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  "type": "article",
  "title": "फेडेरल रिजर्व की ब्याज दर उम्मीदों के बीच अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में लगातार तीसरे दिन गिरावट",
  "summary": "वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स लगातार तीसरे दिन फिसलकर 98.80 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। सितंबर में फेडेरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की 60 फीसदी संभावना और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद डॉलर दबाव में दिख रहा है।",
  "content": "वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) पर दबाव बढ़ता जा रहा है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर दुनिया की छह प्रमुख धातुओं और मुद्राओं की तुलना करने वाले इंडेक्स में फिसलकर 98.80 के स्तर के आसपास पहुंच गई। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह इंडेक्स 98.78 के आसपास दर्ज किया गया, जो पिछले सत्र के बंद स्तर 98.84 से 0.06 प्रतिशत नीचे है। यह लगातार तीसरा कारोबारी दिन है जब डॉलर में मंदी का रुख देखने को मिल रहा है। बाजार प्रतिभागियों द्वारा सितंबर नीतिगत समीक्षा में फेडेरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर में बढ़ोतरी की 60 प्रतिशत संभावना जताए जाने और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से मुद्रास्फीति की चिंताएं गहराने के बावजूद डॉलर को पर्याप्त खरीदारी का समर्थन नहीं मिल पा रहा है। वित्तीय बाजारों की नजर अब इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) आंकड़ों पर टिकी है, जो केंद्रीय बैंक के आगामी नीतिगत फैसलों के लिए अंतिम दिशा तय करेंगे।\n\n \n\nतकनीकी संकेतकों में गिरावट का गहराता दबाव\n\nदैनिक मूल्य चार्ट के तकनीकी विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि डॉलर इंडेक्स में निकट अवधि का मंदी का रुख मजबूती से हावी है। वर्तमान में 98.78 से 98.80 के दायरे में कारोबार कर रहा यह सूचकांक अपने प्रमुख शॉर्ट-टर्म और मिड-टर्म एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से नीचे बना हुआ है। अल्पकालिक 9-दिवसीय ईएमए 99.07 पर है, जबकि 20-दिवसीय ईएमए 99.35 और 50-दिवसीय ईएमए 99.69 के स्तर पर स्थित है। वहीं 200-दिवसीय ईएमए 99.29 और सिंपल मूविंग एवरेज 50-SMA 100.14 और 200-SMA 99.16 पर मौजूद हैं। ये घटते औसत डॉलर की हर संभावित बढ़त को रोक रहे हैं और ऊपरी स्तरों पर मजबूत प्रतिरोध पैदा कर रहे हैं। हालांकि लंबी अवधि में 50-ईएमए का 200-ईएमए से ऊपर होना एक गोल्डन क्रॉस की स्थिति दर्शाता है, लेकिन अल्पकालिक गति मंद बनी हुई है।\n\nतकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 38 के आसपास बना हुआ है, जो स्पष्ट करता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव कायम है और तुरंत किसी बड़े तेजी के रिवर्सल के बजाय मंदी का सिलसिला जारी रहने का अंदेशा है। एमएसीडी (MACD) संकेतक -0.28 के स्तर पर मंदी का संकेत दे रहा है। बोलिंजर बैंड्स (20,2) 98.49 से 100.09 (मध्य रेखा 99.29) के बीच हैं, जिससे पता चलता है कि मूल्य वर्तमान में बैंड के निचले हिस्से के पास है। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 34 पर होने के कारण मौजूदा ट्रेंड की मजबूती को दर्शाता है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 17 और सिग्नल लाइन 28 पर ओवरसोल्ड जोन के पास बनी हुई है।\n\nतकनीकी विश्लेषण के अनुसार, यदि डॉलर में सुधार आता है तो पहला तात्कालिक प्रतिरोध पिवट स्तर 98.78 के ऊपर R1 98.82 और R2 98.86 पर मिलेगा। इसके बाद 9-दिवसीय ईएमए (99.07) और 50-दिवसीय ईएमए (99.69) के साथ 20-दिवसीय प्रतिरोध 100.08 पर मजबूत बाधा साबित होगा। नीचे की तरफ तात्कालिक समर्थन S1 98.74 और S2 98.70 पर स्थित है, जबकि 20-दिवसीय समर्थन 98.56 के पास देखा जा रहा है। 52 हफ्तों का विस्तृत दायरा 95.55 से 101.80 के बीच रहा है। बाजार में दैनिक अस्थिरता बफर (ATR 14) 0.41 अंक दर्ज किया गया है। वहीं एफएक्सएस फेड सेंटिमेंट इंडेक्स का 125.72 का सुस्त स्तर यह स्पष्ट संकेत देता है कि डॉलर में तेजी को लेकर संस्थागत निवेशकों का व्यापक आर्थिक विश्वास अभी भी कमजोर बना हुआ है।\n\n \n\nफेडेरल रिजर्व की नीति और मुद्रास्फीति की चिंताएं\n\nसीएमई फेडवॉच टूल के नवीनतम वायदा आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा व्यापारी इस बात की 60 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं कि फेडेरल रिजर्व सितंबर की अपनी बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर में बढ़ोतरी कर सकता है। सामान्य परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना से अमेरिकी डॉलर की संपत्तियों पर यील्ड बढ़ती है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है और विदेशी पूंजी का आकर्षण बढ़ता है। हालांकि, मौजूदा व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों का रुख अत्यधिक सतर्क बना हुआ है।