फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से अमेरिकी डॉलर में तेजी, क्या 100 के स्तर से ऊपर बनी रहेगी मजबूती फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल के चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। विश्लेषक नीतिगत सख्ती और प्रमुख तकनीकी स्तरों पर नजर बनाए हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में उल्लेखनीय मजबूती दर्ज की जा रही है। फेडरल रिजर्व द्वारा हालिया मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में की गई वृद्धि और उसके बाद के सख्त नीतिगत रुख के कारण डॉलर सात सप्ताह के नए शीर्ष स्तर पर पहुंच गया है। ताजा कारोबारी सत्र में डॉलर इंडेक्स 100.40 के आसपास कारोबार करता देखा गया और यह एक प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लाइव क्लोजिंग आंकड़ों के अनुसार, डॉलर इंडेक्स 100.22 के स्तर पर स्थिर दिखाई दिया है, जबकि इसका 52 हफ्तों का दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने ग्रीनबैक की खरीदारी को काफी बल दिया है। फेडरल रिजर्व के कदम और वैश्विक वित्तीय संस्थानों का आकलन अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ताजा फैसले ने बाजार विश्लेषकों को अपने पुराने अनुमानों की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। यूओबी ग्रुप के विश्लेषकों का कहना है कि उनकी 2026 की चौथी तिमाही वाली रिपोर्ट में मध्यम अवधि के लिए डॉलर पर मंदी का जो रुख तय किया गया था, वह इस धारणा पर आधारित था कि फेड 2026 के शेष हिस्से में दरों में वृद्धि को स्थगित रखेगा। हालांकि, हालिया संघीय खुला बाजार समिति (FOMC) के घटनाक्रमों के बाद इस दृष्टिकोण का नए सिरे से मूल्यांकन किया जा रहा है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि बाजारों की ही तरह यह कोई अकेला और अंतिम दर संशोधन नहीं था, क्योंकि पिछले ऐतिहासिक चक्रों को देखने से स्पष्ट होता है कि केंद्रीय बैंक आमतौर पर केवल एक बढ़ोतरी के बाद रुकता नहीं है। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसे लंबी और अंतहीन दर वृद्धियों की श्रृंखला की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। आगामी नीतिगत कदमों के रास्ते में कई बाधाएं और जोखिम भी मौजूद हैं। विश्लेषकों ने 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के निकट होने के कारण अक्टूबर की FOMC बैठक में लगातार दूसरी दर वृद्धि की संभावना को खारिज कर दिया है। इसके बावजूद, यदि कच्चे तेल और ऊर्जा की उच्च कीमतें, व्यापार शुल्क तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जुड़े कारक मुद्रास्फीति को अधिक टिकाऊ और जिद्दी बनाते हैं, तो नीतिगत सख्ती का जोखिम बरकरार रहेगा। तकनीकी संकेत और प्रमुख समर्थन व प्रतिरोध स्तर दैनिक चार्ट पर डॉलर इंडेक्स का तकनीकी ढांचा तेजी के अनुकूल बना हुआ है। यह इंडेक्स 50-दिवसीय, 100-दिवसीय और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से ऊपर बना हुआ है, जो मोटे तौर पर 99.16 और 99.91 के बीच केंद्रित हैं। लाइव तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 50-दिवसीय SMA 99.95 पर और 200-दिवसीय SMA 99.15 पर मौजूद है, जहां 50-दिवसीय और 200-दिवसीय घातीय मूविंग एवरेज (EMA) के बीच गोल्डन क्रॉस की स्थिति दीर्घकालिक तेजी के रुझान की पुष्टि करती है। इसके अतिरिक्त, 20-दिवसीय EMA 99.58, 50-दिवसीय EMA 99.73 और 200-दिवसीय EMA 99.30 पर स्थित हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI(14) 60 के स्तर पर मौजूद है, जो ओवरबॉट क्षेत्र के करीब पहुंचते हुए भी खरीदारी की गति को दर्शाता है। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) 0.05 पर है, जबकि इसकी सिग्नल लाइन -0.12 पर है, जिसका 0.18 का सकारात्मक हिस्टोग्राम तेजी का संकेत दे रहा है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 27 पर एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार की ओर इशारा करता है, जबकि स्टोकैस्टिक की फास्ट लाइन 83 और सिग्नल लाइन 91 पर दर्ज की गई है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 0.44 के साथ दैनिक अस्थिरता का मापदंड तय करती है। ऊपरी स्तरों की बात करें तो 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट स्तर 100.46 पर तत्काल प्रतिरोध के रूप में काम कर रहा है। इसके पार निकलने पर 78.6 प्रतिशत फाइबोनैचि स्तर 100.98 पर अगला अवरोध बनेगा, जिसके बाद हालिया स्विंग हाई 101.64 का स्तर आता है। तकनीकी पिवट स्तर 100.32 पर है, जहां पहला प्रतिरोध R1 100.46 और दूसरा प्रतिरोध R2 100.71 पर देखा जा सकता है। 