फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में उछाल, प्रमुख मुद्राओं पर बढ़ा दबाव फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेतों और मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद डॉलर इंडेक्स 101.40 के करीब पहुंच गया है। यूरो, पाउंड और जापानी येन में गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स यानी DXY ने विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी मजबूत बढ़त का सिलसिला बरकरार रखा है और यह 101.40 के स्तर के पास पहुंच गया है, जो जुलाई के आखिर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी का समर्थन किए जाने और श्रम बाजार से जुड़े मजबूत आंकड़ों के बाद डॉलर लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जुलाई के आखिर में बने शीर्ष स्तर और अगस्त के निचले स्तर के बीच इंडेक्स ने जितना नुकसान झेला था, उसमें से करीब 90% की भरपाई अब तक हो चुकी है। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार डॉलर इंडेक्स 101.28 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 101.10 के बंद स्तर से 0.18% ऊपर है। मजबूत श्रम आंकड़े और आने वाले आर्थिक संकेतक अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आए ताज़ा बेरोजगारी दावों ने मुद्रा को काफी सहारा दिया है। शुरुआती बेरोजगार दावों की संख्या 197K दर्ज की गई, जबकि विश्लेषकों का अनुमान 201K का था। इस आंकड़े ने दर्शाया है कि अमेरिकी श्रम बाजार अभी भी मजबूती से टिका हुआ है, जिससे नीति निर्माताओं को सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने का पर्याप्त आधार मिल रहा है। व्यापारियों की नजर अब शुक्रवार को आने वाले टिकाऊ सामानों के ऑर्डर आंकड़ों पर टिकी है। टिकाऊ सामानों के ऑर्डर में 1.1% की पिछली बढ़त के बाद अब -0.4% की गिरावट का अनुमान जताया गया है। वहीं परिवहन को छोड़कर टिकाऊ सामानों के ऑर्डर में 0.6% की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो पिछली बार 0.4% रहा था। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन द्वारा जारी किए जाने वाले घरेलू महंगाई उम्मीदों के आंकड़े पर भी ध्यान रहेगा, जो आगामी वर्ष के लिए 4.6% रहने का अनुमान है और यह आंकड़ा 14:00 GMT पर सामने आएगा। फेडरल रिजर्व के अधिकारी प्रेसिडेंट विलियम्स और प्रेसिडेंट हैमक शुक्रवार को एक बार फिर संबोधन देने वाले हैं, जिससे बाजार को उनके विचारों को दोबारा परखने का अवसर मिलेगा। वैश्विक मुद्राओं और विदेशी बाजारों पर असर अमेरिकी डॉलर की इस तेजी का दूसरा पहलू अमेरिका से बाहर वैश्विक मुद्रा बाजारों में देखने को मिल रहा है। गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले यूरो दो महीने के निचले स्तर पर चला गया, जबकि ब्रिटिश पाउंड तीन महीने के निचले स्तर के करीब आ गया। जापानी येन के मुकाबले डॉलर यानी USD/JPY 158.00 के करीब कारोबार करता नजर आया, खासकर तब जब तीन दिनों की छुट्टी के बाद तोक्यो का बाजार दोबारा खुला। बैंक ऑफ जापान ने 18 सितंबर को एक नीतिगत बैठक में 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया था, जिसे मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक कदम माना गया। हालांकि विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने इस दर बढ़ोतरी को बेहद सीमित माना और यह राय बनी कि दरों में लगातार बढ़ोतरी का कोई लंबा दौर शुरू नहीं होने वाला है, जिसके चलते जापानी येन दबाव में बना रहा। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी AUD/USD भी एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर की तरफ गिरता दिखा। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने की रोजगार रिपोर्ट में बेरोजगारी दर अनुमानित 4.5% के मुकाबले बढ़कर 4.6% पर आ गई, भले ही रोजगार में 39.5K का इजाफा हुआ। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक से पहले भी कारोबारी सतर्क रुख बनाए हुए हैं। दूसरी तरफ सोने की कीमतों में भी नरमी देखी गई और सोना प्रति ट्रॉय औंस $4,250 के नीचे फिसल गया, क्योंकि डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में तेजी ने इस कीमती धातु पर दबाव बनाया। चार्ट पर तकनीकी स्तर और समर्थन-प्रतिरोध दैनिक तकनीकी चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का रुझान मजबूती की तरफ बना हुआ है। गुरुवार का 101.40 के करीब का उच्च स्तर जुलाई के अंत के बाद का सबसे बड़ा स्तर है और यह 28 जुलाई को बने 101.50 से ठीक ऊपर वाले शीर्ष स्तर के काफी करीब है। यदि इंडेक्स इस स्तर को पार करता है, तो जून महीने का 101.80 के करीब का शिखर अगला बड़ा प्रतिरोध स्तर साबित होगा। लाइव चार्ट संकेतकों के मुताबिक आरएसआई 71 पर है जो ओवरबॉट स्थिति दर्शाता है, जबकि एमएसीडी 0.30 पर है और सिग्नल लाइन 0.05 की तुलना में तेज बढ़त का संकेत दे रहा है। 52-हफ्तों का दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है। समर्थन स्तरों की बात करें तो 101.00 का स्तर महत्वपूर्ण है, जिसे बुधवार की तेजी ने पार किया था और गुरुवार का निचला स्तर इसी के आसपास थमा। इसके नीचे 100.50 का दायरा आता है, जहां से बुधवार की रैली शुरू हुई थी। दैनिक स्टोकैस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी Stoch RSI पर मोमेंटम करीब 84 पर पहुंच चुका है, जो जुलाई की शुरुआत के बाद पहली बार 80 से ऊपर आया है। इसका तात्पर्य है कि तेजी की चाल काफी खिंच चुकी है और बिना रुख बदले इसमें ठहराव आ सकता है। हालांकि, यदि दैनिक बंद 100.50 से नीचे आता है, तो तेजी का यह परिदृश्य समाप्त हो सकता है। दैनिक औसत ट्रू रेंज यानी ATR 0.45 पर है, जबकि पिवट बिंदु 101.23, पहला प्रतिरोध R1 101.45, दूसरा प्रतिरोध R2 101.62, पहला समर्थन S1 101.05 और दूसरा समर्थन S2 100.83 पर स्थित है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और डॉलर की भूमिका अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ कई अन्य देशों में भी स्थानीय नोटों के साथ प्रचलन में रहता है। यह दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो 2022 के आंकड़ों के अनुसार कुल वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार के 88% से अधिक हिस्सेदारी रखती है, यानी औसतन प्रतिदिन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का लेन-देन इसमें होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड की जगह दुनिया की प्राथमिक रिजर्व करेंसी का स्थान लिया। अपने इतिहास के अधिकांश समय में डॉलर को सोने का समर्थन प्राप्त था, लेकिन 1971 के ब्रेटन वुड्स समझौते के बाद गोल्ड स्टैंडर्ड समाप्त कर दिया गया। डॉलर के मूल्य को निर्धारित करने वाला सबसे बड़ा एकल कारक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व के दो मुख्य उद्देश्य हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना और अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना। इन लक्ष्यों को पाने के लिए उसका प्राथमिक साधन ब्याज दरों का समायोजन है। जब कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और महंगाई 2% के लक्ष्य से ऊपर चली जाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे डॉलर के मूल्य को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत जब महंगाई 2% से नीचे आती है या बेरोजगारी दर अधिक होती है, तब दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर कमजोर पड़ता है। मात्रात्मक ढील और मात्रात्मक सख्ती का प्रभाव अत्यधिक दबाव की स्थितियों में फेडरल रिजर्व अतिरिक्त डॉलर छापकर क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी मात्रात्मक ढील (QE) की नीति अपना सकता है। यह प्रक्रिया वित्तीय तंत्र में ऋण के प्रवाह को व्यापक स्तर पर बढ़ाने के लिए की जाती है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसका सहारा तब लिया जाता है जब बैंकों के बीच एक-दूसरे को उधार देने का भरोसा टूट जाता है। 