# फ्रांस के कर्ज संकट से यूरो लगातार सातवें दिन पस्त, 0.8450 के स्तर पर टिकी बाजार की नजरें

> फ्रांस के बढ़ते राजकोषीय संकट और चुनावी आशंकाओं के बीच यूरो में लगातार सातवें दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले यह साल के निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/france-ke-karja-snkata-se-euro-lagatara-sataven-dina-pasta-0-8450-ke-stara-para-tiki-bajara-ki-najaren-43238 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो पाउंड, विदेशी मुद्रा बाजार, फ्रांस कर्ज संकट, यूरोपीय संघ, मुद्रा विनिमय दर, फॉरेक्स ट्रेडिंग, वित्त

यूरोपीय मुद्रा यूरो पर गहराते दबाव के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारी हलचल देखने को मिल रही है। ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले यूरो लगातार सातवें कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ है और यह अपने इस साल के निचले दायरे 0.8460 से 0.8455 के बेहद करीब आ पहुंचा है। बाजार में बिकवाली का यह सिलसिला मुख्य रूप से फ्रांस के बढ़ते कर्ज संकट और वहां की राजनीतिक अनिश्चितताओं से जुड़ा हुआ है। निवेशक इस बात को लेकर बेहद सतर्क हैं कि यदि स्थिति नहीं संभली, तो यह मंदी अन्य यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं को भी अपनी चपेट में ले सकती है।

## फ्रांस के राजकोषीय संकट और चुनावी अनिश्चितता का भारी असर
यूरोपीय संघ की साझी मुद्रा पर इस समय सबसे बड़ा दबाव फ्रांस के ऋण संकट का पड़ रहा है। बाजार सहभागियों में यह डर गहराता जा रहा है कि फ्रांस में कर्ज का बढ़ता स्तर अनियंत्रित हो सकता है और इसका बुरा असर यूरोप के अन्य अधिक कर्ज वाले देशों तक फैल सकता है। अगले साल फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, जिससे पहले देश की भावी वित्तीय और राजकोषीय नीतियों को लेकर अनिश्चितता चरम पर पहुंच गई है। राजनीतिक स्तर पर किसी ठोस योजना के अभाव में निवेशक यूरोपीय परिसंपत्तियों से पूंजी निकाल रहे हैं, जिससे यूरो में स्वाभाविक कमजोरी बनी हुई है। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार की गति नीचे की ओर ही झुकती नजर आ रही है।

## तकनीकी संकेतकों पर नजर: अत्यधिक बिकवाली और संभावित अवरोध
तकनीकी चार्ट्स पर यूरो और ब्रिटिश पाउंड का रुख स्पष्ट रूप से नकारात्मक बना हुआ है, हालांकि कुछ संकेतक अत्यधिक खिंचाव की ओर भी इशारा कर रहे हैं। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD नकारात्मक क्षेत्र में नीचे की ओर झुकती रेखा के साथ बना हुआ है, जो मंदी के दबाव की पुष्टि करता है। वहीं रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI गिरकर 25 के आसपास पहुंच गया है, जो ओवरसोल्ड क्षेत्र माना जाता है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार 14-दिवसीय RSI 27 पर दर्ज है और MACD बेयरिश संकेत दे रहा है। यह तकनीकी स्थिति दर्शाती है कि बिकवाली का दबाव भले ही हावी हो, लेकिन निचले स्तरों पर बिकवाली जारी रहने के बजाय लिवाली का सहारा मिल सकता है।

यदि इस स्तर से कोई सुधारात्मक उछाल आता है, तो मुद्रा जोड़ी को 0.8500 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर पहले तात्कालिक अवरोध का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद 0.8540 का क्षेत्र दूसरा बड़ा रुकावट बिंदु साबित हो सकता है। यदि बाजार इस बाधा को पार करने में सफल रहता है, तो शॉर्ट कवरिंग रैली देखने को मिल सकती है, जो इसे 0.8600 के स्तर की ओर ले जा सकती है। यह दायरा 200-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA200 के साथ मेल खाता है, जो एक अहम धुरी स्तर की भूमिका निभाएगा। जब तक दैनिक आधार पर इस बाधा के ऊपर समापन नहीं होता, तब तक मंदी का रुझान पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है। तकनीकी स्तरों के लिहाज से पिवट स्तर 0.8478, पहला सपोर्ट 0.8451 और दूसरा सपोर्ट 0.8430 पर स्थित है, जबकि रेसिस्टेंस 0.8499 और 0.8526 पर मौजूद है।

## अन्य प्रमुख मुद्राओं में यूरो का तुलनात्मक प्रदर्शन
वैश्विक मुद्रा बाजारों में यूरो के प्रदर्शन का आकलन करें तो यह विभिन्न प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले मिले-जुले उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। आज के कारोबार में यूरो ने न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत स्थिति दिखाई। हालांकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरोपीय मुद्रा भारी दबाव में रही है। मई 2025 के बाद से यूरो-यूएसडी जोड़ी अपने सबसे निचले स्तर पर खिसक गई है। हाल ही में यह जोड़ी 1.1312 के स्तर तक लुढ़क चुकी है, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरोप में ऊर्जा की ऊंची कीमतों का जोखिम, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव इस तेज गिरावट की मुख्य वजहें बनी हुई हैं।

## वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती का असर अन्य परिसंपत्तियों पर भी साफ देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.6900 की तरफ फिसला। मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों का ध्यान कच्चे तेल की कीमतों, ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की नीतियों पर बना हुआ है। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 का स्तर फिर से हासिल करने में कामयाब रहा। बैंक ऑफ जापान की ओर से सख्त रुख की संभावनाओं और संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिम के बावजूद डॉलर को बढ़त मिली।

