फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड के फैसलों से पहले वैश्विक बाजारों में हलचल, डॉलर मजबूत और ब्रिटिश पाउंड में गिरावट महत्वपूर्ण केंद्रीय बैंक बैठकों से पहले अमेरिकी डॉलर में आई तेजी के कारण ब्रिटिश पाउंड पर दबाव बढ़ गया है, जिससे तकनीकी रूप से मंदी के संकेत मिल रहे हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में इस सप्ताह बड़ी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि दुनिया के दो सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों की घोषणा करने वाले हैं। इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम से ठीक पहले अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती ने ब्रिटिश पाउंड को पीछे धकेल दिया है। निवेशक वाशिंगटन और लंदन से आने वाले ब्याज दर के फैसलों का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं, जिससे मुद्रा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान ब्रिटिश पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, जो वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ते तनाव और डॉलर की सुरक्षित मांग को दर्शाता है। फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और ब्याज दरों की स्थिति अमेरिकी डॉलर की इस ताजा तेजी के पीछे मुख्य कारण वाशिंगटन में फेडरल रिजर्व (Fed) की होने वाली उच्च स्तरीय बैठक है। बाजार विश्लेषक और निवेशक व्यापक रूप से इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि फेडरल रिजर्व अपनी ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है। हाल ही में जारी हुए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) के आंकड़ों के बाद अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई के दबाव की पुष्टि हुई है। इन महंगाई संबंधी आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है। वित्तीय उपकरणों के विश्लेषण के अनुसार, बाजार इस सप्ताह फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी की लगभग 88% संभावना मानकर चल रहा है। इस सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीद ने डॉलर को अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में बढ़त हासिल करने में मदद की है। इसके अतिरिक्त, बाजार केवल इस फैसले पर ही नजर नहीं रख रहा है, बल्कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी टिकी हुई है। इस वार्ता के दौरान भविष्य में ब्याज दरों के रास्ते को लेकर मिलने वाले संकेतों पर बारीक नजर रखी जाएगी। यदि केविन वॉर्श भविष्य में और अधिक दर वृद्धि के दरवाजे खुले रखने का संकेत देते हैं, तो अमेरिकी डॉलर को और अधिक समर्थन मिल सकता है, जिससे पाउंड-डॉलर की जोड़ी पर मंदी का दबाव बना रहेगा। अमेरिकी राजनीति का प्रभाव भी इस फैसले पर दिख सकता है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्याज दरों को कम रखने के दबाव के बीच चेयरमैन केविन वॉर्श की स्वतंत्रता की कड़ी परीक्षा होने वाली है। बैंक ऑफ इंग्लैंड का नीतिगत रुख और आर्थिक परिस्थितियां अमेरिकी घटनाक्रम के ठीक एक दिन बाद, लंदन में बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों की घोषणा करेगा। अधिकांश अर्थशास्त्रियों और विश्लेषकों का अनुमान है कि ब्रिटिश केंद्रीय बैंक इस बार अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 3.75% पर स्थिर रख सकता है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने हाल ही में बाजार की उन उम्मीदों को शांत करने का प्रयास किया था, जिसमें मौद्रिक नीति को स्वचालित रूप से कड़ा करने की बात कही जा रही थी। गवर्नर एंड्रयू बेली ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि भविष्य में ब्याज दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि पूरी तरह से देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर निर्भर करेगी। इस बयान से स्पष्ट है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड बिना सोचे-समझे दरों में वृद्धि करने के बजाय सतर्कता और डेटा-आधारित दृष्टिकोण अपनाने को प्राथमिकता दे रहा है। ब्याज दरों में स्थिरता का यह अनुमान पाउंड के लिए बहुत अधिक सकारात्मक साबित नहीं हो रहा है, खासकर जब इसके मुकाबले अमेरिकी डॉलर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। ब्रिटेन के मजबूत आर्थिक आंकड़े पाउंड को दे रहे