# फ्रांस के बढ़ते राजकोषीय संकट और मुद्रास्फीति के दबाव से यूरो में तेज गिरावट

> फ्रांस में बजट घाटे की चिंताओं और यूरोप व जापान में गर्म मुद्रास्फीति आंकड़ों के चलते यूरो दबाव में आ गया है, जबकि वैश्विक बाजारों की नजर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर टिकी है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/france-ke-barhate-rajakoshiya-snkata-aura-mudrasphiti-ke-dabava-se-euro-men-teja-giravata-41918 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो, विदेशी मुद्रा बाजार, फ्रांस बजट, मुद्रास्फीति, अमेरिकी डॉलर, जापानी येन, नॉनफार्म पेरोल

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो को अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले भारी बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस तेज गिरावट के केंद्र में फ्रांस की बिगड़ती राजकोषीय स्थिति और राजनीतिक अनिश्चितताएं हैं, जिसके कारण निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान जापानी येन के मुकाबले यूरो 0.35 प्रतिशत फिसलकर लगभग 177.00 के स्तर पर आ गया। वैश्विक स्तर पर मुद्राओं की आपसी तुलना में यूरो सबसे कमजोर स्विस फ्रैंक के खिलाफ साबित हुआ है। इसके साथ ही यूरोज़ोन और जापान दोनों ही क्षेत्रों से सितंबर महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े उम्मीद से अधिक गर्म दर्ज किए गए हैं, जिसने केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों को लेकर अनिश्चितता को और गहरा कर दिया है।

## फ्रांस का बजटीय रोडमैप और भारी राजनीतिक अड़चनें
फ्रांस सरकार ने यूरोपीय संघ के राजकोषीय नियमों का पालन करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। फ्रांस का लक्ष्य अपने बजट घाटे को अगले वर्ष के लिए निर्धारित आर्थिक उत्पादन के 5 प्रतिशत के लक्ष्य से घटाकर 2029 तक यूरोपीय संघ की अनिवार्य सीमा 3 प्रतिशत पर लाना है। इसी कड़ी में फ्रांस के वित्त मंत्री रोलांड लेस्क्योर ने गुरुवार को देश का 2027 बजट विधेयक संसद में पेश किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह व्यापक वित्तीय योजना सार्वजनिक वित्त को दोबारा पटरी पर लाएगी और बजट सुदृढ़ीकरण की दिशा में मजबूत कदम साबित होगी।

हालांकि, वित्तीय बाजारों और विश्लेषकों को सरकार के इन दावों पर गहरा संदेह है। फ्रांस में सत्तासीन अल्पसंख्यक सरकार संसद में बिना बड़े समझौते या रियायतें दिए इस विधेयक को पारित कराने में सक्षम होगी, इसे लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के एलियास हद्दाद ने फ्रांस के समक्ष उपस्थित भारी राजकोषीय संकट को रेखांकित करते हुए आगाह किया है कि उन्हें संदेह है कि यह प्रस्ताव बिना महत्वपूर्ण रियायतों के संसद से पारित हो पाएगा। यह स्थिति वास्तविक राजकोषीय अनुशासन हासिल करने की राह में खड़ी भारी राजनीतिक बाधाओं को साफ दर्शाती है।

## आशावादी आर्थिक अनुमान और राष्ट्रपति चुनाव का साया
यदि राजनीतिक दलों के बीच किसी प्रकार का समझौता हो भी जाता है, तब भी राह आसान नहीं दिखती। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन ने ध्यान दिलाया है कि फ्रांस के राजकोषीय निगरानी निकाय ने पहले ही चेतावनी दे दी है कि 2027 के मसौदा बजट में शामिल आर्थिक अनुमान जरूरत से ज्यादा आशावादी हैं। इस टिप्पणी ने मध्यम अवधि के वित्तीय लक्ष्यों की विश्वसनीयता और व्यावहारिकता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

इसके अलावा, फ्रांस में राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन का मानना है कि 18 अप्रैल 2027 को होने वाले आगामी राष्ट्रपति चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में किसी बड़े वित्तीय समझौते के प्रति बहुत कम रुचि है। ऐसी स्थिति में 2026 के बजट को ही आगे बढ़ाना या रोलओवर करना सबसे संभावित परिणाम प्रतीत होता है, जिससे आवश्यक वित्तीय सुधार अधर में लटक सकते हैं।

