जर्मनी में खुदरा बिक्री अगस्त में 1.3 प्रतिशत बढ़ी, अनुमानों से पीछे रहा आंकड़ा जर्मनी के सांख्यिकी कार्यालय डेस्टैटिस के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में खुदरा बिक्री में 1.3 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई, जो 2.0 प्रतिशत के अनुमान से कम है। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी में घरेलू उपभोक्ता मांग को लेकर ताजा आंकड़े सामने आए हैं। फेडरल स्टैटिस्टिकल ऑफिस यानी डेस्टैटिस की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त महीने में देश की खुदरा बिक्री में महीने-दर-महीने आधार पर 1.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। उपभोक्ता खर्च का यह प्रमुख पैमाना पिछले महीने की तेज गिरावट से उबरने में तो कामयाब रहा, लेकिन विश्लेषकों और बाजार के जानकारों द्वारा लगाए गए 2.0 प्रतिशत की वृद्धि के अनुमान को छूने में नाकाम रहा। इससे पहले जुलाई महीने के दौरान खुदरा बिक्री में 3.4 प्रतिशत की भारी मासिक गिरावट देखी गई थी। सालाना आधार पर तुलना की जाए तो अगस्त में जर्मन खुदरा बिक्री में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि, यह गिरावट पिछले आंकड़े के मुकाबले काफी सीमित है, क्योंकि जुलाई में वार्षिक आधार पर खुदरा बिक्री में 2.5 प्रतिशत का संकुचन देखा गया था। जर्मनी जैसे बड़े औद्योगिक राष्ट्र में घरेलू खरीदारी की यह सुस्त रफ्तार यूरोपीय बाजारों और साझा मुद्रा यूरो की दिशा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक मानी जाती है। वैश्विक मुद्रा बाजार में यूरो का दबदबा और व्यापारिक पैमाना यूरोपीय संघ के 20 सदस्य देशों की साझा मुद्रा यूरो दुनिया भर के वित्तीय तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यूरो मुद्रा क्षेत्र यानी यूरोज़ोन की यह साझा मुद्रा अमेरिकी डॉलर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है। साल 2022 के वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी मुद्रा लेनदेन में यूरो की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही थी, जिसका दैनिक औसत कारोबार 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक दर्ज किया गया था। मुद्रा विनिमय बाजारों में विभिन्न युग्मों के भीतर EUR/USD सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय युग्म बना हुआ है, जो दुनिया भर के सभी मुद्रा सौदों में लगभग 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। इसके अलावा यूरो के अन्य प्रमुख क्रॉस में EUR/JPY की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत, EUR/GBP की हिस्सेदारी 3 प्रतिशत तथा EUR/AUD की हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस वजह से जर्मनी और अन्य प्रमुख यूरोपीय राष्ट्रों के आर्थिक आंकड़े सीधे तौर पर इन वैश्विक युग्मों में उतार-चढ़ाव लाते हैं। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का समीकरण जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ECB पूरे यूरोज़ोन के केंद्रीय बैंक के रूप में कार्य करता है। यह नियामक संस्था ब्याज दरों के निर्धारण के साथ-साथ समग्र मौद्रिक नीति के संचालन का जिम्मा संभालती है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक जनादेश कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत महंगाई को काबू में रखना या आर्थिक विकास को गति देना शामिल होता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने अथवा घटाने के उपकरण का इस्तेमाल करता है। सामान्य तौर पर जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं या उनके बढ़ने की उम्मीद होती है, तो यह स्थिति यूरो के लिए फायदेमंद साबित होती है, जबकि दरें घटने से मुद्रा पर दबाव बनता है। मौद्रिक नीतियों पर अंतिम निर्णय ECB की गवर्निंग काउंसिल द्वारा लिया जाता है, जिसकी बैठकें साल में आठ बार आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों के अलावा छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी शामिल हैं। परिषद द्वारा लिए गए ब्याज दरों के फैसले सीधे तौर पर निवेशकों की धारणा और पूंजी प्रवाह को बदलते हैं। मुद्रास्फीति सूचकांक और यूरोज़ोन के मुख्य आर्थिक संकेतक यूरो की