फेडरल रिजर्व की सख्ती और पश्चिम एशिया में खिंचाव के बीच अमेरिकी डॉलर दो हफ्ते के शीर्ष पर, वैश्विक बाजारों में हलचल फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक बैठक और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 102.00 के पार पहुंच गया है, जिससे प्रमुख मुद्राओं, सोने और डिजिटल संपत्तियों पर दबाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर एक बार फिर अपनी ताकत दिखाता नजर आ रहा है। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी मुद्रा के मूल्य का आकलन करने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) पिछले तीन कारोबारी सत्रों में 0.6% से अधिक की बढ़त दर्ज करते हुए दो सप्ताह के अपने नए उच्च स्तर 102.00 के पार निकल चुका है। सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में डॉलर की यह वापसी मुख्य रूप से फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क रुख और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की वजह से देखने को मिल रही है। फेडरल रिजर्व का कड़ा रुख और भू-राजनीतिक जोखिम बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक के आगामी निर्णयों को लेकर अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार में मजबूती ने डॉलर को लगातार सहारा दिया है। आईएनजी के क्रिस टर्नर का कहना है कि ऊर्जा की मजबूत कीमतें और अमेरिका व इजरायल द्वारा ईरान पर एक और हमले की बढ़ती आशंकाओं के बीच केंद्रीय बैंकों का रुख सख्त बने रहने की संभावना है, जो गिरावट के हर दौर में डॉलर को समर्थन देता रहेगा। दूसरी ओर, एचएसबीसी के विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर आने वाले हफ्तों में अपने हालिया उच्च स्तरों के करीब ही स्थिर रहेगा, और इसमें किसी बड़ी कमजोरी की जगह आगे और बढ़त का जोखिम ज्यादा बना हुआ है। टीडी सिक्योरिटीज ने भी मुद्रास्फीति के लगातार बने रहने वाले जोखिमों को रेखांकित करते हुए फेडरल रिजर्व के सतर्क रुख की संभावना जताई है। टीडी सिक्योरिटीज के अनुसार, बुधवार की बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखना दिसंबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावना को और अधिक मजबूत बना देगा। जब उधार की लागत ऊंची बनी रहती है, तो वैश्विक पूंजी अमेरिकी बॉन्ड और डॉलर संपत्तियों की तरफ तेजी से आकर्षित होती है, जिससे दुनिया भर की अन्य मुद्राओं पर स्वाभाविक दबाव बढ़ जाता है। वैश्विक वित्तीय ढांचे में अमेरिकी डॉलर का प्रभुत्व अमेरिकी डॉलर संयुक्त राज्य अमेरिका की आधिकारिक मुद्रा होने के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में वहां की स्थानीय मुद्राओं के समानांतर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर उपयोग की जाती है। वर्ष 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह दुनिया की सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जो वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय कारोबार के 88% से अधिक हिस्सेदारी रखती है। यह औसतन 6.6 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के दैनिक वित्तीय लेन-देन का प्रतिनिधित्व करती है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा का स्थान हासिल किया था। अपने इतिहास के लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर सोने के भंडार पर आधारित था, लेकिन 1971 में हुए ब्रेटन वुड्स समझौते के साथ ही इस गोल्ड स्टैंडर्ड प्रणाली को समाप्त कर दिया गया था। इसके बाद से अमेरिकी डॉलर पूरी तरह से एक फिएट करेंसी के रूप में संचालित हो रहा है, जिसका मूल्य मुख्य रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उसकी मौद्रिक नीतियों की मजबूती पर टिका है। मौद्रिक नीति, क्यूई और क्यूटी का डॉलर पर असर अमेरिकी डॉलर के मूल्य को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला घटक फेडरल रिजर्व द्वारा तय की जाने वाली मौद्रिक नीति है। फेडरल रिजर्व को मुख्य रूप से दो अधिदेश सौंपे गए हैं: पहला, 2% के लक्ष्य के दायरे में मूल्य स्थिरता हासिल करना और दूसरा, अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों में समायोजन करना है। जब वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं और मुद्रास्फीति 2% से ऊपर निकल जाती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब महंगाई दर 2% से नीचे आती है या बेरोजगारी दर अधिक हो जाती है, तो फेड ब्याज दरों में कटौती करता