20-दिवसीय प्रतिरोध लगभग 100.56 पर स्थित है। दूसरी तरफ, यदि गिरावट आती है तो पहला समर्थन 50.0 प्रतिशत रिट्रेसमेंट स्तर पर 100.10 के आसपास दिखाई देगा, जिसके साथ ही पहला दैनिक समर्थन S1 100.07 पर है। इसके बाद 50-दिवसीय SMA 99.91 (लाइव 99.95) और दूसरा समर्थन S2 99.93 पर मौजूद है, जिसके नीचे 100-दिवसीय SMA 99.86 पर स्थित है। गहरे सुधार की स्थिति में 38.2 प्रतिशत रिट्रेसमेंट 99.74 पर, 23.6 प्रतिशत रिट्रेसमेंट 99.29 पर, 200-दिवसीय SMA 99.16 पर और 20-दिवसीय प्रमुख समर्थन 98.56 के संरचनात्मक निचले स्तर पर परीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा। बोलिंजर बैंड (20,2) की सीमा 98.43 से 100.30 के बीच है और इसका मध्य स्तर 99.36 पर है, जिससे स्पष्ट है कि मौजूदा भाव बैंड के भीतर बने हुए हैं। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं और परिसंपत्तियों की स्थिति वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर की ताकत का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर साफ देखा गया। डॉलर ने विशेष रूप से जापानी येन के मुकाबले सबसे अधिक मजबूती दिखाई। मुद्रा हीटमैप के अनुसार, जहां विभिन्न मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव को आंका जाता है, वहां अमेरिकी डॉलर शीर्ष पर रहा। USD/JPY जोड़ी ने यूरोपीय कारोबारी सत्र में अपनी बढ़त का सिलसिला फिर से शुरू किया और दो सप्ताह के नए उच्चतम स्तर को छूते हुए 158.00 के करीब पहुंच गई। बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने उम्मीद के अनुरूप अपनी नीतिगत दरों को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय सात के मुकाबले दो मतों से लिया गया, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम था। बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काजुओ उएदा ने कहा कि नीतिगत चरण बदल चुका है। इसके बावजूद, दर वृद्धि के खिलाफ पड़े दो आश्चर्यजनक असहमति मतों के कारण जापानी येन में लगातार बिकवाली हावी रही और यह कमजोर बना रहा। इसके विपरीत, AUD/USD जोड़ी एशियाई सत्र में लगातार दूसरे दिन सकारात्मक रुख के साथ 0.7100 के स्तर से ऊपर टिकी रही। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में आई हल्की नरमी ने डॉलर की तेजी पर कुछ हद तक रोक लगाई। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त टिप्पणियों ने वहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बढ़ाया, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को समर्थन मिला। हालांकि, फेडरल रिजर्व का सख्त दृष्टिकोण और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं डॉलर की किसी भी बड़ी गिरावट को सीमित कर रही हैं, जिससे इस जोड़ी का ऊपरी स्तर सीमित बना हुआ है। दूसरी ओर, कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में सप्ताह के उत्तरार्ध में उत्साह देखने को मिला। शुक्रवार को पीली धातु लगभग 4,370 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर पर मजबूती के साथ कारोबार करती नजर आई। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने सोने की तेजी को गति प्रदान की, जिससे यह धातु अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी के दबाव को बेअसर करने में सफल रही। वैश्विक वृहद आर्थिक रुझानों के बीच निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों के बयानों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत सख्ती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय पर सीधा असर देखने को मिलेगा। • भारत में: डॉलर की मजबूती के कारण आयातित वस्तुओं और कच्चे तेल की खरीद की लागत बढ़ सकती है। इससे घरेलू मुद्रा रुपये पर दबाव देखने को मिल सकता है और विदेश यात्रा या विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों का खर्च बढ़ जाएगा। • वैश्विक निवेशकों पर: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के चलते उभरते बाजारों से पूंजी का बहिर्गमन तेज हो सकता है। निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षित परिसंपत्ति के तौर पर डॉलर और बॉन्ड्स को अधिक प्राथमिकता दे सकते हैं। • सोना और कमोडिटी खरीदारों पर: सोने की कीमतें डॉलर के मजबूत होने के बावजूद 4,370 डॉलर प्रति औंस के आसपास टिके रहने से आभूषण खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ बना रहेगा। यदि डॉलर की तेजी आगे भी जारी रहती है, तो धातु बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। • विदेशी मुद्रा व्यापारियों पर: USD/JPY और AUD/USD जैसी जोड़ियों में उतार-चढ़ाव बढ़ने से तकनीकी स्तरों पर सख्त स्टॉप-लॉस रखना आवश्यक हो गया है। व्यापारी 100.46 के प्रतिरोध और 100.10 के समर्थन स्तर को ध्यान में रखकर ही नई स्थिति बना सकेंगे। ऐसा क्यों हुआ फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई वृद्धि और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव ने डॉलर इंडेक्स में इस ताजा तेजी की नींव रखी है। केंद्रीय बैंकों के बीच नीतियों के अंतर और मुद्रास्फीति के दबाव ने मुद्रा बाजारों में डॉलर की मांग को बढ़ा दिया है। • फेडरल रिजर्व की नीतिगत सख्ती: केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर संकेत दिया है कि वह मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखेगा। इस कदम से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार हुआ और विदेशी पूंजी का प्रवाह डॉलर की ओर मुड़ा। • बैंक ऑफ जापान में मतभेद: हालांकि बैंक ऑफ जापान ने अपनी ब्याज दर बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दी, लेकिन नीतिगत समिति में दो सदस्यों के विरोध ने संकेत दिया कि आगे दरों में तेजी से वृद्धि नहीं होगी। इस अनिश्चितता के चलते जापानी येन में बिकवाली बढ़ी और डॉलर को बढ़त मिली। • मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक कारक: उच्च ऊर्जा कीमतें, व्यापारिक शुल्क और वैश्विक तनाव ने मुद्रास्फीति के दीर्घकालिक बने रहने की आशंकाओं को जन्म दिया है। इन अनिश्चित परिस्थितियों में वैश्विक निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर चुना है। सवाल-जवाब 1. डॉलर इंडेक्स में हालिया उछाल का मुख्य कारण क्या है? फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में की गई वृद्धि और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी डॉलर इंडेक्स के सात सप्ताह के शीर्ष पर पहुंचने का प्रमुख कारण है। 2. डॉलर इंडेक्स के लिए निकटतम तकनीकी प्रतिरोध स्तर क्या हैं? तकनीकी रूप से 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि स्तर पर 100.46 तत्काल प्रतिरोध है, जिसके बाद 100.98 और 101.64 प्रमुख स्तर हैं। 3. बैंक ऑफ जापान द्वारा दरें बढ़ाने के बावजूद येन क्यों गिरा? बैंक ऑफ जापान ने दरें बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कीं, लेकिन दो सदस्यों की असहमति के कारण आगे दरों में वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बनी और येन कमजोर हुआ। 4. सोने की कीमतों पर डॉलर की तेजी का क्या प्रभाव पड़ा? डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के बावजूद कच्चा तेल सस्ता होने से सोना 4,370 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के आसपास मजबूत बना रहा। 5. क्या फेडरल रिजर्व अक्टूबर की बैठक में फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है? विश्लेषकों ने 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बेहद करीब होने के कारण अक्टूबर की बैठक में लगातार दूसरी दर वृद्धि की संभावना को खारिज किया है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-sakhta-rukha-se-us-dollar-men-teji-kya-100-ke-stara-se-upara-bani-rahegi-majabuti-33366 TrendKia — Har trend, sabse pehle.