फेडरल रिजर्व के सख्त संकेतों से पाउंड स्टर्लिंग में फिसलन, तकनीकी बाधाओं ने बढ़ाया दबाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की तरफ से ब्याज दरों पर सख्त रुख के बाद पाउंड स्टर्लिंग में कमजोरी देखी गई है, जहां तकनीकी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार के शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान पाउंड स्टर्लिंग में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नरमी दर्ज की गई, जहां भाव फिसलकर 1.3225 के स्तर के आसपास पहुंच गया। दैनिक चार्ट पर 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के नीचे बने रहने के चलते इस करेंसी जोड़े का तकनीकी परिदृश्य लगातार नकारात्मक बना हुआ है। हालांकि तकनीकी संकेतक ओवरसोल्ड जोन में हैं, लेकिन अहम मूविंग एवरेज की ऊपरी रुकावटें किसी भी मजबूत सुधार की कोशिश को सीमित कर रही हैं। फेडरल रिजर्व के सख्त बयान और ब्याज दरों की संभावनाएं अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों ने डॉलर को समर्थन दिया है और पाउंड पर दबाव बढ़ाया है। शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने मंगलवार को कहा कि मुद्रास्फीति का फेड के तय लक्ष्य से ऊपर बना रहना एक खतरनाक स्थिति को दर्शाता है, जिसके समाधान के लिए नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता पड़ सकती है। इसी क्रम में फेड गवर्नर माइकल बर ने भी आगाह किया कि महंगाई की रफ्तार को धीमा करने के लिए आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार अब अक्टूबर की बैठक में फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की करीब 47.1 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं। वहीं दिसंबर महीने में नीतिगत दरों में इजाफा होने की संभावना 92.5 प्रतिशत तक आंकी जा रही है। इन आक्रामक अनुमानों के कारण वैश्विक निवेशक डॉलर की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे अन्य प्रमुख मुद्राओं पर दबाव गहराया है। दैनिक चार्ट पर तकनीकी ढांचे और प्रमुख स्तरों का विश्लेषण दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो जीबीपी/यूएसडी में अल्पावधि का रुख मंदी की ओर झुका हुआ है, क्योंकि हाजिर भाव 20-अवधि के बोलिंगर सिंपल मूविंग एवरेज और 100-दिवसीय एसएमए के नीचे कारोबार कर रहा है। यह जोड़ी हालिया वोलैटिलिटी एनवेलप के निचले हिस्से की तरफ बढ़ रही है, जहां मौजूदा स्तर बोलिंगर के ऊपरी बैंड की तुलना में 20-अवधि के निचले बैंड के ज्यादा करीब हैं। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 28.43 के स्तर पर मौजूद है, जो तकनीकी रूप से ओवरसोल्ड स्थिति को दर्शाता है। हालांकि यह इस बात का संकेत है कि नीचे की ओर बिकवाली का दबाव काफी खिंच चुका है, लेकिन जब तक ऊपरी मूविंग एवरेज की बाधाएं बरकरार हैं, तब तक किसी स्पष्ट उलटफेर की पुष्टि नहीं होती। गिरावट की स्थिति में पहला तात्कालिक सपोर्ट 29 सितंबर के निचले स्तर 1.3202 पर देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो अगला सहारा 20-अवधि के बोलिंगर लोअर बैंड यानी 1.3145 के पास मिलेगा। इस स्तर के नीचे दैनिक बंद मिलने पर कमजोरी और गहरी हो सकती है, जो भाव को 20 नवंबर 2025 के निचले स्तर 1.3038 और फिर 1.3000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ धकेल सकती है। दूसरी ओर, तेजी की किसी भी कोशिश में पहली बाधा 28 सितंबर के उच्च स्तर 1.3280 पर सामने आएगी। यदि इस रुकावट के पार खरीदारी जारी रहती है, तो रिकवरी की राह 1.3395 के करीब स्थित बोलिंगर मिडिल बैंड और उसके बाद 1.3415 पर स्थित 100-दिवसीय एसएमए तक खुल सकती है। यह दायरा एक मजबूत सप्लाई जोन के रूप में काम कर रहा है। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट होने पर ही बोलिंगर अपर बैंड यानी 1.3645 की तरफ बढ़ने का रास्ता साफ हो सकेगा। लाइव मार्केट डेटा और वर्तमान तकनीकी स्थिति क्लोजिंग बेल सत्र के लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, जीबीपी/यूएसडी 1.33 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1.33 की तुलना में 0.08 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का ट्रेडिंग दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर दर्ज हुआ है। तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो आरएसआई (14) वर्तमान में 33 पर है। एमएसीडी -0.01 पर है जबकि सिग्नल लाइन -0.00 पर है (हिस्टोग्राम -0.00, मंदी का रुख)। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 1.34, 50-दिवसीय ईएमए 1.34 और 200-दिवसीय ईएमए 1.34 पर स्थित हैं, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 1.35 और 200-दिवसीय एसएमए 1.34 पर हैं। लंबी अवधि में रुझान मंदी का है, हालांकि ईएमए50 के ईएमए200 से ऊपर होने के कारण गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। बोलिंगर बैंड (20,2) 1.32 से 1.36 के बीच हैं (मध्य स्तर 1.34)। एडीएक्स (14) 32 पर ट्रेंडिंग चरण दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 19 और सिग्नल लाइन 13 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पिवट 1.33 पर है, जिसमें प्रतिरोध आर1 1.33 और आर2 1.34 पर तथा सपोर्ट एस1 1.32 और एस2 1.32 पर मौजूद हैं। पाउंड स्टर्लिंग का वैश्विक महत्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीति पाउंड स्टर्लिंग 886 ईस्वी से अस्तित्व में मौजूद दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा है और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा बाजार में यह चौथी सबसे अधिक ट्रेड होने वाली यूनिट है, जिसकी हिस्सेदारी सभी सौदों में 12 प्रतिशत है और इसका दैनिक औसत कारोबार 630 अरब डॉलर का है। इसके प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में 'केबल' के नाम से चर्चित जीबीपी/यूएसडी (विदेशी मुद्रा बाजार का 11 प्रतिशत), 'ड्रैगन' के रूप में जाना जाने वाला जीबीपी/जेपीवाई (3 प्रतिशत) और ईयूआर/जीबीपी (2 प्रतिशत) शामिल हैं। इसे बैंक ऑफ इंग्लैंड जारी करता है। पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे अहम कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक अपने निर्णय मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य पर आधारित करता है, जिसका मकसद मुद्रास्फीति की दर को करीब 2 प्रतिशत पर स्थिर रखना है। इसे साधने का मुख्य जरिया ब्याज दरों का समायोजन है। जब मुद्रास्फीति अत्यधिक ऊंची होती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरें बढ़ाकर ऋण को महंगा करता है। यह आमतौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक होता है, क्योंकि उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को ब्रिटेन में पूंजी लगाने के लिए आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई बहुत नीचे गिरती है और आर्थिक सुस्ती दिखती है, तब केंद्रीय बैंक ब्याज दरें घटाने पर विचार करता है ताकि कारोबार सस्ते कर्ज लेकर निवेश बढ़ा सकें। आर्थिक संकेतक, व्यापार संतुलन और अन्य वैश्विक बाजारों की हलचल अर्थव्यवस्था की सेहत मापने वाले आर्थिक आंकड़े पाउंड की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जीडीपी, विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई और रोजगार के आंकड़े सीधे स्टर्लिंग को प्रभावित करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था पाउंड को सहारा देती है क्योंकि यह विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ ब्याज दर वृद्धि की जमीन तैयार करती है। कमजोर आंकड़ों की स्थिति में पाउंड में गिरावट की आशंका रहती है। इसके अतिरिक्त ट्रेड बैलेंस यानी व्यापार संतुलन भी महत्वपूर्ण है, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है। सकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूती प्रदान करता है, जबकि नकारात्मक संतुलन कमजोरी लाता है। वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों की बात करें तो बुधवार को एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा (AUD/USD) दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब रही, क्योंकि अगस्त के उम्मीद से कमजोर अंडरलाइंग सीपीआई आंकड़ों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा दर वृद्धि की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इसके अलावा चीनी पीएमआई के आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा देने में विफल रहे। उधर यूएसडी/जेपीवाई 157.00 के नीचे नुकसान में रहा, जहां बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख की उम्मीदों और संभावित दखल के जोखिम ने येन को समर्थन दिया। कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार