# फ्रांसीसी बॉन्ड बाजार में तेज बिकवाली से यूरो फिसला, अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव

> फ्रांस के राजकोषीय संकट और 125 अरब यूरो की बजट कटौती योजना पर बढ़ती अनिश्चितता के कारण यूरो में गिरावट आई, जबकि अमेरिकी डॉलर सूचकांक 102.34 पर मजबूत बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/french-bonda-bajara-men-teja-bikavali-se-euro-phisala-us-dollar-ki-majabuti-ne-barhaya-dabava-44617 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूरो, अमेरिकी डॉलर, फ्रांस बॉन्ड, यूरोपीय सेंट्रल बैंक, विदेशी मुद्रा, राजकोषीय घाटा, वित्त

यूरोपीय मुद्रा बाजार में बुधवार को साझा मुद्रा यूरो पर एक बार फिर चौतरफा दबाव देखने को मिला, जिससे एक दिन पहले मिली मामूली राहत का असर पूरी तरह खत्म हो गया। फ्रांस के सरकारी बॉन्ड बाजार में बिकवाली का दौर दोबारा शुरू होने और वहां के बजटीय घाटे को लेकर पैदा हुई आशंकाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो 0.63 प्रतिशत फिसलकर 1.1188 के स्तर के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वैश्विक मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूती दिखा रहा है और निवेशक आगामी नीतिगत संकेतों के लिए तैयार हो रहे हैं।

## फ्रांस का राजकोषीय संकट और बजट कटौती पर असमंजस
फ्रांसीसी वित्तीय परिदृश्य में तनाव का मुख्य कारण सरकार की प्रस्तावित वित्तीय नीतियां हैं। हाल ही में फ्रांस की अल्पसंख्यक सरकार ने सरकारी खर्च में 125 अरब यूरो की भारी कटौती करने की योजना संसद के समक्ष पेश की है। हालांकि, वित्तीय बाजारों को इस बात पर गहरा संदेह है कि संसद में बिना किसी बड़े समझौते या विशेष रियायतों के इतनी सख्त कटौती को पारित कराना सरकार के लिए संभव हो पाएगा या नहीं। यदि संसद में यह प्रस्ताव अटक जाता है, तो देश का राजकोषीय असंतुलन और गहरा सकता है।

इस स्थिति को फ्रांस की आधिकारिक वित्तीय निगरानी संस्था, जिसे पब्लिक फाइनेंस की उच्च समिति के नाम से भी जाना जाता है, की टिप्पणियों ने और गंभीर बना दिया है। इस निगरानी समिति ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि सरकार का 2027 का मसौदा बजट बेहद आशावादी नजर आता है। संस्था की इस टिप्पणी ने सरकारी योजनाओं की व्यावहारिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया और सरकारी ऋणपत्रों की बिकवाली तेज हो गई।

## अमेरिकी डॉलर का दबदबा और आगामी आर्थिक घटनाक्रम
साझा मुद्रा पर केवल फ्रांस के घरेलू संकट का ही असर नहीं है, बल्कि मजबूत अमेरिकी डॉलर भी इस पर भारी पड़ रहा है। प्रमुख छह वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य का आकलन करने वाला अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 0.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 102.34 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नए सिरे से आई तेजी ने निवेशकों को डॉलर की ओर आकर्षित किया है। इसके अलावा, वैश्विक बाजार के प्रतिभागी सितंबर की नीतिगत बैठक के एफओएमसी मिनट्स की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो शाम 18:00 जीएमटी पर जारी होने वाले हैं। इन मिनट्स से यह संकेत मिलेगा कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।

## यूरो के तकनीकी स्तर और बाजार की स्थिति
मुद्रा जोड़ी के चार्ट और तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो मौजूदा रुझान मंदी की ओर झुका हुआ दिखाई देता है। ऊपर की ओर, पहला प्रमुख प्रतिरोध 20 दिवसीय ईएमए पर 1.1372 के स्तर पर मौजूद है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मंदी के दबाव को कम करने और किसी भी निरंतर सुधार की पुष्टि के लिए कीमत का 1.1372 के पार टिकना जरूरी होगा।

लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, ईयूआर/यूएसडी इस समय 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1.12 से 0.26 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 1.12 से 1.20 के बीच रहा है। तकनीकी पैमाने पर 14 दिवसीय आरएसआई 15 के स्तर पर पहुंच गया है, जो गहरे ओवरसोल्ड क्षेत्र को दर्शाता है। एमएसीडी सूचक -0.01 पर सिग्नल -0.01 के मुकाबले मंदी के संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज की स्थिति देखें तो ईएमए20 1.14, ईएमए50 1.15 और ईएमए200 1.16 पर स्थित है, जिसमें ईएमए50 का ईएमए200 से नीचे होना डेथ क्रॉस और दीर्घकालिक गिरावट की पुष्टि करता है। बॉलिंगर बैंड्स 1.12 से 1.17 के बीच हैं, जबकि एडीएक्स 47 पर एक मजबूत ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है। स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 8 और सिग्नल लाइन 16 पर है, जबकि दैनिक अस्थिरता एटीआर 0.01 दर्ज की गई है। मौजूदा स्थिति में व्यापारी हाल के निचले स्तर 1.1190 और धुरी स्तर 1.12 को तात्कालिक आधार मान रहे हैं, जहां से ओवरसोल्ड आरएसआई के सहारे उछाल आने अथवा नए निचले स्तरों की ओर गिरावट जारी रहने की संभावना पर नजर रखी जा रही है।

## वैश्विक वित्तीय तंत्र में यूरो की भूमिका और महत्व
यूरो 20 यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की आधिकारिक मुद्रा है, जो मिलकर यूरोज़ोन का निर्माण करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय के मामले में अमेरिकी डॉलर के बाद यह विश्व की दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, सभी विदेशी मुद्रा लेनदेनों में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका औसत दैनिक कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा।

मुद्रा जोड़ियों के संदर्भ में ईयूआर/यूएसडी दुनिया की सबसे सक्रिय जोड़ी है, जो कुल वैश्विक विनिमय लेनदेनों के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद अन्य जोड़ियों में ईयूआर/जेपीवाई की 4 प्रतिशत, ईयूआर/जीबीपी की 3 प्रतिशत और ईयूआर/एयूडी की 2 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल है। यह विशाल व्यापारिक परिमाण दर्शाता है कि यूरोज़ोन की किसी भी आर्थिक या राजनीतिक हलचल का प्रभाव पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों पर तत्काल पड़ता है।

## यूरोपीय सेंट्रल बैंक का ढांचा और मौद्रिक नीतियां
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) यूरोज़ोन का केंद्रीय बैंक है, जो ब्याज दरों के निर्धारण और समग्र मौद्रिक नीति प्रबंधन का कार्य करता है। ईसीबी का प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना या आर्थिक विकास को गति देना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक का सबसे प्रमुख उपकरण ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं या उनके बढ़ने की संभावना होती है, तो आमतौर पर वैश्विक निवेशक अधिक प्रतिफल की तलाश में इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैं, जिससे यूरो मजबूत होता है। इसके विपरीत, कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर करती हैं।

ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार आयोजित होने वाली बैठकों में मौद्रिक नीति संबंधी फैसले लेती है। इन बैठकों में यूरोज़ोन के राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य भाग लेते हैं, जिनकी अध्यक्षता ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड करती हैं। सामान्य परिस्थितियों में जब मुद्रास्फीति ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से दोगुनी गति से चल रही होती है, तो बैंक का सीधा कदम ब्याज दरें बढ़ाने का होता है। हालांकि, मौजूदा हालात बेहद असामान्य हैं क्योंकि बॉन्ड बाजार पहले से ही वित्तीय सख्ती का हिस्सा खुद पूरा कर रहा है, जिससे ईसीबी के सामने एक जटिल दुविधा उत्पन्न हो गई है।

## आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन का प्रभाव
यूरोज़ोन में आर्थिक आंकड़ों की स्थिति साझा मुद्रा की दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। मुद्रास्फीति का आकलन उपभोक्ता मूल्यों के सामंजस्यपूर्ण सूचकांक (एचआईसीपी) द्वारा किया जाता है। यदि मुद्रास्फीति ईसीबी के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से अधिक बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक को दरों में बढ़ोतरी करने के लिए विवश होना पड़ता है। इसके अलावा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार के आंकड़े और उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण भी मुद्रा के रुख को प्रभावित करते हैं। जब आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं, तो यह न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करता है बल्कि ईसीबी को दरें बढ़ाने का आधार भी देता है, जिससे यूरो को सहारा मिलता है। विशेष रूप से यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन के आंकड़े अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये चारों मिलकर पूरे यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

इसके साथ ही व्यापार संतुलन का आंकड़ा भी मुद्रा के मूल्य निर्धारण में अहम होता है। यह संकेतक किसी निश्चित अवधि में निर्यात से होने वाली आय और आयात पर होने वाले खर्च के बीच के अंतर को मापता है। जब कोई देश ऐसे उत्पादों का निर्यात करता है जिनकी वैश्विक स्तर पर भारी मांग होती है, तो विदेशी खरीदारों की मांग के कारण उस देश की मुद्रा का मूल्य बढ़ता है। इस प्रकार एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूती प्रदान करता है, जबकि नकारात्मक संतुलन इसे कमजोर बनाता है।

## अन्य वैश्विक संपत्तियों और मुद्राओं का प्रदर्शन
बुधवार के कारोबारी सत्र में केवल यूरो ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख मुद्राएं और संपत्तियां भी अमेरिकी डॉलर की ताकत के आगे संघर्ष करती नजर आईं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (एयूडी/यूएसडी) एशियाई सत्र में अपने पिछले सुधार को बनाए रखने में असमर्थ रहा और 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करता दिखा। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की ओर से सख्त नीतिगत उम्मीदों के बावजूद अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने इस जोड़ी पर दबाव बनाए रखा। दूसरी ओर, यूएसडी/जेपीवाई एशियाई सत्र में 158.50 के स्तर के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बना रहा, जहां निवेशक 200 दिवसीय एसएमए के स्तर पर नजरें टिकाए हुए हैं और बैंक ऑफ जापान की ओर से नीतिगत नरमी के संकेतों से डॉलर को समर्थन मिला।

कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार में भी मंदी का रुख देखने को मिला। सोने की कीमतों ने मंगलवार की बढ़त गंवा दी और निवेशक फेड बैठक के ब्योरे से पहले सतर्क हो गए। एक्सएयू/यूएसडी 4,120 डॉलर के नीचे कारोबार कर रहा था, जो मंगलवार को 4,180 डॉलर के दायरे से गिरकर दो महीने के निचले स्तर 4,104 डॉलर के करीब पहुंच गया। क्रिप्टोकरेंसी सेगमेंट में डॉगकॉइन 5 प्रतिशत से अधिक की साप्ताहिक गिरावट के साथ 0.090 डॉलर के आसपास बना रहा, जहां शॉर्ट पोजीशन एक महीने के उच्च स्तर पर पहुंचने से डेरिवेटिव बाजार में सतर्कता का माहौल दिखा।

भारतीय रुपये की बात करें तो बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक के बाद रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। यूएसडी/आईएनआर उछलकर लगभग 96.72 पर पहुंच गया, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है। इस नीतिगत बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत करने का निर्णय लिया, जो फरवरी 2023 के बाद से पहली दर वृद्धि है। इन तमाम वैश्विक घटनाक्रमों के बीच फ्रांस के राजकोषीय संकट ने यूरो पर दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

## इसका आप पर असर
फ्रांस में बजटीय अनिश्चितता और यूरो में आई तेज गिरावट से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय दरों, यात्रा लागतों और विदेशी निवेश पर सीधा असर पड़ रहा है।