## जापान में मुद्रास्फीति का उछाल और मुद्रा विनिमय पर असर
यूरोपीय चिंताओं के समानांतर, जापान की राजधानी टोक्यो से आए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों ने भी बाजार को चौंकाया है। सितंबर महीने के लिए टोक्यो का सीपीआई आंकड़ा अनुमान से कहीं अधिक गर्म रहा है। ताजा खाद्य पदार्थों को छोड़कर टोक्यो सीपीआई सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत बढ़ा, जो बाजार के 2.4 प्रतिशत के अनुमान और पिछले महीने के 1.8 प्रतिशत के आंकड़े की तुलना में काफी तेज है।

इसी तरह, हेडलाइन मुद्रास्फीति भी अगस्त के 1.9 प्रतिशत से उछलकर सितंबर में 2.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में उतार-चढ़ाव देखा गया। यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी छोर से नीचे आते हुए 158.00 के करीब नई दिशा तलाशने के लिए संघर्ष करता दिखा, क्योंकि एक तरफ जापानी महंगाई तेज हुई है तो दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर में भी मुनाफावसूली का दौर देखा गया।

## वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों का ताजा रुख
अन्य प्रमुख संपत्तियों की बात करें तो शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सुधरकर 0.6950 की ओर बढ़ा। वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में तेजी और मुद्रास्फीति के बने रहने के खतरों के बीच नवंबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें फिर से जागने लगी हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को अच्छा समर्थन मिला। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्चतम स्तर से पीछे हटा है क्योंकि ट्रेडर महत्वपूर्ण अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से पहले मुनाफा समेटने में जुटे हैं।

कमोडिटी बाजार में सोने की चाल शुक्रवार को भी सीमित दायरे में बनी रही। यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक सोना 4,200 डॉलर के स्तर से नीचे कारोबार करता नजर आया। पीआई नेटवर्क जैसी डिजिटल परिसंपत्ति में भी निकट अवधि में भारी अस्थिरता बनी रही। शुक्रवार को यह लगभग 0.0900 डॉलर के आसपास घूमता रहा, जबकि इससे पिछले दिन इसमें 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी। पीआई नेटवर्क 0.1000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बना हुआ है और चार घंटे के चार्ट पर राइजिंग वेज पैटर्न से नीचे टूटने के जोखिम के साथ एक गहरी गिरावट की आशंका पैदा कर रहा है।

## अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट पर टिकी निवेशकों की निगाहें
संपूर्ण वित्तीय जगत की नजरें अब शुक्रवार को 12:30 जीएमटी पर जारी होने वाले अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के सितंबर नॉनफार्म पेरोल्स आंकड़ों पर टिकी हैं। यह डेटा अमेरिकी अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदमों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों और निवेशकों का अनुमान है कि अगस्त में दर्ज की गई 162 हजार की मजबूत बढ़ोतरी के बाद सितंबर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में केवल 90 हजार नई नौकरियां जुड़ी होंगी। इसी तरह, बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद जताई गई है। वेतन मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, औसत प्रति घंटा आय में होने वाला मासिक बदलाव 0.3 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान लगाया गया है। जब तक रोजगार के यह वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ जाते, तब तक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में सतर्कता का माहौल बने रहने की पूरी संभावना है।

## इसका आप पर असर
फ्रांस के वित्तीय संकट और प्रमुख देशों में ब्याज दरों के बदलते परिदृश्यों से मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और यात्रा लागत सीधे प्रभावित होंगे।

