फ्रांस के राजकोषीय संकट और यूरोपीय राजनीतिक अनिश्चितता के बीच यूरो 1.1250 के नीचे फिसला फ्रांस में भारी कर्ज संकट और स्पेन में समय से पहले चुनाव की घोषणा के चलते यूरो दबाव में आ गया है, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली है। बुधवार को एशियाई कारोबारी सत्र की शुरुआत में यूरो की विनिमय दर में नरमी दर्ज की गई, जहां EUR/USD जोड़ी 1.1250 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास संघर्ष करती दिखी। यूरोज़ोन के सबसे बड़े देशों में राजनीतिक अस्थिरता और बजट घाटे को लेकर गहराते असंतोष के चलते निवेशकों का रुझान साझा मुद्रा से हटकर अमेरिकी डॉलर की तरफ बढ़ गया है। कारोबारी अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के आगामी बैठक विवरणियों पर नजरें गड़ाए हुए हैं, जिससे ब्याज दरों के भावी रुख का स्पष्ट संकेत मिलने की उम्मीद है। पेरिस का वित्तीय बजट संकट और राजनीतिक दबाव यूरोपीय मुद्रा पर ताजा दबाव की मुख्य वजह फ्रांस की सरकारी वित्तीय स्थिति को माना जा रहा है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्तियन लेकॉर्नू की अल्पमत सरकार ने संभावित सॉवरेन रेटिंग डाउनग्रेड अथवा डिफॉल्ट के जोखिम को टालने के लिए 54 अरब यूरो की बचत योजना की घोषणा की थी। देश पर लगातार बढ़ते सार्वजनिक ऋण का बोझ भारी पड़ रहा है, जबकि राजनेता 2027 के विभाजनकारी चुनावों से पहले वित्तीय घाटे पर अंकुश लगाने की कठिन चुनौती से जूझ रहे हैं। बजट को लेकर संसद और जनता के बीच बढ़ती खींचतान ने निवेशकों की धारणा को हिला कर रख दिया है। इसके अलावा स्पेन में समय से पहले आम चुनावों के ऐलान ने भी महाद्वीप की राजनीतिक स्थिरता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सटीबी की रिसर्च डायरेक्टर कैथलीन ब्रूक्स के अनुसार, सप्ताह की शुरुआत में ही पूरे यूरोज़ोन की वित्तीय और राजनीतिक चिंताएं केंद्र में आ गई हैं। फ्रांस इन चिंताओं का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है, जबकि स्पेन में शुरुआती चुनावों की तैयारी ने विदेशी निवेशकों के संशय को और अधिक गहरा दिया है। जब एक ही समय पर ब्लॉक की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं राजनीतिक उथल-पुथल से घिरती हैं, तो सामूहिक मुद्रा का कमजोर होना लाजिमी माना जाता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और रोजगार आंकड़ों का असर यूरो पर मंडराते इस दबाव के समानांतर अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर भी परिदृश्य लगातार बदल रहा है। पिछले सप्ताह अमेरिका के रोजगार आंकड़ों में नरमी दर्ज की गई थी, जिसके चलते फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठकों में ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की संभावनाओं को झटका लगा था। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के मुताबिक, ब्याज दर स्वैप बाजार में अक्टूबर बैठक के दौरान फेड द्वारा उधार लागत बढ़ाने की संभावना घटकर करीब 20 प्रतिशत के स्तर पर आंकी जा रही है। फेड की सख्ती कम होने की यह उम्मीद डॉलर की तेजी पर अंकुश लगाकर यूरो को कुछ सहारा दे सकती है। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बयानों में मुद्रास्फीति को लेकर कड़ा रुख अभी भी बरकरार है। फेड अधिकारी श्मिट के हालिया संबोधन में सख्त नीतिगत तेवर देखने को मिले, जिसे एफएक्सएस स्पीचट्रैकर स्कोर पर 8/10 का मूल्यांकन मिला है। यह ऐतिहासिक औसत 7.5/10 से अधिक है और दर्शाता है कि उच्च कीमतों को लेकर चिंताएं खत्म नहीं हुई हैं। श्मिट ने रेखांकित किया कि महंगाई से निपटना अत्यंत आवश्यक है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समय महंगाई को बढ़ाने वाले बड़े कारकों में शामिल हो गया है। उन्होंने आगाह किया कि लंबी अवधि के बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने के बावजूद अल्पकालिक दरों पर फेड का काम अभी अधूरा है और मुद्रास्फीति को काबू करने में केंद्रीय बैंक की साख दांव पर लगी है। सिस्टमैटिक ट्रेडर्स की पोजीशनिंग और तकनीकी विश्लेषण टीडी सिक्योरिटीज के सीटीए पोजीशनिंग विश्लेषण के अनुसार, व्यवस्थित और एल्गोरिथम आधारित ट्रेडर्स विभिन्न बाजार परिदृश्यों में यूरो के फ्यूचर्स अनुबंधों पर काफी हद तक शॉर्ट पोजीशन बनाए हुए हैं। डाउनटेप और फ्लैट टेप की तुलना में अपटेप मॉडल यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे बाजार की दिशा बदलती है, ट्रेडर्स अपने एक्सपोजर को पुनः संतुलित करते हैं। यदि यूरो में अचानक कोई बड़ा उछाल देखने को मिलता है, तो शॉर्ट कवरिंग के कारण