फेडरल रिजर्व की दरों में बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में हलचल अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद बॉन्ड यील्ड सीमित रहने के आसार हैं, जबकि डॉलर, सोना, बिटकॉइन और एशियाई मुद्राओं में व्यापक फेरबदल देखने को मिला है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ताजा नीतिगत फैसले ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में नई हलचल पैदा कर दी है। फेडरल रिजर्व ने अपनी मानक उधारी दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया है, जिसके बाद फेडरल फंड्स टारगेट रेंज बढ़कर 3.75% से 4.00% तक पहुंच गई है। नीति निर्माताओं की 12-0 की सर्वसम्मत सहमति से लिया गया यह कदम जुलाई 2023 के बाद फेडरल रिजर्व की पहली दर वृद्धि को दर्शाता है। सख्त मौद्रिक रुख और सख्त भविष्यगामी अनुमानों के चलते मुद्रास्फीति नियंत्रण को लेकर नीति निर्माताओं की साख को मजबूती मिली है। इसके प्रभाव से अमेरिकी बाजार में नॉमिनल और वास्तविक प्रतिफल दोनों ही निवेशकों के लिए आकर्षक बन गए हैं। ट्रेजरी यील्ड और यील्ड कर्व की चाल बाजार के विश्लेषकों का आकलन है कि 10 वर्ष की परिपक्वता वाले अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में अत्यधिक उछाल आने की गुंजाइश काफी सीमित है। इसका मुख्य कारण यह है कि बाजार ने पहले ही नीतिगत सख्ती की संभावनाओं को बड़े पैमाने पर अपने भावों में शामिल कर लिया था, साथ ही व्यापक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं भी यील्ड पर लगाम लगा रही हैं। विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि बहुत कम अवधि में यील्ड भले ही ऊपरी स्तरों का परीक्षण कर सकती है, लेकिन नॉमिनल और वास्तविक दरें बेहद मजबूत बनी हुई हैं। इसके अलावा ब्याज दर वक्र के दोबारा चपटा होने की स्थिति भी सामने आ रही है। विश्लेषकों के अनुसार यील्ड कर्व का यह रुख आने वाले महीनों में निवेशकों को स्टीपनर पोजीशन में प्रवेश करने का शानदार अवसर दे रहा है। ब्याज दर चक्र के अगले चरण में स्टीपनर ट्रेड को सबसे सहज रास्ता माना जा रहा है, क्योंकि आने वाले समय में छोटी अवधि और लंबी अवधि के परिपक्वता प्रतिफल के बीच का फासला बाजार की नई दिशा तय करेगा। मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और डॉलर की स्थिति फेडरल रिजर्व के सख्त नीतिगत ऐलान के बाद अमेरिकी डॉलर में आई जोरदार तेजी जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छूने के बाद थमती दिखी। गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने नई ताकत दिखाई और AUD/USD जोड़ी फिर से 0.7100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े के पार निकल गई। जोखिम से संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक संवाद की उम्मीदों से अतिरिक्त समर्थन मिला, जिससे जोखिम उठाने की धारणा मजबूत हुई। दूसरी ओर जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी USD/JPY ने एशियाई सत्र में 156.00 के नीचे तक गोता लगाने के बाद अपनी गिरावट की भरपाई की। इससे पहले डॉलर ने लगातार तीन दिनों की बढ़त दर्ज करते हुए पिछले दिन लगभग दो सप्ताह के शीर्ष स्तर को छुआ था। अमेरिकी डॉलर की सात सप्ताह के शीर्ष स्तर से रुकती रैली और बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की तेज होती संभावनाओं ने येन को सहारा दिया है। शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक के नतीजे आने हैं, जिस पर निवेशकों की पूरी नजरें टिकी हुई हैं। सोने और बिटकॉइन का बाजार प्रदर्शन कीमती धातुओं के बाजार में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त नीतिगत संदेश के तुरंत बाद सोना छह सप्ताह के निचले स्तर 4,235 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़क गया था। हालांकि इसके बाद निचले स्तरों से सुधार की कोशिश हुई, लेकिन गुरुवार की शुरुआत में 4,300 डॉलर के ऊपर जाते ही बिकवाली का नया दबाव बन गया, जिसने सोने की रिकवरी की गति को धीमा कर दिया है। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के चलते सोने के खरीदार सतर्कता बरत रहे हैं। डिजिटल परिसंपत्ति वर्ग में बिटकॉइन का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दिन बुधवार को बिटकॉइन 76,000 डॉलर के स्तर के ऊपर कारोबार करता देखा गया। सख्त ब्याज दर माहौल के बावजूद प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी का इस स्तर पर टिके रहना निवेशकों के निरंतर रुझान को दर्शाता है। जापानी येन और वैश्विक फंडिंग का नया दौर जापान की दशकों पुरानी अत्यंत नरम ब्याज दर नीति ने ऐतिहासिक रूप से दुनिया भर में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। शून्य या नकारात्मक दरों के कारण जापानी येन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सस्ती फंडिंग मुद्रा बन गया था, जिसका उपयोग कैरी ट्रेड के जरिए दुनिया भर के परिसंपत्ति बाजारों में किया जाता रहा। जब दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी की, तब जापान एक अलग अपवाद के रूप में अपनी ढीली नीति पर टिका रहा। अब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी नीतिगत सख्ती के नए चरण में कदम रखने के संकेतों के साथ वैश्विक स्तर पर फंडिंग का यह पुराना लाभ पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह, डॉलर का भाव और निवेश परिसंपत्तियों की लागत प्रभावित होगी। • वैश्विक निवेशकों के लिए: अमेरिकी ट्रेजरी में वास्तविक और नॉमिनल यील्ड आकर्षक होने से पूंजी का प्रवाह सुरक्षित ऋण साधनों की ओर बढ़ सकता है। इससे उभरते बाजारों और इक्विटी में अल्पकालिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है। • करेंसी और डॉलर पर असर: मजबूत अमेरिकी ब्याज दरें विदेशी मुद्रा विनिमय में डॉलर को सहारा देती हैं जिससे स्थानीय मुद्राओं पर आयात बिल का दबाव बढ़ सकता है। विदेशी यात्रा, शिक्षा और आयातित कच्चे माल की लागत पर करीबी नजर रखनी होगी। • कमोडिटी और सोना खरीदारों के लिए: ऊंची अमेरिकी ब्याज दरों के चलते सोने में 4,300 डॉलर के आसपास बिकवाली का दबाव देखा गया है। जो खरीदार सोने में नई खरीदारी की योजना बना रहे हैं उन्हें दरों में स्थिरता आने तक कीमतों में उतार-चढ़ाव झेलना पड़ सकता है। • क्रिप्टो निवेशकों के लिए: कड़े नीतिगत फैसले के बावजूद बिटकॉइन का 76,000 डॉलर के ऊपर टिके रहना इस वर्ग में स्थिरता का संकेत है। हालांकि बढ़ती उधारी लागत के दौर में जोखिम वाले डिजिटल एसेट्स में सतर्क रुख अपनाना जरूरी है। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी और बाजार में यील्ड कर्व के चपटा होने के पीछे निरंतर आर्थिक चुनौतियां और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत बदलाव मुख्य कारण हैं। • मुद्रास्फीति का दबाव: फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और अपनी नीतिगत विश्वसनीयता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की है। यह सर्वसम्मत निर्णय जुलाई 2023 के बाद पहली बार दरें बढ़ाने की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित करता है। • बाजार की पूर्व तैयारी: 10 वर्ष की ट्रेजरी यील्ड में सीमित बढ़त इसलिए देखी जा रही है क्योंकि वित्तीय बाजार पहले से ही नीतिगत सख्ती की कीमत को शामिल कर चुका था। आर्थिक सुस्ती की चिंताओं ने भी लंबी अवधि के प्रतिफल को बेलगाम ऊपर जाने से रोका है। • वैश्विक मौद्रिक विचलन: बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी लंबे समय से चली आ रही अत्यंत ढीली नीति को समाप्त कर दरों को सामान्य करने की संभावनाओं ने मुद्रा बाजारों में पुनर्संतुलन पैदा किया है। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया द्वारा दर वृद्धि के अनुमान और कूटनीतिक आशावाद ने डॉलर की तेजी पर विराम लगाया। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व ने अपनी नीतिगत दरों में कितना बदलाव किया है? फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है, जिससे लक्षित दायरा 3.75% से 4.00% हो गया है। 2. यह दर वृद्धि पिछली बढ़ोतरी के कितने समय बाद हुई है? यह फैसला 12-0 के सर्वसम्मत मतदान से लिया गया और यह जुलाई 2023 के बाद फेडरल रिजर्व की पहली दर वृद्धि है। 3. 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सीमित बढ़त का क्या कारण बताया गया है? बाजार पहले ही नीतिगत सख्ती की संभावनाओं को शामिल कर चुका था और आर्थिक वृद्धि को लेकर बनी चिंताओं के कारण यील्ड में बहुत बड़े उछाल की गुंजाइश सीमित है। 4. ब्याज दर फैसले के बाद सोने और बिटकॉइन का क्या स्तर रहा? सोना 4,235 डॉलर के निचले स्तर से उबरकर 4,300 डॉलर के ऊपर बिकवाली के दबाव में आया, जबकि बिटकॉइन 76,000 डॉलर के ऊपर बना रहा। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ki-daron-men-barhotari-ke-bada-us-bonda-yilda-aura-vaishvika-bajaron-men-halachala-33743 TrendKia — Har trend, sabse pehle.