# फ्रांस के बढ़ते कर्ज संकट और डॉलर की मजबूती से मई 2025 के निचले स्तर पर फिसला यूरो

> फ्रांस में गहराते कर्ज संकट, राजनीतिक गतिरोध और अमेरिकी डॉलर में आई तेजी के दोहरे दबाव में यूरो लुढ़ककर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/france-ke-barhate-karja-snkata-aura-dollar-ki-majabuti-se-mai-2025-ke-nichale-stara-para-phisala-euro-43053 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो, अमेरिकी डॉलर, फ्रांस कर्ज संकट, विदेशी मुद्रा बाजार, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, कच्चा तेल, सोना

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो भारी बिकवाली के दबाव का सामना कर रही है। प्रमुख मुद्रा जोड़ी EUR/USD में सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसके पीछे यूरोज़ोन की आंतरिक आर्थिक कमजोरियां और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग दोनों एक साथ असर दिखा रहे हैं। विशेष रूप से फ्रांस में गहराते कर्ज संकट और आगामी चुनावी माहौल को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा को गंभीर झटका दिया है। वैश्विक स्तर पर सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल दरों यानी यील्ड में बढ़ोतरी के बीच फ्रांस के उधार लेने की लागत में तेजी आई है, जहां 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 4.9% के स्तर को पार कर दशकों के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच चुकी है।

 दूसरी ओर, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार बढ़त बनाए हुए है। हालांकि अक्टूबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कुछ कमजोर पड़ी हैं, लेकिन मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने के तौर पर अमेरिकी डॉलर की ओर आकर्षित किया है। इन विपरीत परिस्थितियों के चलते यूरो की कीमत लुढ़ककर मई 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। हालिया कारोबारी सत्र में EUR/USD जोड़ी गिरकर 1.1312 के स्तर तक पहुंच गई, जो जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरोप का ऊर्जा कीमतों के प्रति जोखिम भी इस गिरावट को तेज कर रहा है।

 

## फ्रांस की वित्तीय स्थिति और आगामी चुनाव की चिंताएं

यूरोपीय संघ की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फ्रांस में वित्तीय स्थिरता को लेकर बाजार के भीतर गहरी चिंताएं देखी जा रही हैं। ताजा अनुमानों के मुताबिक फ्रांस का कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद अनुपात (डेट-टू-जीडीपी रेशियो) इस साल के 119% से बढ़कर अगले साल 122% तक पहुंचने का अनुमान है। बजट घाटे पर नियंत्रण पाने के प्रयासों के बीच देश के भीतर राजनीतिक समीकरणों में खिंचाव बना हुआ है। चुनाव से पहले नीतिगत फैसले लेने में आ रही अड़चनों ने आर्थिक सुधारों की रफ्तार धीमी कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में फ्रांस के संप्रभु ऋण को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

 राजनीतिक मोर्चे पर, राष्ट्रपति पद की दौड़ में जनमत सर्वेक्षणों में आगे चल रहीं दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन के आर्थिक वादों ने वित्तीय विश्लेषकों की चिंता और बढ़ा दी है। मरीन ले पेन ने सत्ता में आने पर करों में कटौती करने और सेवानिवृत्ति की उम्र घटाकर 60 वर्ष तक लाने का संकल्प लिया है। फ्रांस की पेंशन प्रणाली पहले से ही देश के सार्वजनिक बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा खर्च कर रही है। ऐसी स्थिति में पेंशन खर्च को और अधिक बढ़ाने तथा कर राजस्व घटाने के वादों से सरकारी खजाने पर दबाव और बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फ्रांस के सरकारी बॉन्ड पर अधिक यील्ड की मांग कर रहे हैं और यूरो में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं।

 

## वैश्विक मुद्रा विनिमय में यूरो की भूमिका और उसका दायरा

यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देश यूरोज़ोन का हिस्सा हैं, जो आधिकारिक मुद्रा के रूप में यूरो का उपयोग करते हैं। अमेरिकी डॉलर के बाद यूरो दुनिया की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वैश्विक स्तर पर वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, सभी विदेशी मुद्रा विनिमय लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31% रही थी, जिसमें दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक दर्ज किया गया था। इस विशाल कारोबारी परिमाण के बावजूद क्षेत्र के प्रमुख देशों के आर्थिक संकट मुद्रा के संपूर्ण मूल्यांकन को प्रभावित करते हैं।

 मुद्रा जोड़ियों के लिहाज से EUR/USD दुनिया में सबसे सक्रिय रूप से कारोबार की जाने वाली जोड़ी है। अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा बाजार के कुल लेनदेन में अकेले EUR/USD की हिस्सेदारी लगभग 30% आंकी जाती है। इसके बाद अन्य प्रमुख जोड़ियों में EUR/JPY की हिस्सेदारी 4%, EUR/GBP की हिस्सेदारी 3% और EUR/AUD की हिस्सेदारी 2% के आसपास है। इस तरह EUR/USD में आने वाला कोई भी बड़ा उतार-चढ़ाव न केवल यूरोज़ोन बल्कि पूरी दुनिया के मुद्रा बाजारों और व्यापारिक प्रवाह पर सीधा असर डालता है।