कीमतों में तेज फेरबदल की संभावना बन सकती है। तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो EUR/USD के लिए शुरुआती प्रतिरोध 1.1405 के स्तर पर स्थित बोलिंगर बैंड की मध्य रेखा पर मौजूद है। इसके ऊपर 1.1500 पर स्थित 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) एक व्यापक आपूर्ति क्षेत्र तैयार करता है, जिसके बाद ऊपरी बोलिंगर बैंड 1.1640 के करीब आता है। दूसरी तरफ गिरावट की स्थिति में 1.1168 का निचला बोलिंगर बैंड तत्काल समर्थन प्रदान करता है। यदि यह स्तर नीचे की ओर टूटता है तो गिरावट और गहरा सकती है, जबकि इसके ऊपर बने रहने पर ऊपरी मूविंग एवरेज के नीचे एक कंसॉलिडेशन दौर संभव है। वर्तमान में यूरो 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1.12 की तुलना में 0.29 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.12 से 1.20 तक रहा है और मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के बराबर है। तकनीकी संकेतकों में 14-अवधि का आरएसआई 24 के स्तर पर अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) का संकेत दे रहा है। 50-दिवसीय ईएमए (1.15) का 200-दिवसीय ईएमए (1.16) के नीचे जाना डेथ क्रॉस मंदी का प्रमाण देता है, जबकि एडीएक्स 47 के स्तर पर मजबूत ट्रेंडिंग गति दिखा रहा है। पिवट पॉइंट 1.13 के पास है, जिसमें प्रतिरोध 1.13 और समर्थन 1.12 पर केंद्रित है। वैश्विक वित्तीय ढांचे में यूरो की भूमिका और केंद्रीय बैंक की दुविधा यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा के रूप में यूरो अंतरराष्ट्रीय वित्त में अमेरिकी डॉलर के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्थान रखता है। वर्ष 2022 के वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक विदेशी मुद्रा के कुल लेन-देन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा। EUR/USD सबसे सक्रिय मुद्रा जोड़ी है, जो कुल विदेशी मुद्रा सौदों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रखती है, जिसके बाद EUR/JPY चार प्रतिशत, EUR/GBP तीन प्रतिशत और EUR/AUD दो प्रतिशत का योगदान देते हैं। फ्रैंकफर्ट स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) यूरोज़ोन की मौद्रिक नीति का संचालन करता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है। ईसीबी गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार बैठक करती है, जिसमें सदस्य देशों के केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और राष्ट्रपति क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं। यदि सामंजस्यपूर्ण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (HICP) के तहत मापी गई मुद्रास्फीति ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकलती है, तो बैंक को दरें बढ़ाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। हालांकि जब बॉन्ड बाजार स्वयं ही सरकारी कर्जों पर यील्ड बढ़ाकर सख्त वित्तीय स्थितियां पैदा कर रहा हो, तो केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत दरों को लेकर गंभीर दुविधा पैदा हो जाती है। यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन से आता है। इसलिए इन देशों के जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई तथा उपभोक्ता भावना से जुड़े आंकड़े साझा मुद्रा के मूल्य को सीधे प्रभावित करते हैं। साथ ही व्यापार संतुलन, जो निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च के अंतर को दर्शाता है, मुद्रा की मांग तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों और मुद्राओं की हलचल बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्रा जोड़ियों और परिसंपत्तियों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। AUD/USD जोड़ी अपने तीन महीने के निचले स्तर 0.6900 से उबरने के बाद 0.7000 के स्तर से नीचे दबाव में रही, जहां अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने डॉलर की मांग बनाए रखी, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीदों ने इसे सीमित सहारा दिया। वहीं USD/JPY जोड़ी ने पिछले डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ, जहां जापानी वित्तीय नीतियों को लेकर चिंता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि से येन कमजोर रहा तथा ट्रेडर्स 158.00 के मध्य स्थित 200-दिवसीय एसएमए के टूटने का इंतजार कर रहे हैं। सोने की कीमतों ने सोमवार की मामूली बढ़त को आगे बढ़ाया, लेकिन यह 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को पुनः हासिल करने के लिए