है, जो डॉलर पर नकारात्मक असर डालता है। असाधारण वित्तीय संकट के समय फेडरल रिजर्व अतिरिक्त नकदी प्रवाह बढ़ाने के लिए क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) का सहारा लेता है। यह एक गैर-मानक नीतिगत उपाय है, जिसे तब अपनाया जाता है जब बैंकिंग प्रणाली में ऋण प्रवाह पूरी तरह रुक जाता है और बैंक एक-दूसरे को जोखिम के डर से कर्ज देने से कतराते हैं। ब्याज दरों में सामान्य कटौती जब अप्रभावी हो जाती है, तब यह अंतिम उपाय बनता है। वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के समय फेड ने बड़े पैमाने पर नए डॉलर छापकर वित्तीय संस्थानों से अमेरिकी सरकारी बॉन्ड खरीदे थे। क्वांटिटेटिव ईजिंग की इस प्रक्रिया से बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे सामान्यतः डॉलर कमजोर होता है। इसके उलट, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) वह प्रक्रिया है जिसमें केंद्रीय बैंक बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाली मूल राशि का दोबारा निवेश नहीं करता, जिससे डॉलर को आमतौर पर मजबूती मिलती है। विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ियों की स्थिति डॉलर की व्यापक मजबूती के बीच विभिन्न विदेशी मुद्रा जोड़ियों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के साथ डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सुधरते हुए 0.7030 के स्तर पर पहुंच गई। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों पर कड़े रुख की उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया, जिससे यह एक महीने के उच्च स्तर से आई गिरावट से संभल सकी। हालांकि, बुधवार को आने वाले ऑस्ट्रेलिया के सितंबर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों और फेड के ब्याज दर निर्णय से पहले मजबूत डॉलर के कारण हाजिर कीमतें अपने 100-दिवसीय एसएमए प्रतिरोध स्तर से नीचे बनी हुई हैं। जापानी येन के मुकाबले डॉलर की जोड़ी (USD/JPY) में लगातार तीसरे दिन खरीदार सक्रिय रहे, जिससे यह अपने एक महीने के निचले स्तर से उबरने में सफल रही। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा शुक्रवार की बैठक में आक्रामक दर वृद्धि टालने के कयासों ने येन पर दबाव बनाया है। अमेरिकी डॉलर के लगभग दो सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने से इस जोड़ी को मजबूत बढ़त मिली है। कमोडिटी और सोने का मिजाज मजबूत डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक ऊपर टिके रहने का प्रयास कर रहा है। फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले बाजार में अत्यधिक सतर्कता का माहौल है। नवीनतम बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोने की हाजिर कीमत 4,076 डॉलर प्रति औंस पर चल रही है, जो पिछले 4,038 डॉलर के बंद भाव से 0.93% की बढ़त दर्शाती है। इसका 52 सप्ताह का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों के आधार पर सोने का 14-दिवसीय आरएसआई (RSI) 39 पर है, जबकि एमएसीडी (MACD) -64.81 पर सिग्नल लाइन -60.26 के नीचे रहकर मंदी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 4,151 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,239 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,422 डॉलर पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने के साथ डेथ क्रॉस बना हुआ है। बोलिंजर बैंड 4,033 डॉलर से 4,254 डॉलर के बीच है, जिसमें मध्य रेखा 4,144 डॉलर है। एडीएक्स 27 पर ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है। सोने के लिए 4,075 डॉलर पर पिवट स्तर, 4,078 डॉलर और 4,079 डॉलर पर प्रतिरोध स्तर तथा 4,074 डॉलर और 4,071 डॉलर पर तात्कालिक समर्थन स्तर मौजूद हैं। क्रिप्टोकरेंसी और राजनीतिक अनिश्चितता डिजिटल संपत्तियों के क्षेत्र में पाई नेटवर्क (PI) मंगलवार को 0.0760 डॉलर के स्तर के ऊपर स्थिर बना रहा। पिछले दिन लगभग 2% की तेजी के बाद इसकी गति धीमी पड़ गई है। कमजोर बाजार धारणा और ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी के कारण पाई टोकन पर दबाव है। तकनीकी रूप से यह दीर्घकालिक प्रतिरोध ट्रेंडलाइन के नीचे सीमित बना हुआ है और इसमें गति कमजोर नजर आ रही है। इसके साथ ही, अमेरिकी डॉलर को 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण दौर का सामना करना पड़ रहा है। बाजार जहां दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और वृद्धि की तैयारी कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी कांग्रेस के नियंत्रण की राजनीतिक लड़ाई आने वाले समय में राजकोषीय नीतियों की दिशा बदल सकती है, जिसका परोक्ष प्रभाव 2027 में मौद्रिक नीतियों के मार्ग पर भी पड़ सकता है। इसका आप पर असर अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों से वैश्विक और भारतीय बाजारों पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में असर: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और आयात महंगा हो सकता है। कच्चे तेल और आयातित वस्तुओं के लिए अधिक डॉलर चुकाने से घरेलू स्तर पर महंगाई और चालू खाता घाटे पर असर देखने को मिल सकता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: बॉन्ड यील्ड और सुरक्षित संपत्तियों में डॉलर की मांग बढ़ने से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी हो सकती है। विदेशी संस्थागत निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी डॉलर परिसंपत्तियों में स्थानांतरित कर सकते हैं। • सोने के खरीदारों के लिए: डॉलर मजबूत रहने के बावजूद सोना 4,000 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। यदि फेडरल रिजर्व सख्त रुख बनाए रखता है, तो सोने की कीमतों में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। • फॉरेक्स और कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए: प्रमुख मुद्राओं जैसे येन और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। ट्रेडर्स को 102.00 के प्रमुख स्तर और फेडरल रिजर्व के नीतिगत बयानों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ अमेरिकी डॉलर में यह ताजा तेजी मुख्य रूप से आगामी नीतिगत फैसलों और भू-राजनीतिक तनावों के संयोजन से प्रेरित है। • फेडरल रिजर्व से सख्ती की उम्मीद: आगामी एफओएमसी बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने और दिसंबर में दर वृद्धि के खुले विकल्पों ने निवेशकों को आकर्षित किया है। ऊंची ब्याज दरें अमेरिकी संपत्तियों पर बेहतर प्रतिफल सुनिश्चित करती हैं, जिससे डॉलर की मांग बनी रहती है। • पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ा दी है। युद्ध और अनिश्चितता के दौर में वैश्विक पूंजी डॉलर जैसी सुरक्षित मुद्राओं की ओर रुख करती है। • कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतें: ऊर्जा बाजार में मजबूती के चलते केंद्रीय बैंकों द्वारा मुद्रास्फीति से निपटने के लिए सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने का दबाव बना हुआ है। जब ऊर्जा कीमतें ऊंची होती हैं, तो मुद्रास्फीति कम करने के लिए ब्याज दरों में कटौती टल जाती है। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में हाल ही में कितनी बढ़त दर्ज की गई है? यूएस डॉलर इंडेक्स पिछले तीन कारोबारी सत्रों में 0.6% से अधिक चढ़कर 102.00 के स्तर के पार पहुंच गया है। 2. डॉलर में इस मजबूती के पीछे मुख्य कारण क्या हैं? फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक में सख्त नीतिगत रुख की उम्मीदें और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। 3. वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में अमेरिकी डॉलर की कितनी हिस्सेदारी है? 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय कारोबार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी 88% से अधिक है, जो दैनिक 6.6 ट्रिलियन डॉलर के लेन-देन को दर्शाती है। 4. क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) में क्या अंतर है? क्वांटिटेटिव ईजिंग में केंद्रीय बैंक नए डॉलर छापकर बॉन्ड खरीदता है जिससे डॉलर कमजोर होता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बॉन्ड पुनर्निवेश रोककर नकदी घटाई जाती है जो डॉलर को मजबूती देती है। 5. वर्तमान में सोने की कीमत किस स्तर पर कारोबार कर रही है? सोने की हाजिर कीमत 0.93% की बढ़त के साथ 4,076 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रही है। 6. अमेरिकी मध्यावधि चुनाव डॉलर को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? 3 नवंबर को होने वाले चुनाव अमेरिकी कांग्रेस का नियंत्रण तय करेंगे, जिससे राजकोषीय नीतियां और 2027 तक मौद्रिक नीति की दिशा प्रभावित हो सकती है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ki-sakhti-aura-pashchima-eshiya-men-khinchava-ke-bicha-us-dollar-do-haphte-ke-shirsha-para-vaishvika-bajaron-men-h-52363 TrendKia — Har trend, sabse pehle.