फेडरल रिजर्व की सख्ती से अमेरिकी डॉलर को मिली मजबूती, वैश्विक मुद्राओं और सोने पर दिखा असर फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और आगे भी सख्ती के संकेत के बाद अमेरिकी डॉलर मजबूत स्थिति में पहुंच गया है। इस फैसले से कच्चे तेल, जापानी येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने के बाजारों में नए समीकरण बनने लगे हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की ताजा वृद्धि किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को बेहद मजबूत आधार मिल गया है। नीति निर्माताओं की ओर से साल के अंत तक एक और संभावित बढ़ोतरी के कड़े मौद्रिक संकेत दिए गए हैं। इससे अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) दो महीने के उच्चतम स्तर तक पहुंच चुका है। कच्चे तेल के चढ़ते दाम और केंद्रीय बैंक का सख्त रुख अल्पावधि में डॉलर की मजबूती को लगातार बढ़ावा दे रहे हैं, हालांकि आने वाले महीनों में खाड़ी क्षेत्र के हालातों और व्यापक आर्थिक आंकड़ों के आधार पर स्थिति स्थिर होने के आसार भी देखे जा रहे हैं। बॉन्ड स्वैप दरों में उछाल और आगामी नीतिगत अनुमान फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले वित्तीय बाजारों में सख्त रुख की उम्मीदें पहले से लगाई जा रही थीं। इसके बावजूद, बैठक के औपचारिक नतीजे सामने आते ही दो वर्षीय अमेरिकी डॉलर स्वैप दर में 10 से 12 आधार अंकों की भारी बढ़त दर्ज की गई। मौजूदा समय में बाजार की कीमतें अक्टूबर के लिए 13 आधार अंक और दिसंबर के लिए 32 आधार अंकों की संभावित बढ़ोतरी का संकेत दे रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मौद्रिक सख्ती के इस स्पष्ट संदेश से वित्तीय बाजारों को यह छूट मिल गई है कि यदि आर्थिक आंकड़े गर्म आते हैं या कच्चे तेल की कीमतें और उछलती हैं, तो अक्टूबर में होने वाले अगले कदम को पहले ही पूरी तरह आंक लिया जाए। डॉलर इंडेक्स में व्यापक तेजी और बाहरी सहारा अमेरिकी डॉलर ने सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के मुकाबले जोरदार बढ़त हासिल की है। इस तेजी के चलते डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए दो महीने के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। इस मजबूती के पीछे तीन प्रमुख कारक काम कर रहे हैं। पहला, मुद्रास्फीति पर लगाम कसने के लिए कड़े संदेश के चलते बाजार आने वाले महीनों में किसी भी नए नीतिगत कदम को तुरंत स्वीकार करने की स्थिति में आ गए हैं। दूसरा, मौद्रिक अनुशासन का संकल्प मुद्रा के अवमूल्यन पर आधारित व्यापार की वापसी की राह को काफी कठिन बना देता है। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा बाजार से जुड़ा है, जहां कच्चे तेल के ऊंचे दाम अमेरिकी डॉलर के लिए बाहरी अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं। जब तक कच्चे तेल को मजबूती मिलती रहेगी, तब तक डॉलर की तेजी का रुख बना रहने की संभावना है। आने वाले महीनों में मौजूदा दायरे के आसपास ठहराव और साल के अंत तक डॉलर में थोड़ी नरमी का अनुमान खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम होने पर निर्भर करता है। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की स्थिति गुरुवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) में नए खरीदार लौटते दिखाई दिए। यह जोड़ी एक बार फिर 0.7100 के स्तर को छूने में सफल रही। यह सुधार ऐसे समय आया जब अमेरिकी डॉलर ने जुलाई के अंत के बाद के अपने उच्चतम स्तर की दौड़ पर थोड़ी देर के लिए विराम लगाया। इसके साथ ही, रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों की संभावनाओं ने भी निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को बढ़ाया, जिसका सीधा फायदा जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मिला। बैंक ऑफ़ जापान के नीतिगत फैसले पर टिकी निगाहें जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (USD/JPY) ने गुरुवार को एशियाई सत्र में 156.00 के नीचे आई संक्षिप्त गिरावट को उलट दिया। यह जोड़ी पिछले दिन दर्ज किए गए करीब दो सप्ताह के शीर्ष स्तर से अपनी तीन दिनों की बढ़त की लय को थामने की कोशिश कर रही है। फेड के फैसले के बाद डॉलर सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जहां से अब इसमें थोड़ा ठहराव आया है। वहीं दूसरी तरफ, बैंक ऑफ़ जापान (BoJ) द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में सख्त रुख अपनाने के बाजार अनुमानों ने जापानी येन को कुछ मजबूती प्रदान की है। इस स्थिति ने इस मुद्रा जोड़ी की तेजी को सीमित रखा है, और अब सारा ध्यान शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ़ जापान के नीतिगत फैसले पर केंद्रित हो गया है। उल्लेखनीय है कि जापान की दशकों पुरानी बेहद कम ब्याज दरों ने विश्व भर में खरबों डॉलर के वैश्विक निवेश को वित्तीय पोषण दिया था, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में