\n\nदूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मुद्रास्फीति की आशंकाओं को गहरा रही हैं। ऊर्जा की लागत बढ़ने से अर्थव्यवस्था में विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी होती है, जिससे मुद्रास्फीति लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रह सकती है। यह स्थिति डॉलर में बहुत बड़ी गिरावट को रोकने के लिए एक फ्लोर या सपोर्ट का काम कर रही है। अब निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी सीपीआई और पीपीआई मुद्रास्फीति रिपोर्ट पर केंद्रित है। यदि ये आंकड़े मुद्रास्फीति में नया उछाल दिखाते हैं, तो फेडेरल रिजर्व के लिए नीतिगत दरें बढ़ाना अनिवार्य हो जाएगा, जो डॉलर की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।\n\n \n\nवैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की ऐतिहासिक भूमिका\n\nअमेरिकी डॉलर (USD) संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई अन्य देशों में भी व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। यह दुनिया भर में सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के वैश्विक बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के कुल विदेशी मुद्रा कारोबार में 88 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अमेरिकी डॉलर की होती है, जहां प्रतिदिन औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर का लेन-देन संपादित किया जाता है।\n\nद्वितीय विश्व युद्ध के समापन के बाद, अमेरिकी डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड का स्थान लेते हुए दुनिया की प्राथमिक रिजर्व मुद्रा का दर्जा हासिल किया था। अपने इतिहास के अधिकांश हिस्से में अमेरिकी डॉलर का मूल्य भौतिक सोने के भंडार से जुड़ा हुआ था। हालांकि, वर्ष 1971 में ब्रेटन वुड्स समझौते के समाप्त होने के साथ ही गोल्ड स्टैंडर्ड खत्म हो गया और डॉलर एक स्वतंत्र फिएट मुद्रा के रूप में वैश्विक वित्तीय प्रणाली का मुख्य आधार बन गया, जिसका मूल्य केंद्रीय बैंक की नीतियों और वैश्विक मांग से तय होता है।\n\n \n\nमौद्रिक नीति के उपकरण: ब्याज दरें, क्यूई और क्यूटी\n\nअमेरिकी डॉलर के मूल्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक फेडेरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है। केंद्रीय बैंक को दो प्रमुख कानूनी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं: पहली, मूल्य स्थिरता बनाए रखना यानी मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्ष्य के भीतर सीमित रखना और दूसरी, अर्थव्यवस्था में अधिकतम सतत रोजगार के अवसर पैदा करना। इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए फेडेरल रिजर्व मुख्य रूप से ब्याज दरों में संशोधन का सहारा लेता है। जब मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर जाने लगती है, तो फेड ब्याज दरें बढ़ाता है, जिससे डॉलर की विनिमय दर मजबूत होती है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति सुस्त होती है या बेरोजगारी दर बढ़ती है, तो दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर में गिरावट आती है।\n\nगंभीर आर्थिक संकट के समय फेडेरल रिजर्व क्वांटिटेटिव इजिंग (QE) जैसे अपरंपरागत मौद्रिक उपायों को लागू करता है। क्यूई वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक संकटग्रस्त वित्तीय प्रणाली में तरलता का प्रवाह बढ़ाने के लिए वाणिज्यिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से भारी मात्रा में सरकारी बॉन्ड खरीदता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान क्रेडिट संकट से निपटने के लिए इसी उपाय का इस्तेमाल किया गया था। इस प्रक्रिया से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे आमतौर पर डॉलर कमजोर होता है। इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में फेड बॉन्ड खरीद बंद कर देता है और अपनी बैलेंस शीट को समेटता है, जो डॉलर को मजबूती प्रदान करने में सहायक होता है।\n\n \n\nमुद्रा बाजार, सोना और ऊर्जा क्षेत्र पर व्यापक असर\n\nडॉलर इंडेक्स में जारी सुस्ती का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के अन्य परिसंपत्ति वर्गों में भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान प्रमुख मुद्रा जोड़ों, कीमती धातुओं और ऊर्जा वायदा बाजार में महत्वपूर्ण हलचल दर्ज की गई।\n\nविदेशी मुद्रा बाजार में AUD/USD की जोड़ी 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकन में कारोबार करती दिखी। चीन के हालिया सीपीआई और पीपीआई के आंकड़ों का प्रभाव भले ही सीमित रहा हो, लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की बढ़ती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा दिया। दूसरी ओर, USD/JPY में बिकवाली का दबाव देखा गया और यह मंगलवार को छूए गए लगभग सात महीने के निचले स्तर के करीब बना रहा। जापानी तानकान व्यावसायिक सर्वेक्षण के मजबूत नतीजों ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की उम्मीदों को मजबूत किया, जिससे जापानी येन को समर्थन मिला।