दिशा तय करने में यूरोज़ोन के उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति आंकड़ों की भूमिका अत्यंत संवेदनशील होती है, जिसे हार्मोनाइज्ड इंडेक्स ऑफ कंज्यूमर प्राइसेज यानी HICP के जरिए मापा जाता है। जब मुद्रास्फीति की दर अपेक्षा से अधिक बढ़ती है और विशेष रूप से जब यह केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत के अनिवार्य लक्ष्य को पार कर जाती है, तो ECB को महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें यूरो को अधिक मजबूती प्रदान करती हैं, क्योंकि यह वैश्विक निवेशकों को अपने फंड पार्क करने के लिए यूरोप को आकर्षक गंतव्य बनाता है। इसके अलावा अर्थव्यवस्था की सेहत को आंकने वाले कई अन्य आर्थिक आंकड़े भी यूरो के उतार-चढ़ाव को प्रभावित करते हैं। इन प्रमुख संकेतकों में सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के PMI आंकड़े, रोजगार की स्थिति और उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण शामिल हैं। जब आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं, तो न केवल विदेशी पूंजी निवेश बढ़ता है बल्कि केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे साझा मुद्रा को समर्थन मिलता है। इसके विपरीत कमजोर आंकड़े यूरो पर बिकवाली का दबाव बनाते हैं। यूरोज़ोन की चार सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन समग्र यूरोज़ोन की अर्थव्यवस्था का 75 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं, इसलिए इन चार देशों के आंकड़े सबसे निर्णायक साबित होते हैं। व्यापार संतुलन का असर और अन्य वैश्विक बाजारों की हलचल मुद्रा की मजबूती के लिए ट्रेड बैलेंस यानी व्यापार संतुलन भी एक प्रमुख आर्थिक पैमाना है। यह आंकड़ा किसी देश द्वारा अपने निर्यातों से की जाने वाली कुल कमाई और आयातों पर किए जाने वाले कुल खर्च के बीच के अंतर को दर्शाता है। यदि किसी देश के उत्पादों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक होती है, तो विदेशी खरीदारों द्वारा उन वस्तुओं को खरीदने के लिए होने वाली मांग से उसकी स्थानीय मुद्रा को मजबूती मिलती है। परिणामस्वरूप, एक सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को मजबूत बनाता है, जबकि नकारात्मक संतुलन उसे कमजोर करता है। वैश्विक वित्तीय परिदृश्य के अन्य क्षेत्रों पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म AUD/USD एशियाई कारोबारी सत्र में दो महीने के निचले स्तर के करीब 0.6950 के आसपास बना रहा। अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया के अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI के कमजोर आंकड़ों ने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को झटका दिया, जिससे मुद्रा दबाव में रही। साथ ही चीन के PMI आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को सहारा देने में असफल रहे। दूसरी ओर, USD/JPY युग्म एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे दबाव में रहा, जहां बैंक ऑफ जापान के सख्त मौद्रिक रुख और संभावित बाजार हस्तक्षेप की आशंकाओं ने जापानी येन को समर्थन दिया और कमजोर घरेलू फैक्टरी उत्पादन व खुदरा बिक्री के असर को सीमित किया। कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों में सोने की कीमतें पिछले 4,110 डॉलर के आठ हफ्ते के निचले स्तर से उबरने के बाद 4,200 डॉलर के नीचे स्थिर बनी रहीं। निवेशक अब अमेरिका के आगामी ADP रोजगार आंकड़ों और कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स डेटा का इंतजार कर रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में आवे यानी AAVE का भाव पिछले दिन 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज करने के बाद मुनाफावसूली के चलते 161 डॉलर के नीचे आ गया। इसी बीच आवे के संस्थापक स्टैनी कुलेचोव आवेनॉमिक्स 3.0 के तहत टोकन-बर्न तंत्र लाने पर विचार कर रहे हैं, जो इस डिजिटल टोकन के लिए संभावित सकारात्मक उत्प्रेरक माना जा रहा है। इसका आप पर असर जर्मनी के उपभोक्ता खर्च के कमजोर आंकड़ों से यूरोपीय आर्थिक सुधार की रफ्तार सुस्त रहने के संकेत मिलते हैं, जिसका असर वैश्विक मुद्राओं और निवेश पर पड़ेगा। • भारत में: यूरो और डॉलर की चाल से भारतीय विनिमय