- **मुद्रा कारोबारियों के लिए:** यूरो और डॉलर की विनिमय दरों में अस्थिरता बढ़ने से मुद्रा व्यापारियों को अपने स्टॉप लॉस स्तरों को सख्त करना होगा। दैनिक उतार-चढ़ाव 0.01 एटीआर के करीब रहने से 1.1190 और 1.12 के स्तरों पर विशेष सतर्कता बरतनी होगी।
- **यूरोप यात्रा और अध्ययन पर:** डॉलर या अन्य मजबूत मुद्राओं के मुकाबले यूरो के कमजोर होने से भारतीय या वैश्विक यात्रियों के लिए यूरोज़ोन में खर्च थोड़ा सस्ता हो सकता है। छात्रों और पर्यटकों को यूरो के निचले स्तर पर बने रहने से दैनिक खर्चों में आंशिक राहत मिल सकती है।
- **वैश्विक निवेशकों के लिए:** फ्रांस के सॉवरेन बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने और बिकवाली तेज होने से यूरोपीय ऋण संपत्तियों में जोखिम प्रीमियम बढ़ गया है। निवेशकों को यूरोज़ोन के 75 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए।
- **आयात-निर्यात कारोबारियों के लिए:** यूरोपीय संघ के देशों से सामान आयात करने वाले व्यापारियों के लिए बिलिंग लागत में बदलाव देखने को मिल सकता है। सकारात्मक या नकारात्मक व्यापार संतुलन के प्रभाव से निर्यातकों के भुगतान पर सीधा असर पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
फ्रांस की संसद में 125 अरब यूरो की बजट कटौती योजना को मंजूरी मिलने पर गहराए संदेह और देश की वित्तीय निगरानी संस्था की सख्त चेतावनियों ने इस बिकवाली को जन्म दिया है।

- **अल्पसंख्यक सरकार की राजनीतिक मजबूरी:** फ्रांस की मौजूदा सरकार के पास संसद में स्पष्ट बहुमत नहीं है, जिससे 125 अरब यूरो की विशाल खर्च कटौती को बिना रियायतों के पारित कराना अत्यंत कठिन लग रहा है। इस विधायी गतिरोध की आशंका ने वित्तीय बाजारों में अविश्वास का माहौल तैयार कर दिया।
- **वित्तीय निगरानी संस्था की चेतावनी:** फ्रांस की पब्लिक फाइनेंस उच्च समिति ने सरकार के 2027 के मसौदा बजट को अत्यधिक आशावादी करार दिया। आधिकारिक संस्था की इस प्रतिकूल टिप्पणी ने निवेशकों को यह मानने पर मजबूर किया कि वित्तीय घाटे के लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा।
- **अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती:** अमेरिकी डॉलर सूचकांक का 102.34 के स्तर तक मजबूत होना और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आना यूरो पर अतिरिक्त मंदी का दबाव बना रहा है। निवेशक आगामी एफओएमसी मिनट्स से पहले डॉलर में सुरक्षित दांव लगाना पसंद कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बुधवार को यूरो में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो 0.63 प्रतिशत फिसलकर लगभग 1.1188 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

### 2. फ्रांस के बॉन्ड बाजार में बिकवाली दोबारा क्यों शुरू हुई?
फ्रांस की अल्पसंख्यक सरकार द्वारा प्रस्तावित 125 अरब यूरो की बजट कटौती योजना के संसद में पारित होने पर बढ़ते संदेह और निगरानी समिति की चेतावनियों के कारण बिकवाली तेज हुई।

### 3. फ्रांस की वित्तीय निगरानी संस्था ने क्या कहा था?
पब्लिक फाइनेंस की उच्च समिति ने स्पष्ट किया था कि सरकार का 2027 का मसौदा बजट बेहद आशावादी नजर आता है।

### 4. अमेरिकी डॉलर सूचकांक इस समय किस स्तर पर है?
प्रमुख छह वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर सूचकांक 0.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 102.34 के स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।

### 5. वैश्विक मुद्रा विनिमय में यूरो की कितनी हिस्सेदारी है?
वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, सभी विदेशी मुद्रा लेनदेनों में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत थी, जिसका दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक रहा।

### 6. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हालिया नीतिगत बैठक में क्या फैसला लिया?
रिजर्व बैंक ने अपनी रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया, जिसके बाद डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 96.72 पर आ गया।

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