फेडरल रिजर्व के सख्त बयानों से डॉलर में उछाल, यूरो पर दबाव बढ़ा न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के जॉन विलियम्स द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के संकेत के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे यूरो में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते यूरो पर बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के स्थायी मतदान सदस्य जॉन विलियम्स की ओर से नीतिगत दरों को लेकर दिए गए सख्त बयानों के बाद यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.1400 के इंट्राडे उच्च स्तर से फिसलकर 1.1380 के करीब आ गया। मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी डीएक्सवाई छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बढ़त दर्ज करते हुए 101.17 के आसपास कारोबार करता नजर आया, जो इसके आठ हफ्तों के उच्च स्तर 101.23 के काफी करीब है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में रिकॉर्ड उछाल और फेडरल रिजर्व का रुख जॉन विलियम्स की सख्त टिप्पणियों का सीधा असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी दिखा। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड उछलकर 5.14% के स्तर पर पहुंच गई, जो 19 वर्षों का नया उच्च स्तर है। जॉन विलियम्स ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती, रोजगार के मोर्चे पर घटते जोखिमों और एआई आधारित मजबूत मांग का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने के लिए साल के अंत तक एक और ब्याज दर वृद्धि का कदम उचित हो सकता है। उनके इस रुख ने नीतिगत सख्ती जारी रहने की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। जर्मन आईएफओ आंकड़ों से मिला शुरुआती सहारा दिन के शुरुआती कारोबार में यूरो को जर्मनी से आए बेहतर आर्थिक आंकड़ों का सहारा मिला था। सितंबर महीने के लिए जर्मन आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स सुधरकर 89.9 पर पहुंच गया, जो विश्लेषकों के 89.0 के अनुमान और अगस्त के 88.9 के आंकड़े से काफी बेहतर रहा। इसके अलावा वर्तमान आकलन सूचकांक 89.5 और उम्मीदों से जुड़ा सूचकांक 90.4 दर्ज किया गया। हालांकि, इन सकारात्मक आर्थिक आंकड़ों का असर फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के सामने अधिक समय तक नहीं टिक सका। तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर तकनीकी मोर्चे पर यूरो बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी के लिए पहला बड़ा प्रतिरोध 20-पीरियड एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी ईएमए 1.1515 के करीब स्थित है। इस मंदी के दबाव को कम करने और किसी ठोस रिकवरी के लिए दैनिक आधार पर इस स्तर से ऊपर बंद होना जरूरी माना जा रहा है। नीचे की ओर यह जोड़ी 1.1325 के साल के निचले स्तर की तरफ दबाव महसूस कर सकती है। वर्तमान में 14-पीरियड आरएसआई 25 के स्तर पर बना हुआ है, जो ओवरसोल्ड स्थिति की ओर इशारा करता है। वहीं 20-पीरियड बोलिंजर बैंड के निचले दायरे से नीचे फिसलने के साथ जोड़ी में मंदी का रुख बना हुआ है। एशियाई और वैश्विक बाजारों का हाल अन्य प्रमुख मुद्राओं की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर जोड़ी 0.7000 के स्तर की ओर फिसलती नजर आई। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त माह के रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5% की तुलना में बढ़कर 4.6% दर्ज की गई, हालांकि रोजगार में बदलाव 39.5 हजार के मजबूत स्तर पर रहा। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी तीन सप्ताह के उच्च स्तर से फिसलकर 158.00 के करीब बनी रही। जापानी बॉन्ड यील्ड में तेजी और संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया। केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले और अन्य संपत्तियां अन्य केंद्रीय बैंकों के फैसलों में स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को उम्मीद के अनुरूप 0% पर अपरिवर्तित रखा है। स्विस नेशनल बैंक ने 2026 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 0.6% से बढ़ाकर 0.7% कर दिया है और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रमों को मुख्य जोखिम बताया है। वहीं बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के कदम के तहत 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। कमोडिटी बाजार में डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक से पहले सोने में लगातार दूसरे दिन कमजोरी रही और यह 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक हफ्ते के निचले स्तर पर कारोबार करता रहा। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी का सीधा असर वैश्विक मुद्रा बाजार और आयात लागत पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय और यात्रा: मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेशी शिक्षा के खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। जो लोग विदेश यात्रा या विदेशी भुगतान की योजना बना रहे हैं, उन्हें विनिमय दरों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। • आयात और महंगाई: डॉलर के मजबूत होने से कच्चे तेल और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। इससे घरेलू बाजार में आयातित उत्पादों की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। • फॉरेक्स और कमोडिटी ट्रेडर्स: केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णयों के चलते करेंसी जोड़ों और सोने में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। ट्रेडर्स को सख्त स्टॉप-लॉस और उचित जोखिम प्रबंधन के साथ ही नई पोजीशन बनानी चाहिए। • ऋण और निवेश लागत: वैश्विक स्तर पर उच्च ब्याज दरों का रुख रहने से विदेशी पूंजी की लागत बढ़ सकती है। इससे उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह में अस्थिरता आ सकती है। ऐसा क्यों हुआ न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारी द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताए जाने और अमेरिकी आर्थिक मजबूती के चलते यह बाजार हलचल देखने को मिली। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: जॉन विलियम्स ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है और साल के अंत तक एक और दर वृद्धि उचित हो सकती है। इस बयान ने बाजार में ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदों को खारिज कर दिया। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: नीतिगत सख्ती की संभावनाओं के बीच 10-वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 19 साल के उच्चतम स्तर 5.14% पर पहुंच गई। उच्च प्रतिफल ने डॉलर में वैश्विक स्तर पर भारी खरीदारी को बढ़ावा दिया। • आर्थिक आंकड़ों में अंतर: हालांकि जर्मनी के आईएफओ आंकड़े सकारात्मक रहे, लेकिन अमेरिका की मजबूत घरेलू मांग और एआई क्षेत्र की वृद्धि डॉलर के पक्ष में अधिक भारी साबित हुई। सवाल-जवाब 1. यूरो के मुकाबले डॉलर क्यों मजबूत हो रहा है? फेडरल रिजर्व के अधिकारी जॉन विलियम्स द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी के संकेत देने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ है। 2. अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड किस स्तर पर पहुंची? 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.14% के स्तर पर पहुंच गई है, जो 19 वर्षों का नया उच्च स्तर है। 3. जर्मनी के आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट आंकड़े क्या रहे? सितंबर माह में जर्मन आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स सुधरकर 89.9 रहा, जो 89.0 के अनुमान से बेहतर है। 4. बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दरों में क्या बदलाव किया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 5. स्विस नेशनल बैंक का नीतिगत फैसला क्या रहा? स्विस नेशनल बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 0% पर बनाए रखा है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-sakhta-bayanon-se-dollar-men-uchhala-euro-para-dabava-barha-37721 TrendKia — Har trend, sabse pehle.