फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर असमंजस बरकरार, दरों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ा फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, हालांकि दरों में वृद्धि का जोखिम बढ़ गया है। बाजार की नजरें अमेरिका के आगामी जॉब्स रिपोर्ट और उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों पर टिकी हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी या नहीं, इस पर अनिश्चितता का माहौल अभी भी बना हुआ है। हालांकि इस बात की आशंका जरूर बढ़ गई है कि मौद्रिक नीति को और सख्त किया जा सकता है। इस सिलसिले में विशेषज्ञों का मानना है कि नीतिगत मोर्चे पर तस्वीर पूरी तरह साफ होने में अभी कुछ वक्त लग सकता है। उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों और महंगाई का अनुमान आने वाले दिनों में जारी होने वाले उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों में जुलाई के मुकाबले 0.4 प्रतिशत की উল্লেখযোগ্য तेजी दर्ज की जाने की उम्मीद जताई जा रही है। यह आंकड़ा पिछले महीने के 0.1 प्रतिशत के स्तर से काफी ऊपर होगा। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह पेट्रोल की कीमतों में आया उछाल है, जो फारस की खाड़ी में नए सिरे से उपजे तनाव के चलते करीब 4 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। फेडरल रिजर्व अधिकारियों की चिंताएं ऐसी परिस्थितियों के बीच फेडरल रिजर्व के अधिकारी यह तर्क भी दे सकते हैं कि महंगाई के बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ रही है और इसलिए ब्याज दरों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी न की जाए। सैद्धांतिक तौर पर किसी एक महीने के आंकड़े को नीतिगत फैसलों का एकमात्र आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके बावजूद, कई केंद्रीय बैंक अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से यह बात कही है कि वे लंबे समय से उच्च स्तर पर बनी हुई महंगाई दर को लेकर आशंकित हैं, क्योंकि यह स्थिति वेतन और कीमतों के समझौतों को प्रभावित कर सकती है। वैश्विक मुद्रा बाजार और कमोडिटी का हाल इस बीच, वैश्विक बाजारों में विभिन्न मुद्राओं और जिंसों की चाल में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। एशियाई सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में जापान के केंद्रीय बैंक की तरफ से दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और संभावित हस्तक्षेप के कारण तेजी का रुख बना हुआ है। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी के चलते अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर भी स्थिर रुख के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि निवेशकों की निगाहें अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट पर टिकी हैं। दूसरी ओर, कीमती धातु यानी सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बाद कुछ सुस्ती आई है और यह मजबूत होते डॉलर के दबाव में नीचे की ओर आ रही है। ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की स्थिति अपेक्षाकृत शांत लग रही है, लेकिन डीजल के मोर्चे पर हालात अलग हैं, जहां अमरीकी डीजल क्रैक स्प्रेड में भारी उछाल दर्ज किया गया है। इसका आप पर असर फेडरल रिजर्व की नीतियों और महंगाई के आंकड़ों में बदलाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय निवेशकों और आयातकों पर भी पड़ता है। • भारत में: कच्चे तेल और पेट्रोल की कीमतों में होने वाले बदलाव से देश में आयात बिल और ईंधन के खुदरा दामों पर सीधा असर पड़ सकता है। • वैश्विक वित्तीय बाजारों में: ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता से डॉलर इंडेक्स और विदेशी निवेश के प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। • शेयर बाजार के निवेशकों के लिए: अमेरिकी मौद्रिक नीति के रुख से घरेलू इक्विटी बाजारों में भी धारणा प्रभावित हो सकती है। • कच्चे तेल और जिंसों पर: खाड़ी देशों में तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी से वैश्विक स्तर पर उत्पादन और ढुलाई की लागत बढ़ सकती है। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर क्या अनिश्चितता है? फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करेगा या नहीं, इस पर अभी कोई स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है, हालांकि दरों में वृद्धि का जोखिम बढ़ गया है। 2. उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों में कितनी बढ़ोतरी की उम्मीद है? विशेषज्ञों का अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों में जुलाई की तुलना में 0.4 प्रतिशत की显著 वृद्धि हो सकती है। 3. पेट्रोल और ऊर्जा की कीमतों में तेजी की क्या वजह है? फारस की खाड़ी में नए सिरे से पैदा हुए तनाव के कारण पेट्रोल की कीमतों में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 4. फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की मुख्य चिंता क्या है? अधिकारियों को इस बात का डर है कि लंबे समय तक उच्च रही महंगाई दर वेतन और कीमतों के समझौतों को प्रभावित कर सकती है। 5. जापानी येन और अमेरिकी डॉलर के बीच बाजार में क्या स्थिति है? बैंक ऑफ जापान द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के कारण जापानी येन में तेजी आई है, जबकि अमेरिकी डॉलर बॉन्ड यील्ड में नरमी के कारण दबाव में है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-faces-close-call-on-further-tightening-as-inflation-risks-persist-27789 TrendKia — Har trend, sabse pehle.