में, सोना आठ सप्ताह के निचले स्तर 4,110 डॉलर से उबरने के बाद बुधवार को एशिया में कंसोलिडेशन के दौर में रहा और 4,200 डॉलर के नीचे बना रहा, जहां निवेशक अमेरिकी एडीपी जॉब्स रिपोर्ट और कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। वहीं क्रिप्टोकरेंसी में बिटकॉइन, एथेरियम और एक्सआरपी में तेजी की रफ्तार थमती दिखी। बिटकॉइन को 85,000 डॉलर के पास प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है, जबकि एथेरियम 2,674 डॉलर और एक्सआरपी 1.500 डॉलर के करीब बना हुआ है। इसका आप पर असर अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं से डॉलर मजबूत होने और पाउंड में कमजोरी आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े कारोबारियों और यात्रियों पर सीधा असर पड़ सकता है। • मुद्रा विनिमय लागत: ब्रिटेन की यात्रा या वहां शिक्षा के लिए जाने वाले छात्रों को डॉलर के मुकाबले पाउंड में नरमी से अल्पकालिक राहत मिल सकती है। हालांकि डॉलर की चौतरफा मजबूती अन्य विदेशी मुद्राओं के खर्च को महंगा बना सकती है। • आयात-निर्यात कारोबार: विदेशी मुद्रा में लेन-देन करने वाले भारतीय व्यापारियों को हेजिंग रणनीतियों पर सतर्कता बरतनी होगी। डॉलर और पाउंड के उतार-चढ़ाव से आयात बिल और निर्यात मुनाफे पर सीधा प्रभाव पड़ता है। • फॉरेक्स ट्रेडिंग रणनीति: करेंसी डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वाले निवेशकों के लिए 1.3202 का स्तर अहम सपोर्ट है। इस स्तर के टूटने पर अतिरिक्त स्टॉप-लॉस प्रबंधन अपनाना आवश्यक हो जाता है। • वैश्विक निवेश पोर्टफोलियो: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख से वैश्विक स्तर पर लिक्विडिटी प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय इक्विटी और बॉन्ड आवंटन में डॉलर की चाल पर नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी फेडरल रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने के संकेत और तकनीकी स्तरों पर मजबूत बिकवाली दबाव के कारण जीबीपी/यूएसडी में यह गिरावट आई है। • फेड अधिकारियों की आक्रामक बयानबाजी: शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी और फेड गवर्नर माइकल बर ने स्पष्ट किया है कि मुद्रास्फीति लक्ष्य से ऊपर रहने के कारण ब्याज दरों में और बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है। इस रुख ने बाजार में डॉलर की मांग को नई गति दी है। • ब्याज दर वृद्धि की बढ़ी संभावनाएं: सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक अक्टूबर में 47.1 प्रतिशत और दिसंबर में 92.5 प्रतिशत संभावना दर वृद्धि की लगाई जा रही है। इन आकलनों ने निवेशकों को जोखिम वाली मुद्राओं से हटाकर डॉलर की तरफ मोड़ा है। • तकनीकी मूविंग एवरेज का अवरोध: दैनिक चार्ट पर हाजिर भाव 20-पीरियड और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के नीचे लगातार बना हुआ है। ओवरसोल्ड स्थिति होने के बावजूद इन तकनीकी स्तरों पर मजबूत सप्लाई होने से रिकवरी बाधित हुई है। सवाल-जवाब 1. बुधवार को जीबीपी/यूएसडी किस स्तर पर आ गया? बुधवार के शुरुआती यूरोपीय सत्र में जीबीपी/यूएसडी कमजोर होकर 1.3225 के स्तर के आसपास पहुंच गया। 2. फेड अधिकारियों ने ब्याज दरों को लेकर क्या कहा? ऑस्टन गूल्सबी ने महंगाई को खतरनाक स्थिति बताया और माइकल बर ने कहा कि मुद्रास्फीति को थामने के लिए और दर वृद्धि की आवश्यकता हो सकती है। 3. दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ोतरी की कितनी संभावना आंकी जा रही है? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना 92.5 प्रतिशत आंकी गई है। 4. जीबीपी/यूएसडी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर कौन से हैं? पहला सपोर्ट 1.3202 और फिर 1.3145 पर है, जबकि पहला रेजिस्टेंस 1.3280 और उसके बाद 1.3395 से 1.3415 के दायरे में है। 5. वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में पाउंड स्टर्लिंग की कितनी हिस्सेदारी है? 2022 के आंकड़ों के अनुसार, पाउंड स्टर्लिंग सभी एफएक्स लेनदेन में 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है और औसतन 630 अरब डॉलर का दैनिक कारोबार करता है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ke-sakhta-snketon-se-pound-sterling-men-phisalana-takaniki-badhaon-ne-barhaya-dabava-40615 TrendKia — Har trend, sabse pehle.