घरेलू बाजार में बिकवाली का गहराया दबाव, निफ्टी 23,914 पर फिसला कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सेंसेक्स 374 अंक तथा निफ्टी 141 अंक टूटकर बंद हुए। ऑटो और आईटी शेयरों में भारी गिरावट रही, जबकि अडानी पोर्ट्स बढ़त बनाने में सफल रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मची उथल-पुथल और कच्चे तेल के दामों में आए उछाल के असर से 2 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में बंद हुआ। बुधवार के कारोबारी सत्र में बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। उतार-चढ़ाव भरे माहौल के बीच कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 373.93 अंक अथवा 0.49 प्रतिशत गिरकर 76,570.35 के स्तर पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 141.35 अंक यानी 0.59 प्रतिशत फिसलकर 23,914.45 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार के दौरान बाजार का रुख साफ तौर पर मंदी की तरफ झुका रहा, जहाँ 1827 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 2323 शेयरों में गिरावट का रुख रहा। ऑटो, आईटी और मीडिया सेक्टर में तेज बिकवाली बाजार में केवल एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर ही मजबूती दिखा सके, जबकि शेष सभी सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। ऑटो, आईटी और मीडिया सेक्टर में 1.2 से 1.8 प्रतिशत तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी निवेशकों का रुझान सतर्क रहा, जिससे निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। गिरावट दर्ज करने वाले प्रमुख काउंटरों में आयशर मोटर्स, विप्रो, बजाज ऑटो, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टीसीएस शामिल रहे। एशियन पेंट्स में 1.61 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.56 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 0.86 प्रतिशत, इंफोसिस में 1.28 प्रतिशत और टीसीएस में 0.89 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी तरफ, व्यापक बिकवाली के बावजूद अडानी पोर्ट्स का शेयर 1.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1672.90 पर बंद होकर निफ्टी का शीर्ष गेनर साबित हुआ। इसके अलावा बजाज फिनसर्व, पावरग्रिड, एनटीपीसी, रिलायंस और कोल इंडिया में भी खरीदारी देखी गई। इनमें बजाज फिनसर्व 1.02 प्रतिशत, पावरग्रिड 1.00 प्रतिशत, एनटीपीसी 0.96 प्रतिशत और रिलायंस 0.44 प्रतिशत मजबूत हुआ। सेंसेक्स के प्रमुख गेनर्स और लूजर्स का प्रदर्शन सेंसेक्स के शीर्ष बढ़त वाले शेयरों में टाइटन 1.70 प्रतिशत, अडानी पोर्ट्स 1.63 प्रतिशत, बजाज फिनसर्व 1.02 प्रतिशत, पावर ग्रिड 1.00 प्रतिशत और एनटीपीसी 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुए। दूसरी ओर, सेंसेक्स के सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में एशियन पेंट्स 1.61 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 1.56 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा 1.56 प्रतिशत, एचसीएल टेक 1.49 प्रतिशत और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 1.33 प्रतिशत की गिरावट पर रहे। बाजार में आई गिरावट के प्रमुख कारक शेयर बाजार में गिरावट के पीछे कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण रहे। पश्चिम एशिया में तनाव गहराने और अमेरिका व ईरान के बीच सैन्य हमलों की खबरों से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 1 प्रतिशत चढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गईं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक उच्च स्तर पर बने रहने की आशंका से बॉन्ड यील्ड में तेजी आई, जिसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से धन की निकासी की। साथ ही एशियाई बाजारों की कमजोरी ने भी घरेलू धारणा को प्रभावित किया, जहाँ दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत और जापान का निक्केई 225 करीब 3 प्रतिशत तक टूट गया। इसका आप पर असर कच्चे तेल में तेजी और शेयर बाजार में आई गिरावट का सीधा असर खुदरा निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के बजट पर पड़ सकता है। • खुदरा निवेशकों पर असर: ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में कमजोरी से म्यूचुअल फंड और सीधे इक्विटी निवेशकों के पोर्टफोलियो पर नकारात्मक दबाव बना है। निवेशकों को निकट अवधि में सतर्क रुख अपनाते हुए जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। • ईंधन और महंगाई: ब्रेंट क्रूड का 95.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचना आयात बिल को बढ़ा सकता है। यदि कच्चे तेल के दाम ऊँचे बने रहे तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और परिवहन लागत बढ़ने की संभावना रहेगी। • विदेशी पूंजी प्रवाह: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के चलते विदेशी निवेशक घरेलू बाजार से धन निकाल रहे हैं। इससे निकट भविष्य में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। • सेक्टोरल अवसर: चौतरफा बिकवाली के बावजूद एनर्जी और ऑयल एंड गैस शेयरों में लचीलापन देखने को मिला है। लंबी अवधि के निवेशक रक्षात्मक और ऊर्जा क्षेत्रों के प्रदर्शन पर नजर रख सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ घरेलू बाजार में बिकवाली का यह दौर मुख्यतः बाहरी भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजार में तेजी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण पैदा हुआ। • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य हमलों की खबरों से ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत चढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल पहुँच गया। ऊर्जा आयात पर निर्भर रहने के कारण इसका सीधा नकारात्मक असर भारतीय बाजार की धारणा पर पड़ा। • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि: अमेरिका में नीतिगत ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बने रहने की आशंका ने बॉन्ड यील्ड को ऊपर खींच दिया। नतीजतन, विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से निकासी तेज कर दी। • एशियाई बाजारों में तेज गिरावट: दक्षिण कोरिया के कोस्पी और जापान के निक्केई 225 में 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इन प्रमुख बाजारों में भारी बिकवाली के चलते पूरे क्षेत्र में धारणा कमजोर हुई, जिसका असर घरेलू सूचकांकों पर भी दिखा। सवाल-जवाब 1. 2 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरकर बंद हुए? सेंसेक्स 373.93 अंक गिरकर 76,570.35 पर और निफ्टी 141.35 अंक फिसलकर 23,914.45 पर बंद हुआ। 2. किन सेक्टर्स के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई? ऑटो, आईटी और मीडिया सेक्टर में 1.2 से 1.8 प्रतिशत तक की तेज गिरावट देखने को मिली। 3. बाजार की गिरावट के बीच निफ्टी का टॉप गेनर कौन सा शेयर रहा? अडानी पोर्ट्स का शेयर 1.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1672.90 पर बंद होकर टॉप गेनर रहा। 4. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की क्या वजह रही? पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य हमलों की खबरों से ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत बढ़कर 95.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। 5. प्रमुख एशियाई बाजारों का प्रदर्शन कैसा रहा? दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत और जापान का निक्केई 225 करीब 3 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। https://trendkia.com/market/gharelu-bajara-men-bikavali-ka-gaharaya-dabava-nifty-23-914-para-phisala-37336 TrendKia — Har trend, sabse pehle.