों के चलते छह महीने के निचले स्तर से उछल गया। https://trendkia.com/market/fed-ki-dara-barhotari-ki-ummidon-ke-bicha-yuro-men-1-150-taka-phisalane-ka-anumana-29573 TrendKia — Har trend, sabse pehle.