- **विदेशी मुद्रा और यात्रा लागत पर असर:** यूरो और येन में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव से यूरोप और जापान की यात्रा करने वाले छात्रों और पर्यटकों का खर्च बदलेगा। यदि यूरो और कमजोर होता है तो यूरोपीय देशों की यात्रा और वहां पढ़ाई करना भारतीय यात्रियों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।
- **आयात-निर्यात और कारोबारी मार्जिन:** अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की चाल और यूरोपीय आर्थिक अनिश्चितता आयातकों और निर्यातकों के बिलिंग अनुबंधों को प्रभावित करेगी। व्यवसायों को मुद्रा के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए अपने फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स और हेजिंग रणनीतियों की तत्काल समीक्षा करनी होगी।
- **सोने और निवेश संपत्तियों पर प्रभाव:** अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से पहले सोने का 4,200 डॉलर के नीचे स्थिर रहना यह दर्शाता है कि निवेशक सुरक्षित ठिकानों पर सतर्क हैं। यदि अमेरिकी नौकरियों का आंकड़ा 90 हजार से कमजोर आता है, तो सोने की कीमतों में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है।
- **क्रिप्टो और डिजिटल संपत्तियों में जोखिम:** पीआई नेटवर्क जैसी डिजिटल परिसंपत्तियों का 0.1000 डॉलर से नीचे सीमित रहना खुदरा निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत है। चार घंटे के चार्ट पर तकनीकी कमजोरी को देखते हुए छोटे निवेशकों को किसी भी नए निवेश से पहले गिरावट के जोखिम का आकलन करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
फ्रांस में अल्पसंख्यक सरकार के चलते बजटीय सुधारों पर राजनीतिक सहमति न बन पाना और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में उम्मीद से अधिक मुद्रास्फीति दर्ज होना इस बाजार हलचल का मुख्य कारण बना।

- **फ्रांस की राजनीतिक व बजटीय मजबूरी:** सरकार ने 2029 तक वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए सख्त 2027 बजट विधेयक लाया गया। चूंकि वर्तमान सरकार संसद में अल्पमत में है, इसलिए बिना विपक्षी रियायतों के इन कटौतियों को मंजूरी दिलाना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है।
- **आगामी राष्ट्रपति चुनाव का दबाव:** अप्रैल 2027 में फ्रांस में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के कारण कोई भी राजनीतिक दल कड़े आर्थिक फैसलों या खर्च में कटौती का समर्थन करने के मूड में नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनावी अनिच्छा के चलते 2026 के बजट को ही आगे खिसकाना सरकार की मजबूरी बन सकता है।
- **जापान और यूरोप में अप्रत्याशित महंगाई:** टोक्यो में ताजा खाद्य पदार्थों को छोड़कर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक बढ़कर 2.7 प्रतिशत पहुंच गया, जो 2.4 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक था। इस तेजी ने संकेत दिया कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई अभी पूरी तरह काबू में नहीं आई है, जिससे मुद्रा विनिमय दरों पर दबाव बढ़ा।
- **अमेरिकी रोजगार आंकड़ों का इंतजार:** अमेरिकी डॉलर 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशक सितंबर नॉनफार्म पेरोल रिपोर्ट से पहले मुनाफावसूली करने लगे। 90 हजार नौकरियों के कमजोर अनुमान के कारण ट्रेडर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. फ्रांस का बजट घाटा घटाने का आधिकारिक लक्ष्य क्या है?
फ्रांस सरकार का लक्ष्य अपने बजट घाटे को अगले वर्ष के 5 प्रतिशत से घटाकर 2029 तक यूरोपीय संघ की निर्धारित सीमा 3 प्रतिशत पर लाना है।

### 2. फ्रांस के 2027 बजट विधेयक को लेकर बाजार में चिंता क्यों है?
फ्रांस में अल्पमत सरकार होने के कारण बिना बड़ी रियायतों के संसद से बजट पारित होना बेहद मुश्किल माना जा रहा है, और इसके आर्थिक अनुमानों को बहुत आशावादी बताया गया है।

### 3. सितंबर महीने में टोक्यो के मुद्रास्फीति आंकड़े कैसे रहे?
ताजा खाद्य पदार्थों को छोड़कर टोक्यो सीपीआई सालाना 2.7 प्रतिशत बढ़ा, जो अनुमानित 2.4 प्रतिशत और अगस्त के 1.8 प्रतिशत से कहीं अधिक है।

### 4. अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल्स रिपोर्ट से बाजार को क्या उम्मीदें हैं?
निवेशक सितंबर में 90 हजार नई नौकरियों के जुड़ने, बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत और मासिक औसत प्रति घंटा आय में 0.3 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगा रहे हैं।

### 5. कमोडिटी बाजार में सोने का क्या हाल रहा?
शुक्रवार को अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट जारी होने से पहले सोना यूरोपीय सत्र में 4,200 डॉलर के स्तर के नीचे सीमित दायरे में कारोबार करता रहा।

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