शामिल रहा। अब जापान के नीतिगत बदलाव की संभावनाओं के साथ यह पुराना लाभ एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जबकि अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं पहले ही ब्याज दरें बढ़ा चुकी हैं। सोने की कीमतों में रिकवरी और सुरक्षित निवेश की मांग अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में सोना गुरुवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत से पहले संभलते हुए फिर से 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। हालांकि, पीली धातु पिछले कारोबारी दिन छुए गए छह सप्ताह के निचले स्तर के काफी करीब बनी हुई है। जुलाई के अंत के बाद के नए उच्च स्तर को छूने के बाद डॉलर में आई हल्की नरमी ने सोने को कुछ सहारा दिया। इसके बावजूद, फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत दृष्टिकोण और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को बनाए रखे हुए हैं, लेकिन गैर-उपज वाली इस बहुमूल्य धातु की ऊपरी बढ़त पर मौद्रिक सख्ती का दबाव भी देखा जा रहा है। इसका आप पर असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के इस फैसले से वैश्विक व्यापार, विदेशी मुद्रा दरों और कमोडिटी की कीमतों में सीधा उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। • भारत में: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आयातित सामान खासकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और तेल महंगे हो सकते हैं। आयातकों को विदेशी मुद्रा हेजिंग की लागत बढ़ सकती है, जबकि निर्यातकों को कमजोर रुपये से मार्जिन में कुछ राहत मिल सकती है। • वैश्विक स्तर पर: ऊंची अमेरिकी ब्याज दरों के कारण दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में पूंजी की लागत बढ़ जाएगी। इससे विकासशील देशों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश वापस अमेरिकी संपत्तियों की तरफ जा सकता है। • सोने के खरीदारों के लिए: सोने की कीमतें 4,300 डॉलर के पास बनी हुई हैं, लेकिन मजबूत डॉलर इसकी तेज बढ़त को सीमित रखेगा। शादी-ब्याह या निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को डॉलर और स्थानीय मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर नजर रखनी चाहिए। • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और छात्रों के लिए: डॉलर के उच्च स्तर पर बने रहने से अमेरिका या डॉलर से जुड़े देशों में पढ़ाई और यात्रा का बजट बढ़ जाएगा। छात्रों और उनके परिवारों को ट्यूशन फीस और रहने के खर्च के लिए अधिक स्थानीय मुद्रा खर्च करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी और आगे भी सख्ती बनाए रखने के फैसले के पीछे मुद्रास्फीति का दबाव और ऊर्जा बाजार की स्थितियां मुख्य कारण हैं। • मुद्रास्फीति नियंत्रण: अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए दरों में 25 आधार अंकों का इजाफा किया और साल के अंत तक एक और वृद्धि का संकेत दिया। इस मौद्रिक अनुशासन ने बॉन्ड स्वैप दरों को 10 से 12 आधार अंक तक बढ़ा दिया। • कच्चे तेल की कीमतें: वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति के जोखिम को दोबारा हवा दी है। ऊंचे तेल के दाम अमेरिकी डॉलर के लिए अनुकूल बाहरी माहौल बनाते हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। • वैश्विक नीतियों में असमानता: जहां बैंक ऑफ़ जापान जैसे संस्थान अपनी अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की शुरुआत कर रहे हैं, वहीं फेडरल रिजर्व द्वारा सख्ती बनाए रखने से मुद्राओं के बीच ब्याज दर का अंतर डॉलर के पक्ष में बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कितना बदलाव किया है? फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (0.25%) की बढ़ोतरी की है और साल के अंत तक एक और बढ़ोतरी का संकेत दिया है। 2. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) पर इस फैसले का क्या असर हुआ? डॉलर इंडेक्स 0.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। 3. जापानी येन और बैंक ऑफ़ जापान की स्थिति क्या है? USD/JPY जोड़ी 156.00 के करीब है, और बाजार शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ़ जापान के नीतिगत फैसले पर नजर रखे हुए है जहां नीतिगत सख्ती की संभावना है। 4. सोने की कीमत किस स्तर पर कारोबार कर रही है? सोना सुधरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया है, हालांकि यह अपने छह सप्ताह के निचले स्तर के करीब बना हुआ है। 5. कच्चे तेल के दामों का डॉलर पर क्या असर पड़ रहा है? कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अमेरिकी डॉलर को बाहरी समर्थन प्रदान कर रही हैं, जिससे मुद्रा में तेजी का रुख बना हुआ है। https://trendkia.com/market/federal-reserve-ki-sakhti-se-us-dollar-ko-mili-majabuti-vaishvika-mudraon-aura-sone-para-dikha-asara-33674 TrendKia — Har trend, sabse pehle.