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  "type": "article",
  "title": "जी7 देशों के 10 करोड़ बैरल रणनीतिक तेल भंडार जारी करने से डब्ल्यूटीआई क्रूड लुढ़का",
  "summary": "जी7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने के फैसले के बाद डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में मंगलवार के शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई और भाव 88.60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। कच्चे तेल की कीमतों पर यह दबाव ग्रुप ऑफ सेवन यानी जी7 देशों द्वारा अपने आपातकालीन रणनीतिक भंडार से भारी मात्रा में तेल बाजार में उतारने के फैसले और मध्य पूर्व से आपूर्ति में सुधार के चलते बना है।\n\nशुक्रवार को जी7 समूह के देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद अपने रणनीतिक आपातकालीन भंडार से 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति व्यक्त की थी। इसके साथ ही इन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने ऊर्जा निर्यात पर किसी भी तरह के नए प्रतिबंध न लगाने का भी संकल्प लिया। सोमवार को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक सितंबर के अंतिम सप्ताह के सात में से चार दिनों के दौरान मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर से ऊपर पहुंच गया था, और जी7 देशों का यह नया कदम बाजार में आपूर्ति को और ज्यादा बढ़ाएगा।\n\nईंधन की लागत घटाने के लिए अमेरिका का बड़ा कदम\nअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात डीजल पर लगने वाले कर में छूट से जुड़े नियमों को आसान बनाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस आदेश के तहत लाल रंग वाले टैक्स-फ्री डीजल की खरीद पर लगी ऑफ-रोड अनिवार्य शर्तों को आधिकारिक तौर पर हटा दिया गया है, जिससे अब कोई भी व्यक्ति किसी भी उद्देश्य के लिए इसे खरीद सकता है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले इस कदम को ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ कम करने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।\n\nकेसीएम ट्रेड के मुख्य विश्लेषक टिम वाटरर के अनुसार रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल करने के जी7 के फैसले ने बाजार से तत्काल आपूर्ति संकट की चिंता को कुछ हद तक दूर कर दिया है। इसके साथ ही यह धारणा भी मजबूत हो रही है कि सऊदी अरब का निर्यात स्तर युद्ध से पहले की स्थिति की तरफ लौट रहा है, भले ही ये बैरल अधिक लागत और कम कुशल मार्गों से भेजे जा रहे हों। उन्होंने आगे कहा कि यह पूरा तालमेल कीमतों को सीमित रखने के लिए पर्याप्त है, भले ही खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने का जोखिम अभी टला नहीं है।\n\nभू-राजनीतिक तनाव और तकनीकी संकेतकों की स्थिति\nमध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है। यमन के हूती समूह ने सोमवार को दावा किया कि उसने सऊदी अरब में दो हवाई अड्डों, एक तेल संयंत्र और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर तीन सैन्य अभियान चलाए हैं। क्षेत्र में जारी यह तनाव कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट को सीमित करने का काम कर सकता है। वहीं राबोबैंक के ऊर्जा बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में अमेरिकी युद्ध का नया चरण शुरू हो सकता है, जिससे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। बैंक की टीम ने आगाह किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए मौजूदा आपूर्ति प्रणाली बेहद नाजुक है और प्रमुख टर्मिनल व रिफाइनरियां ईरान के निशाने पर आ सकती हैं, जिससे आपूर्ति मार्गों की मजबूती का बाजार में जो भरोसा बना हुआ है, वह भ्रम साबित हो सकता है।\n\nतकनीकी चार्ट पर डब्ल्यूटीआई अमेरिकी तेल अपनी हालिया गिरावट के बाद कंसोलिडेशन के दौर में है। दैनिक चार्ट में यह बोलिंजर बैंड्स के निचले सपोर्ट और 100-दिवसीय मूविंग एवरेज (एमए) से ऊपर बना हुआ है, लेकिन बोलिंजर मध्य बैंड के प्रतिरोध से नीचे सीमित है। 