 

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति और मुद्रास्फीति का प्रभाव

जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी (ECB) यूरोज़ोन के लिए केंद्रीय बैंक के तौर पर कार्य करता है। ईसीबी ब्याज दरें तय करने और यूरोज़ोन की मौद्रिक नीति के संचालन के लिए जिम्मेदार है। ईसीबी का प्राथमिक दायित्व कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसका तात्पर्य या तो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना है या आर्थिक विकास को गति देना है। इस कार्य के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ाना अथवा घटाना होता है। सामान्य तौर पर अपेक्षाकृत उच्च ब्याज दरें या दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें यूरो को मजबूती प्रदान करती हैं, क्योंकि इससे वैश्विक निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है। इसके विपरीत दरों में कमी मुद्रा को कमजोर करती है।

 ईसीबी गवर्निंग काउंसिल की मौद्रिक नीति बैठकें साल में आठ बार आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य नीतिगत निर्णय लेते हैं, जिनमें ईसीबी की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं। यूरोज़ोन में महंगाई दर का आकलन करने के लिए हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी एचआईसीपी (HICP) सबसे महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। यदि मुद्रास्फीति ईसीबी के 2% के निर्धारित लक्ष्य से अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक को इसे काबू में लाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने पर विवश होना पड़ता है। दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले यूरोज़ोन में अधिक ब्याज दरें क्षेत्र को पूंजी निवेश के लिए आकर्षक बनाती हैं, जिससे यूरो में मांग बढ़ती है।

 

## आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन की अहमियत

यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था की सेहत मापने के लिए जारी होने वाले विभिन्न आंकड़े यूरो के उतार-चढ़ाव को दिशा देते हैं। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई (PMI), रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता धारणा सर्वेक्षण जैसे प्रमुख संकेतक मुद्रा के रुख को तय करते हैं। एक मजबूत अर्थव्यवस्था यूरो के लिए अनुकूल साबित होती है, क्योंकि यह न केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करती है बल्कि ईसीबी को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित करती है। वहीं आर्थिक आंकड़ों में कमजोरी आने पर यूरो में गिरावट देखने को मिलती है। यूरोज़ोन के भीतर जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन की अर्थव्यवस्थाएं सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये चारों देश मिलकर यूरोज़ोन की कुल अर्थव्यवस्था का 75% हिस्सा बनाते हैं।

 मुद्रा के स्वास्थ्य के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतक व्यापार संतुलन यानी ट्रेड बैलेंस है। यह पैमाना किसी निश्चित अवधि में किसी देश द्वारा अपने निर्यात से अर्जित कमाई और आयात पर किए गए खर्च के बीच के अंतर को दर्शाता है। यदि किसी देश के उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन वस्तुओं को खरीदने के लिए संबंधित मुद्रा की मांग बढ़ती है, जिससे मुद्रा का मूल्य बढ़ता है। परिणामस्वरूप, एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन किसी भी मुद्रा को मजबूती देता है, जबकि व्यापार घाटा यानी नकारात्मक व्यापार संतुलन मुद्रा पर दबाव बनाता है।

 

## अन्य मुद्राओं, सोने और कच्चे तेल के बाजारों की चाल

सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों और परिसंपत्तियों में भी हलचल देखी गई। अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच AUD/USD में नई बिकवाली दर्ज की गई और यह जोड़ी फिसलकर 0.6900 के स्तर की ओर पहुंच गई। इस जोड़ी पर मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव का दबाव दिखा। बाजार प्रतिभागी अब आगामी दिशा के लिए कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी आरबीए (RBA) के नीतिगत रुख पर नजर बनाए हुए हैं।

 उधर USD/JPY ने अपनी पिछली गिरावट की भरपाई करते हुए एशियाई सत्र में दोबारा 158.00 का स्तर छू लिया और एक सप्ताह पुराने दायरे में कारोबार करती रही। फेड की दर वृद्धि की कम होती उम्मीदों के बावजूद भू-राजनीतिक अनिश्चितता डॉलर को सहारा दे रही है। हालांकि बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे (BoJ) के सख्त रुख और येन को समर्थन देने के लिए संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिमों के चलते इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।