सहारा भले ही मौद्रिक नीति की उम्मीदें ब्रिटिश पाउंड पर दबाव डाल रही हैं, लेकिन ब्रिटेन के घरेलू आर्थिक आंकड़े उम्मीद से काफी बेहतर रहे हैं, जिससे पाउंड को निचले स्तरों पर कुछ सहारा मिला है। जुलाई के महीने में यूनाइटेड किंगडम के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसने उन पूर्वानुमानों को पीछे छोड़ दिया है जिसमें आर्थिक गतिविधियों के स्थिर रहने की आशंका जताई गई थी। GDP के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी सकारात्मक रहे हैं, और सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में उम्मीद से कहीं अधिक मजबूती देखी गई है। इन उत्साहजनक आंकड़ों के बावजूद, इस सप्ताह की शुरुआत में पाउंड और डॉलर का उतार-चढ़ाव पूरी तरह से मौद्रिक नीति की उम्मीदों से ही संचालित हो रहा है। अंततः फेडरल रिजर्व का निर्णय और बैंक ऑफ इंग्लैंड की घोषणा ही यह तय करेंगे कि अमेरिकी डॉलर अपनी बढ़त बनाए रखेगा या ब्रिटिश पाउंड फिर से अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने में सफल होगा। तकनीकी विश्लेषण और पाउंड-डॉलर जोड़ी के महत्वपूर्ण स्तर बाजार के लाइव आंकड़ों के अनुसार, इस समय GBP/USD की जोड़ी 1.35 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 1.35 से लगभग 0.24% की गिरावट दर्शाती है। जोड़ी का 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है। तकनीकी चार्ट का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पाउंड-डॉलर की जोड़ी में निकट अवधि में मंदी का रुख बना हुआ है, क्योंकि यह जोड़ी अपने 50-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) और 200-अवधि के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) दोनों के नीचे बनी हुई है, जो 1.35 के स्तर पर स्थित हैं। इसके अतिरिक्त, ईएमए स्तरों की बात करें तो 200-अवधि का एक्स्पोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 1.34 पर है, जबकि 50-अवधि का EMA 1.35 पर बना हुआ है, जो एक दीर्घकालिक अपट्रेंड और गोल्डन क्रॉसओवर की स्थिति को दर्शाता है। तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स या RSI(14) वर्तमान में 44 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है लेकिन यह अभी पूरी तरह से अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) की स्थिति में नहीं है। एमएसीडी (MACD) सूचक भी शून्य के स्तर पर बना हुआ है जो मंदी के रुझान की पुष्टि करता है। बॉलिंजर बैंड की सीमाएं 1.35 से 1.37 के बीच फैली हुई हैं, जिसमें मध्य बिंदु 1.36 पर स्थित है। ऊपर की तरफ बढ़ने के लिए पाउंड को पहला प्रतिरोध 1.35 के स्तर पर मिलेगा, जिसके बाद अगला मजबूत प्रतिरोध 1.36 पर है। नीचे की तरफ, तत्काल समर्थन 1.35 के स्तर पर है, और यदि यह स्तर टूटता है तो अगला महत्वपूर्ण समर्थन 1.34 के पास देखा जा सकता है, जहां मंदी का दौर गहराने पर गिरावट थम सकती है। दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला एटीआर (ATR) इस समय 0.01 पर है, जिसे व्यापारी अपने स्टॉप-लॉस बफर के रूप में उपयोग कर सकते हैं। वैश्विक मुद्रा, जिंस और क्रिप्टो बाजार की ताजा स्थिति केवल ब्रिटिश पाउंड ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों की अन्य प्रमुख संपत्तियां भी अमेरिकी डॉलर की इस मजबूती से प्रभावित हुई हैं। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियन डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी लगभग डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर 0.7140 के पास पहुंच गई, और वर्तमान में यह जोड़ी 0.7100 के मध्य स्तर के ठीक ऊपर कारोबार कर रही है, जो आज के दिन 0.25% की गिरावट दर्शाती है। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) में मजबूती देखी गई और यह नई तेजी के साथ 154.00 के करीब पहुंच गया, जिससे पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट की आंशिक भरपाई हो गई। हालांकि, निवेशक जापान के सात महीने के निचले स्तर के पास बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। कमोडिटी बाजार में, बढ़ती डॉलर की मांग के कारण सोने की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है और सोना सोमवार को $4,300 प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गया। इस बीच, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने अपनी बढ़त बरकरार रखी