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 46 के करीब है और नीचे की ओर झुक रहा है, जो कमजोर होती तेजी और तटस्थ से मंदी के रुख का संकेत देता है। ऊपर की तरफ तत्काल प्रतिरोध 93.35 डॉलर के बोलिंजर मध्य बैंड के पास है, जबकि अगला बड़ा अवरोध 101.10 डॉलर के ऊपरी बैंड पर है। नीचे की ओर प्रारंभिक सपोर्ट 88.35 डॉलर के हालिया धुरी स्तर पर है, जिसके बाद 85.58 डॉलर का निचला बैंड और 84.35 डॉलर का 100-दिवसीय एमए प्रमुख मांग क्षेत्र बनाते हैं।\n\nलाइव बाजार के आंकड़ों के अनुसार क्रूड ऑयल का भाव वर्तमान में 89.35 डॉलर पर चल रहा है, जो पिछले बंद भाव 91.11 डॉलर की तुलना में 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर के बीच रहा है और ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.01 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी स्तरों पर 14-दिवसीय आरएसआई 45 पर है और एमएसीडी 0.21 पर सिग्नल लाइन 1.50 के मुकाबले मंदी का हिस्टोग्राम (-1.29) बना रहा है। मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 92.81 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 90.17 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 80.80 डॉलर पर है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 88.58 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 82.55 डॉलर पर स्थित है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 86.10 डॉलर से 105.77 डॉलर (मध्य 95.94 डॉलर) के बीच है। 14-दिवसीय एडीएक्स 21 पर एक दायरे में कारोबार का संकेत देता है, स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 7 और सिग्नल लाइन 16 पर है, जबकि एटीआर 4.50 पर है। प्रमुख इंट्राडे स्तरों में पिवट 89.32 डॉलर, प्रतिरोध आर1 89.52 डॉलर व आर2 89.70 डॉलर, और सपोर्ट एस1 89.14 डॉलर व एस2 88.94 डॉलर पर है।\n\nकच्चे तेल का बाजार ढांचा और वैश्विक प्रभाव\nडब्ल्यूटीआई क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकने वाला एक प्रमुख कच्चा तेल है, जिसे लाइट और स्वीट श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि इसमें घनत्व और सल्फर की मात्रा कम होती है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल आसानी से रिफाइन किया जा सकता है और इसका वितरण अमेरिका के कुशिंग हब से होता है, जिसे दुनिया का पाइपलाइन चौराहा कहा जाता है। ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई भी वैश्विक तेल बाजार के लिए एक बेंचमार्क है।\n\nकच्चे तेल की कीमतें आपूर्ति और मांग, वैश्विक आर्थिक वृद्धि, युद्ध, प्रतिबंधों और ओपेक के उत्पादन निर्णयों से तय होती हैं। चूंकि कच्चे तेल का अधिकांश व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती या कमजोरी भी इसकी मांग को प्रभावित करती है। इसके अलावा अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (एपीआई) द्वारा प्रत्येक मंगलवार और ऊर्जा सूचना एजेंसी (ईआईए) द्वारा बुधवार को जारी की जाने वाली साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट भी कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 12 तेल उत्पादक देशों का संगठन ओपेक और रूस सहित 10 अन्य देशों का समूह ओपेक+ समय-समय पर उत्पादन कोटे में बदलाव कर वैश्विक आपूर्ति को नियंत्रित करते हैं।\n\nविदेशी मुद्रा, बॉन्ड और अन्य वैश्विक संपत्तियों का हाल\nवैश्विक वित्तीय बाजारों में अन्य परिसंपत्तियों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी में नरमी दर्ज की गई, क्योंकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब बनी हुई है। हालांकि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक यानी आरबीए द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदें इस मुद्रा को कुछ सहारा दे रही हैं। दूसरी ओर यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के नीचे कंसोलिडेट कर रहा है, जहां बैंक ऑफ जापान यानी बीओजे की सख्त नीतियों की उम्मीदें और संभावित सरकारी हस्तक्षेप की चर्चाएं जापानी येन को समर्थन दे रही हैं।\n\nसोने की कीमतों की बात करें तो सर्राफा बाजार में पीली धातु 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे स्थिर बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर वृद्धि की घटती संभावनाओं से सोने को समर्थन मिल रहा है, लेकिन मजबूत अमेरिकी डॉलर इसकी तेजी को सीमित किए हुए है और निवेशक आगे की नीतिगत दिशा के लिए एफओएमसी कार्यवृत्त का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ईसीबी के सामने फ्रांस के कर्ज संकट और 3.8 प्रतिशत की ऊंची महंगाई दर के बीच ब्याज दरों को लेकर एक जटिल स्थिति बनी हुई है।