संघर्ष करता दिखा। दूसरी तरफ भारत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुधवार सुबह 10:00 बजे अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करने वाला है। बाजार के आम अनुमानों के अनुसार केंद्रीय बैंक इस कैलेंडर वर्ष में पहली बार ब्याज दरों में वृद्धि का चक्र शुरू कर सकता है, जिसके तहत रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत किए जाने की प्रबल संभावना है। इसका आप पर असर यूरो में आई इस कमजोरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड की हलचल का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों पर पड़ेगा। • भारतीय यात्रियों और छात्रों पर असर: यूरोप की यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों और वहां पढ़ रहे छात्रों के लिए यूरो में गिरावट फायदेमंद साबित हो सकती है। कमजोर यूरो के चलते ट्यूशन फीस और रहने का खर्च भारतीय रुपये के मुकाबले थोड़ा सस्ता हो सकता है। • आयात और निर्यात पर प्रभाव: यूरोपीय संघ को सामान बेचने वाले भारतीय निर्यातकों की कमाई पर मुद्रा में उतार-चढ़ाव का दबाव पड़ सकता है। वहीं यूरोप से मशीनरी और तकनीकी उपकरण आयात करने वाली कंपनियों के लिए लागत में मामूली राहत मिल सकती है। • वैश्विक निवेश और डॉलर की मजबूती: डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इससे वैश्विक फंड फ्लो में सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुझान बढ़ सकता है। • ब्याज दरों और ऋण लागत पर नजर: केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में सख्ती बनाए रखने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विदेशी कर्ज लेना महंगा बना रह सकता है। कंपनियों को अपने विदेशी मुद्रा ऋणों की हेजिंग पर अधिक ध्यान देना होगा। ऐसा क्यों हुआ यूरो में यह गिरावट फ्रांस में गहराते सरकारी कर्ज संकट, स्पेन में अचानक चुनाव की घोषणा और अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त रुख के सम्मिलित प्रभाव के कारण आई है। • फ्रांस का वित्तीय घाटा और रेटिंग का डर: फ्रांस की अल्पमत सरकार द्वारा 54 अरब यूरो की बचत योजना पेश किए जाने के बाद भी निवेशक बजट घाटे और संभावित सॉवरेन रेटिंग डाउनग्रेड को लेकर आशंकित हैं। 2027 के चुनावों के कारण राजनीतिक सहमति बनना बेहद कठिन हो गया है। • स्पेन में मध्यावधि चुनाव: स्पेन में समय से पहले चुनाव बुलाए जाने से पूरे यूरोज़ोन में राजनीतिक अस्थिरता का दायरा बढ़ गया है। दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता ने साझा मुद्रा पर बिकवाली का दबाव बढ़ा दिया। • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: अमेरिकी रोजगार आंकड़ों में नरमी के बावजूद फेड अधिकारियों द्वारा मुद्रास्फीति पर चिंता जताए जाने से डॉलर को समर्थन मिला है। ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने के संकेतों ने यूरो की रिकवरी को सीमित कर दिया है। • बॉन्ड बाजार का दबाव: यूरोपीय बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने से वित्तीय स्थितियां पहले ही सख्त हो गई हैं, जिससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने नीतिगत फैसले लेने में जटिलताएं पैदा हो रही हैं। सवाल-जवाब 1. EUR/USD में हालिया गिरावट का मुख्य कारण क्या है? फ्रांस के 54 अरब यूरो के बजट संकट, संभावित सॉवरेन डाउनग्रेड और स्पेन में समय से पहले चुनाव के चलते यूरो पर बिकवाली का दबाव बढ़ा है। 2. फ्रांस सरकार ने बजट संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाया है? प्रधानमंत्री सेबेस्तियन लेकॉर्नू की सरकार ने डिफॉल्ट और रेटिंग डाउनग्रेड से बचने के लिए 54 अरब यूरो की बचत योजना की घोषणा की है। 3. फेडरल रिजर्व की आगामी नीति को लेकर बाजार की क्या उम्मीदें हैं? सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार ट्रेडर्स अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना केवल 20 प्रतिशत आंक रहे हैं। 4. EUR/USD के लिए प्रमुख तकनीकी समर्थन और प्रतिरोध स्तर कौन से हैं? तात्कालिक प्रतिरोध 1.1405 और 1.1500 पर स्थित है, जबकि निचला समर्थन स्तर 1.1168 और 1.12 पर बना हुआ है। 5. भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक से बाजार को क्या अपेक्षा है? बाजार का अनुमान है कि आरबीआई अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.25% से 5.5% कर सकता है। https://trendkia.com/market/france-ke-rajakoshiya-snkata-aura-yuropiya-rajanitika-anishchitata-ke-bicha-euro-1-1250-ke-niche-phisala-44222 TrendKia — Har trend, sabse pehle.