FOMC मिनट्स में सख्ती के संकेत के बावजूद अमेरिकी डॉलर में सुस्ती फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्यौरे में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, लेकिन कमजोर आर्थिक आंकड़ों के कारण डॉलर में मजबूती नहीं दिख रही है। ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से जारी हालिया मिनट्स में नीति निर्माताओं का रुख 'हायर-फॉर-लॉन्गर' यानी ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के संकेत की ओर झुका हुआ है। बैठक के दौरान कुछ नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया कि यदि मुद्रास्फीति का रुझान प्रतिकूल रहता है, तो भविष्य में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करना आवश्यक हो सकता है। इसके बावजूद, वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर (USD) अपनी स्थिति मजबूत करने में विफल रहा है। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी विकास की धीमी संभावनाओं और हाल ही में सामने आए श्रम बाजार के कमजोर आंकड़ों पर केंद्रित है, जो डॉलर पर दबाव बना रहे हैं। मुद्राओं का प्रदर्शन और बाजार की स्थिति बाजार में प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल मिश्रित रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर जापानी येन (JPY) के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति में बना हुआ है। डॉलर और येन की जोड़ी (USD/JPY) 162.50 के स्तर के पास मजबूती से टिकी हुई है, जो कई दशकों के उच्चतम स्तर के करीब है। दूसरी ओर, ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) ने बुधवार को 1.3400 का प्रमुख स्तर पार कर लिया है। डॉलर में गिरावट के कारण पाउंड को नई ऊंचाई हासिल करने में मदद मिली है, जबकि मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद यह तेजी जारी है। यूरो (EUR/USD) की स्थिति भी कुछ इसी तरह की रही है। बुधवार के उत्तरी अमेरिकी सत्र के उत्तरार्ध में यूरो 1.1400 के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। शुरुआती गिरावट को पीछे छोड़ते हुए, डॉलर की कमजोरी ने यूरो को वापस ऊपर की ओर लौटने में सहयोग दिया है, हालांकि फेडरल रिजर्व का रुख और भू-राजनीतिक अस्थिरता लगातार बाजार को प्रभावित कर रही है। ऊर्जा और कीमती धातुओं का बाजार ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में तेजी देखी गई है। यह 74.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छूने के बाद 75.73 डॉलर के करीब पहुंच गया है, जो दो सप्ताह का उच्चतम स्तर है। इस तेजी के पीछे का मुख्य कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का डर है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास दी गई चेतावनियों ने ऊर्जा बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को पुनर्जीवित कर दिया है। सोने (Gold) की कीमतों में भी सुधार देखा गया है। बुधवार को कीमती धातु ने शुरुआती निचले स्तर से उबरकर फिर से अपनी स्थिति मजबूत की है। अमेरिकी डॉलर में गिरावट और भू-राजनीतिक चिंताओं के बने रहने के कारण सोने का ध्यान अब 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के लक्ष्य की ओर है। फॉरवर्ड गाइडेंस का बदलता स्वरूप लंबे समय से केंद्रीय बैंक बाजार को भविष्य के कदमों के बारे में संकेत देते रहे हैं। हालांकि, अब स्थिति बदल रही है। फेडरल रिजर्व से लेकर यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड तक, नीति निर्माता अब फॉरवर्ड गाइडेंस यानी भविष्य की दिशा बताने की प्रक्रिया में कमी लाने की ओर बढ़ रहे हैं। व्यापारियों को यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि आने वाले समय में केंद्रीय बैंक अपनी रणनीतियों को लेकर पहले की तुलना में कम स्पष्ट जानकारी साझा कर सकते हैं। इसका आप पर असर भारत में: डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि भारतीय रुपये पर दबाव डाल सकती है और पेट्रोल-डीजल की आयात लागत बढ़ा सकती है। निवेशकों के लिए: वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता को देखते हुए पोर्टफोलियो में सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों का महत्व बढ़ जाता है। सवाल-जवाब 1. फेडरल रिजर्व के मिनट्स में क्या संकेत दिए गए हैं? मिनट्स में कहा गया है कि यदि मुद्रास्फीति का दबाव जारी रहता है, तो ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करना आवश्यक हो सकता है। 2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल क्यों आया है? अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंताओं के कारण आपूर्ति बाधाओं का डर पैदा हो गया है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। 3. सोने की कीमत पर क्या असर पड़ रहा है? अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने की कीमतों में सुधार हुआ है, जो अब 4,100 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस की ओर देख रहा है। 4. केंद्रीय बैंक फॉरवर्ड गाइडेंस को लेकर क्या सोच रहे हैं? दुनिया भर के प्रमुख केंद्रीय बैंक, जैसे फेड और ईसीबी, अब भविष्य की दिशा बताने यानी फॉरवर्ड गाइडेंस देने में कमी लाने की तैयारी कर रहे हैं। https://trendkia.com/market/fomc-minatsa-men-sakhti-ke-snketa-ke-bavajuda-ameriki-dollar-men-susti-5951 TrendKia — Har trend, sabse pehle.