दरों तथा यूरोप को होने वाले भारतीय निर्यात के ऑर्डरों पर असर देखने को मिल सकता है। आयात-निर्यात से जुड़े भारतीय व्यापारी और यूरोप यात्रा करने वाले लोग मुद्रा विनिमय दरों में अस्थिरता के लिए तैयार रहें। • यूरोप में: जर्मनी में खुदरा बिक्री के अनुमान से कम रहने से स्थानीय कारोबारियों के मुनाफे और रोजगार परिदृश्य पर दबाव बना रह सकता है। आम उपभोक्ता बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के दबाव के बीच अपने व्यक्तिगत खर्चों को सीमित रख सकते हैं। • विदेशी मुद्रा व्यापारियों के लिए: EUR/USD और EUR/JPY जैसे प्रमुख युग्मों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है क्योंकि आर्थिक सुधार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। मुद्रा बाजार में पोजीशन लेने वाले ट्रेडर ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखें। • कमोडिटी व सोना निवेशकों के लिए: वैश्विक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बीच सोने के 4,200 डॉलर के नीचे बने रहने से कीमती धातुओं में सतर्कता का माहौल है। निवेशक अमेरिकी नौकरियों और व्यक्तिगत उपभोग व्यय के आगामी आंकड़ों के बाद ही नई दिशा देख पाएंगे। ऐसा क्यों हुआ जर्मनी की खुदरा बिक्री में अनुमान से कम वृद्धि उच्च उधारी लागत, कमजोर उपभोक्ता भावना और पूर्ववर्ती महीनों में दर्ज भारी गिरावट के बाद आए आंशिक सुधार का परिणाम है। • उपभोक्ता खर्च में धीमापन: जुलाई महीने में 3.4 प्रतिशत की भारी गिरावट के बाद अगस्त में 1.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, जो दर्शाता है कि खरीदारी की गति अब भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौटी है। घरेलू स्तर पर आर्थिक चिंताओं के कारण आम जनता ने बड़े खर्चों को टालना जारी रखा है। • ब्याज दरों का कड़ा स्तर: यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए लागू की गई सख्त मौद्रिक नीतियों ने व्यक्तिगत और व्यावसायिक ऋणों को महंगा बनाए रखा है। उधारी की इस बढ़ी लागत ने उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति और खरीदारी की इच्छा दोनों को सीमित किया है। • आर्थिक सुधार की धीमी गति: यूरोज़ोन की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद विनिर्माण और घरेलू मांग दोनों ही क्षेत्रों में लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि विश्लेषकों का 2.0 प्रतिशत की तेज वृद्धि का अनुमान वास्तविक आंकड़ों से आगे निकल गया। सवाल-जवाब 1. अगस्त में जर्मनी की खुदरा बिक्री में कितनी वृद्धि हुई? डेस्टैटिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में जर्मनी की खुदरा बिक्री में महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2. बाजार के विश्लेषक अगस्त के लिए खुदरा बिक्री में कितनी वृद्धि का अनुमान लगा रहे थे? बाजार और अर्थशास्त्रियों को अगस्त महीने के दौरान खुदरा बिक्री में 2.0 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान था। 3. जुलाई महीने में जर्मनी की खुदरा बिक्री का आंकड़ा क्या था? जुलाई महीने में जर्मनी की खुदरा बिक्री में महीने-दर-महीने 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। 4. सालाना आधार पर अगस्त में खुदरा बिक्री में क्या बदलाव आया? सालाना आधार पर अगस्त में जर्मनी की खुदरा बिक्री में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पिछले महीने यह गिरावट 2.5 प्रतिशत थी। 5. वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार में यूरो की कुल हिस्सेदारी कितनी है? साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, यूरो दुनिया के सभी विदेशी मुद्रा लेनदेन में 31 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और दैनिक 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का कारोबार करता है। 6. सोने की कीमतें एशियाई सत्र में किस स्तर के आसपास कारोबार कर रही थीं? सोने की कीमतें 4,110 डॉलर के आठ हफ्ते के निचले स्तर से उबरने के बाद एशियाई सत्र में 4,200 डॉलर के नीचे स्थिर बनी रहीं। https://trendkia.com/market/germany-men-khudara-bikri-agasta-men-1-3-pratishata-barhi-anumanon-se-pichhe-raha-ankara-40607 TrendKia — Har trend, sabse pehle.