# फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले से पहले अमेरिकी डॉलर में असममित जोखिम, जानिए वैश्विक बाजारों का हाल

> फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि दर वृद्धि की भारी उम्मीदों के कारण डॉलर के लिए सीमित बढ़त और तेज गिरावट का खतरा बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-byaja-dara-phaisale-se-pahale-us-dollar-men-assam-mita-jokhima-janie-vaishvika-bajaron-ka-hala-33774 · **Language:** Hindi
**Tags:** फेडरल रिजर्व, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दर, विदेशी मुद्रा, सोना, बैंक ऑफ जापान, कच्चा तेल

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक को लेकर वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल तेज हो गई है। कच्चे तेल और ऊर्जा से जुड़ी महंगाई की चिंताओं के बीच अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत समर्थन मिल रहा है। हालांकि, वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावना पहले ही बाजार भाव में शामिल हो चुकी है। इस वजह से डॉलर के लिए ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित है, जबकि नीतिगत रुख में किसी भी तरह की नरमी आने पर इसमें तेज गिरावट का जोखिम कहीं अधिक बड़ा नजर आ रहा है।

## फेडरल रिजर्व की बैठक और ब्याज दरों की स्थिति
ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के वरिष्ठ रणनीतिकार इलियास हद्दाद के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी डॉलर को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से उपजी जोखिम भरी परिस्थितियों का लाभ मिल रहा है। फेडरल रिजर्व की संघीय मुक्त बाजार समिति आज अपनी नीतिगत समीक्षा की घोषणा करने जा रही है, जिसका समय लंदन के समयानुसार शाम 7:00 बजे और न्यूयॉर्क के समयानुसार दोपहर 2:00 बजे निर्धारित है। वित्तीय बाजारों का व्यापक अनुमान है कि नीति निर्माता प्रमुख उधारी दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के लक्षित दायरे में ला सकते हैं।

यदि समिति आज ब्याज दरों में इजाफा करती है, तो यह लगातार पांच बैठकों तक दरों को स्थिर रखने के बाद पहला बदलाव होगा। साथ ही यह जुलाई 2023 के बाद फेडरल रिजर्व की पहली दर वृद्धि मानी जाएगी। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य से लगातार ऊपर बने रहने और रोजगार बाजार की स्थिरता को इस संभावित वृद्धि का मुख्य आधार माना जा रहा है। फेड फंड्स फ्यूचर्स के आंकड़े बताते हैं कि आज 25 आधार अंकों की वृद्धि होने की संभावना लगभग 94 प्रतिशत तक आंकी जा चुकी है।

## नीतिगत अनुमान, वोट विभाजन और भविष्य की दिशा
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दर वृद्धि की उच्च संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों का मुख्य ध्यान समिति के सदस्यों के वोट विभाजन, आर्थिक अनुमानों के सारांश और फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श की प्रेस वार्ता पर रहेगा। नीतिगत बयानों से यह स्पष्ट होगा कि केंद्रीय बैंक भविष्य में मौद्रिक सख्ती को किस गति से आगे बढ़ाने का विचार रखता है।

वित्तीय स्वैप कर्व से संकेत मिलता है कि बाजार अगले बारह महीनों के भीतर लगभग 100 आधार अंकों की अतिरिक्त सख्ती का अनुमान लगा रहा है। इसमें आज होने वाली संभावित 25 आधार अंकों की वृद्धि के अलावा इस साल के अंत तक 25 आधार अंकों की एक और बढ़ोतरी तथा सितंबर 2027 तक लगभग 50 आधार अंकों की और वृद्धि शामिल मानी जा रही है। इलियास हद्दाद का कहना है कि यही व्यापक मूल्य निर्धारण डॉलर के लिए असममित जोखिम पैदा करता है, जिसमें सख्त नीति से बहुत कम लाभ होगा, लेकिन किसी भी नरम संकेत से तेज बिकवाली आ सकती है।

## अमेरिकी आर्थिक परिस्थितियां और वेतन वृद्धि की चाल
विश्लेषकों का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि अमेरिका की वर्तमान आर्थिक परिस्थितियां किसी बहुत आक्रामक सख्ती चक्र का समर्थन नहीं करती हैं। देश में वेतन वृद्धि की रफ्तार में आई सुस्ती महंगाई के दबाव को कम करने में मदद कर रही है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नीतिगत ब्याज दर पहले से ही करीब 3.00 प्रतिशत की नाममात्र तटस्थ दर की तुलना में प्रतिबंधात्मक दायरे में मौजूद है। ऐसे में जरूरत से ज्यादा आक्रामक कदम आर्थिक वृद्धि पर विपरीत असर डाल सकते हैं।

हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त महीने की रोजगार रिपोर्ट काफी मजबूत रही थी, जिसने दरों में तेज वृद्धि की संभावनाओं को हवा दी। हालांकि, बाजार की दीर्घकालिक दिशा तय करने में अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों को अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महंगाई को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए नीति निर्माताओं को फूंक-फूंक कर कदम उठाने की जरूरत होगी।