\n\nइसका आप पर असर\nजी7 देशों द्वारा आपातकालीन तेल भंडार जारी करने और वैश्विक आपूर्ति बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की लागत पर दबाव कम हुआ है।\n\n• भारत में वाहन चालकों पर असर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से घरेलू तेल कंपनियों पर लागत का दबाव कम होता है। इसके चलते आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में स्थिरता या कटौती की गुंजाइश बन सकती है।\n• आयात बिल और मुद्रास्फीति: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल का सस्ता होना व्यापार घाटे को कम करने में मदद करता है। इसके असर से परिवहन लागत नियंत्रित रहती है और आम उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में होने वाली महंगाई की रफ्तार धीमी हो सकती है।\n• वैश्विक ऊर्जा उपभोक्ता: जी7 के रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल आने से सर्दियों के मौसम में संभावित ईंधन संकट का जोखिम घटा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिफाइनिंग लागत और हवाई यात्रा के किराए में स्थिरता देखने को मिल सकती है।\n• कमोडिटी निवेशक और ट्रेडर्स: तेल बाजार में वर्तमान तकनीकी स्तरों को देखते हुए व्यापारियों को स्टॉप लॉस और सपोर्ट स्तरों पर कड़ी नजर रखनी होगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन के साथ ही नई पोजिशन बनानी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nजी7 देशों द्वारा रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने के समझौते और मध्य पूर्व से शिपमेंट में सुधार के कारण कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट आई है।\n\n• रणनीतिक भंडार जारी होना: अमेरिकी दबाव के बाद जी7 देशों ने बाजार में पर्याप्त तरलता बनाए रखने के लिए 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल जारी करने पर सहमति जताई। इस कदम ने तात्कालिक आपूर्ति संकट की चिंताओं को दूर कर दिया।\n• मध्य पूर्व से निर्यात में सुधार: आंकड़ों से पता चला है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मध्य पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात कई दिनों तक युद्ध-पूर्व स्तर से ऊपर रहा। इससे वैश्विक रिफाइनरियों तक आपूर्ति पहुंचने का भरोसा बढ़ा।\n• अमेरिकी ईंधन नीति में ढील: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैक्स-मुक्त डीजल की खरीद पर लगी पाबंदियों को हटाने से घरेलू आपूर्ति आसान हुई है। इस कदम ने वायदा बाजार में ईंधन की कीमतों को नीचे लाने में योगदान दिया।\n• भू-राजनीतिक जोखिमों की सीमाएं: यमन के हूती हमलों और खाड़ी में तनाव के बावजूद आपूर्ति मार्ग खुले रहने से बाजार में घबराहट कम हुई। विश्लेषकों का मानना है कि वास्तविक आपूर्ति बाधित न होने तक यह नरमी बनी रह सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत में हाल ही में गिरावट क्यों आई?\nजी7 देशों द्वारा रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल व डीजल जारी करने और मध्य पूर्व से निर्यात में सुधार के कारण कीमतें गिरी हैं।\n\n2. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डीजल को लेकर क्या फैसला लिया?\nउन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए जिससे ऑफ-रोड अनिवार्य शर्तों को हटाकर किसी को भी टैक्स-फ्री लाल डीजल खरीदने की अनुमति मिली।\n\n3. मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति का तेल कीमतों पर क्या असर पड़ रहा है?\nयमन के हूती हमलों और ईरान तनाव के बावजूद आपूर्ति जारी रहने से बड़ी तेजी रुकी हुई है, लेकिन जोखिम के चलते कीमतों में भारी गिरावट भी सीमित है।\n\n4. वर्तमान तकनीकी चार्ट पर डब्ल्यूटीआई क्रूड के लिए प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या हैं?\nतकनीकी रूप से तत्काल प्रतिरोध 93.35 डॉलर पर और ऊपरी बाधा 101.10 डॉलर पर है, जबकि प्रमुख सपोर्ट 88.35 डॉलर और 84.35 डॉलर के आसपास स्थित है।",
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  "publishedAt": "2026-10-06",
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