फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से अमेरिकी डॉलर में मजबूती, वैश्विक मुद्राओं और सोने पर दबाव फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण अमेरिकी डॉलर में मजबूती बनी हुई है, जिससे सोना, यूरो और जापानी येन दबाव में हैं जबकि बिटकॉइन में 85,500 डॉलर के नीचे कंसोलिडेशन देखा जा रहा है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम उठाने की धारणा में सुधार के बावजूद अमेरिकी डॉलर ने अपनी पकड़ ढीली नहीं की है। तकनीकी शेयरों में तेजी, अमेरिका और चीन के बीच आगामी वार्ता को लेकर सकारात्मक उम्मीदों तथा कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने बाजार के माहौल को सहारा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बेहतर होने और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक प्रगति की आस से तेल आपूर्ति से जुड़ी चिंताएं कुछ हद तक शांत हुई हैं। हालांकि, आमतौर पर जोखिम धारणा बेहतर होने पर सुरक्षित निवेश मानी जाने वाली मुद्राएं कमजोर पड़ती हैं, लेकिन अमेरिकी डॉलर की चाल काफी हद तक मिली-जुली और स्थिर बनी हुई है। बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा कीमतों का रुख कच्चे तेल और ऊर्जा की गिरती कीमतों से तात्कालिक महंगाई को लेकर आशंकाएं कुछ कम हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सरकारी बॉन्ड की यील्ड नीचे आई है। यूरोप में यील्ड वक्र में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अमेरिका में स्थिति थोड़ी अलग रही। फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं की ओर से ब्याज दरों को लेकर सख्त बयानों ने अमेरिकी शॉर्ट टर्म यील्ड में तेज गिरावट को थाम लिया। अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाले मजबूत रिटर्न ने मुद्रा बाजार में डॉलर के भाव को टिकाए रखा है। साल के अंत तक अमेरिकी डॉलर के सीमित दायरे में मजबूत बने रहने की संभावना है क्योंकि फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख का जोखिम लगातार बना हुआ है। हालांकि, डॉलर में किसी बड़े और टिकाऊ उछाल के लिए अर्थव्यवस्था में केवल आपूर्ति संबंधी दबावों के बजाय मांग से प्रेरित महंगाई के स्पष्ट संकेत मिलने की आवश्यकता होगी। यूरोपीय मुद्राओं पर वित्तीय दबाव और जापानी येन की स्थिति यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो के सामने कई मोर्चों पर चुनौतियां खड़ी हैं, जिससे डॉलर को अतिरिक्त मजबूती मिल रही है। यूरोप की अर्थव्यवस्थाएं वित्तीय चिंताओं, खासकर फ्रांस में वित्तीय अस्थिरता, बिजली और ईंधन की ऊंची लागतों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निवेश की धीमी रफ्तार से जूझ रही हैं। दूसरी ओर, चीनी युआन यानी CNY अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले धीरे-धीरे बढ़त बना रहा है। यदि जापान की घरेलू मौद्रिक नीतियां अधिक अनुकूल होती हैं, तो जापानी येन यानी JPY के परिदृश्य में भी सुधार देखा जा सकता है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान USD/JPY जोड़ी ने 157.50 के स्तर के करीब मामूली बढ़त दर्ज की। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंका ने येन में बड़ी गिरावट को सीमित रखा। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्चतम स्तर तक की गई ब्याज दर वृद्धि के बावजूद येन पर दबाव बना हुआ है क्योंकि केंद्रीय बैंक का रुख नरम माना जा रहा है। फेड के सख्त रुख और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर को अतिरिक्त सहारा मिल रहा है। बैंक ऑफ जापान का ऐतिहासिक ब्याज दर फैसला बैंक ऑफ जापान ने अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है। नीति निर्धारण बोर्ड में यह निर्णय 7 के मुकाबले 2 वोटों के बहुमत से लिया गया। यह कदम देश की मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण चरण है, जो बाजार के कई हफ्तों के अनुमानों के पूरी तरह अनुकूल रहा। इसके बावजूद येन में अपेक्षित उछाल नहीं दिखा क्योंकि निवेशकों ने इसे बहुत आक्रामक फैसला नहीं माना। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और आगामी शिखर सम्मेलन पर नजर रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की असिस्टेंट गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलक के कड़े नीतिगत बयानों के बाद मंगलवार को एशियाई सत्र में AUD/USD जोड़ी 0.7100 के ऊपर पहुंच गई। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत नजरिया डॉलर के तेजी के रुझान को बरकरार रखे हुए हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की यह बढ़त सीमित दायरे में बंध सकती है। इस बीच, इस सप्ताह के अंत में होने वाले ट्रंप और शी के बीच अहम शिखर सम्मेलन पर दुनिया भर के निवेशकों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। सोने की कीमतों में गिरावट और बिटकॉइन का हाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त ब्याज दर रुख का सीधा असर कीमती धातुओं पर देखने को मिला है। यूरोपीय सत्र में सोने के भाव लगातार दूसरे दिन फिसलते हुए 4,315 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गए, जो तीन दिनों का निचला स्तर है। ब्याज न देने वाली संपत्तियों से निवेशकों की पूंजी बाहर निकलने के कारण सोने पर यह दबाव बना है। डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में पिछले दिन 6.7 प्रतिशत की जोरदार छलांग लगाने के बाद मंगलवार को बिटकॉइन में हल्का सुधार देखने को मिला और यह 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार करता नजर आया। इस मामूली सुस्ती के बावजूद संस्थागत निवेशकों की मांग काफी मजबूत बनी हुई है। स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF में सोमवार को करीब 1 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि स्ट्रैटेजी ने अपने कोष में 950 BTC और जोड़े हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर और अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर वैश्विक पूंजी प्रवाह, आयात लागत और निवेश के विकल्पों पर पड़ता है। • मुद्रा विनिमय और आयात: डॉलर की मजबूती से आयातित सामानों पर लागत दबाव बना रह सकता है। भारतीय आयातकों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को विनिमय दरों पर विशेष नजर रखनी चाहिए। • सोने में निवेश: अमेरिकी दरों के ऊंचे बने रहने से सोने की कीमतों में निकट अवधि में नरमी देखने को मिल सकती है। सोना खरीदार मौजूदा गिरावट को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं। • क्रिप्टोकरेंसी बाजार: संस्थागत मांग मजबूत होने के बावजूद बिटकॉइन में तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली हो रही है। नए निवेशकों को 85,500 डॉलर के स्तर पर उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन का ध्यान रखना होगा। • वैश्विक शेयर बाजार: आगामी ट्रंप-शी वार्ता और फेडरल रिजर्व की नीतियों से आने वाले दिनों में शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक परिसंपत्तियों में यह फेरबदल केंद्रीय बैंकों की नीतियों तथा अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक गतिविधियों के समन्वय का परिणाम है। • फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणियां: फेड अधिकारियों द्वारा लगातार सख्त नीतिगत संकेत दिए जाने से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मजबूत बनी रही। इसने निवेशकों को अमेरिकी डॉलर में अपनी पूंजी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। • बैंक ऑफ जापान का संतुलित फैसला: ब्याज दरों में 1.25 प्रतिशत तक की वृद्धि के बावजूद बैंक ऑफ जापान का लहजा आक्रामक नहीं रहा। इसके चलते जापानी येन में डॉलर के मुकाबले अपेक्षित मजबूती नहीं आ सकी। • ऊर्जा कीमतों में नरमी: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुचारू आवाजाही और कूटनीतिक प्रगति से तेल के दाम घटे। इसने मुद्रास्फीति की चिंता कम की, लेकिन सुरक्षित मुद्राओं की तुलना में डॉलर की मांग प्रभावित नहीं हुई। • संस्थागत पूंजी प्रवाह: क्रिप्टोकरेंसी में संस्थागत पूंजी और ईटीएफ की भारी आवक ने बड़े उछाल के बाद मुनाफावसूली के दौर को प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व के रुख से अमेरिकी डॉलर पर क्या असर पड़ रहा है? फेडरल रिजर्व के सख्त बयानों से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिला है, जिससे डॉलर साल के अंत तक मजबूत बना रह सकता है। 2. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दी है, जो 31 साल का उच्चतम स्तर है। 3. सोने की कीमतों में गिरावट क्यों आई? फेडरल रिजर्व के कड़े मौद्रिक रुख के कारण निवेशक ब्याज न देने वाली संपत्तियों से दूर हो रहे हैं, जिससे सोना फिसलकर 4,315 डॉलर के आसपास आ गया। 4. क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन का ताजा स्तर क्या है? बिटकॉइन 6.7 प्रतिशत की तेजी के बाद 85,500 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि स्पॉट ईटीएफ में करीब 1 अरब डॉलर का निवेश दर्ज हुआ। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-sakhta-rukha-se-us-dollar-men-majabuti-vaishvika-mudraon-aura-sone-para-dabava-36470 TrendKia — Har trend, sabse pehle.