## विदेशी मुद्रा बाजार: येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव
मुद्रा बाजार के रुझानों को देखें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार तीसरे कारोबारी दिन दबाव में रहा। बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में यह 0.7100 के स्तर का बचाव करते हुए अपने मासिक निचले स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है, जिससे जोखिम वाली मुद्राओं पर असर पड़ा है।

दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर बुधवार को 155.00 के स्तर के पार पहुंचकर एक सप्ताह के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, डॉलर और येन की यह जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर से नीचे बनी रही क्योंकि कारोबारी फेडरल रिजर्व के फैसले के साथ-साथ गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक को लेकर सतर्क हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी अमेरिकी मुद्रा की आरक्षित स्थिति को सहारा दिया है।

## बैंक ऑफ जापान की नीति और सोने की वापसी
जापान की दशकों पुरानी अति-उदार मौद्रिक नीति ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन दुनिया भर में सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बना रहा। जब दुनिया भर की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं ब्याज दरों में तेज वृद्धि कर रही थीं, तब भी जापान एक अलग रास्ते पर बना रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की उम्मीदें जताई जा रही हैं, जिसका अर्थ है कि सस्ता वित्तपोषण उपलब्ध कराने वाला यह दौर एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है।

कमोडिटी बाजार में सोने ने लगातार दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। बहुमूल्य धातु में मजबूती लौटी और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,350 डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच गई। अमेरिकी डॉलर में मजबूती के बावजूद सोने में यह सुधार देखने को मिला, जबकि फेड के संभावित फैसले से पहले अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी पीली धातु को संभलने का अवसर प्रदान किया।

## इसका आप पर असर
फेडरल रिजर्व के इस नीतिगत फैसले और डॉलर की चाल का सीधा असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ आम निवेशकों और आयात-निर्यात पर पड़ेगा।

- **मुद्रा विनिमय दर:** अमेरिकी डॉलर में मजबूती से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना रहता है। इससे आयात महंगे हो सकते हैं, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
- **सोने में निवेश:** पीली धातु 4,350 डॉलर प्रति औंस के आसपास संभलती दिख रही है। यदि फेडरल रिजर्व अपने रुख में नरमी दिखाता है, तो सोने की कीमतों को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
- **ऋण और उधारी लागत:** अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में धन की लागत बढ़ जाती है। इसका असर विदेशी कर्ज लेने वाली कंपनियों और वैश्विक पूंजी प्रवाह पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
- **कमोडिटी कीमतें:** तेल और ऊर्जा से जुड़ी महंगाई वैश्विक व्यापार की लागत को प्रभावित कर रही है। आने वाले हफ्तों में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव घरेलू मुद्रास्फीति को सीधे प्रभावित कर सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तैयारी और वित्तीय बाजारों में तेज हलचल के पीछे कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक जिम्मेदार हैं।

- **महंगाई का दबाव:** कच्चे तेल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से भड़का दिया है। अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े अभी भी नीति निर्माताओं के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर बने हुए हैं।
- **मजबूत रोजगार परिदृश्य:** हालिया श्रम बाजार रिपोर्ट से संकेत मिला है कि अर्थव्यवस्था में रोजगार की स्थिति स्थिर बनी हुई है। इसने मौद्रिक सख्ती को बरकरार रखने के पक्ष में केंद्रीय बैंक के तर्कों को बल दिया।
- **भू-राजनीतिक तनाव:** मध्य पूर्व और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक टकराव ने सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाया है। अनिश्चितता के इस माहौल में अंतरराष्ट्रीय निवेशक अमेरिकी डॉलर की आरक्षित स्थिति का सहारा ले रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों को लेकर क्या अनुमान है?
बाजार का अनुमान है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में ला सकता है।

### 2. फेडरल रिजर्व ने आखिरी बार ब्याज दर कब बढ़ाई थी?
यदि आज दर में वृद्धि होती है, तो यह जुलाई 2023 के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा की जाने वाली पहली ब्याज दर वृद्धि होगी।

### 3. फेड फंड्स फ्यूचर्स के अनुसार आज दर वृद्धि की कितनी संभावना है?
फेड फंड्स फ्यूचर्स के अनुसार आज नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की लगभग 94 प्रतिशत संभावना है।

### 4. डॉलर के लिए असममित जोखिम क्यों माना जा रहा है?
बाजार पहले ही भारी नीतिगत सख्ती का अनुमान लगा चुका है, जिससे सख्त फैसले पर डॉलर की बढ़त सीमित रहेगी जबकि नरम रुख से तेज गिरावट आ सकती है।

### 5. सोने की कीमत किस स्तर पर कारोबार कर रही है?
सोना पिछले दो दिनों की गिरावट से उबरकर 4,350 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर के आसपास पहुंच गया है।

### 6. बैंक ऑफ जापान की नीति को लेकर क्या अटकलें हैं?
बाजार को उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और कड़ा करने की दिशा में कदम उठा सकता है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._