कमोडिटी बाजार में सोने की चाल सीमित दायरे में बनी रही और यह यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी रोजगार आंकड़ों की निराशा के बावजूद डॉलर में आई मजबूती ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाए रखा, यद्यपि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें न बढ़ाने की बढ़ती संभावनाओं ने गिरावट को सीमित भी किया। डिजिटल परिसंपत्तियों की बात करें तो लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद बीएनबी, जिसे पहले बाइनेंस कॉइन के नाम से जाना जाता था, मामूली गिरावट के साथ 790 डॉलर के आसपास देखा गया। डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट और फंडिंग दरों की स्थिति यह संकेत दे रही है कि वहां तेजड़ियों का रुख अब भी मजबूत बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
यूरो में आई इस गिरावट और फ्रांस के राजकोषीय संकट का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय लेनदेन, विदेशी यात्रा और निवेश पर पड़ सकता है।

- **भारत में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों पर:** यूरोप की यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों के लिए यूरो कमजोर होने से होटल और स्थानीय खर्चे तुलनात्मक रूप से सस्ते पड़ सकते हैं। वहीं ब्रिटेन की यात्रा करने वालों के लिए पाउंड की मजबूती के कारण खर्च पहले जैसा या थोड़ा अधिक बना रहेगा।
- **यूरोपीय संघ में आयातकों और छात्रों पर:** भारत से यूरोप पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों को यूरो में ट्यूशन फीस और रहने का खर्च चुकाने में आंशिक राहत मिल सकती है। दूसरी ओर यूरोपीय सामान आयात करने वाले व्यापारियों के लिए विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से हेजिंग लागत बढ़ सकती है।
- **करेंसी ट्रेडर्स और निवेशकों पर:** फॉरेक्स ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को 0.8450 के स्तर के आसपास अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। तकनीकी संकेतक ओवरसोल्ड होने के कारण यहां अचानक शॉर्ट कवरिंग या उछाल आने का जोखिम बना हुआ है।
- **वैश्विक अर्थव्यवस्था पर:** फ्रांस के कर्ज संकट का प्रसार यदि अन्य यूरोपीय देशों तक हुआ, तो वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। इससे सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों में पूंजी का प्रवाह तेज हो सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यूरोपीय मुद्रा में लगातार सात दिनों की यह कमजोरी मुख्य रूप से फ्रांस में गहराते राजकोषीय असंतुलन, आगामी चुनावों की अनिश्चितता और पूरे महाद्वीप में कर्ज संकट के फैलाव की चिंताओं के कारण आई है।

- **फ्रांस का अनियंत्रित सरकारी कर्ज:** फ्रांस के बढ़ते सरकारी ऋण और बजट घाटे ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच भारी संशय पैदा कर दिया है। बाजार को डर है कि यदि राजकोषीय अनुशासन नहीं बना रहा, तो इसका असर अन्य यूरोपीय देशों की साख पर भी पड़ेगा।
- **आगामी राष्ट्रपति चुनाव का राजनीतिक दबाव:** फ्रांस में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले सख्त वित्तीय सुधारों को लागू करना राजनीतिक रूप से कठिन माना जा रहा है। सरकार की भावी नीतियों पर असमंजस के चलते निवेशक यूरो की परिसंपत्तियों में बिकवाली कर रहे हैं।
- **यूरोप में ऊर्जा और भू-राजनीतिक तनाव:** मध्य पूर्व और यूक्रेन संकट के चलते यूरोप में ऊर्जा आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम फिर से बढ़ गए हैं। इन चुनौतियों के बीच साझी मुद्रा लगातार अमेरिकी डॉलर और ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले कमजोर पड़ रही है।
- **तकनीकी मोमेंटम और बिक्री का दबाव:** लगातार कई सत्रों से जारी गिरावट ने चार्ट्स पर बिकवाली के रुझान को और मजबूत कर दिया है। अहम सपोर्ट स्तरों के टूटने के डर से संस्थागत ट्रेडर्स निचले स्तरों पर नई बिकवाली की स्थिति बना रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. यूरो और ब्रिटिश पाउंड की जोड़ी में लगातार गिरावट क्यों आ रही है?
फ्रांस के बढ़ते कर्ज संकट और वहां अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर उपजी नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण यूरो लगातार सात दिनों से कमजोर हो रहा है।

### 2. इस मुद्रा जोड़ी के लिए इस समय कौन सा स्तर सबसे अहम माना जा रहा है?
साल के निचले स्तर के करीब स्थित 0.8460 से 0.8455 का दायरा और 0.8450 का स्तर वर्तमान में सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर माने जा रहे हैं।

### 3. तकनीकी संकेतकों के अनुसार क्या बाजार में और गिरावट आ सकती है?
आरएसआई 25 के करीब पहुंचकर ओवरसोल्ड स्तर पर है, जिससे संकेत मिलता है कि भारी बिकवाली के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी का सहारा भी मिल सकता है।

### 4. यदि यूरो में कोई उछाल आता है तो किस स्तर पर रुकावट आ सकती है?
किसी भी सुधार की स्थिति में 0.8500 का मनोवैज्ञानिक स्तर और उसके बाद 0.8540 तथा 0.8600 का क्षेत्र प्रमुख अवरोध बिंदु साबित हो सकता है।

### 5. आज के कारोबार में यूरो किस प्रमुख मुद्रा के मुकाबले सबसे मजबूत रहा?
आज के वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार में यूरो ने न्यूजीलैंड डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया।

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