# घरेलू बाजार में भारी हलचल के बाद संभले बेंचमार्क इंडेक्स, निफ्टी 23,470 के पार पहुंचा

> कारोबारी सत्र में उतार-चढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स 138 अंक की बढ़त के साथ 74,902 पर और निफ्टी 46 अंक चढ़कर 23,477 के स्तर पर बंद हुआ। एचडीएफसी लाइफ और ओएनजीसी के शेयरों में खरीदारी रही, जबकि कच्चे तेल की तेजी और एफआईआई बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा।

**Type:** article · **Category:** बाज़ार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/market/gharelu-bajara-men-bhari-halachala-ke-bada-snbhale-benchamarka-indeksa-nifty-23-470-ke-para-pahuncha-36633 · **Language:** Hindi
**Tags:** शेयर बाजार, सेंसेक्स, निफ्टी, कच्चा तेल, एचडीएफसी लाइफ, ओएनजीसी, एफआईआई

घरेलू इक्विटी बाजारों में 10 सितंबर को निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा, हालांकि दिन के अंत में प्रमुख सूचकांक हल्की बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहे। सत्र के दौरान दोनों बेंचमार्क सूचकांकों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। कारोबार समाप्ति पर बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 138.36 अंक यानी बढ़त दर्ज करते हुए 74,902.59 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 46.30 अंक की मजबूती के साथ 23,477.80 के स्तर पर बंद होने में सफल रहा। समग्र बाजार की चौड़ाई यानी मार्केट ब्रेड्थ के आंकड़े मिले-जुले रहे। पूरे सत्र में करीब 1,872 कंपनियों के शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जबकि 2,272 शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया और वे लाल निशान में बंद हुए। वहीं 155 शेयरों के भाव में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं देखा गया।

## शीर्ष बढ़त और गिरावट दर्ज करने वाले शेयर
निफ्टी 50 बास्केट में शामिल प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी लाइफ का शेयर 2.36 प्रतिशत चढ़कर टॉप गेनर की सूची में पहले पायदान पर रहा। इसके अलावा पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन में 2.22 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि ओएनजीसी के शेयर 1.39 प्रतिशत मजबूत हुए। भारती एयरटेल 1.34 प्रतिशत और टेक महिंद्रा 0.18 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में सफल रहे। इसके विपरीत कुछ प्रमुख दिग्गज कंपनियों में भारी बिकवाली का असर देखा गया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 1.85 प्रतिशत टूटकर सबसे बड़ा लूजर साबित हुआ। इसके बाद हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में 1.26 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि टाटा स्टील का शेयर 1.04 प्रतिशत फिसल गया। अडानी एंटरप्राइजेज 0.89 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.83 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

## विभिन्न सेक्टर्स और ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन
क्षेत्रीय सूचकांकों के मोर्चे पर प्रदर्शन काफी बंटा हुआ दिखाई दिया। मीडिया सेक्टर के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों यानी पीएसयू बैंक और निजी बैंकों के इंडेक्स खरीदारी के दम पर हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। दूसरी ओर मेटल, ऑटोमोबाइल और फार्मा सेक्टर्स पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा और इन क्षेत्रों के सूचकांकों में 0.5 फीसदी तक की कमजोरी दर्ज की गई। व्यापक बाजार यानी ब्रॉडर मार्केट की स्थिति भी सुस्त रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स किसी बड़े बदलाव के बिना लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ।

## वैश्विक और संस्थागत दबाव के मुख्य कारक
कारोबार के दौरान सूचकांकों पर दो प्रमुख कारणों से दबाव देखा गया। पहला मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आया अचानक उछाल रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चा तेल 102 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। अमेरिका द्वारा ईरान के पांच तेल टैंकरों को डुबोए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट 10 जहाजों पर हमला करने का दावा किया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे कच्चे तेल के दामों में तेजी देश के आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति पर सीधा प्रतिकूल असर डालती है। दूसरा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की ओर से निरंतर की जा रही बिकवाली रहा। बीते कारोबारी सत्र यानी 9 सितंबर को एफआईआई ने 583 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, हालांकि इस बिकवाली के मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने 1,509 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।

## इसका आप पर असर
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव आम नागरिकों और खुदरा निवेशकों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

- **खुदरा निवेशकों के लिए:** बाजार में व्यापक गिरावट के कारण पोर्टफोलियो का दैनिक मूल्यांकन घट सकता है। मिडकैप और मेटल सेक्टर में कमजोरी को देखते हुए नए निवेश में सतर्कता बरतें।
- **ईंधन और महंगाई:** कच्चे तेल के 102 डॉलर के पार जाने से तेल कंपनियों की लागत में भारी वृद्धि होगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम ऊंचे बने रहे तो आगामी दिनों में खुदरा ईंधन दरों और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है।
- **घरेलू बजट पर असर:** कच्चे तेल की महंगाई आयात बिल को बढ़ाकर देश में सामान्य मुद्रास्फीति को हवा दे सकती है। आवश्यक वस्तुओं के परिवहन खर्च में बढ़ोतरी से रसोई का बजट प्रभावित हो सकता है।
- **बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरधारक:** बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में स्थिरता से म्यूचुअल फंड और वित्तीय पोर्टफोलियो को आंशिक सहारा मिला है। लंबी अवधि के निवेशक रक्षात्मक और बैंकिंग शेयरों के रुझान पर नजर रख सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
घरेलू शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और सूचकांकों पर सीमित बढ़त का रुख वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और संस्थागत पूंजी प्रवाह के मिले-जुले असर के कारण बना।

- **कच्चे तेल में भारी उछाल:** अमेरिका द्वारा ईरान के पांच तेल टैंकरों को डुबोए जाने और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमले के दावे से पश्चिम एशिया में तनाव भड़क उठा। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंताएं बढ़ गईं।
- **विदेशी निवेशकों की बिकवाली:** विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 9 सितंबर को 583 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। विदेशी पूंजी की निरंतर निकासी ने सूचकांकों की ऊपरी बढ़त को सीमित रखा।
- **घरेलू संस्थागत निवेशकों का सहारा:** घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,509 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। इसी घरेलू पूंजी प्रवाह की बदौलत भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. 10 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी किस स्तर पर बंद हुए?
बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक चढ़कर 74,902.59 पर और एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 46.30 अंक की तेजी के साथ 23,477.80 के स्तर पर बंद हुआ।

### 2. सत्र के दौरान किन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही?
निफ्टी में एचडीएफसी लाइफ 2.36 प्रतिशत, पावर ग्रिड 2.22 प्रतिशत और ओएनजीसी 1.39 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स रहे।

### 3. किन कंपनियों के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई?
एचसीएल टेक 1.85 प्रतिशत, हिंडाल्को 1.26 प्रतिशत और टाटा स्टील 1.04 प्रतिशत टूटकर सबसे बड़े लूजर्स साबित हुए।

### 4. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की क्या वजह रही?
पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिका द्वारा ईरान के पांच टैंकर डुबोए जाने और ईरान द्वारा होर्मुज के पास 10 जहाजों पर हमले के दावे से कच्चा तेल 102 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।

### 5. विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का रुख कैसा रहा?
9 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 583 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 1,509 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।

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