\n\nकमोडिटी बाजार में, स्पॉट सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के एक सप्ताह के निचले स्तर से उबरता नजर आया। डॉलर की कमजोरी और येन की मजबूती से सोने की कीमतों को आधार मिला, हालांकि फेडेरल रिजर्व द्वारा सितंबर में दरें बढ़ाए जाने की संभावना से इसकी तेजी सीमित रह सकती है। वहीं ऊर्जा बाजार में, तेल बाजार भले ही स्थिर दिख रहा हो, लेकिन डीजल क्रैक स्प्रेड एक अलग कहानी बयां कर रहा है। डब्ल्यूटीआई क्रूड के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो रिफाइंड ईंधन बाजार में आपूर्ति की गंभीर किल्लत को रेखांकित करता है।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स में आ रही यह मंदी वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम निवेशकों के पोर्टफोलियो पर सीधा असर डालती है।\n\n• भारतीय निवेशकों पर: अमेरिकी डॉलर में सुस्ती से भारतीय शेयर बाजार को अल्पकालिक राहत मिल सकती है, क्योंकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) उभरते बाजारों में निवेश बढ़ाने का विकल्प चुनते हैं।\n\n• भारतीय आयातकों पर: डॉलर की विनिमय दर में गिरावट से भारत के आयात बिल में राहत मिल सकती है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल की खरीद लागत में कमी आएगी।\n\n• क्रूड और ईंधन पर: कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने और डीजल क्रैक स्प्रेड 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से लॉजिस्टिक्स और परिवहन लागत पर दबाव बना रह सकता है।\n\n• सोने के खरीदारों पर: डॉलर कमजोर होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस से उबरा है, जिससे घरेलू बाजार में सोने के भाव स्थिर या मजबूत बने रह सकते हैं।\n\n• विदेश जाने वालों पर: विदेश यात्रा या विदेशों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये में स्थिरता रहने पर यात्रा और फीस भुगतान पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम हो सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेरिकी डॉलर इंडेक्स में गिरावट के पीछे कई तकनीकी कारक, केंद्रीय बैंकों के रुख और व्यापक आर्थिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।\n\n• तकनीकी प्रतिरोध का दबाव: डॉलर इंडेक्स 9-दिवसीय ईएमए (99.07) और 50-दिवसीय ईएमए (99.69) से नीचे बना हुआ है, जबकि आरएसआई 38 के आसपास होने से बिकवाली का दबाव बना हुआ है।\n\n• जापानी येन में मजबूती: तानकान व्यावसायिक सर्वेक्षण के मजबूत नतीजों के बाद बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दरों को सामान्य बनाने की उम्मीदें बढ़ी हैं, जिससे येन मजबूत हुआ और डॉलर पर दबाव पड़ा।\n\n• वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियां: ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों और अन्य केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख के कारण डॉलर का यील्ड एडवांटेज सीमित हुआ है।\n\n• मैक्रो इकोनॉमिक अनिश्चितता: सीएमई फेडवॉच टूल द्वारा सितंबर में 60% दर वृद्धि की संभावना जताने के बावजूद एफएक्सएस फेड सेंटिमेंट इंडेक्स का 125.72 पर रहना यह दिखाता है कि निवेशकों में दीर्घकालिक मजबूती का विश्वास कम है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बुधवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स किस स्तर पर कारोबार कर रहा था?\nबुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 98.78 से 98.80 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था।\n\n2. फेडेरल रिजर्व द्वारा सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की कितनी संभावना है?\nसीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार बाजार सितंबर में फेडेरल रिजर्व द्वारा दर बढ़ोतरी की 60 प्रतिशत संभावना मान रहा है।\n\n3. डॉलर इंडेक्स के लिए प्रमुख तकनीकी प्रतिरोध स्तर कौन से हैं?\nपहला प्रतिरोध 9-दिवसीय ईएमए 99.07 पर और मजबूत प्रतिरोध 50-दिवसीय ईएमए 99.69 के स्तर पर स्थित है।\n\n4. जापानी तानकान बिजनेस सर्वे का USD/JPY पर क्या असर पड़ा?\nतानकान सर्वे के मजबूत आंकड़ों से बैंक ऑफ जापान द्वारा नीति सामान्य करने की उम्मीद बढ़ी, जिससे जापानी येन मजबूत हुआ और USD/JPY सात महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया।\n\n5. अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड ने क्या रिकॉर्ड बनाया है?\nडब्ल्यूटीआई के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल वायदा का प्रीमियम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलकर 102.00 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।\n\n6. सोने की कीमतों में क्या हलचल देखी गई?\nडॉलर की सुस्ती से सहारा पाकर स्पॉट सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के एक सप्ताह के निचले स्तर से उबरा है।",
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  "publishedAt": "2026-09-09",
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