 कमोडिटी बाजार की बात करें तो सोना सोमवार सुबह 4,150 डॉलर प्रति औंस के करीब अपनी रिकवरी बढ़त को बनाए रखने की कोशिश करता दिखा और पिछले सप्ताह के दायरे में टिका रहा। गिरती ट्रेजरी यील्ड और तेल कीमतों के बावजूद डॉलर के 17 महीने के उच्च स्तर पर लौटने से तकनीकी रूप से सोने पर निकट अवधि में दबाव का रुख देखा जा रहा है। दूसरी ओर, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल की कीमत में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह एशियाई कारोबारी घंटों में 89.30 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही थी। कच्चे तेल में यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद जी7 (G7) देशों ने आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई तथा ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने का संकल्प लिया।

## इसका आप पर असर
फ्रांस के कर्ज संकट और वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेश यात्रा और जिंस बाजार पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारतीय अर्थव्यवस्था पर:** वैश्विक स्तर पर मजबूत होता अमेरिकी डॉलर भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है। इसके चलते आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं और घरेलू स्तर पर आयात बिल में इजाफा देखने को मिल सकता है।
- **यूरोप यात्रा और पढ़ाई पर:** भारतीय छात्रों और पर्यटकों के लिए यूरो में कमजोरी यात्रा और शिक्षा खर्च को अपेक्षाकृत किफायती बना सकती है। यूरो के 1.1312 के स्तर तक फिसलने से डॉलर आधारित खर्च के मुकाबले यूरोपीय खर्च की लागत घट सकती है।
- **कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों पर:** जी7 देशों द्वारा 100 मिलियन बैरल आपातकालीन भंडार जारी करने से डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल फिसलकर 89.30 डॉलर पर आ गया है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में नरमी बने रहने से भारत में ईंधन की खुदरा कीमतों पर राहत मिल सकती है।
- **निवेशकों और फॉरेक्स ट्रेडर्स पर:** डॉलर की 17 महीने के उच्च स्तर पर वापसी से सोने और जोखिम वाली संपत्तियों पर उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। 4,150 डॉलर के करीब टिके सोने में निकट अवधि में तकनीकी कमजोरी रहने से निवेशकों को संभलकर ट्रेड करना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यूरो में आई इस भारी गिरावट के पीछे फ्रांस की वित्तीय अस्थिरता, आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर नीतिगत संशय और मजबूत अमेरिकी डॉलर की सुरक्षित मांग मुख्य वजह हैं।

- **फ्रांस का अनियंत्रित सरकारी कर्ज:** फ्रांस का कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद अनुपात इस वर्ष के 119% से बढ़कर अगले वर्ष 122% पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ते कर्ज के कारण 10 वर्षीय फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड यील्ड 4.9% के पार पहुंच गई है, जिससे देश की उधारी लागत दशकों के उच्चतम स्तर के करीब आ गई है।
- **चुनावी वादे और बजट संकट:** राष्ट्रपति पद की दौड़ में आगे चल रहीं दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन द्वारा कर कटौती और सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष करने के वादों ने बाजार को चिंतित किया है। पहले से ही भारी भरकम पेंशन व्यवस्था के बीच इन प्रस्तावों से सार्वजनिक खजाने पर और अधिक दबाव पड़ने का डर है।
- **डॉलर की सुरक्षित मांग और भू-राजनीतिक तनाव:** फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की संभावना कम होने के बावजूद मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन संकट ने निवेशकों को डॉलर की ओर धकेला है। सुरक्षित निवेश के तौर पर अमेरिकी डॉलर की निरंतर मांग ने यूरो और अन्य प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं को लगातार दबाकर रखा है।

## सवाल-जवाब

### 1. EUR/USD मुद्रा जोड़ी गिरकर किस स्तर पर पहुंच गई है?
EUR/USD जोड़ी गिरकर 1.1312 पर आ गई है, जो मई 2025 के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है।

### 2. फ्रांस के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड की क्या स्थिति है?
फ्रांस की 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 4.9% से ऊपर पहुंच गई है, जो दशकों के उच्चतम स्तर के करीब है।

### 3. फ्रांस का कर्ज-जीडीपी अनुपात कितना रहने का अनुमान है?
फ्रांस का कर्ज और सकल घरेलू उत्पाद अनुपात इस साल के 119% से बढ़कर अगले साल 122% तक पहुंचने का अनुमान है।

### 4. मरीन ले पेन ने किन प्रमुख आर्थिक बदलावों का प्रस्ताव रखा है?
मरीन ले पेन ने करों में कटौती करने और फ्रांस में सेवानिवृत्ति की आयु घटाकर 60 वर्ष करने का संकल्प लिया है।

### 5. वैश्विक विदेशी मुद्रा कारोबार में यूरो की कितनी हिस्सेदारी है?
वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, सभी विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31% थी, जिसका दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा।

### 6. जी7 देशों ने कच्चे तेल को लेकर क्या फैसला लिया है?
जी7 देशों ने आपातकालीन भंडार से 100 मिलियन बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई है, जिसके बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड 89.30 डॉलर पर आ गया।

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