जर्मन कारोबारी विश्वास में उछाल से यूरो हुआ मजबूत, बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्त टिप्पणियों के बीच पाउंड ठहरा जर्मनी के आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट सूचकांक में सितंबर माह के दौरान दर्ज की गई तेज बढ़त ने यूरो को ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले तीन महीने के उच्च स्तर के करीब बनाए रखा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड के अधिकारियों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चेतावनी के बावजूद मुद्रा विनिमय बाजार में पाउंड की चाल शांत रही। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो ने ब्रिटिश पाउंड के सामने अपनी पकड़ बेहद मजबूत कर ली है। यूरो और ब्रिटिश पाउंड का विनिमय अनुपात 0.8600 के स्तर पर टिका हुआ है, जो इसके तीन महीने के उच्चतम शिखर 0.8607 से केवल कुछ ही पिप्स नीचे है। इस हफ्ते यूरो ने पाउंड के मुकाबले 0.3% की प्रभावशाली साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है। इस मजबूती की प्राथमिक वजह यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी से सामने आए बेहद सकारात्मक आर्थिक आंकड़े हैं, जिन्होंने मंदी की आशंकाओं के बीच निवेशकों का भरोसा लौटाया है। जर्मनी के आईएफओ कारोबारी सूचकांक ने चौंकाया गुरुवार को जारी हुए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी के प्रतिष्ठित आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स में सितंबर महीने के दौरान उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। यह सूचकांक अगस्त के 88.8 से उछलकर सितंबर में 89.9 के स्तर पर जा पहुंचा। बाजार विश्लेषकों का आम अनुमान था कि यह आंकड़ा सुधरकर केवल 89.0 तक ही पहुंचेगा, लेकिन वास्तविक नतीजों ने इस अनुमान को पीछे छोड़ दिया। अर्थव्यवस्था की वर्तमान जमीनी स्थिति को लेकर कारोबारियों का रुख भी सुधरा है और वर्तमान स्थिति से जुड़ा सूचकांक 88.5 से बढ़कर 89.5 दर्ज किया गया। वहीं भविष्य की कारोबारी उम्मीदों का सूचकांक अगस्त के 89.0 से लंबी छलांग लगाकर 90.4 पर पहुंच गया। यह फरवरी के बाद से अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है, जो यह दर्शाता है कि जर्मन कंपनियां आने वाले महीनों को लेकर कहीं अधिक आशान्वित हैं। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में मजबूती, ऑटो उद्योग पर दबाव आईएफओ संस्थान के विस्तृत आकलन के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के सूचकांक में एक बार फिर इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी को मुख्य रूप से बेहतर भविष्य की उम्मीदों से सहारा मिला है, विशेषकर इलेक्ट्रिकल उपकरण उद्योग में कारोबारियों की धारणा में बड़ा सुधार देखा गया है। हालांकि, सर्वेक्षण में भाग लेने वाले विनिर्माताओं ने अपनी वर्तमान परिस्थितियों को लेकर चिंता भी जताई है और वे अपने घटते ऑर्डर बैकलॉग की शिकायत कर रहे हैं। रिपोर्ट में जर्मनी के अत्यंत महत्वपूर्ण ऑटोमोटिव सेक्टर के बारे में भी सतर्कता बरतने की बात कही गई है। अध्ययन के मुताबिक देश का ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय बेहद कठिन परिस्थितियों और जटिल दौर से गुजर रहा है। दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र से जुड़े सूचकांक में संतोषजनक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि निर्माण क्षेत्र का सूचकांक मोटे तौर पर अपरिवर्तित बना रहा। इन मिले-जुले लेकिन समग्र रूप से सकारात्मक रुझानों ने पूरे यूरोज़ोन में निवेशकों की धारणा को मजबूती दी है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्त चेतावनी का पाउंड पर सीमित असर दूसरी तरफ, बैंक ऑफ इंग्लैंड की मौद्रिक नीति समिति की सदस्य लोम्बार्डेली ने मुद्रास्फीति पर कड़ा रुख अपनाया है। लोम्बार्डेली ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि देश में महंगाई की दर उच्च स्तर पर बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी करनी होगी। उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि ब्रिटेन में वेतन वृद्धि की रफ्तार अभी भी इतनी तेज है जो महंगाई को तय लक्ष्य पर लाने की दिशा में बिल्कुल अनुकूल नहीं कही जा सकती। हालांकि, लोम्बार्डेली ने यह भी जोड़ा कि वेतन दबाव के बावजूद अर्थव्यवस्था में अब तक दूसरे दौर के मुद्रास्फीति प्रभावों के स्पष्ट संकेत सामने नहीं आए हैं। ब्याज दरों में सख्ती के इस सख्त संकेत के बावजूद पाउंड में कोई खास हलचल देखने को नहीं मिली और ब्रिटिश मुद्रा पर इन टिप्पणियों का असर बेहद सीमित रहा। बाजार की आक्रामक उम्मीदों पर विश्लेषकों की राय ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के वित्तीय विश्लेषकों ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वित्तीय बाजार वर्तमान में अत्यधिक आक्रामक दर वृद्धि की उम्मीद लगाए बैठा है। ब्याज दर स्वैप्स कर्व से यह संकेत मिल रहा है कि बाजार अगले बारह महीनों के भीतर बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा ब्याज दरों में करीब 100 आधार अंकों (100 बीपीएस) की बढ़ोतरी की संभावना मान रहा है, जिससे बैंक रेट बढ़कर 4.75% तक पहुंच सकता है। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के रणनीतिकारों का मानना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को शायद उतना कड़ा रुख अपनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी जितनी बाजार को आशंका है। उनके अनुसार, ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पहले से ही अपनी पूर्ण क्षमता से नीचे काम कर रही है। इसके अलावा 3.75% का मौजूदा बैंक रेट बैंक ऑफ इंग्लैंड के अनुमानित तटस्थ दायरे 2% से 4% के शीर्ष स्तर के बेहद करीब है। विश्लेषकों का यह भी आकलन है कि ब्रिटेन की आगामी वित्तीय नीति अधिक सख्त होने की संभावना है, जो अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त सख्ती की जरूरत को सीमित कर देगी। अन्य वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजार का हाल गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की ओर फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जो विश्लेषकों के 4.5% के अनुमान से अधिक थी। हालांकि, इसी अवधि में देश में रोजगार परिवर्तन के आंकड़े अनुमान से बेहतर रहे और 39.5 हजार नए रोजगार जुड़े। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की होने वाली अहम बैठक से पहले मुद्रा बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन की जोड़ी अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से पीछे हटते हुए एशियाई सत्र में 158.00 के आसपास फिसल गई। जापान में बॉन्ड यील्ड में आई तेजी और जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार हस्तक्षेप के बढ़ते जोखिम ने येन को सहारा दिया। वहीं दूसरी ओर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर कड़े रुख के अनुमान और मजबूत अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बल पर डॉलर इंडेक्स ने अपनी बढ़त बनाए रखी। सोने के बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट का दबाव देखा गया और यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में पीली धातु 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसलकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई। सोने के कारोबारी भी डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हालांकि किसी बहुत बड़े आर्थिक समझौते की उम्मीदें कम हैं, फिर भी बाजार की नजर रेयर अर्थ खनिजों की आपूर्ति, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम के विस्तार पर टिकी हुई है। स्विस और जापानी केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले यूरोपीय वित्तीय हलकों में स्विस नेशनल बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति बैठक में मुख्य नीतिगत ब्याज दरों को उम्मीद के मुताबिक 0% पर स्थिर रखने का फैसला किया। स्विस नेशनल बैंक ने अपने नीतिगत मूल्यांकन में बताया कि उसके पास रखे जाने वाले बैंकों के साइट डिपॉजिट्स पर एक निर्धारित सीमा तक नीतिगत दर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने वर्ष 2026 के लिए अपने महंगाई के अनुमान को पहले के 0.6% से थोड़ा बढ़ाकर 0.7% कर दिया है। बैंक ने रेखांकित किया कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा खतरा वैश्विक अर्थव्यवस्था में होने वाले घटनाक्रमों से जुड़ा है। उधर एशिया में बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया। बैंक ऑफ जापान की नीति निर्धारण समिति में यह फैसला 7-2 के बहुमत से पारित हुआ। जापानी केंद्रीय बैंक का यह निर्णय पूरी तरह से बाजार की उन अपेक्षाओं के अनुरूप रहा जो पिछले कई हफ्तों से लगाई जा रही थीं। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय दरों और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों में बदलाव से वैश्विक व्यापार लागत, यात्रा और आयात-निर्यात से जुड़े खर्च सीधे प्रभावित होते हैं। • भारत में आयातकों और निर्यातकों पर: यूरोपीय और ब्रिटिश बाजारों में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों की मुद्रा हेजिंग लागत बदल सकती है। यूरो के मजबूत होने और पाउंड के सीमित दायरे में रहने से यूरोप को होने वाले भारतीय निर्यात के मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। • ब्रिटेन और यूरोप जाने वाले यात्रियों पर: यूरोप की यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटकों और छात्रों के लिए यूरो का मजबूत स्तर खर्च बढ़ा सकता है। इसके विपरीत, पाउंड में स्थिरता रहने से ब्रिटेन में रहने वाले छात्रों और प्रवासियों के बजट पर फिलहाल अतिरिक्त दबाव नहीं बनेगा। • वैश्विक निवेशकों और बॉन्ड बाजारों पर: प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने से अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों में अस्थिरता बनी रह सकती है। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह में उतार-चढ़ाव आ सकता है। • कमोडिटी और सोना खरीदारों पर: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर के मजबूत रहने और ट्रंप-शी वार्ता से पहले सोने के 4,300 डॉलर से नीचे आने से घरेलू कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे आभूषण खरीदारों और खुदरा निवेशकों को कम कीमतों पर खरीदारी का तात्कालिक अवसर मिल सकता है। ऐसा क्यों हुआ यूरो की मजबूती और वैश्विक मुद्रा बाजारों में हलचल मुख्य रूप से जर्मनी के उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत रुख के कारण देखने को मिली है। वहीं आगामी उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ताओं से पहले निवेशकों की सतर्कता ने अन्य परिसंपत्तियों की दिशा तय की है। • जर्मनी में कारोबारी विश्वास में उछाल: आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स का 88.8 से सुधरकर 89.9 पर पहुंचना यूरोज़ोन में आर्थिक पुनरुद्धार के संकेत देता है। विशेष रूप से औद्योगिक और इलेक्ट्रिकल उपकरण क्षेत्रों में भविष्य की सकारात्मक उम्मीदों ने यूरो को ठोस समर्थन प्रदान किया। • बैंक ऑफ इंग्लैंड की सख्त चेतावनी का सीमित असर: लोम्बार्डेली द्वारा महंगाई काबू करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने की चेतावनी के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिटेन पहले से ही सुस्त आर्थिक रफ्तार से जूझ रहा है। इसके चलते बाजार ने बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा आक्रामक नीति अपनाने की संभावना को सीमित माना, जिससे पाउंड में तेजी नहीं आ सकी। • वैश्विक कूटनीतिक बैठक और व्यापारिक सतर्कता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आगामी बैठक को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार दुर्लभ खनिजों और तकनीकी प्रतिबंधों पर प्रगति देखने की प्रतीक्षा कर रहा है, जिसके कारण सोने और प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सतर्कता देखी गई। • केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले: बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी ब्याज दर को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने और स्विस नेशनल बैंक द्वारा 0% की दर बरकरार रखने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूंजी प्रवाह का पुनर्संतुलन हुआ है। सवाल-जवाब 1. यूरो और ब्रिटिश पाउंड का ताजा विनिमय स्तर क्या है? यूरो और ब्रिटिश पाउंड का विनिमय अनुपात 0.8600 पर बना हुआ है, जो इसके तीन महीने के उच्च स्तर 0.8607 से केवल कुछ ही पिप्स नीचे है। 2. जर्मनी के आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स में कितना सुधार हुआ? सितंबर महीने में जर्मनी का आईएफओ बिजनेस क्लाइमेट इंडेक्स अगस्त के 88.8 से सुधरकर 89.9 पर पहुंच गया, जो 89.0 के बाजार अनुमान से बेहतर रहा। 3. बैंक ऑफ इंग्लैंड की ओर से ब्याज दरों को लेकर क्या कहा गया? बैंक ऑफ इंग्लैंड की लोम्बार्डेली ने कहा कि यदि महंगाई उच्च स्तर पर बनी रहती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी होगी, क्योंकि वेतन वृद्धि दर महंगाई के लक्ष्य के अनुकूल नहीं है। 4. ब्राउन ब्रदर्स हैरीमन के विश्लेषकों का ब्रिटेन की ब्याज दरों पर क्या दृष्टिकोण है? विश्लेषकों का मानना है कि बाजार अगले 12 महीनों में 100 बीपीएस की जिस बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, केंद्रीय बैंक को शायद उतनी सख्ती करने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि ब्रिटिश अर्थव्यवस्था पहले से ही क्षमता से कम पर काम कर रही है। 5. बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों पर क्या निर्णय लिया है? बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है। 6. स्विस नेशनल बैंक की मौद्रिक नीति बैठक का क्या फैसला रहा? स्विस नेशनल बैंक ने अपनी मुख्य नीतिगत ब्याज दर को 0% पर अपरिवर्तित रखा और वर्ष 2026 के लिए महंगाई अनुमान को 0.6% से संशोधित कर 0.7% किया। https://trendkia.com/market/german-karobari-vishvasa-men-uchhala-se-euro-hua-majabuta-bank-of-england-ki-sakhta-tippaniyon-ke-bicha-british-pound-thahara-37720 TrendKia — Har trend, sabse pehle.