है और यह सोमवार को $77,884 के स्तर के पास कारोबार करता दिखा। अन्य प्रमुख डिजिटल संपत्तियों में एथेरियम ने $2,521 के अपने महत्वपूर्ण समर्थन स्तर को बनाए रखा है, और रिपल भी $1.38 के समर्थन स्तर पर टिका हुआ है, जिससे संपूर्ण क्रिप्टो बाजार में एक तटस्थ से सकारात्मक रुख का संकेत मिल रहा है। इसका आप पर असर इस बड़े आर्थिक घटनाक्रम का आम निवेशकों और मुद्रा व्यापारियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से आयात-निर्यात और घरेलू बाजारों की चाल प्रभावित होती है। • विदेशी मुद्रा व्यापारियों के लिए: GBP/USD के 1.35 स्तर पर बने होने से बाजार में अत्यधिक सतर्कता है। ट्रेडर्स को फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड के नीतिगत बयानों के बाद आने वाली भारी अस्थिरता के लिए अपनी स्थिति को मजबूत रखना होगा। • भारतीय निवेशकों पर प्रभाव: डॉलर इंडेक्स में मजबूती से भारतीय शेयर बाजार और रुपये (INR) पर अस्थायी दबाव देखा जा सकता है। निवेशकों को अपने विदेशी निवेश पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए हेजिंग का इस्तेमाल करना चाहिए। • क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों के लिए: बिटकॉइन का $77,884 पर बने रहना यह दर्शाता है कि पारंपरिक बाजार की उथल-पुथल के बीच डिजिटल संपत्तियां अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। हालांकि, डॉलर की अत्यधिक मजबूती से क्रिप्टो बाजार में भी तेज सुधार आ सकता है। • जिंस बाजार के खरीदारों के लिए: सोने के $4,300 से नीचे आने से खरीदारों को कम कीमत पर खरीदारी का अवसर मिल सकता है। लेकिन फेड के फैसले के बाद सोने की कीमतों में बड़ी दिशात्मक चाल आ सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह बाजार हलचल मुख्य रूप से अमेरिका और ब्रिटेन में होने वाले आगामी ब्याज दर निर्धारण और मुद्रास्फीति के दबाव के कारण उत्पन्न हुई है। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: हाल ही में आए मजबूत CPI और PPI आंकड़ों ने अमेरिका में महंगाई के बने रहने की पुष्टि की है। इससे बाजार में फेड द्वारा 25 बेसिस पॉइंट दर वृद्धि की संभावना बढ़कर 88% हो गई है। • बैंक ऑफ इंग्लैंड की सावधानी: ब्रिटेन में दरें 3.75% पर स्थिर रहने की उम्मीद है। गवर्नर एंड्रयू बेली डेटा-आधारित रुख अपना रहे हैं, जिससे दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीद कम हुई है और पाउंड कमजोर हुआ है। • ट्रंप का राजनीतिक दबाव: पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दरें कम रखने के दबाव के बीच फेड चेयरमैन केविन वॉर्श की स्वतंत्रता की परीक्षा हो रही है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता है। सवाल-जवाब 1. इस सप्ताह पाउंड और डॉलर में गिरावट का मुख्य कारण क्या है? इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की मजबूत संभावनाओं और बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा दरों को स्थिर रखने की उम्मीदों के कारण पाउंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है। 2. फेडरल रिजर्व से इस बैठक में क्या उम्मीदें हैं? बाजार वर्तमान में फेड द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की लगभग 88% संभावना जता रहा है, जो हालिया मजबूत अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर आधारित है। 3. बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठा सकता है? अधिकांश अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड अपनी नीतिगत ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 3.75% पर बनाए रखेगा। 4. ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति वर्तमान में कैसी है? ब्रिटेन के आर्थिक आंकड़े मजबूत हैं; जुलाई में देश की GDP में 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई है, और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन में भी सुधार देखा गया है। 5. इस समय सोने और बिटकॉइन की कीमतों की क्या स्थिति है? बढ़ते डॉलर के कारण सोना गिरकर $4,300 से नीचे आ गया है, जबकि बिटकॉइन $77,884 के स्तर के पास कारोबार कर रहा है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-aura-bank-of-england-ke-phaisalon-se-pahale-vaishvika-bajaron-men-halachala-dollar-majabuta-aura-british-pound-men-32280 TrendKia — Har trend, sabse pehle.