फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर बीएनवाई का बड़ा आकलन, वैश्विक बाजारों और संपत्तियों पर दबाव बीएनवाई के विश्लेषकों के अनुसार फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 2026 में केवल एक और दर वृद्धि की संभावना है, जबकि मुद्रास्फीति आपूर्ति दबावों से संचालित बनी हुई है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुद्रा, सोना और क्रिप्टो संपत्तियों में गिरावट देखी जा रही है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर वैश्विक वित्तीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है। बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन (बीएनवाई) के ताजा वित्तीय विश्लेषण के अनुसार, केंद्रीय बैंक द्वारा वर्ष 2026 में केवल एक और ब्याज दर वृद्धि किए जाने की संभावना दिखाई दे रही है, जिसके बाद मौद्रिक नीति की भावी दिशा अधिक अस्पष्ट और जटिल हो सकती है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मौजूदा समय में महंगाई का स्तर ऊंचा बना हुआ है, और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने लागत संबंधी दबाव को और अधिक तीव्र कर दिया है। विश्लेषकों का स्पष्ट तर्क है कि वर्तमान मुद्रास्फीति मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की बाधाओं से प्रेरित है, जबकि दीर्घावधि में महंगाई संबंधी जन अपेक्षाएं अभी भी स्थिर दायरे में टिकी हुई हैं। मांग प्रबंधन और मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता केंद्रीय बैंकों द्वारा अपनाई जाने वाली पारंपरिक मौद्रिक सख्ती आमतौर पर उपभोक्ता मांग को नियंत्रित करने का साधन होती है। बीएनवाई के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ऊंची ब्याज दरों के जरिए आपूर्ति पक्ष के दबावों पर पूरी तरह काबू पाना बेहद कठिन साबित होगा। हालांकि, नीति निर्माताओं की नजर वर्ष 2027 में मांग पक्ष से उभरने वाले संभावित दबावों पर टिकी रहेगी। यदि उस समय उपभोक्ता मांग के कारण महंगाई में दोबारा उछाल आता है, तभी अतिरिक्त ब्याज दर वृद्धि जैसे मौद्रिक कदम प्रासंगिक और तार्किक माने जाएंगे। विश्लेषण में पिछले सप्ताह हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वॉर्श द्वारा दिए गए बयानों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। वॉर्श का दावा था कि सितंबर में की गई ब्याज दर वृद्धि ने वित्तीय स्थितियों को महत्वपूर्ण रूप से कड़ा किया है। इसके विपरीत, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर में एआई क्षेत्र में देखी गई अस्थिरता को छोड़कर वास्तविक अर्थव्यवस्था के व्यापक स्तर पर ऐसी वित्तीय सख्ती के पुख्ता प्रमाण बहुत कम मिले हैं। इसके बावजूद, यदि शेयर और ऋण बाजारों में घबराहट और अनिश्चितता जारी रहती है, तो वित्तीय स्थितियां प्राकृतिक रूप से कड़ी हो जाएंगी। ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर 2027 में वर्तमान में अनुमानित दो ब्याज दर वृद्धियों के मुकाबले कम बढ़ोतरी की आवश्यकता पड़ेगी। विदेशी मुद्रा बाजार में उठापटक और केंद्रीय बैंकों के कदम वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किए गए। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) द्वारा नीतिगत दरों में 25 आधार अंकों (बीपीएस) की बहुप्रतीक्षित बढ़ोतरी किए जाने के बाद एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) लगातार दूसरे दिन फिसलते हुए दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस नीतिगत निर्णय में बोर्ड पूरी तरह एकमत नहीं था, क्योंकि तीन सदस्यों ने ब्याज दरों को 4.60% पर अपरिवर्तित रखने का पक्ष लिया था। इस आंतरिक मतभेद ने भविष्य में और अधिक दर बढ़ोतरी की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है, जिससे मजबूत अमेरिकी डॉलर के सामने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा पर नकारात्मक दबाव पड़ा। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) मंगलवार के एशियाई सत्र में फिसलकर 158.00 के पिछले लाभ को आंशिक रूप से गंवाता दिखा। ईरान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के पहले अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना रहा। इसके साथ ही, जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को समर्थन प्रदान किया। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता ने इस बढ़त को सीमित रखा, जिसके कारण यह मुद्रा जोड़ी एक संकीर्ण दायरे में कारोबार करती नजर आई। सोने, कच्चे तेल और क्रिप्टोकरेंसी में सुस्ती कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में मंगलवार को सुस्ती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना (XAU/USD) 0.93% की दैनिक गिरावट के साथ लगभग $3,909 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई रिकवरी रही। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें फिर से उछल गईं, जिससे परिसंपत्ति बाजार में हलचल तेज हो गई। डिजिटल परिसंपत्तियों के बाजार में भी मंदी का रुख देखने को मिला। बिटकॉइन मंगलवार को छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण करते हुए $76,566 पर नीचे कारोबार करता दिखा। इसी प्रकार, इथेरियम पर भी लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा और यह अपने सीमित समर्थन दायरे के भीतर संघर्ष करता नजर आया। वहीं दूसरी ओर, रिपल की कीमत $1.25 के स्तर से मामूली रूप से ऊपर बनी रही। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसलों और वैश्विक परिसंपत्तियों में गिरावट से भारतीय निवेशकों और आम उपभोक्ताओं पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। • भारतीय शेयर और ऋण बाजार: विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल के उछाल और वैश्विक अनिश्चितता से घरेलू बाजारों में निकट अवधि में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। • सोने के खरीदार और निवेशक: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 0.93% की नरमी आई है। यदि यह रुख जारी रहता है, तो आभूषण खरीदारों और नए निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है। • क्रिप्टो संपत्ति धारक: बिटकॉइन छह सप्ताह के निचले स्तर $76,566 पर फिसल गया है और इथेरियम भी दबाव में है। खुदरा निवेशकों को अत्यधिक अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रुख अपनाने की आवश्यकता है। • मुद्रा और आयात लागत: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से आयात बिल और ईंधन लागत पर असर पड़ सकता है। यदि डॉलर में मजबूती बनी रहती है, तो रुपये के विनिमय मूल्य पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी मौद्रिक नीति और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में यह स्थिति मुख्य रूप से आपूर्ति बाधाओं, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण उत्पन्न हुई है। • आपूर्ति संचालित मुद्रास्फीति: वैश्विक बाजारों में महंगाई मुख्य रूप से आपूर्ति श्रृंखला और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से संचालित है। केंद्रीय बैंक की ब्याज दरें मांग को प्रभावित करती हैं, जिससे आपूर्ति जनित कीमतों पर तत्काल रोक लगाना मुश्किल होता है। • केंद्रीय बैंकों का विभाजित रुख: ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक में तीन सदस्यों द्वारा दरें 4.60% पर स्थिर रखने के पक्ष में मत देने से मौद्रिक सख्ती की सीमा स्पष्ट हुई है। इसी तरह अमेरिकी दर वृद्धि के वास्तविक प्रभाव को लेकर मतभेद गहरा रहे हैं। • भू-राजनीतिक घटनाक्रम: ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इस अचानक घटनाक्रम ने कमोडिटी और सुरक्षा संपत्तियों के सामान्य प्रवाह को प्रभावित किया है। सवाल-जवाब 1. बीएनवाई के अनुसार 2026 में फेडरल रिजर्व कितनी ब्याज दर वृद्धि कर सकता है? बीएनवाई के विश्लेषण के मुताबिक फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 2026 में केवल एक और दर वृद्धि किए जाने की संभावना है। 2. वर्तमान मुद्रास्फीति का मुख्य कारण क्या बताया गया है? विश्लेषकों के अनुसार वर्तमान मुद्रास्फीति मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की बाधाओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित है। 3. रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया? आरबीए ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की, हालांकि तीन सदस्यों ने दर को 4.60% पर बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया था। 4. सोने की कीमत में कितनी गिरावट दर्ज की गई? सोना लगभग 0.93% की दैनिक गिरावट के साथ $3,909 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। 5. क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन का ताजा स्तर क्या रहा? बिटकॉइन छह सप्ताह के निचले स्तर का परीक्षण करते हुए $76,566 पर कारोबार कर रहा था। 6. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी क्यों देखी गई? वॉल स्ट्रीट जर्नल द्वारा ईरान के क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ki-byaja-daron-para-bny-ka-bara-akalana-vaishvika-bajaron-aura-snpattiyon-para-dabava-55822 TrendKia — Har trend, sabse pehle.