फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले 1.3500 के स्तर पर लड़खड़ाया ब्रिटिश पाउंड, डॉलर की मजबूती से दबाव में वैश्विक मुद्रा बाजार अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी ब्याज दर नीति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे पाउंड स्टर्लिंग में 1.3500 के आसपास बिकवाली देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती के बीच ब्रिटिश पाउंड लगातार दबाव में नजर आ रहा है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से ठीक पहले विदेशी मुद्रा बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। पाउंड स्टर्लिंग ने सत्र के दौरान 1.3500 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ बढ़ने का प्रयास किया, लेकिन अमेरिकी डॉलर की व्यापक खरीदारी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार तेजी के कारण यह बढ़त टिक नहीं पाई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक केंद्रीय बैंक की ओर से ब्याज दरों को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो जाती, तब तक ब्रिटिश मुद्रा में सीमित दायरे का ही कारोबार देखने को मिलेगा। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, GBP/USD वर्तमान में 1.34 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद 1.34 की तुलना में 0.26 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच बना हुआ है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर इंडेक्स का प्रभुत्व अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति का पूरा संचालन फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है। फेडरल रिजर्व को दो प्रमुख संवैधानिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जिनमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और अधिकतम रोजगार हासिल करना शामिल है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना होता है। जब अर्थव्यवस्था में आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और मुद्रास्फीति बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य को पार कर जाती है, तब फेडरल रिजर्व उधार लागत को बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। इस प्रक्रिया से अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए पूंजी निवेश बेहद आकर्षक हो जाता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2 प्रतिशत से नीचे आ जाती है या बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर तक बढ़ जाती है, तब उधारी को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिसका सीधा नकारात्मक असर डॉलर के मूल्यांकन पर पड़ता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति, जिसे फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी कहा जाता है, साल भर में कुल आठ नियमित बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों के दौरान बारह प्रमुख नीति निर्माता अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति की बारीकी से समीक्षा करते हैं। समिति में सात सदस्य बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के होते हैं, जबकि एक स्थाई सीट न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष के पास होती है। शेष चार सीटें अन्य ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों द्वारा एक वर्ष के रोटेशन के आधार पर भरी जाती हैं। हालिया आर्थिक आंकड़ों में अगस्त महीने के मजबूत रोजगार आंकड़े सामने आए थे, जिसने नीतिगत दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को हवा दी थी। इसके तुरंत बाद अगस्त के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई आंकड़ों ने नीतिगत परिदृश्य को और भी संवेदनशील बना दिया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में ब्याज दरों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मात्रात्मक सहजता और तकनीकी संतुलन के स्तर वित्तीय संकट या असामान्य परिस्थितियों में फेडरल रिजर्व पारंपरिक ब्याज दर समायोजन के अलावा गैर-पारंपरिक नीतिगत उपायों का सहारा लेता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान केंद्रीय बैंक ने क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी मात्रात्मक सहजता की नीति को प्रमुखता से लागू किया था। इस नीति के तहत केंद्रीय बैंक नई मुद्रा जारी करके वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले सुरक्षित बॉन्ड खरीदता है, ताकि संकटग्रस्त बैंकिंग प्रणाली में नकदी का प्रवाह सुचारू रूप से बना रहे। यह कदम आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को कमजोर करता है क्योंकि बाजार में नकदी की आपूर्ति बढ़ जाती है। वहीं दूसरी तरफ, मात्रात्मक सख्ती यानी क्वांटिटेटिव टाइटनिंग की प्रक्रिया में केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीद को पूरी तरह रोक देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाले मूलधन का दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे डॉलर की विनिमय दर को समर्थन मिलता है। तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो पाउंड-डॉलर विनिमय दर में 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज यानी एसएमए 1.3455 के स्तर पर स्थित है। मंदी के रुझान पर दांव लगाने वाले कारोबारी इस स्तर से नीचे की गिरावट का इंतजार कर रहे हैं। यदि मुद्रा जोड़ी 1.3455 के नीचे फिसलती है, तो 50.0 प्रतिशत के फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 1.3406 और उसके बाद 61.8 प्रतिशत के रिट्रेसमेंट स्तर 1.3343 तक गिरावट का रास्ता खुल सकता है। 1.3343 के नीचे का कोई भी दैनिक बंद तकनीकी रूप से समग्र तेजी के ढांचे को निरस्त कर देगा। ऊपर की ओर, पहला कड़ा प्रतिरोध 23.6 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट के पास 1.3548 पर देखा जा रहा है, जबकि बड़ा तकनीकी अवरोध हालिया स्विंग हाई 1.3675 के आसपास बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 38 पर दर्ज किया गया है, जो कमजोर गति को दर्शाता है, जबकि एमएसीडी हिस्टोग्राम शून्य से नीचे नकारात्मक रुझान प्रदर्शित कर रहा है। इसके अलावा 20-दिवसीय बॉलिंगर बैंड्स 1.34 से 1.37 के बीच फैले हैं और औसत ट्रू रेंज 0.01 पर स्थिर है। एशियाई और वैश्विक मुद्राओं पर बहुआयामी दबाव डॉलर की सर्वव्यापी मजबूती का असर केवल ब्रिटिश पाउंड तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी के साथ 0.7100 के स्तर का बचाव करने की कोशिश कर रहा है और बुधवार के एशियाई सत्र में एक महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उपजी मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंची तेजी ने जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर भारी दबाव डाला है। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सुरक्षित विकल्प की तलाश में अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया है। उधर डॉलर-येन जोड़ी बुधवार को एशियाई कारोबार में 155.00 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार करते हुए एक हफ्ते के नए शिखर पर पहुंच गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते राजनयिक और भू-राजनीतिक तनाव ने अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय रिजर्व मुद्रा के रूप में अतिरिक्त संबल प्रदान किया है। हालांकि, निवेशक फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक से पहले किसी बड़ी दिशात्मक खरीदारी से बचते दिख रहे हैं, जिससे जोड़ी 155.00 के मध्य स्तर के नीचे बनी रही। जापान की एक दशक से अधिक समय तक चली शून्य के करीब ब्याज दरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरबों डॉलर के वित्तीय निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे येन वैश्विक स्तर पर फंडिंग का सबसे सस्ता स्रोत बन गया था। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सख्ती की संभावनाओं के बीच यह ऐतिहासिक लाभ एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कमोडिटी बाजारों का रुख और सोने की चाल केंद्रीय बैंकों के फैसलों से पहले वैश्विक जिंस बाजारों में भी अत्यधिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना यूरोपीय सत्र के पहले पहर के दौरान मामूली बढ़त बनाए रखने में कामयाब रहा, हालांकि इसमें आक्रामक खरीदारी का अभाव देखा गया और कीमतें 4,350 डॉलर प्रति औंस के नीचे ही टिकी रहीं। दो हफ्ते के उच्चतम स्तर से डॉलर इंडेक्स में हुई आंशिक मुनाफावसूली ने पीली धातु को तात्कालिक सहारा दिया। इसके बावजूद वायदा और हाजिर बाजार के व्यापारी जोखिम भरे दांव लगाने से पूरी तरह परहेज कर रहे हैं। प्रमुख केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर दृष्टिकोण सामने आने तक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में अस्थिरता बनी रहने की प्रबल संभावना है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले और डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और आयात-निर्यात लागत पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में: डॉलर मजबूत रहने से भारतीय रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दबाव में आ सकता है। आयातित कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत बढ़ सकती है जिससे घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव महसूस होगा। • वैश्विक यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर और पाउंड में तेज उतार-चढ़ाव से विदेश में पढ़ाई और यात्रा के बजट पर असर पड़ेगा। विदेश यात्रा करने वाले नागरिकों को करेंसी एक्सचेंज और कार्ड स्वाइप की विनिमय दरों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। • मुद्रा और कमोडिटी निवेशकों के लिए: केंद्रीय बैंकों की सख्ती से सोने और चांदी की कीमतों में सीमित दायरे का कारोबार बना रह सकता है। ट्रेडर्स को 1.3455 और 1.3343 के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर रखते हुए सख्त स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए। • आयात-निर्यात कंपनियों के लिए: विनिमय दर में अचानक बदलाव से विदेशी व्यापारिक अनुबंधों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। निर्यातकों और आयातकों को संभावित मुद्रा जोखिम से बचने के लिए फॉरवर्ड हेजिंग रणनीतियों को सक्रिय रखना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती आशंकाओं और भू-राजनीतिक तनाव के कारण उत्पन्न हुई है। • अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का प्रभाव: अगस्त महीने में आए मजबूत रोजगार और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त नीति बनाए रखने की संभावनाओं को बढ़ाया है। इसके चलते अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर पहुंच गई और डॉलर को भारी मजबूती मिली। • भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद ने निवेशकों को सुरक्षित वित्तीय संपत्तियों की ओर जाने पर मजबूर किया है। इस कारण जोखिम-संवेदनशील मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मांग में भारी उछाल दर्ज किया गया। • केंद्रीय बैंकों की नीतियों में भिन्नता: प्रमुख विकसित देशों के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना रहे हैं, जबकि बैंक ऑफ जापान अपनी दशक पुरानी नीति को बदलने की तैयारी में है। इन केंद्रीय बैंक बैठकों से पहले ट्रेडर्स ने नई पोजिशन बनाने के बजाय मुनाफावसूली और सावधानी का रास्ता चुना। सवाल-जवाब 1. ब्रिटिश पाउंड में 1.3500 के स्तर पर गिरावट क्यों आई? फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले से पहले अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण पाउंड पर दबाव बना। 2. GBP/USD के लिए कौन से तकनीकी समर्थन स्तर महत्वपूर्ण हैं? तकनीकी रूप से 200-दिवसीय एसएमए 1.3455 पर है, जिसके नीचे 1.3406 और 1.3343 के फिबोनाची स्तर प्रमुख समर्थन के रूप में कार्य करेंगे। 3. फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बदलाव क्यों करता है? फेडरल रिजर्व कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और अधिकतम रोजगार के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ब्याज दरों को औजार के रूप में उपयोग करता है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में क्या अंतर है? मात्रात्मक सहजता में केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी बढ़ाने के लिए बॉन्ड खरीदता है, जबकि मात्रात्मक सख्ती में बॉन्ड खरीद रोककर नकदी को कम किया जाता है। 5. सोने की कीमतों में सीमित बढ़त क्यों देखी जा रही है? डॉलर में हल्की मुनाफावसूली से सोने को सहारा मिला है, लेकिन केंद्रीय बैंक बैठकों के डर से निवेशक आक्रामक खरीदारी से बच रहे हैं और कीमतें $4,350 के नीचे हैं। 6. ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की क्या स्थिति है? ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर होकर 0.7100 के पास मासिक निचले स्तर पर है, जबकि डॉलर-येन जोड़ी 155.00 के पार एक हफ्ते के नए शिखर पर पहुंच गई है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-phaisale-se-pahale-1-3500-ke-stara-para-larakharaya-british-pound-us-dollar-ki-majabuti-se-dabava-men-vaishvika-33815 TrendKia — Har trend, sabse pehle.