2008 के वित्तीय संकट के दौरान इसका मुख्य रूप से उपयोग किया गया था, जिसमें फेडरल रिजर्व डॉलर जारी कर वित्तीय संस्थानों से सरकारी बॉन्ड खरीदता है। यह प्रक्रिया सामान्यतः डॉलर को कमजोर करती है। इसके उलट क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी मात्रात्मक सख्ती (QT) वह प्रक्रिया है जिसमें फेडरल रिजर्व वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता। यह प्रक्रिया बाजार में मुद्रा आपूर्ति को सीमित करती है और डॉलर के मूल्य के लिए सकारात्मक साबित होती है। वर्तमान में फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और नीतिगत बयानों ने डॉलर को अतिरिक्त बल दिया है, जिससे वैश्विक वित्तीय बाजारों पर गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में आई इस तेजी और फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति से वैश्विक व्यापार और वित्तीय परिसंपत्तियों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • भारत में प्रभाव: मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कच्चे तेल और अन्य आयातों की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर घरेलू बाजार में आयातित वस्तुओं के महंगे होने और चालू खाता घाटे पर पड़ सकता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर के मजबूत होने से उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी तेज हो सकती है। इक्विटी बाजारों और सोने जैसी कीमती धातुओं में निवेश करने वालों को थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। • विदेशी यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर की मजबूती के कारण अमेरिका में पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए ट्यूशन फीस और रहने का खर्च बढ़ जाएगा। इसी तरह विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों के बजट में मुद्रा विनिमय के कारण इजाफा देखने को मिलेगा। • मुद्रा व्यापारियों के लिए: तकनीकी रूप से 101.40 और 101.80 का स्तर डॉलर इंडेक्स के लिए अहम बाधा है, जबकि 100.50 टूटने पर ही तेजी थमेगी। ट्रेडर्स को आने वाले टिकाऊ सामानों के ऑर्डर और महंगाई उम्मीदों के आंकड़ों पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में यह उछाल आर्थिक आंकड़ों की मजबूती और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के सख्त बयानों के संयुक्त असर से पैदा हुआ है। • श्रम बाजार की मजबूती: बेरोजगारी भत्ते के शुरुआती दावे घटकर 197K रह गए, जो अनुमानित 201K से काफी बेहतर थे। मजबूत रोजगार आंकड़े यह दर्शाते हैं कि अर्थव्यवस्था में मंदी की तत्काल आशंका नहीं है, जिससे फेड को दरें बढ़ाने की छूट मिलती है। • फेड अधिकारियों के आक्रामक बयान: प्रेसिडेंट विलियम्स और प्रेसिडेंट हैमक सहित फेडरल रिजर्व के प्रमुख अधिकारियों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का समर्थन किया है। नीति निर्माताओं के इस रुख से बाजार में लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीदें पक्की हो गई हैं। • वैश्विक केंद्रीय बैंकों की धीमी गति: बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें 1.25% करने के बावजूद बाजार ने इसे धीमा कदम माना, जिससे येन कमजोर हुआ। यूरोप और ब्रिटेन में सुस्त आर्थिक आंकड़ों के कारण यूरो और पाउंड डॉलर के मुकाबले भारी दबाव में आ गए। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) किस स्तर पर पहुंचा है? डॉलर इंडेक्स 101.40 के स्तर के करीब पहुंचा है, जो जुलाई के अंत के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। 2. हालिया अमेरिकी बेरोजगारी दावों के आंकड़े क्या रहे? प्रारंभिक बेरोजगारी दावों की संख्या 197K दर्ज की गई, जो 201K के अनुमान से बेहतर और कम रही। 3. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या फैसला लिया? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 4. डॉलर इंडेक्स के लिए प्रमुख तकनीकी प्रतिरोध और समर्थन स्तर क्या हैं? प्रमुख प्रतिरोध 101.40 और 101.80 के पास है, जबकि नीचे की तरफ 101.00 और 100.50 अहम समर्थन स्तर हैं। 5. शुक्रवार को कौन से प्रमुख आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं? शुक्रवार को अमेरिकी टिकाऊ सामानों के ऑर्डर और यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की मुद्रास्फीति अपेक्षाओं के आंकड़े आने हैं। 6. सोने की कीमतों पर डॉलर की मजबूती का क्या प्रभाव पड़ा? मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण सोना गिरकर $4,250 प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसल गया। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-sakhta-rukha-se-us-dollar-index-men-uchhala-pramukha-mudraon-para-barha-dabava-38086 TrendKia — Har trend, sabse pehle.